RBSE Class 12th 2019 Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019 Previous Year Papers

You opened the RBSE Class 12th 2019 Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019 Previous Year Papers page — a focused place to read the real previous year question paper for that subject and year. RBSE Solution keeps exam-year sets together so you can practise the same cycle your seniors faced.

Previous year papers reward patience: read instructions, note mark distribution, then attempt questions before peeking at solutions elsewhere on the site. This URL always loads the same free previous year papers content for Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019 (2019).

Use the details table to confirm class and year, then scroll to the paper images or PDF below. More subjects from 2019 are linked later on this page.

Paper details

Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.

Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2019
Subject Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 12th, year 2019, and subject Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019 before studying.

RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.

Turning 2019 papers into insight

One Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019 paper reveals style; several from the same year reveal pattern. After this page, open sibling subjects listed below to see whether marks cluster in certain units.

Keep rough work dated in your notebook. Examiners in Class 12th expect clear numbering even in practice sessions.

RBSE Class 12th 2019 Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019

Scroll through the Previous Year Papers pages for Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019 (2019).

RBSE Class 12th 2019 Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019 Previous Year Papers 0
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2019 Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019 Previous Year Papers 1
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2019 Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019 Previous Year Papers 2
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2019 Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019 Previous Year Papers 3
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2019 Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019 Previous Year Papers 4
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2019 Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019 Previous Year Papers 5
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2019 Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019 Previous Year Papers 6
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2019 Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019 Previous Year Papers 7
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2019 Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019 Previous Year Papers 8
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2019 Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019 Previous Year Papers 9
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2019 Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019 Previous Year Papers 10
https://rbsesolution.com

Rajasthan Board Class 12th Music Vocal Or Instrumental Or Dance-SS-16,63,64,65,66,67,68,69,670,71-2019 2019 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2019

SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2019

संगीत - स्वर अथवा वाद्य अथवा नृत्य

(MUSIC - VOCAL OR INSTRUMENTAL OR DANCE)

समय : 3 घण्टे 15 मिनट     पूर्णांक : 24


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक (Roll No.) लिखें।
    Candidate must first write his/her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.

प्रश्न पत्र कोड : SS-6,63,64,65,66,67,68,69,70,71
विषय : संगीत (स्वर, वाद्य एवं नृत्य)
प्रश्नों की संख्या : 9 × 4 = 36
मुद्रित पृष्ठ : 11

(पृष्ठ 1 का अंत)

भाग - अ (Part - A)

संगीत (गायन) Music - Vocal

अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न (शब्द सीमा 20 शब्द) प्रत्येक प्रश्न 2 अंक

  1. प्रश्न 1: अलंकार को परिभाषित कीजिए।

    उत्तर: अलंकार संगीत में स्वरों के एक निश्चित क्रम में आरोह-अवरोह में प्रयोग को कहते हैं, जो राग के स्वरूप को स्पष्ट करता है।

  2. प्रश्न 2: वर्ण कितने प्रकार के होते हैं? नाम लिखिए।

    उत्तर: वर्ण चार प्रकार के होते हैं: (1) स्थायी वर्ण, (2) आरोही वर्ण, (3) अवरोही वर्ण, (4) संचारी वर्ण।

रिक्त स्थान की पूर्ति करें। Fill in the blanks. (2×½=1)

  1. प्रश्न 3: नाट्यशास्त्र में कुल .......... श्रुतियों का उल्लेख मिलता है।

    उत्तर: 22

    नाट्यशास्त्र में 22 श्रुतियों का उल्लेख है।

नोट: गायन विषय लेने वाले छात्र केवल भाग - अ के सभी प्रश्नों के ही उत्तर लिखें। सितार, सरोद, वायलिन, दिलरूबा अथवा इसराज, बांसुरी व गिटार विषय के परीक्षार्थी केवल भाग - ब के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें तथा तबला व पखावज विषय के परीक्षार्थी केवल भाग - स के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें तथा कथक नृत्य विषय के परीक्षार्थी केवल भाग - द के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें।

4) संगीत रत्नाकर में कुल ......... रागों का वर्णन दिया गया हैं।

A total of Ragas have been described in Sangeet Ratnakar.

