RBSE Class 12th 2019 Drawing History Of Indian Painting & Sculpture-SS-17-2019 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2019
Subject Drawing History Of Indian Painting & Sculpture-SS-17-2019
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 12th 2019 Drawing History Of Indian Painting & Sculpture-SS-17-2019

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Rajasthan Board Class 12th Drawing History Of Indian Painting & Sculpture-SS-17-2019 2019 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक (मूक-बधिर) परीक्षा, 2019

चित्रकला
DRAWING

भारतीय चित्रकला एवं मूर्तिकला का इतिहास
History of Indian Painting and Sculpture

समय : 1¾ घण्टे     पूर्णांक : 24


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
  5. प्रश्न संख्या एवं अंक प्रत्येक प्रश्न उत्तर की शब्द सीमा :
    - प्रश्न 1-3 : 50 शब्द
    - प्रश्न 4-5 : 70 शब्द
    - प्रश्न 6-11 : 3 शब्द
  6. प्रश्न संख्या 1 से 3 में आंतरिक विकल्प हैं।

नामांक : ____________________     Roll No. : ____________________

SL.No. : &     PTT TTL

No. of Questions : [[ S S -] 7 Drawing(D & D )

No. of Printed Pages : 3

$5-7- Drawing(D&D) I356 [Turn Over

प्रश्न 2

राजस्थानी चित्रकला के शैलीगत विकासक्रम को समझाइए।

उत्तर: राजस्थानी चित्रकला का विकासक्रम मुख्यतः 16वीं से 19वीं शताब्दी तक रहा। इसके अंतर्गत विभिन्न राजपूत राज्यों में अलग-अलग शैलियाँ विकसित हुईं। प्रारंभ में मेवाड़ शैली (लगभग 1600 ई.) का उदय हुआ, जिसमें रागमाला चित्र और महाभारत के दृश्य प्रमुख हैं। इसके बाद बूंदी शैली (17वीं शताब्दी) विकसित हुई, जिसमें प्रकृति चित्रण और नायिका भेद विशेष है। कोटा शैली में शिकार के दृश्य और हाथियों के चित्र प्रमुख हैं। जयपुर शैली (18वीं शताब्दी) में मुगल प्रभाव दिखता है। किशनगढ़ शैली (18वीं शताब्दी) में बनी-ठनी और नागरदास की कृतियाँ प्रसिद्ध हैं। अंत में झालावाड़ और अलवर शैलियाँ विकसित हुईं।

अथवा

कांगड़ा शैली पर एक निबन्ध लिखिए।

उत्तर: कांगड़ा शैली पहाड़ी चित्रकला की एक प्रमुख शैली है, जो 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में विकसित हुई। इस शैली का स्वर्णकाल राजा संसार चंद (1775-1823) के शासनकाल में था। कांगड़ा शैली की मुख्य विशेषताएँ हैं: प्रकृति का सजीव चित्रण, नायिकाओं के भाव-भंगिमाओं का सुंदर प्रदर्शन, कोमल रेखाएँ, और हल्के-फुल्के रंगों का प्रयोग। इस शैली में भागवत पुराण, गीत गोविंद और राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंगों का चित्रण प्रमुख है। प्रसिद्ध चित्रकारों में नैनसुख, मनसुख और गौड़ शामिल हैं। कांगड़ा शैली ने बाद में गुलेर, चंबा और बिलासपुर शैलियों को भी प्रभावित किया।

प्रश्न 3

बंगाल शैली की कलागत विशेषताओं के बारे में लिखिए।

उत्तर: बंगाल शैली (बंगाल स्कूल) 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में अवनींद्रनाथ टैगोर के नेतृत्व में विकसित हुई। इसकी प्रमुख कलागत विशेषताएँ हैं: (1) राष्ट्रीयता की भावना - स्वदेशी आंदोलन से प्रेरित, (2) मध्यकालीन भारतीय चित्रकला (मुगल, राजपूत) और जापानी सुलेखन का प्रभाव, (3) कोमल, तरल रेखाओं का प्रयोग, (4) हल्के और मटमैले रंगों का उपयोग, (5) पौराणिक और ऐतिहासिक विषयों पर आधारित चित्र, (6) भारतीय परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास। प्रमुख कलाकारों में अवनींद्रनाथ टैगोर, नंदलाल बोस, असित कुमार हालदार और मुकुल चंद्र शामिल हैं।

