RBSE Class 12th 2019 Hindi Sahitya-SS-21-2019 Previous Year Papers
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2019 |
| Subject | Hindi Sahitya-SS-21-2019 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2019 Hindi Sahitya-SS-21-2019
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Rajasthan Board Class 12th Hindi Sahitya-SS-21-2019 2019 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2019
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2019
हिन्दी साहित्य
समय : 3¼ घण्टे पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिन प्रश्नों में आंतरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
- उत्तर यथासम्भव निर्धारित शब्द-सीमा में ही सुपाठ्य लिखें।
नामांक (Roll No.) : _______________
प्रश्न पत्र कोड : S S-2l-Hindi Sah.
प्रश्नों की संख्या : 26 मुद्रित पृष्ठ : 7
SS-2—Hindi Sah. [ Turn Over ]
खण्ड - 'अ'
-
छायावाद की प्रमुख विशेषताओं एवं कवियों का उल्लेख कीजिए।
(उत्तर सीमा 80 शब्द)उत्तर: छायावाद हिंदी साहित्य का एक प्रमुख काव्य-आंदोलन है (लगभग 1918-1936 ई.)। इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं: प्रकृति-चित्रण, व्यक्तिवादी अनुभूति, रहस्यवाद, कल्पना-प्रधानता, प्रेम और सौंदर्य की अभिव्यक्ति, तथा भाषा में लाक्षणिकता और संगीतात्मकता। प्रमुख कवि: जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा।
-
आधुनिक काल (अज्ञात युग) के गद्य साहित्य की समीक्षा लिखिए।
(उत्तर सीमा 80 शब्द)उत्तर: आधुनिक काल (द्विवेदी युग के बाद) में गद्य साहित्य का व्यापक विकास हुआ। निबंध, कहानी, उपन्यास, नाटक, आलोचना आदि विधाओं में सशक्त रचनाएँ हुईं। प्रमुख लेखकों में प्रेमचंद (कहानी-उपन्यास), हजारीप्रसाद द्विवेदी (निबंध), रामचंद्र शुक्ल (आलोचना) आदि शामिल हैं। इस युग में यथार्थवाद, सामाजिक चेतना और मनोवैज्ञानिकता का समावेश हुआ।
-
रेखाचित्र और संस्मरण विधा की परिभाषा देते हुए अंतर स्पष्ट कीजिए।
(उत्तर सीमा 80 शब्द)उत्तर: रेखाचित्र किसी व्यक्ति, स्थान या वस्तु का सजीव, संक्षिप्त और कलात्मक चित्रण है, जिसमें लेखक की कल्पना और निरीक्षण प्रमुख होता है। संस्मरण लेखक के स्वयं के अनुभवों और स्मृतियों पर आधारित आत्मपरक रचना है। अंतर: रेखाचित्र में वस्तुनिष्ठता और कल्पना अधिक होती है, जबकि संस्मरण में व्यक्तिनिष्ठता और स्मृति प्रधान होती है। रेखाचित्र में लेखक स्वयं गौण होता है, संस्मरण में लेखक केंद्र में होता है।
-
आधुनिक हिंदी नाटक परंपरा पर टिप्पणी लिखिए।
(उत्तर सीमा 80 शब्द)उत्तर: आधुनिक हिंदी नाटक की शुरुआत भारतेंदु हरिश्चंद्र से मानी जाती है। प्रसाद, रामकुमार वर्मा, उदयशंकर भट्ट, मोहन राकेश आदि ने इसे समृद्ध किया। प्रारंभ में ऐतिहासिक और पौराणिक विषय प्रमुख थे, बाद में सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और प्रयोगात्मक नाटकों का विकास हुआ। आधुनिक नाटक में यथार्थवाद, प्रतीकवाद और अस्तित्ववादी चेतना देखने को मिलती है।
खण्ड - 'ब'
-
ओज गुण की परिभाषा लिखिए।
(उत्तर सीमा 80 शब्द)उत्तर: ओज गुण काव्य का वह गुण है जिसमें रचना में वीरता, उत्साह, संघर्ष या शक्ति का भाव प्रमुख होता है। इसमें कठोर शब्दों, संयुक्ताक्षरों और ओजस्वी भाषा का प्रयोग होता है। इस गुण से काव्य में गतिशीलता और प्रभावोत्पादकता आती है। उदाहरण: "वीर रस" के काव्य में ओज गुण पाया जाता है।
-
काव्य दोष किसे कहते हैं?