(5-8) राग पहचानिए। [4×½=2]

(5-8) Identify the Raga -

  1. त्िसा,गमप,गमग — Ni Sa, Ga Ma Pa, Ga Ma Ga
  2. निसारे, मरे, पमरे, सा — Ni Sa Re, Ma Re, Pa Ma Re, Sa
  3. गम धनि, धम, गसा — Ga Ma Dha Ni, Dha Ma, Ga Sa
  4. मगसा, रे सा, धर तिसा — Ma Ga Sa, Re Sa, Dha Ni Sa

लघुत्तरात्मक प्रश्न - I (शब्द सीमा 20-50 शब्द)

9) समय सिध्दांत में संधि प्रकाश से आप क्या समझते हैं?

What you understand by 'Sandhi Prakash Category' in Time - Theory?

उत्तर: समय सिद्धांत में संधि प्रकाश का अर्थ है दिन और रात के संधिकाल (गोधूलि बेला) में गाए जाने वाले राग। इस समय प्रकृति में एक विशेष वातावरण होता है जो रागों के भाव को प्रभावित करता है। संधि प्रकाश रागों में कोमल स्वरों का प्रयोग अधिक होता है, जैसे भैरव, मारवा, पूरिया आदि।

10) ग्वालियर तथा किराना घराने के दो-दो कलाकारों के नाम लिखिए।

Write the names of two artists of Gwalior and Kirana Gharana.

उत्तर: ग्वालियर घराना — उस्ताद हद्दू खाँ और उस्ताद हस्सू खाँ (या पं. विष्णु दिगम्बर पलुस्कर, पं. ओंकारनाथ ठाकुर)। किराना घराना — उस्ताद अब्दुल करीम खाँ और उस्ताद अब्दुल वहीद खाँ (या पं. सवाई गंधर्व, पं. भीमसेन जोशी)।

11) जयपुर अथवा ग्वालियर घराने की मुख्य विशेषताएँ लिखिये।

Write the chief characteristics of Jaipur or Gwalior Gharana.

उत्तर: ग्वालियर घराने की मुख्य विशेषताएँ: (1) स्वरों की स्पष्टता और सीधी प्रस्तुति, (2) आलाप में मध्य लय का प्रयोग, (3) बोल-बांट और तानों का सुंदर संयोजन, (4) राग के मूल स्वरूप पर बल। जयपुर घराने की विशेषताएँ: (1) तीव्र गति की तानें, (2) बोल-तान का प्रचुर प्रयोग, (3) रागों में दुर्लभ स्वर संगतियाँ, (4) लयकारी में निपुणता।

12) ताल-चौताल का ठेका लिखिये।

Write the 'Theka' of tal Chautal.

उत्तर: चौताल का ठेका (12 मात्राएँ, 6 विभाग):

धा | धा | धिं | ता | किट | धिं | ता | तिं | किट | ता | धा | धा |

विभाग: (धा धा) (धिं ता) (किट धिं) (ता तिं) (किट ता) (धा धा)

ताली: 1, 5, 9, 11 (खाली: 7वीं मात्रा)

SS - 6,63,64,65,66,67,68,69,70,71 - Music (Vocal & Instrumental & Dance)

प्रश्न 3: पं. कुमार गंधर्व द्वारा रचित 4 रागों के नाम लिखिए।

Write the names of any 4 Ragas created by Pt. Kumar Gandharva.

उत्तर: पंडित कुमार गंधर्व द्वारा रचित चार प्रमुख रागों के नाम निम्नलिखित हैं:

  1. राग मधुवंती
  2. राग सावनी कल्याण
  3. राग भीमपलासी
  4. राग गौरी मंजरी

(नोट: ये राग उनकी रचनात्मकता के उदाहरण हैं।)

प्रश्न 4: श्री मल्लक्ष्य संगीतम् ग्रंथ का संक्षिप्त परिचय लिखिये। [2]

Write the brief introduction of 'Shri Mallakshya Sangeetam'.

उत्तर: 'श्री मल्लक्ष्य संगीतम्' एक प्राचीन संगीत ग्रंथ है जिसकी रचना संगीतज्ञ श्री मल्लक्ष्य ने की थी। यह ग्रंथ भारतीय शास्त्रीय संगीत के सिद्धांतों, राग-रागिनियों, तालों और गायन-वादन की तकनीकों का विस्तृत वर्णन करता है। इसमें संगीत के दार्शनिक और व्यावहारिक पहलुओं को समझाया गया है। यह ग्रंथ संगीत शिक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।

प्रश्न 5: तानपुरा वाद्य का चित्र बनाकर इसके अंगों के नाम लिखिए। [2]

Make a diagram of Tanpura and write the names of its Parts.

