RBSE Class 12th 2019 Biology-SS-42-2019 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2019 |
| Subject | Biology-SS-42-2019 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2019 Biology-SS-42-2019
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Rajasthan Board Class 12th Biology-SS-42-2019 2019 solved Previous Year Question Papers
नामांक Roll No.
SLNo. :
No. of Questions — 30
No. of Printed Pages — 11
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2019
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2019
जीव विज्ञान
BIOLOGY
समय : 3¼ घण्टे
पूर्णांक : 56
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.
SS—42-Bio. 334 [ Turn Over
Tear Here
प्रश्न पत्र को खोलने के
TEAR HERE TO OPEN THE QUESTION PAPER
T से काटिए
परीक्षा निर्देश (Exam Instructions)
5) प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
6) खण्ड, प्रश्न संख्या एवं अंक विभाजन:
| खण्ड (Section) | प्रश्न संख्या (Q. Nos.) | प्रत्येक प्रश्न के अंक (Marks per question) |
|---|---|---|
| क (A) | 1 – 3 | 1 |
| ख (B) | 4 – 24 | 2 |
| ग (C) | 25 – 27 | 3 |
| घ (D) | 28 – 30 | 4 |
7) प्रश्न क्रमांक 4, 27, 28, 29 व 30 में आन्तरिक विकल्प हैं।
Question Nos. 4, 27, 28, 29 and 30 have internal choices.
SS42-Bio. 334
खण्ड - अ / SECTION - A
-
अनिषेकबीजता को परिभाषित कीजिये। [1]
Define Agamospermy.
उत्तर / Answer: अनिषेकबीजता (Agamospermy) एक प्रकार का अलैंगिक प्रजनन है जिसमें बीज का निर्माण निषेचन के बिना होता है, अर्थात् भ्रूण का विकास बिना नर युग्मक के मादा युग्मक या अन्य कोशिकाओं से होता है।
-
मृदा में किस तत्त्व की कमी के कारण नींबू (सिट्रस) में शीर्षारंमी रोग होता है? [1]
Deficiency of which element in the soil causes Dieback disease of Lemon (Citrus).
उत्तर / Answer: मृदा में ताँबा (Copper) तत्त्व की कमी के कारण नींबू (सिट्रस) में शीर्षारंमी रोग (Dieback disease) होता है।
-
ऑक्सीकरण व अपचयन अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करने वाले एन्जाइम का वर्ग लिखिए? [1]
Write class of enzyme which catalyses the oxidation and reduction reactions.
उत्तर / Answer: ऑक्सीकरण व अपचयन अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करने वाले एन्जाइम का वर्ग ऑक्सीडोरिडक्टेज (Oxidoreductases) है।
-
पादप हॉर्मोन का नाम लिखिए जो आलू के कंद (chal) को संग्रहित करने में प्रयोग लिया जाता है? [1]
Write the name of plant hormone which is used to store potato tubers.
उत्तर / Answer: आलू के कंद को संग्रहित करने में प्रयोग किया जाने वाला पादप हॉर्मोन एब्सिसिक अम्ल (Abscisic acid) है। यह कंदों के अंकुरण को रोकता है।
-
उस तकनीक का नाम लिखिये जिसके द्वारा डी.एन.ए. की एक प्रतिलिपि से लाखों प्रतिलिपियाँ अत्यन्त सीमित समय में प्राप्त की जा सकती है। [1]
Write the name of the technique to make lacs of copies of D.N.A. from a single copy in very limited time.
उत्तर / Answer: इस तकनीक को पॉलिमरेज़ श्रृंखला अभिक्रिया (Polymerase Chain Reaction – PCR) कहते हैं।
प्रश्न (Questions)
-
बायोगैस को परिभाषित कीजिये।
Define biogas.उत्तर / Answer: बायोगैस एक नवीकरणीय ईंधन है जो जैविक कचरे (जैसे गोबर, फसल अवशेष, कृषि अपशिष्ट) के अवायवीय (बिना ऑक्सीजन के) अपघटन से प्राप्त होती है। इसमें मुख्यतः मीथेन (CH₄), कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और थोड़ी मात्रा में अन्य गैसें होती हैं। इसका उपयोग खाना पकाने, प्रकाश और बिजली उत्पादन में किया जाता है।
-
रूधिर के थक्का निर्माण की प्रक्रिया को प्रारम्भ करने वाली रूधिर कणिकायें कौनसी है?
Which blood corpuscles are necessary for starting the process of blood clotting?उत्तर / Answer: रक्त में पाई जाने वाली प्लेटलेट्स (बिंबाणु / Thrombocytes) रक्त का थक्का जमाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक होती हैं। जब कोई रक्त वाहिका क्षतिग्रस्त होती है, तो प्लेटलेट्स सक्रिय होकर थ्रोम्बिन और फाइब्रिन नामक प्रोटीन के निर्माण में मदद करती हैं, जो रक्त को जमाकर घाव को बंद करता है।
-
दृष्टि पटल के उस बिंदु का नाम लिखिये जहाँ शंकु तथा शलाका दोनों अनुपस्थित होती हैं?
Name the point on Retina where both rods and cones are absent.उत्तर / Answer: दृष्टि पटल (रेटिना) पर वह बिंदु जहाँ शंकु (cones) और शलाका (rods) दोनों अनुपस्थित होते हैं, अंध बिंदु (Blind Spot) कहलाता है। यह वह स्थान है जहाँ ऑप्टिक तंत्रिका (optic nerve) रेटिना से बाहर निकलती है, और इसलिए यहाँ प्रकाश-संवेदी कोशिकाएँ नहीं होतीं।
-
संकटकालीन परिस्थितियों का सामना करने के लिए मानव शरीर को तैयार करने वाले हार्मोन का नाम लिखिए।
Write the name of hormone which prepares the human body to face adverse conditions.उत्तर / Answer: संकटकालीन परिस्थितियों (जैसे भय, तनाव, खतरा) का सामना करने के लिए मानव शरीर को तैयार करने वाला हार्मोन एड्रिनलिन (Adrenaline / Epinephrine) है। यह अधिवृक्क ग्रंथि (adrenal gland) के मज्जा (medulla) से स्रावित होता है और हृदय गति, रक्तचाप, श्वसन दर बढ़ाकर शरीर को "लड़ो या भागो" (fight or flight) प्रतिक्रिया के लिए तैयार करता है।
-
मानव में प्रथम ग्रीवा कशेरूक क्या कहलाती है?