(उत्तर सीमा 80 शब्द)उत्तर: काव्य दोष वे तत्व हैं जो काव्य के सौंदर्य या अर्थ-बोध में बाधा उत्पन्न करते हैं। आचार्य मम्मट के अनुसार, "जो रस-प्रतीति में विघ्न डालता है, वही दोष है।" दोष मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं: पद-दोष (शब्द संबंधी), वाक्य-दोष (वाक्य संबंधी) और रस-दोष (रस संबंधी)। उदाहरण: अप्रयुक्त शब्द, अर्थ-अनुचितता, रस-भंग आदि।
7) गीतिका की परिभाषा उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। [3]
(उत्तर सीमा 50 शब्द)
गीतिका एक मात्रिक छंद है जिसमें 14 वर्ण होते हैं। इसके प्रत्येक चरण में 14 वर्ण होते हैं और यह गेय होता है। उदाहरण: "मन मोह लियो मोहन ने, बंसी बजाई।"
8) द्रुतविलम्बित और वंशस्थ छंद की परिभाषा देते हुए अंतर स्पष्ट कीजिए। [3]
(उत्तर सीमा 50 शब्द)
द्रुतविलम्बित छंद में 12 वर्ण होते हैं और यह तेज गति से पढ़ा जाता है। वंशस्थ छंद में 12 वर्ण होते हैं लेकिन इसकी गति धीमी होती है। अंतर: द्रुतविलम्बित में लघु-गुरु का क्रम भिन्न होता है, जबकि वंशस्थ में नियमित लय होती है।
9) दृष्टांत अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए। [4]
(उत्तर सीमा 60 शब्द)
दृष्टांत अलंकार में किसी बात को स्पष्ट करने के लिए प्रसिद्ध उदाहरण दिया जाता है। उदाहरण: "जैसे सूर्य उदय होने पर अंधकार मिट जाता है, वैसे ही ज्ञान होने पर अज्ञान दूर होता है।"
0) समासोक्ति एवं अन्योक्ति अलंकार का उदाहरण सहित अंतर स्पष्ट कीजिए। [4]
(उत्तर सीमा 80 शब्द)
समासोक्ति में एक वस्तु का वर्णन करते हुए दूसरी वस्तु का बोध होता है, जैसे "चंद्रमा मुख" (चंद्रमा के समान मुख)। अन्योक्ति में किसी अन्य वस्तु के माध्यम से मुख्य विषय का संकेत किया जाता है, जैसे "बादल बरस रहा है" (दुखी व्यक्ति के आंसू)। अंतर: समासोक्ति में सादृश्य स्पष्ट होता है, अन्योक्ति में परोक्ष रूप से।
खण्ड - “a
l) निम्नलिखित गद्यांश में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या अधिकतम 80 शब्दों में कीजिए। [3]
गद्यांश 1: अब मुझे मालूम हुआ कि कल गया ने मेरे साथ खेला नहीं, केवल खेलने का बहाना किया। उसने मुझे दया का पात्र समझा। मैंने धाँधली की, बेईमानी की, पर उसे जरा क्रोध न आया। इसीलिए की वह खेल न रहा था, मुझे खेला रहा था, मेरा मन रख रहा था। वह मुझे पदाकर मेरा कचूमर नहीं निकालना चाहता था। मैं अब अफसर हूँ। यह अफसरी मेरे और उसके बीच में दीवार बन गई है। मैं अब उसका लिहाज पा सकता हूँ, अदब पा सकता हूँ, साहचर्य नहीं पा सकता।
सप्रसंग व्याख्या: प्रस्तुत गद्यांश में लेखक अपने मित्र गया के साथ खेल के अनुभव को याद करता है। उसे पता चलता है कि गया ने उसके साथ वास्तविक खेल नहीं खेला, बल्कि उसकी अफसरी के कारण उसे दया का पात्र समझा। लेखक को लगता है कि अफसरी ने उनके बीच दूरी पैदा कर दी है, जिससे वह अब साहचर्य नहीं पा सकता।
अथवा
गद्यांश 2: हमारी जिस संस्कृति का वर्णन इतिहास में मिलता है, वह कहीं से लूटकर तो नहीं लाए थे। सब कुछ अपने देश में उत्पन्न किया था। वह भूमि वे संसाधन आज भी हमारे पास हैं, जिनके बल पर हम फिर उसी संस्कृति को अर्जित कर सकते हैं। केवल संसाधनों के उचित दोहन व अपनी आवश्यकता के अनुसार उपयोग करने की आवश्यकता है। जैसे ही हम आवश्यक संतुलन बना लेंगे, हम अपना पुराना वैभव फिर से प्राप्त कर लेंगे।
सप्रसंग व्याख्या: प्रस्तुत गद्यांश में लेखक भारतीय संस्कृति की महत्ता पर प्रकाश डालता है। वह कहता है कि हमारी संस्कृति स्वदेशी है, न कि कहीं से लूटी गई। आज भी हमारे पास वही संसाधन हैं जिनसे हम पुनः वैभव प्राप्त कर सकते हैं, बशर्ते हम उनका उचित उपयोग करें और संतुलन बनाए रखें।
12. निम्नलिखित पद्यांशों में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या अधिकतम 80 शब्दों में कीजिए।
पहला पद्यांश
चिंता तो हरि की कीजै, और न कीजै कोय।