उत्तर: तानपुरा एक चार तार वाला वाद्य है। इसके प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं:

  • तुंबा (Tumba): नीचे का गोलाकार भाग, जो लौकी या लकड़ी का बना होता है।
  • डांडी (Dandi): लंबी गर्दन, जिस पर तार बंधे होते हैं।
  • पेटी (Petti): ऊपरी भाग जहाँ खूंटियाँ लगी होती हैं।
  • खूंटियाँ (Khuntiyan): तारों को कसने या ढीला करने के लिए।
  • तार (Taar): चार तार (पंचम, षडज, मध्यम, षडज)।
  • जवारी (Jawari): पुल के पास का भाग जो ध्वनि को गूंज देता है।
  • मेड़ (Medh): तारों को सहारा देने वाला पुल।

(चित्र में तानपुरा का आकार दर्शाया जा सकता है।)

प्रश्न 6: राग बिहाग अथवा भैरवी का परिचय, आरोह-अवरोह, पकड़ सहित लिखिए। [2]

Write the introduction of Rag Bihag or Bhairvi with Aroh, Avroh and Pakad.

उत्तर (राग बिहाग):

  • परिचय: राग बिहाग एक लोकप्रिय राग है जो रात्रि के दूसरे प्रहर में गाया जाता है। इसका वातावरण श्रृंगार और भक्ति रस से भरा होता है।
  • आरोह: सा ग म प नि सां
  • अवरोह: सां नि ध प म ग रे सा
  • पकड़: ग म प नि ध प म ग रे सा

अथवा (राग भैरवी):

  • परिचय: राग भैरवी एक प्रातःकालीन राग है जो शांत और गंभीर रस प्रदान करता है। इसमें सभी स्वर कोमल और शुद्ध रूप में प्रयोग होते हैं।
  • आरोह: सा रे ग म प ध नि सां
  • अवरोह: सां नि ध प म ग रे सा
  • पकड़: सा रे ग म प ध नि ध प म ग रे सा

प्रश्न 7: हिन्दुस्तानी तथा कर्नाटक संगीत में समानता तथा भिन्नता स्पष्ट कीजिए। [3]

Explain the similarities and differences in Hindustani and Karnatac Music.

उत्तर: हिन्दुस्तानी और कर्नाटक संगीत भारतीय शास्त्रीय संगीत की दो प्रमुख शैलियाँ हैं।

समानताएँ:

  • दोनों का आधार राग और ताल प्रणाली है।
  • दोनों में स्वर (सा, रे, ग, म, प, ध, नि) का प्रयोग होता है।
  • दोनों में गायन, वादन और नृत्य का समावेश है।
  • दोनों का उद्देश्य भाव और रस की अभिव्यक्ति है।

भिन्नताएँ:

  • उत्पत्ति: हिन्दुस्तानी संगीत उत्तर भारत में विकसित हुआ, जबकि कर्नाटक संगीत दक्षिण भारत में।
  • राग प्रणाली: हिन्दुस्तानी में रागों का वर्गीकरण थाट के आधार पर होता है, जबकि कर्नाटक में मेलकर्ता प्रणाली है।
  • गायन शैली: हिन्दुस्तानी में ख्याल, ध्रुपद, ठुमरी आदि शैलियाँ हैं, जबकि कर्नाटक में कृति, वर्णम, रागमालिका आदि।
  • ताल प्रणाली: हिन्दुस्तानी में तालों की संख्या सीमित है (जैसे तीनताल, एकताल), जबकि कर्नाटक में सैकड़ों ताल हैं।
  • वाद्य: हिन्दुस्तानी में सितार, तबला, सरोद प्रमुख हैं, जबकि कर्नाटक में वीणा, मृदंगम, घटम।

प्रश्न 8: अपने पाठ्यक्रम में वर्णित किसी राग का छोटा ख्याल स्वरलिपिबद्ध लिखिए। [3]

Write the notation of any ‘Chota -Khayal' in the Raga mentioned in your syllabus.