In humans what is the first cervical vertebra called?उत्तर / Answer: मानव में प्रथम ग्रीवा कशेरूक (first cervical vertebra) को एटलस (Atlas) कहा जाता है। यह खोपड़ी के आधार (ओसीसिपिटल हड्डी) से जुड़ता है और सिर को ऊपर-नीचे हिलाने (हाँ-हाँ करने) की गति प्रदान करता है।
-
"रोपण" को समझाइए?
Explain "Implantation".उत्तर / Answer: रोपण (Implantation) वह प्रक्रिया है जिसमें निषेचित अंडाणु (ब्लास्टोसिस्ट) गर्भाशय की दीवार (एंडोमेट्रियम) में प्रवेश करके स्थापित हो जाता है। यह निषेचन के लगभग 6-7 दिन बाद होता है। इसके बाद ब्लास्टोसिस्ट गर्भाशय की दीवार से जुड़ जाता है और पोषण प्राप्त करने लगता है, जिससे गर्भावस्था की शुरुआत होती है। रोपण सफल गर्भधारण के लिए एक आवश्यक चरण है।
खण्ड-ब / SECTION-B
प्रश्न 4 (i) – विसरण दाब कमी (DPD), परासरण दाब (OP) व स्फीति दाब (TP) में सम्बन्ध लिखिए।
Write the relation between Diffusion Pressure Deficit (DPD), Osmotic Pressure (OP), and Turgor Pressure (TP).
सम्बन्ध (Relation):
DPD = OP – TP
जहाँ:
- DPD = विसरण दाब कमी (Diffusion Pressure Deficit) – कोशिका में जल प्रवेश की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
- OP = परासरण दाब (Osmotic Pressure) – कोशिका रस में उपस्थित विलेय कणों के कारण उत्पन्न दाब।
- TP = स्फीति दाब (Turgor Pressure) – कोशिका भित्ति पर कोशिका रस द्वारा डाला गया दाब।
यह सम्बन्ध दर्शाता है कि कोशिका में जल का प्रवेश तब तक होता है जब तक DPD धनात्मक है। जब TP = OP हो जाता है, तब DPD शून्य हो जाता है और जल प्रवेश रुक जाता है।
प्रश्न 4 (ii) – "एक श्लथ कोशिका में OP व DPD बराबर होते हैं" – कारण बताइए।
"OP and DPD are equivalent in a flaccid cell." Give reason.
कारण (Reason):
श्लथ कोशिका (flaccid cell) वह कोशिका होती है जिसमें स्फीति दाब (TP) शून्य होता है। ऐसा तब होता है जब कोशिका ने जल खो दिया हो या वह निर्जलित अवस्था में हो।
सम्बन्ध DPD = OP – TP के अनुसार, जब TP = 0 होता है, तब:
DPD = OP – 0 = OP
अतः श्लथ कोशिका में DPD और OP बराबर होते हैं। इसका अर्थ है कि ऐसी कोशिका में जल प्रवेश की प्रबल प्रवृत्ति (DPD) उसके परासरण दाब (OP) के बराबर होती है।
अथवा / OR
प्रश्न 4 (i) – जल विभव (Ψw), परासरण विभव (Ψs) व दाब विभव (Ψp) में सम्बन्ध लिखिए।
Write the relation between Water Potential (Ψw), Osmotic Potential (Ψs), and Pressure Potential (Ψp).
सम्बन्ध (Relation):
Ψw = Ψs + Ψp
जहाँ:
- Ψw = जल विभव (Water Potential) – शुद्ध जल की तुलना में जल की मुक्त ऊर्जा का माप।
- Ψs = परासरण विभव (Osmotic Potential / Solute Potential) – विलेय कणों के कारण जल विभव में कमी; यह सदैव ऋणात्मक होता है।
- Ψp = दाब विभव (Pressure Potential) – कोशिका भित्ति द्वारा लगाए गए दाब के कारण जल विभव में वृद्धि; यह धनात्मक या ऋणात्मक हो सकता है।
शुद्ध जल का जल विभव शून्य (0) माना जाता है। कोशिका में जल की गति उच्च जल विभव से निम्न जल विभव की ओर होती है।
प्रश्न 4 (ii) – अर्धपारगम्य झिल्ली से घिरा विलयन जिसका परासरण विभव -35 बार तथा दाब विभव -5 बार है, इसके जल विभव की गणना कीजिए।
Calculate water potential of solution which is enclosed in a semi-permeable membrane whose Osmotic Potential is –35 bar and Pressure Potential is –5 bar.
गणना (Calculation):
दिया गया है:
- परासरण विभव (Ψs) = –35 बार
- दाब विभव (Ψp) = –5 बार
सूत्र: Ψw = Ψs + Ψp
Ψw = (–35) + (–5) = –40 बार
उत्तर: विलयन का जल विभव –40 बार है।
नोट: यहाँ दाब विभव ऋणात्मक है, जो दर्शाता है कि विलयन पर बाहर से दाब कम है या वह तनाव में है।
प्रश्न 5 (भाग i एवं ii)
(i) मृदा में उपस्थित क्रांतिक तत्वों के नाम बताइये।
उत्तर: मृदा में उपस्थित क्रांतिक तत्व निम्नलिखित हैं:
- नाइट्रोजन (N)
- फॉस्फोरस (P)
- पोटैशियम (K)
ये तत्व पादप वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं और इनकी कमी से पादपों में विभिन्न लक्षण प्रकट होते हैं।
(ii) किन तत्त्वों की कमी के लक्षण सर्वप्रथम अग्रस्थ कलिकाओं में प्रकट होते हैं?