अथवा

अपनी पसन्द के तीन प्रतिनिधि कलाकारों की शैलियों का विवेचन कीजिए।

उत्तर: तीन प्रतिनिधि कलाकारों की शैलियाँ:

  1. राजा रवि वर्मा (1848-1906): यथार्थवादी शैली, तैल चित्रण, पौराणिक विषय, भारतीय परिधानों का सजीव चित्रण।
  2. अमृता शेरगिल (1913-1941): आधुनिक शैली, भारतीय ग्रामीण जीवन का चित्रण, गहरे रंगों का प्रयोग, भावनात्मक अभिव्यक्ति।
  3. एम.एफ. हुसैन (1915-2011): आधुनिकतावादी शैली, घनवादी प्रभाव, भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं का चित्रण, बोल्ड रेखाएँ और चमकीले रंग।

प्रश्न 4

देलवाड़ा के जैन मंदिर पर निबन्ध लिखिए।

उत्तर: देलवाड़ा के जैन मंदिर राजस्थान के सिरोही जिले में माउंट आबू पर स्थित हैं। ये मंदिर 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच बने थे। पाँच मुख्य मंदिर हैं: विमल वसही (1031 ई.), लूना वसही (1230 ई.), पार्श्वनाथ मंदिर (1458 ई.), आदिनाथ मंदिर और महावीर स्वामी मंदिर। इनकी मुख्य विशेषता संगमरमर पर की गई अद्भुत नक्काशी है। विमल वसही मंदिर में संगमरमर के खंभों पर बेल-बूटे, फूल-पत्तियाँ और जैन तीर्थंकरों की मूर्तियाँ उत्कीर्ण हैं। लूना वसही मंदिर में रंगीन संगमरमर का प्रयोग हुआ है। ये मंदिर भारतीय मूर्तिकला और स्थापत्य कला के उत्कृष्ट नमूने हैं।

अथवा

राजस्थान की समकालीन मूर्तिकला पर एक लेख लिखिए।

उत्तर: राजस्थान की समकालीन मूर्तिकला में परंपरा और आधुनिकता का सम्मिलन देखने को मिलता है। प्रमुख मूर्तिकारों में रामकिंकर बैज (बंगाली मूल के, लेकिन राजस्थान में कार्यरत), कान्हा कुमार, और सुरेश कुमार शामिल हैं। समकालीन मूर्तिकला में पारंपरिक पत्थर और धातु के साथ-साथ लोहा, सीमेंट, फाइबर ग्लास जैसी नई सामग्रियों का प्रयोग हो रहा है। विषयों में सामाजिक मुद्दे, पर्यावरण, और अमूर्त कला शामिल हैं। जयपुर, जोधपुर और उदयपुर में आधुनिक मूर्तिकला केंद्र विकसित हुए हैं। राजस्थान ललित कला अकादमी और जवाहर कला केंद्र समकालीन मूर्तिकला को बढ़ावा दे रहे हैं।

प्रश्न 5

दक्खिनी शैली के किसी एक चित्र पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर: दक्खिनी शैली का एक प्रसिद्ध चित्र "हजरत निजामुद्दीन औलिया और अमीर खुसरो" है। यह चित्र 18वीं शताब्दी का है और हैदराबाद शैली में बना है। इसमें सूफी संत निजामुद्दीन औलिया और उनके शिष्य अमीर खुसरो को दर्शाया गया है। चित्र की विशेषताएँ: गहरे लाल और सुनहरे रंगों का प्रयोग, चेहरों पर भावपूर्ण अभिव्यक्ति, पृष्ठभूमि में वास्तुकला का सुंदर चित्रण, और फारसी शैली का प्रभाव। यह चित्र दक्खिनी शैली के धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक समन्वय को दर्शाता है।