जे कछु चितवै राम बिन, सब काल के पास।
नैनां अंतरि आब तू, नैन झाँपि तोहि आस।
ना हौ तोहि देखन कूँ, ना तुझ देखन बास।
सप्रसंग व्याख्या: प्रस्तुत पद्यांश तुलसीदास जी द्वारा रचित है। इसमें भक्त को उपदेश दिया गया है कि मनुष्य को केवल हरि (भगवान) की चिंता करनी चाहिए, अन्य किसी की नहीं। जो कुछ भी राम के बिना सोचा जाता है, वह सब काल के वश में है। कवि कहते हैं कि हे नयन! तू अंदर आ जा, अपने को ढाँप ले, क्योंकि न तो मैं तुझे देखने के लिए हूँ और न तू मुझे देखने के लिए। यहाँ भगवान के प्रति एकनिष्ठ भक्ति का संदेश है।
अथवा
दूसरा पद्यांश
आह! इस खेवा की ! -
कौन थामता है पतवार ऐसे अंधड़ में,
अन्धकार-पारावार गहन नियति-सा
उमड़ रहा है, ज्योति-रेखाहीन-क्षुब्ध हो
दिया ले चला है -
काल-धीवर अनन्त में
साँस-सफरी-सी अटकी है, किसकी आशा में ?
सप्रसंग व्याख्या: प्रस्तुत पद्यांश में जीवन की नश्वरता और अनिश्चितता को दर्शाया गया है। कवि कहते हैं कि इस जीवन रूपी नाव का पतवार अंधड़ में कौन थाम सकता है? चारों ओर अंधकार का सागर उमड़ रहा है, जो नियति के समान गहन है। काल रूपी मछुआरा जीवन को अनंत में लिए जा रहा है, और साँस रूपी मछली किसी आशा में अटकी हुई है। यह जीवन की क्षणभंगुरता का मार्मिक चित्रण है।
भक्ति आंदोलन में तुलसी के योगदान पर अपने मौलिक विचार लिखिए। (उत्तर सीमा 80 शब्द)
तुलसीदास ने भक्ति आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाया। उन्होंने 'रामचरितमानस' जैसे ग्रंथों के माध्यम से रामभक्ति को सरल भाषा में प्रस्तुत किया। वे निर्गुण और सगुण भक्ति के समन्वयक थे। उन्होंने जाति-पाँति से ऊपर उठकर सभी वर्गों को भक्ति का अधिकार दिया। उनकी रचनाओं में लोककल्याण, नैतिकता और समाज सुधार का संदेश है। तुलसी ने भक्ति को व्यावहारिक जीवन से जोड़ा और इसे जन-आंदोलन का रूप दिया।
अथवा
“सेव और ईंट” कहानी अधर्म पर धर्म की विजय है। कथन पर समीक्षात्मक दृष्टि से विवेचन कीजिए।
प्रस्तुत कथन सत्य है कि “सेव और ईंट” कहानी अधर्म पर धर्म की विजय को दर्शाती है। कहानी में सेव (सेवक) और ईंट (ईंट) के माध्यम से यह दिखाया गया है कि सत्य और धर्म की शक्ति असत्य पर हमेशा भारी रहती है। कहानी का नायक अपने धर्म और कर्तव्य पर अडिग रहता है, चाहे उसे कितनी भी कठिनाइयों का सामना करना पड़े। अंत में उसकी धार्मिकता और ईमानदारी की जीत होती है, जो अधर्म का नाश करती है। यह कहानी नैतिक मूल्यों की स्थापना करती है और पाठकों को सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
प्रश्न 4: रहीम के दोहों की भाषागत विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
(उत्तर सीमा 80 शब्द)
रहीम के दोहों की भाषा सरल, सहज और ब्रजभाषा पर आधारित है। उनमें मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग प्रचुर मात्रा में मिलता है, जो भाषा को प्रभावशाली बनाता है। भाषा में अनुप्रास, उपमा और रूपक जैसे अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है। रहीम ने संस्कृतनिष्ठ शब्दों के स्थान पर तत्सम और तद्भव शब्दों का प्रयोग किया है, जिससे भाषा सर्वसुलभ हो गई है। उनकी भाषा में गागर में सागर भरने की क्षमता है, अर्थात् कम शब्दों में गहन अर्थ व्यक्त करना उनकी विशेषता है।
प्रश्न 4 (अथवा): 'यशोधरा' पठित काव्यांश के आधार पर यशोधरा की मनोस्थिति का चित्रण कीजिए।
(उत्तर सीमा 80 शब्द)
यशोधरा की मनोस्थिति अत्यंत दुःखद और संघर्षपूर्ण है। वह एक ओर पति के वैराग्य से व्यथित हैं, तो दूसरी ओर उनके महान कार्य को समझती भी हैं। उनके मन में गहरा आघात, अकेलापन और त्याग की पीड़ा है। वह अपने पति के प्रति प्रेम और उनके मार्ग के प्रति समर्पण के बीच झूलती रहती हैं। काव्यांश में उनकी आंतरिक व्यथा, संशय और अंततः स्वीकारोक्ति का मार्मिक चित्रण मिलता है।
प्रश्न 5: परसाई जी के अनुसार प्रयाग और इलाहबाद शब्दों के प्रयोग में क्या अंतर है?