उत्तर: जिन तत्त्वों की कमी के लक्षण सर्वप्रथम अग्रस्थ कलिकाओं (apical buds) में प्रकट होते हैं, वे हैं:
- कैल्शियम (Ca)
- बोरॉन (B)
कारण: ये तत्व पादप में स्थानांतरित नहीं हो पाते (immobile elements), अतः इनकी कमी सबसे पहले नई वृद्धि वाले भागों में दिखाई देती है।
प्रश्न 6
“लेम्डा जीवाणुभोजी का महत्त्व वाहक के रूप में M13 से ज्यादा होता है।” दो कारण बताते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए।
"λ Bacteriophage is more important vector in comparison to M13." Justify this statement by giving two reasons.
उत्तर: लेम्डा (λ) जीवाणुभोजी का वाहक के रूप में M13 से अधिक महत्त्व होने के दो कारण:
- बड़े DNA टुकड़ों को ग्रहण करने की क्षमता: λ जीवाणुभोजी लगभग 15-20 kb तक के विदेशी DNA टुकड़ों को सम्मिलित कर सकता है, जबकि M13 में यह क्षमता सीमित (लगभग 1-2 kb) होती है।
- लाइसोजेनिक चक्र: λ जीवाणुभोजी में लाइसोजेनिक चक्र (lysogenic cycle) पाया जाता है, जिससे यह जीवाणु के जीनोम में स्थायी रूप से सम्मिलित हो सकता है और लंबे समय तक बना रह सकता है। M13 केवल लाइटिक चक्र (lytic cycle) दिखाता है, जिससे यह अस्थायी होता है।
इन कारणों से λ जीवाणुभोजी को क्लोनिंग वाहक के रूप में अधिक उपयोगी माना जाता है।
प्रश्न 7
एग्रोबैक्टीरियम निर्देशित जीन स्थानान्तरण को समझाइये।
Explain Agrobacterium mediated gene transfer.
उत्तर: एग्रोबैक्टीरियम निर्देशित जीन स्थानान्तरण (Agrobacterium mediated gene transfer) एक प्राकृतिक जीन स्थानांतरण विधि है, जिसमें Agrobacterium tumefaciens नामक जीवाणु का उपयोग किया जाता है। यह जीवाणु पादपों में ट्यूमर (क्राउन गॉल) उत्पन्न करता है।
प्रक्रिया:
- Agrobacterium में एक Ti प्लाज्मिड (Tumor inducing plasmid) पाया जाता है, जिसमें T-DNA क्षेत्र होता है।
- वांछित जीन को Ti प्लाज्मिड के T-DNA क्षेत्र में प्रविष्ट किया जाता है।
- इस प्लाज्मिड को पुनः Agrobacterium में डाला जाता है।
- जीवाणु को पादप कोशिका (जैसे पत्ती के टुकड़े) के साथ सह-संवर्धित (co-cultivation) किया जाता है।
- जीवाणु अपने T-DNA को पादप कोशिका के जीनोम में स्थानांतरित कर देता है।
- पादप कोशिका को पुनर्जीवित (regenerate) करके पूर्ण पादप प्राप्त किया जाता है, जिसमें वांछित जीन अभिव्यक्त होता है।
यह विधि द्विबीजपत्री पादपों में अत्यधिक प्रभावी है और आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) फसलों के विकास में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है।
प्रश्न 8
भाग A में पादप का नाम तथा भाग B में इनसे सम्बन्धित उपयोगी पादप भाग है। निम्न को सुमेलित कीजिए:
| भाग A | भाग B |
|---|---|
| A. मूंगफली | i) शुष्क पुष्प कलिकाएँ |
| B. नारियल | ii) सुखाए गए प्रकंद |
| C. लौंग | iii) अभ्रूणपोष |
| D. हल्दी | iv) बीज |
सही सुमेलन:
- A → iv (मूंगफली का उपयोगी भाग बीज है)
- B → iii (नारियल का उपयोगी भाग अभ्रूणपोष है)
- C → i (लौंग का उपयोगी भाग शुष्क पुष्प कलिकाएँ हैं)
- D → ii (हल्दी का उपयोगी भाग सुखाए गए प्रकंद हैं)
प्रश्न 19
Part A में पौधों के नाम और Part B में उनके उपयोगी भाग दिए गए हैं। सही मिलान कीजिए।
| Part A | Part B |
|---|---|
| A. Groundnut (मूंगफली) | v) Seed (बीज) |
| B. Coconut (नारियल) | it) Endosperm (भ्रूणपोष) |
| C. Clove (लौंग) | 7) dry flower buds (सूखी कलियाँ) |
| D. Turmeric (हल्दी) | n) dried Rhizomes (सूखे प्रकंद) |
सही मिलान:
- A. Groundnut → v) Seed
- B. Coconut → it) Endosperm
- C. Clove → 7) dry flower buds
- D. Turmeric → n) dried Rhizomes
प्रश्न 20
नीलहरित शैवाल या सायनोबैक्टीरिया किस प्रकार जैवउर्वरक के रूप में काम करते हैं? समझाइये। [2]
How Bluegreen algae or Cyanobacteria works as biofertilizer? Explain.
उत्तर: नीलहरित शैवाल (सायनोबैक्टीरिया) जैवउर्वरक के रूप में निम्न प्रकार काम करते हैं:
- ये वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर करके मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाते हैं।
- ये मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होते हैं, विशेषकर धान के खेतों में।
- ये कार्बनिक पदार्थों का निर्माण कर मिट्टी की संरचना में सुधार करते हैं।
- उदाहरण: Anabaena, Nostoc आदि।
प्रश्न 21
श्वसन संबंधी दो रोगों को समझाइये। [1+1=2]
Explain two respiratory disorders.