प्रश्न 6

"कबीर और तेरा" चित्र का वर्णन कीजिए।

उत्तर: "कबीर और तेरा" चित्र प्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस द्वारा बनाया गया है। यह चित्र संत कबीर और उनके शिष्य तेरा (तेरा नामक एक भक्त) को दर्शाता है। चित्र में कबीर जी एक पेड़ के नीचे बैठे हैं और तेरा उनके सामने हाथ जोड़कर खड़ा है। चित्र की विशेषताएँ: सादगी और गहराई, भारतीय लोक कला का प्रभाव, कोमल रेखाएँ, और मटमैले रंगों का प्रयोग। यह चित्र कबीर के आध्यात्मिक संदेश और गुरु-शिष्य परंपरा को दर्शाता है। नंदलाल बोस ने इस चित्र में बंगाल शैली की तकनीक का उपयोग किया है।

प्रश्न 7

किशनगढ़ शैली का कौन सा चित्र विश्व प्रसिद्ध है?

उत्तर: किशनगढ़ शैली का विश्व प्रसिद्ध चित्र "बनी-ठनी" (या "नागरदास की नायिका") है। यह चित्र 18वीं शताब्दी में किशनगढ़ के शासक राजा सावंत सिंह (नागरदास) के शासनकाल में बना था। इसमें एक सुंदर नायिका को दर्शाया गया है, जो श्रृंगार कर रही है। चित्र की विशेषताएँ: नायिका के चेहरे पर अद्वितीय सौंदर्य, कोमल रेखाएँ, हल्के रंगों का प्रयोग, और भाव-भंगिमाओं का सुंदर चित्रण। यह चित्र भारतीय चित्रकला की उत्कृष्ट कृति माना जाता है।

प्रश्न 8

"रावण और वेर" चित्र किस चित्रकार ने बनाया था?

उत्तर: "रावण और वेर" चित्र प्रसिद्ध चित्रकार राजा रवि वर्मा ने बनाया था। यह चित्र रामायण के एक दृश्य को दर्शाता है, जिसमें रावण और वेर (एक राक्षस) के बीच संवाद दिखाया गया है। राजा रवि वर्मा ने इस चित्र में अपनी यथार्थवादी शैली का प्रयोग किया है, जिसमें पौराणिक पात्रों को सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया है। चित्र में गहरे रंगों और प्रकाश-छाया का प्रभावी उपयोग देखने को मिलता है।

खण्ड – स (लघु उत्तरीय प्रश्न)

  1. अमृता शेर गिल के किसी एक चित्र का नाम लिखिए।

    उत्तर: अमृता शेर गिल के प्रसिद्ध चित्रों में से एक है – "तीन कन्याएँ" (Three Girls)। अन्य चित्र: "ब्राइड्स टॉयलेट", "हंगर", "विलेज सीन" आदि।
  2. “मुर्गों की लड़ाई” चित्र किस चित्रकार ने चित्रित किया था?

    उत्तर: “मुर्गों की लड़ाई” चित्र प्रसिद्ध चित्रकार एम. एफ. हुसैन (M. F. Husain) ने चित्रित किया था।
  3. “मिल एवं” मूर्तिशिल्प के निर्माता का नाम लिखिए।

    उत्तर: “मिल एवं” (Mill & Eve) मूर्तिशिल्प के निर्माता रामकिंकर बैज (Ramkinkar Baij) हैं।
  4. “यह बोझ नहीं मेरा भाई है” किसका मूर्तिशिल्प है?

    उत्तर: “यह बोझ नहीं मेरा भाई है” मूर्तिशिल्प सोमनाथ होर (Somnath Hore) द्वारा निर्मित है।

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