(उत्तर सीमा 60 शब्द)
परसाई जी के अनुसार, 'प्रयाग' शब्द का प्रयोग धार्मिक और पौराणिक संदर्भ में होता है, जो तीर्थ और आध्यात्मिकता से जुड़ा है। वहीं 'इलाहबाद' शब्द मुगलकालीन और आधुनिक प्रशासनिक नाम है, जो ऐतिहासिक और राजनीतिक पहचान को दर्शाता है। दोनों शब्द एक ही स्थान के लिए प्रयुक्त होते हैं, लेकिन उनके सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भ भिन्न हैं।
प्रश्न 6: “अपनी स्त्री का हुलिया लिखवाकर पकड़ मँगाना नीच का काम है।' अलोपी ने ऐसा क्यों कहा?
(उत्तर सीमा 60 शब्द)
अलोपी ने यह कथन इसलिए कहा क्योंकि वह एक सीधा-सादा और ईमानदार व्यक्ति था। उसकी दृष्टि में पत्नी के विरुद्ध पुलिस में शिकायत करना और उसे पकड़वाना अत्यंत नीचता और कायरता का काम था। वह पारिवारिक मामलों को आपसी समझ से सुलझाने में विश्वास रखता था, न कि कानूनी कार्रवाई में। यह उसकी सादगी और नैतिकता को दर्शाता है।
प्रश्न 7: “भोर तें आवत कानन-ओर निहारति बावरी आजु न केरे' पंक्ति का मंतव्य स्पष्ट कीजिए।
(उत्तर सीमा 60 शब्द)
इस पंक्ति में एक बावरी (पागल) स्त्री की व्यथा का चित्रण है। वह प्रातःकाल से ही वन की ओर देखती रहती है कि कहीं उसका प्रियतम (केरे) न आ रहा हो। 'आजु न केरे' का अर्थ है कि आज भी वह नहीं आया। यह पंक्ति विरहिणी नायिका की बेचैनी, प्रतीक्षा और निराशा को व्यक्त करती है।
प्रश्न 8: 'किरण-धेनुएँ' कविता में चित्रित प्रकृति सौंदर्य को अपने शब्दों में लिखिए।
(उत्तर सीमा 60 शब्द)
'किरण-धेनुएँ' कविता में प्रकृति का अत्यंत सुंदर और कल्पनाशील चित्रण है। सूर्य की किरणों को 'धेनुएँ' (गायें) कहा गया है, जो आकाश में विचरती हैं। प्रातःकाल का सौंदर्य, ओस की बूँदें, फूलों की खुशबू और पक्षियों का कलरव सब कुछ मिलकर एक मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करते हैं। कवि ने प्रकृति के इस रूप को अलौकिक और दिव्य बताया है।
खण्ड - a
9) कवि अथवा लेखक बाबू गुलाबराय के व्यक्तित्व और कृतित्व पर टिप्पणी लिखिए। [2]
(उत्तर सीमा 40 शब्द)
बाबू गुलाबराय हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध निबंधकार, आलोचक एवं संपादक थे। उनका व्यक्तित्व सरल, गंभीर और विचारशील था। उनकी प्रमुख कृतियाँ 'मेरी असफलताएँ', 'जीवन की सच्चाई', 'हिंदी साहित्य का इतिहास' आदि हैं। उन्होंने साहित्य को जीवन से जोड़ने का कार्य किया।
20) अंततः पाजेब का पता कैसे चलता है? [2]
(उत्तर सीमा 40 शब्द)
पाजेब का पता तब चलता है जब एक साधु उसे बेचने के लिए बाजार में लाता है। वहाँ एक व्यक्ति उसे पहचान लेता है और पुलिस को सूचित करता है। इस प्रकार पाजेब बरामद हो जाती है और चोर पकड़ा जाता है।
2) मंदोदरी राम और रावण के मध्य क्या अंतर बताती है? [2]
(उत्तर सीमा 40 शब्द)