उत्तर: श्वसन संबंधी दो प्रमुख रोग:
- अस्थमा (Asthma): यह एक एलर्जीजन्य रोग है जिसमें श्वास नलिकाओं में सूजन आ जाती है, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है।
- निमोनिया (Pneumonia): यह फेफड़ों का संक्रमण है, जो बैक्टीरिया या वायरस के कारण होता है, जिसमें एल्वियोली में द्रव भर जाता है और ऑक्सीजन का आदान-प्रदान बाधित होता है।
प्रश्न 22
हार्मोन का नाम लिखिए जो कोर्पस ल्यूटियम के परिवर्धन को प्रेरित करता है? कोर्पस ल्यूटियम के क्षतिग्रस्त होने पर उत्पन्न प्रभाव को समझाइये। [1+1=2]
Write the name of hormone which induces the development of corpus luteum. Explain the effect produced due to the damage of corpus luteum.
उत्तर:
- हार्मोन का नाम: ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) कोर्पस ल्यूटियम के विकास को प्रेरित करता है।
- कोर्पस ल्यूटियम के क्षतिग्रस्त होने पर प्रभाव: कोर्पस ल्यूटियम प्रोजेस्टेरोन हार्मोन स्रावित करता है, जो गर्भावस्था को बनाए रखने में सहायक है। इसके क्षतिग्रस्त होने पर प्रोजेस्टेरोन का स्तर गिर जाता है, जिससे गर्भाशय की अंतःस्तर (एंडोमेट्रियम) टूट सकती है और गर्भपात हो सकता है या मासिक धर्म चक्र बाधित हो सकता है।
प्रश्न 23
मानव शुक्राणु की संरचना का वर्णन कीजिए। [2]
Describe the structure of human sperm.
उत्तर: मानव शुक्राणु की संरचना निम्नलिखित भागों में विभाजित होती है:
- शीर्ष (Head): इसमें केंद्रक (nucleus) होता है जो पितृ आनुवंशिक पदार्थ वहन करता है। शीर्ष के अग्र भाग पर एक्रोसोम (acrosome) पाया जाता है, जो अंडाणु में प्रवेश के लिए एंजाइम स्रावित करता है।
- मध्य भाग (Middle piece): इसमें माइटोकॉन्ड्रिया होते हैं जो शुक्राणु की गति के लिए ऊर्जा (ATP) प्रदान करते हैं।
- पुच्छ (Tail): यह लंबा और गतिशील होता है, जो शुक्राणु को तैरने में सहायता करता है।
23.
निम्न में से प्रत्येक में जीन उत्परिवर्तन के प्रकार को समझाइये। [1+1=2]
- ATGCATGC → ACGCATGC
- ATGCATGC → ATGAATGC
Explain the type of gene mutation in each of the following:
- ATGCATGC → ACGCATGC
- ATGCATGC → ATGAATGC
Solution:
- ATGCATGC → ACGCATGC: यह एक प्रतिस्थापन उत्परिवर्तन (Substitution mutation) है। इसमें दूसरे स्थान पर T (थाइमिन) के स्थान पर C (साइटोसिन) आ गया है। यह एक बिंदु उत्परिवर्तन (point mutation) है।
- ATGCATGC → ATGAATGC: यह एक सम्मिलन उत्परिवर्तन (Insertion mutation) है। इसमें चौथे और पाँचवें स्थान के बीच एक अतिरिक्त A (एडेनिन) जुड़ गया है, जिससे अनुक्रम बदल गया है।
24.
अमीबीपेचिश रोग के रोगकारक का नाम लिखिए। इस रोग के दो लक्षण व बचाव के दो उपाय लिखिए। [1+½+½=2]
Name the pathogen of Amoebic dysentery. Mention its two symptoms and two preventive measures.
Solution:
- रोगकारक (Pathogen): Entamoeba histolytica (एण्टअमीबा हिस्टोलिटिका)
- दो लक्षण (Two symptoms):
- पेट में दर्द और ऐंठन (Abdominal pain and cramps)
- मल में रक्त और बलगम आना (Blood and mucus in stool)
- बचाव के दो उपाय (Two preventive measures):
- स्वच्छ पानी पीना और खाने से पहले हाथ धोना (Drink clean water and wash hands before eating)
- सब्जियों और फलों को अच्छी तरह धोकर खाना (Wash vegetables and fruits thoroughly before eating)
खण्ड - स (Section - C)
25.
प्रतीप बीजाण्ड की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए? [2+1=3]
Describe the structure of Anatropous ovule with diagram.
Solution:
प्रतीप बीजाण्ड (Anatropous ovule) पादपों में पाया जाने वाला सबसे सामान्य प्रकार का बीजाण्ड है। इसमें बीजाण्ड पूरी तरह से 180° घूम जाता है, जिससे नाभिका (hilum) और बीजाण्डद्वार (micropyle) एक-दूसरे के निकट आ जाते हैं।
संरचना (Structure):
- वृन्त (Funicle): बीजाण्ड को अंडाशय की भित्ति से जोड़ने वाला डंठल।
- नाभिका (Hilum): वह स्थान जहाँ वृन्त बीजाण्ड से जुड़ता है।
- बीजाण्डद्वार (Micropyle): बीजाण्ड के शीर्ष पर एक छोटा छिद्र।
- बाह्य आवरण (Outer integument) और आंतरिक आवरण (Inner integument): बीजाण्ड को ढकने वाली दो परतें।
- भ्रूणकोष (Embryo sac): बीजाण्ड के मध्य में स्थित मादा युग्मकोद्भिद्।
- चालाजा (Chalaza): वह भाग जहाँ आवरण और बीजाण्ड का मुख्य भाग मिलते हैं।
(चित्र: एक प्रतीप बीजाण्ड जिसमें बीजाण्डद्वार नीचे की ओर झुका हुआ है और वृन्त बीजाण्ड से जुड़ा हुआ है।)
26.
द्विसंकर संकरण को परिभाषित कीजिये। मेण्डल के द्विसंकर संकरण प्रयोग को चैकर बोर्ड द्वारा समझाइये। [1+1+1=3]
Define dihybrid cross. Explain Mendel's dihybrid cross experiment by checker board.
Solution:
द्विसंकर संकरण (Dihybrid cross) की परिभाषा: यह एक ऐसा संकरण है जिसमें दो जोड़ी विपरीत लक्षणों (जैसे बीज का रंग और बीज की आकृति) वाले माता-पिता के बीच संकरण कराया जाता है।
मेण्डल का द्विसंकर संकरण प्रयोग:
मेण्डल ने मटर के पौधों पर दो लक्षणों - बीज का रंग (पीला/हरा) और बीज की आकृति (गोल/झुर्रीदार) - का अध्ययन किया।
- F1 पीढ़ी: शुद्ध पीले-गोल (YYRR) और हरे-झुर्रीदार (yyrr) बीजों वाले पौधों के संकरण से सभी पीले-गोल (YyRr) बीज प्राप्त हुए।
- F2 पीढ़ी: F1 पौधों के स्व-परागण से चार प्रकार के बीज प्राप्त हुए: पीले-गोल, पीले-झुर्रीदार, हरे-गोल, हरे-झुर्रीदार, जिनका अनुपात 9:3:3:1 था।
चैकर बोर्ड (Punnett square):
| ♂ / ♀ | YR | Yr | yR | yr |
|---|---|---|---|---|
| YR | YYRR (पीला-गोल) | YYRr (पीला-गोल) | YyRR (पीला-गोल) | YyRr (पीला-गोल) |
| Yr | YYRr (पीला-गोल) | YYrr (पीला-झुर्रीदार) | YyRr (पीला-गोल) | Yyrr (पीला-झुर्रीदार) |
| yR | YyRR (पीला-गोल) | YyRr (पीला-गोल) | yyRR (हरा-गोल) | yyRr (हरा-गोल) |
| yr | YyRr (पीला-गोल) | Yyrr (पीला-झुर्रीदार) | yyRr (हरा-गोल) | yyrr (हरा-झुर्रीदार) |
परिणाम: F2 पीढ़ी में फीनोटाइपिक अनुपात 9 (पीला-गोल) : 3 (पीला-झुर्रीदार) : 3 (हरा-गोल) : 1 (हरा-झुर्रीदार) प्राप्त हुआ। इससे स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment) सिद्ध हुआ।
प्रश्न 27
एन्जाइम क्रिया को सक्रियण ऊर्जा में कमी के आधार पर समझाइये। सक्रियण ऊर्जा को दर्शाने वाला नामांकित चित्र बनाइए। [2+1=3]
अथवा
पादपों में जलमार्ग के एपोप्लास्ट पथ को समझाइये। पादप कोशिकाओं में जल संचलन के प्रमुख मार्गो का चित्र बनाइए।
Explain the mode of enzyme action on the basis of lowering of Activation energy. Draw a labelled diagram to show activation energy.
OR
Explain Apoplast pathway of water in plants. Draw a diagram to show major paths of water flow in plant cells.
उत्तर (एन्जाइम क्रिया – सक्रियण ऊर्जा में कमी)
एन्जाइम अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) को कम करके अभिक्रिया की दर को बढ़ाते हैं। सक्रियण ऊर्जा वह न्यूनतम ऊर्जा है जो अभिकारकों को उत्पाद में बदलने के लिए आवश्यक होती है। एन्जाइम अभिकारकों (सब्सट्रेट) से जुड़कर एक संक्रमण अवस्था (Transition State) बनाते हैं, जिसमें ऊर्जा की आवश्यकता कम हो जाती है। इस प्रकार एन्जाइम बिना किसी ऊर्जा अवरोध के अभिक्रिया को तीव्र कर देते हैं।
सक्रियण ऊर्जा दर्शाने वाला नामांकित चित्र:
(चित्र में X-अक्ष पर अभिक्रिया प्रगति (Reaction Progress) और Y-अक्ष पर ऊर्जा (Energy) दिखाई गई है। एक वक्र बिना एन्जाइम के उच्च सक्रियण ऊर्जा (Ea) दर्शाता है, और दूसरा वक्र एन्जाइम की उपस्थिति में निम्न सक्रियण ऊर्जा (Ea') दर्शाता है। अभिकारक (Substrate) और उत्पाद (Product) के स्तर भी चिह्नित हैं।)
उत्तर (एपोप्लास्ट पथ – वैकल्पिक)
एपोप्लास्ट पथ पादपों में जल संचलन का एक मार्ग है जिसमें जल कोशिका भित्तियों (Cell Walls) और अंतरकोशिकीय स्थानों (Intercellular Spaces) से होकर बिना कोशिका झिल्ली को पार किए बहता है। यह मार्ग मुख्यतः जड़ों में जल के तीव्र अवशोषण के लिए उपयोगी होता है।
पादप कोशिकाओं में जल संचलन के प्रमुख मार्गों का चित्र:
(चित्र में तीन मार्ग दिखाए गए हैं: एपोप्लास्ट पथ (कोशिका भित्ति से), सिम्प्लास्ट पथ (प्लाज्मोडेस्माटा के माध्यम से कोशिका द्रव्य से), और ट्रांसमेम्ब्रेन पथ (कोशिका झिल्ली के पार)।)
प्रश्न 28
i) प्रकाश फोस्फोरिलीकरण किसे कहते है?