मंदोदरी राम और रावण के मध्य यह अंतर बताती है कि राम धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर चलते हैं, जबकि रावण अहंकार, अधर्म और अन्याय का प्रतीक है। राम में विनम्रता है, रावण में अभिमान।
22) भारत पुण्यभूमि कहलाने की अधिकारी है। क्यों? स्पष्ट कीजिए। [4]
(उत्तर सीमा 80 शब्द)
भारत पुण्यभूमि कहलाने का अधिकारी है क्योंकि:
- यहाँ अनेक महापुरुषों, ऋषियों-मुनियों और अवतारों ने जन्म लिया।
- यहाँ गंगा, यमुना, सरस्वती जैसी पवित्र नदियाँ बहती हैं।
- यहाँ सत्य, अहिंसा, धर्म और त्याग की परंपरा रही है।
- यह भूमि तपस्या, योग और ज्ञान की जननी है।
- यहाँ विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों ने समन्वय स्थापित किया।
अथवा
सुभद्रा जी की चारित्रिक विशेषताओं का वर्णन कीजिए। [4]
(उत्तर सीमा 80 शब्द)
सुभद्रा जी की प्रमुख चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- साहसी और निडर: वे कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोतीं।
- त्यागमयी: वे परिवार और समाज के लिए त्याग करने को तत्पर रहती हैं।
- धार्मिक प्रवृत्ति: उनमें ईश्वर के प्रति गहरी आस्था है।
- कर्तव्यनिष्ठ: वे अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा से करती हैं।
- स्नेहमयी: वे सबसे प्रेम और स्नेह का व्यवहार करती हैं।
23) "गेहूँ और गुलाब' अध्याय में राक्षसता से बचने का क्या उपाय बताया है? [3]
(उत्तर सीमा 60 शब्द)
"गेहूँ और गुलाब" अध्याय में राक्षसता से बचने का उपाय यह बताया गया है कि मनुष्य को अपने अंदर मानवीय मूल्यों को विकसित करना चाहिए। प्रेम, करुणा, सहानुभूति और त्याग जैसे गुणों को अपनाकर ही राक्षसी प्रवृत्तियों से बचा जा सकता है। साथ ही, आत्मचिंतन और आत्मसंयम भी आवश्यक है।
प्रश्न 24
बोस ने क्रेस्कोग्राफ के माध्यम से क्या सिद्ध किया? [3]
बोस ने क्रेस्कोग्राफ नामक यंत्र के माध्यम से यह सिद्ध किया कि पौधों में भी जीवन होता है और वे स्पर्श, प्रकाश, ताप आदि के प्रति संवेदनशील होते हैं। उन्होंने दिखाया कि पौधे भी मनुष्यों की तरह उत्तेजनाओं पर प्रतिक्रिया करते हैं और उनमें स्पंदन होता है।
प्रश्न 25
'एम.आर. का तारा' एकांकी के आधार पर बताइये कि देश कवि से क्या बलिदान माँग रहा था? [3]
'एम.आर. का तारा' एकांकी में देश कवि से यह बलिदान माँग रहा था कि वह अपनी कला और प्रतिभा का उपयोग देश की स्वतंत्रता और जनजागरण के लिए करे। कवि को अपने व्यक्तिगत सुख-दुख से ऊपर उठकर देश की सेवा में अपनी कविताओं और लेखन के माध्यम से योगदान देना था।
प्रश्न 26
सुभाष को साधु जीवन से घृणा क्यों हो गई? [3]
सुभाष को साधु जीवन से घृणा इसलिए हो गई क्योंकि उन्होंने देखा कि साधु लोग समाज की समस्याओं से मुँह मोड़कर केवल अपने मोक्ष की चिंता करते हैं। वे देश की दयनीय स्थिति और गरीबी के प्रति उदासीन रहते हैं। सुभाष का मानना था कि सच्चा धर्म समाज सेवा और देशभक्ति में है, न कि संन्यास में।