ii) चक्रीय प्रकाश फोस्फोरिलीकरण अभिक्रिया को समझाइये।
iii) चक्रीय प्रकाश फोस्फोरिलीकरण अभिक्रिया को दर्शाने वाला आरेख चित्र बनाइये। [1+2+1=4]
अथवा
i) सजीवों में ग्लाइकोलिसिस का क्रियास्थल लिखिये।
ii) ग्लाइकोलिसिस में ग्लूकोज के फोस्फोरेलिकरण के विभिन्न पदों को समझाइये।
iii) ग्लूकोज के फोस्फोरिलिकरण तक होने वाली जैव रासायनिक अभिक्रियाओं का आरेख चित्र बनाइये।
उत्तर (प्रकाश फोस्फोरिलीकरण)
i) प्रकाश फोस्फोरिलीकरण की परिभाषा: प्रकाश फोस्फोरिलीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें प्रकाश ऊर्जा की सहायता से ADP (एडेनोसिन डाइफॉस्फेट) में अकार्बनिक फॉस्फेट (Pi) जुड़कर ATP (एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) का निर्माण होता है। यह प्रकाश-संश्लेषण की प्रकाश अभिक्रिया का एक महत्वपूर्ण भाग है।
ii) चक्रीय प्रकाश फोस्फोरिलीकरण: इस प्रक्रिया में केवल फोटोसिस्टम I (PS I) सक्रिय होता है। इलेक्ट्रॉन PS I से उत्तेजित होकर उच्च ऊर्जा स्तर पर पहुँचते हैं, फिर इलेक्ट्रॉन वाहक श्रृंखला (जैसे फेरिडॉक्सिन, प्लास्टोक्विनोन, साइटोक्रोम b6f कॉम्प्लेक्स, प्लास्टोसायनिन) से होते हुए वापस PS I में लौट आते हैं। इस चक्रीय मार्ग में ATP का निर्माण होता है, लेकिन NADPH या ऑक्सीजन का उत्पादन नहीं होता।
iii) चक्रीय प्रकाश फोस्फोरिलीकरण का आरेख:
(चित्र में फोटोसिस्टम I (PS I), इलेक्ट्रॉन वाहक (फेरिडॉक्सिन, प्लास्टोक्विनोन, साइटोक्रोम b6f, प्लास्टोसायनिन), और ATP सिंथेज़ दिखाया गया है। तीर इलेक्ट्रॉनों के चक्रीय प्रवाह को दर्शाते हैं।)
उत्तर (ग्लाइकोलिसिस – वैकल्पिक)
i) ग्लाइकोलिसिस का क्रियास्थल: सजीवों में ग्लाइकोलिसिस कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) में होता है।
ii) ग्लूकोज के फोस्फोरेलिकरण के विभिन्न पद: ग्लाइकोलिसिस में ग्लूकोज का फोस्फोरिलीकरण दो चरणों में होता है:
- पहला फोस्फोरिलीकरण: ग्लूकोज पर हेक्सोकाइनेज एन्जाइम की क्रिया से ATP से एक फॉस्फेट समूह स्थानांतरित होता है, जिससे ग्लूकोज-6-फॉस्फेट बनता है।
- दूसरा फोस्फोरिलीकरण: फ्रक्टोज-6-फॉस्फेट पर फॉस्फोफ्रक्टोकाइनेज-1 एन्जाइम की क्रिया से ATP से दूसरा फॉस्फेट समूह जुड़ता है, जिससे फ्रक्टोज-1,6-बिस्फॉस्फेट बनता है। यह एक अपरिवर्तनीय चरण है।
iii) ग्लूकोज के फोस्फोरिलिकरण तक की जैव रासायनिक अभिक्रियाओं का आरेख:
(चित्र में ग्लूकोज से ग्लूकोज-6-फॉस्फेट, फिर फ्रक्टोज-6-फॉस्फेट, और अंत में फ्रक्टोज-1,6-बिस्फॉस्फेट तक के चरणों को एन्जाइम और ATP/ADP के साथ दर्शाया गया है।)
प्रश्न 9 (Question 9)
श्वेत प्रकाश-फॉस्फोरिलीकरण (Cyclic Photophosphorylation)
-
चक्रीय प्रकाश-फॉस्फोरिलीकरण की अभिक्रिया समझाइए।
चक्रीय प्रकाश-फॉस्फोरिलीकरण में केवल प्रकाश अभिक्रिया I (PS I) भाग लेती है। इसमें इलेक्ट्रॉन एक चक्रीय पथ में गति करते हैं और ATP का निर्माण होता है, लेकिन NADPH + H⁺ का निर्माण नहीं होता है। इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन भी मुक्त नहीं होती है।
प्रक्रिया: प्रकाश ऊर्जा के अवशोषण से PS I के अभिक्रिया केंद्र (P700) से इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर बाहर निकलते हैं। ये इलेक्ट्रॉन इलेक्ट्रॉन वाहकों (फेरिडॉक्सिन, प्लास्टोक्विनोन, साइटोक्रोम b₆f कॉम्प्लेक्स, प्लास्टोसायनिन) की श्रृंखला से होते हुए वापस PS I में आ जाते हैं। इस इलेक्ट्रॉन प्रवाह के दौरान ATP का संश्लेषण होता है।
-
चक्रीय प्रकाश-फॉस्फोरिलीकरण की अभिक्रियाओं को दर्शाने के लिए एक रेखा चित्र बनाइए।
रेखा चित्र:
प्रकाश (Light) ↓ PS I (P700) ↓ (उत्तेजित इलेक्ट्रॉन) फेरिडॉक्सिन (Fd) ↓ प्लास्टोक्विनोन (PQ) ↓ साइटोक्रोम b₆f कॉम्प्लेक्स (Cyt b₆f) ↓ (ATP संश्लेषण) प्लास्टोसायनिन (PC) ↓ PS I (P700) ← (इलेक्ट्रॉन वापस)इस चक्रीय पथ में केवल ATP का निर्माण होता है।
अथवा (OR)
-
ग्लाइकोलिसिस का स्थान लिखिए।
ग्लाइकोलिसिस कोशिका के कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) में होता है।
-
ग्लाइकोलिसिस में ग्लूकोज के फॉस्फोरिलीकरण के विभिन्न चरणों की व्याख्या कीजिए।
ग्लूकोज के फॉस्फोरिलीकरण के चरण निम्नलिखित हैं:
- ग्लूकोज का फॉस्फोरिलीकरण: ग्लूकोज, ATP से फॉस्फेट समूह ग्रहण करके ग्लूकोज-6-फॉस्फेट बनाता है। यह अभिक्रिया हेक्सोकाइनेज एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है।
- ग्लूकोज-6-फॉस्फेट का फ्रक्टोज-6-फॉस्फेट में समावयवीकरण: फॉस्फोग्लूकोआइसोमरेज एंजाइम द्वारा यह अभिक्रिया होती है।
- फ्रक्टोज-6-फॉस्फेट का फॉस्फोरिलीकरण: फ्रक्टोज-6-फॉस्फेट, ATP से दूसरा फॉस्फेट समूह ग्रहण करके फ्रक्टोज-1,6-बिस्फॉस्फेट बनाता है। यह अभिक्रिया फॉस्फोफ्रक्टोकाइनेज-1 द्वारा उत्प्रेरित होती है।
इस प्रकार ग्लूकोज के दो फॉस्फोरिलीकरण चरणों में 2 ATP अणुओं का उपयोग होता है।
-
ग्लूकोज के फॉस्फोरिलीकरण तक की जैव रासायनिक अभिक्रियाओं का रेखा चित्र बनाइए।
रेखा चित्र:
ग्लूकोज (Glucose) ↓ (हेक्सोकाइनेज, ATP → ADP) ग्लूकोज-6-फॉस्फेट (Glucose-6-phosphate) ↓ (फॉस्फोग्लूकोआइसोमरेज) फ्रक्टोज-6-फॉस्फेट (Fructose-6-phosphate) ↓ (फॉस्फोफ्रक्टोकाइनेज-1, ATP → ADP) फ्रक्टोज-1,6-बिस्फॉस्फेट (Fructose-1,6-bisphosphate)यह ग्लाइकोलिसिस का प्रारंभिक चरण है जिसमें 2 ATP का उपयोग होता है।
प्रश्न 29 (Question 29)
मनुष्य के पाचनतंत्र का नामांकित चित्र बनाइए। आमाशय में पाचन की क्रियाविधि समझाइए।
मानव पाचन तंत्र का नामांकित चित्र:
मुख (Mouth)
↓
ग्रसिका (Pharynx)
↓
ग्रासनली (Oesophagus)
↓
आमाशय (Stomach)
↓
छोटी आंत (Small Intestine) - ग्रहणी (Duodenum), मध्यांत्र (Jejunum), शेषांत्र (Ileum)
↓
बड़ी आंत (Large Intestine) - उंडुक (Caecum), वृहदांत्र (Colon), मलाशय (Rectum)
↓
गुदा (Anus)
आमाशय में पाचन की क्रियाविधि:
आमाशय में भोजन का यांत्रिक और रासायनिक पाचन होता है।
- यांत्रिक पाचन: आमाशय की पेशीय दीवारों के संकुचन और शिथिलन (क्रमाकुंचन) से भोजन अच्छी तरह मिश्रित होता है और इसे काइम (chyme) में बदलता है।
- रासायनिक पाचन:
- गैस्ट्रिक रस: आमाशय की ग्रंथियों से गैस्ट्रिक रस स्रावित होता है जिसमें हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl), पेप्सिनोजेन, और रेनिन (शिशुओं में) होते हैं।
- HCl का कार्य: यह भोजन को अम्लीय बनाता है (pH ~2), जीवाणुओं को मारता है, और पेप्सिनोजेन को सक्रिय पेप्सिन में बदलता है।
- पेप्सिन: यह प्रोटीन को पेप्टाइड्स और अमीनो अम्लों में तोड़ता है।
- रेनिन: यह दूध के प्रोटीन (कैसीनोजेन) को कैसीन में जमाता है, जिससे पाचन आसान होता है।
आमाशय में भोजन लगभग 3-4 घंटे तक रहता है और फिर छोटी आंत में जाता है।
अथवा (OR)
मानव के उत्सर्जन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइए। मानव में मूत्र निर्माण की परानिस्यन्दन क्रिया को समझाइए।
मानव उत्सर्जन तंत्र का नामांकित चित्र:
वृक्क (Kidney) - दाएं और बाएं
↓
मूत्रवाहिनी (Ureter) - दाएं और बाएं
↓
मूत्राशय (Urinary Bladder)
↓
मूत्रमार्ग (Urethra)
मानव में मूत्र निर्माण की परानिस्यन्दन (अल्ट्राफिल्ट्रेशन) क्रिया:
परानिस्यन्दन वृक्क की नेफ्रॉन इकाई में होता है, विशेष रूप से बोमैन संपुट (Bowman's capsule) और ग्लोमेरुलस (Glomerulus) में।
- स्थान: यह क्रिया वृक्क कणिका (Renal corpuscle) में होती है, जहां ग्लोमेरुलस (केशिकाओं का जाल) बोमैन संपुट से घिरा होता है।
- प्रक्रिया:
- ग्लोमेरुलस में रक्त उच्च दबाव पर होता है (क्योंकि अभिवाही धमनिका अपवाही धमनिका से चौड़ी होती है)।
- इस उच्च दबाव के कारण रक्त का तरल भाग (प्लाज्मा) ग्लोमेरुलस की केशिका दीवारों और बोमैन संपुट की आंतरिक दीवार (पोडोसाइट्स) से होकर छनता है।
- इस छनने को अल्ट्राफिल्ट्रेशन कहते हैं।
- छने हुए द्रव को ग्लोमेरुलर निस्यंद (Glomerular filtrate) कहते हैं, जिसमें पानी, ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, यूरिया, लवण आदि होते हैं, लेकिन रक्त कोशिकाएं और बड़े प्रोटीन नहीं होते।
- निस्यंदन दर: प्रति मिनट लगभग 125 mL निस्यंद बनता है (GFR - Glomerular Filtration Rate)।
यह निस्यंद फिर नेफ्रॉन की नलिकाओं में पुनर्अवशोषण और स्राव से गुजरकर अंततः मूत्र बनता है।
SS42-Bio. 334
प्रश्न 30
भाग (i) – मानव मस्तिष्क का नामांकित चित्र
मानव मस्तिष्क का नामांकित चित्र बनाइए। चित्र में निम्नलिखित भागों को दर्शाएँ:
- प्रमस्तिष्क (Cerebrum)
- अनुमस्तिष्क (Cerebellum)
- मेड्यूला ऑब्लॉन्गेटा (Medulla Oblongata)
- पॉन्स (Pons)
- मध्यमस्तिष्क (Midbrain)
- हाइपोथैलेमस (Hypothalamus)
- पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland)
(चित्र स्वयं बनाएँ और उपरोक्त भागों को नामांकित करें।)
भाग (ii) – प्रमस्तिष्क का वर्णन
प्रमस्तिष्क (Cerebrum) मानव मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है, जो मस्तिष्क के कुल आयतन का लगभग 80% भाग घेरता है। यह दो गोलार्धों (left and right hemispheres) में विभाजित होता है, जो कॉर्पस कैलोसम (Corpus Callosum) नामक तंत्रिका तंतुओं के बंडल द्वारा जुड़े होते हैं। प्रमस्तिष्क की बाहरी सतह को ग्रे मैटर (Grey Matter) कहते हैं, जिसमें तंत्रिका कोशिकाओं के कोशिका शरीर पाए जाते हैं। आंतरिक भाग व्हाइट मैटर (White Matter) कहलाता है, जिसमें तंत्रिका तंतु होते हैं। प्रमस्तिष्क में चार प्रमुख खंड (lobes) होते हैं:
- फ्रंटल लोब (Frontal Lobe) – सोच, निर्णय, और स्वैच्छिक गतियों का नियंत्रण
- पैराइटल लोब (Parietal Lobe) – स्पर्श, दबाव, और तापमान संवेदनाएँ
- टेम्पोरल लोब (Temporal Lobe) – श्रवण और स्मृति
- ऑक्सिपिटल लोब (Occipital Lobe) – दृष्टि
भाग (iii) – प्रमस्तिष्क के दो कार्य
- स्वैच्छिक गतियों का नियंत्रण: प्रमस्तिष्क शरीर की सभी स्वैच्छिक मांसपेशियों की गतियों को नियंत्रित करता है, जैसे चलना, बोलना, और हाथों का उपयोग।
- उच्च मानसिक कार्य: यह सोच, तर्क, स्मृति, भाषा, और निर्णय लेने जैसे उच्च मानसिक कार्यों का केंद्र है।
अथवा
भाग (i) – नर जनन तंत्र का नामांकित चित्र
नर जनन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइए। चित्र में निम्नलिखित भागों को दर्शाएँ:
- वृषण (Testis)
- अधिवृषण (Epididymis)
- वास डिफेरेंस (Vas Deferens)
- शुक्राशय (Seminal Vesicle)
- प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate Gland)
- मूत्रमार्ग (Urethra)
- लिंग (Penis)
(चित्र स्वयं बनाएँ और उपरोक्त भागों को नामांकित करें।)
भाग (ii) – वृषण की संरचना
वृषण (Testis) नर जनन तंत्र का प्रमुख अंग है, जो अंडकोश (scrotum) के अंदर स्थित होता है। प्रत्येक वृषण अंडाकार आकार का होता है और इसकी संरचना निम्नलिखित होती है:
- बाहरी आवरण: वृषण चार परतों से ढका होता है – ट्यूनिका वैजाइनैलिस (Tunica Vaginalis), ट्यूनिका अल्ब्यूजिनिया (Tunica Albuginea), और ट्यूनिका वैस्कुलोसा (Tunica Vasculosa)।
- आंतरिक संरचना: ट्यूनिका अल्ब्यूजिनिया से अंदर की ओर सेप्टा (Septae) निकलते हैं, जो वृषण को लगभग 250-300 लोब्यूल (Lobules) में विभाजित करते हैं।
- शुक्रजनक नलिकाएँ (Seminiferous Tubules): प्रत्येक लोब्यूल में 1-3 कुंडलित शुक्रजनक नलिकाएँ होती हैं, जहाँ शुक्राणु निर्माण (spermatogenesis) होता है।
- अंतराली कोशिकाएँ (Interstitial Cells / Leydig Cells): ये शुक्रजनक नलिकाओं के बीच स्थित होती हैं और टेस्टोस्टेरॉन (Testosterone) हार्मोन का स्राव करती हैं।
- सरटोली कोशिकाएँ (Sertoli Cells): ये शुक्रजनक नलिकाओं की भीतरी दीवार पर स्थित होती हैं और शुक्राणुओं को पोषण प्रदान करती हैं।
भाग (iii) – सरटोली कोशिका के दो कार्य
- शुक्राणुओं को पोषण प्रदान करना: सरटोली कोशिकाएँ विकासशील शुक्राणुओं को आवश्यक पोषक तत्व और सहायता प्रदान करती हैं।
- हार्मोन स्राव: ये कोशिकाएँ इन्हिबिन (Inhibin) हार्मोन का स्राव करती हैं, जो FSH (फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन) के स्राव को नियंत्रित करता है।
[I+2+I=4]