उत्तर (राग यमन में छोटा ख्याल):

राग: यमन (कल्याण थाट, रात्रि का प्रथम प्रहर)

ताल: तीनताल (16 मात्राएँ)

स्थायी:

सा रे गा मा पा धा नि सां | सां नि धा पा मा गा रे सा ||

गा मा पा धा नि सां रे सां | नि धा पा मा गा रे सा ||

अंतरा:

सां रे सां नि धा पा मा गा | मा पा धा नि सां रे सां नि ||

धा पा मा गा रे सा नि धा | पा मा गा रे सा ||

(यह एक सरल उदाहरण है। पाठ्यक्रम के अनुसार राग का चयन किया जा सकता है।)

प्रश्न 9: महाराणा कुंभा अथवा उ. अल्लादिया खां का जीवन परिचय तथा संगीत क्षेत्र में योगदान को लिखिए। [3]

Write the life sketch and contribution of Maharana Kumbha or Ut. Alladiya Khan in the field of Music.

उत्तर (महाराणा कुंभा):

महाराणा कुंभा (1433-1468 ई.) मेवाड़ के एक महान शासक और संगीत प्रेमी थे। उन्होंने संगीत के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने 'संगीत राज' नामक एक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की, जिसमें राग, ताल और नृत्य का विस्तृत वर्णन है। वे स्वयं एक कुशल गायक और वादक थे। उन्होंने कई नए रागों की रचना की और संगीत शिक्षा को प्रोत्साहित किया। उनका योगदान भारतीय शास्त्रीय संगीत के विकास में अमूल्य है।

अथवा (उस्ताद अल्लादिया खां):

उस्ताद अल्लादिया खां (1855-1946 ई.) जयपुर-अतरौली घराने के प्रसिद्ध गायक थे। उन्होंने ख्याल गायन को नई ऊँचाइयाँ दीं। वे अपनी गायकी में बड़े ख्याल, छोटे ख्याल और तराने के मिश्रण के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कई शिष्यों को प्रशिक्षित किया, जिनमें मल्लिकार्जुन मंसूर और केसरबाई केरकर प्रमुख हैं। उनका योगदान हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के विकास में महत्वपूर्ण है।

भाग - ब (Part - B)

संगीत (स्वर वाद्य)

(सितार / सरोद / वॉयलिन / दिलरूबा - इसराज / बांसुरी / गिटार)

Music (Melody Instrument)

(Sitar / Sarod / Violin / Dilruba - Israj / Flute / Guitar)

अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न 2 अंक, शब्द सीमा 20 शब्द)

  1. मीड की परिभाषा लिखिये। [8]

    Define Meend.

    उत्तर: मीड एक स्वर से दूसरे स्वर तक बिना किसी अंतराल के सरकते हुए पहुँचने की क्रिया है। इसमें स्वरों को खींचकर गाया या बजाया जाता है।

    Answer: Meend is a technique of gliding from one note to another without any break, creating a smooth transition between notes.

  2. किसी भी राग की पकड़ लिखिये। [8]

    Write Pakad of any Rag.

    उत्तर: राग यमन की पकड़: नि रे गा मा पा मा गा रे सा। यह राग की विशिष्ट स्वर संगति है जो राग की पहचान बताती है।

    Answer: Pakad of Raga Yaman: Ni Re Ga Ma Pa Ma Ga Re Sa. This characteristic phrase identifies the raga.

  3. दक्षिण भारतीय संगीत पद्धति की मुख्य ताले कितनी हैं? [2]

    How many main tals are in South Indian music system?

    उत्तर: दक्षिण भारतीय संगीत पद्धति में 7 मुख्य ताले हैं।

    Answer: There are 7 main tals in the South Indian music system.

  4. संचारी क्या हैं? [A]

    What is Sanchari?

    उत्तर: संचारी राग के विकास का तीसरा चरण है जिसमें राग के स्वरों का विस्तार विभिन्न सप्तकों में किया जाता है।

    Answer: Sanchari is the third stage of raga development where the notes are elaborated across different octaves.

  5. भरत ने एक सप्तक में कितनी श्रुतियाँ मानी है? [A]

    How many shruties are in Saptak according to Bharat?

    उत्तर: भरत मुनि ने एक सप्तक में 22 श्रुतियाँ मानी हैं।

    Answer: According to Bharat Muni, there are 22 shruties in one Saptak.

  6. "श्री मल्लक्ष्य संगीतम्" ग्रन्थ भातखण्डेजी ने किस उपनाम से लिखा है? [2]

    By which nick name Bhatkhandeji has wrote "Shri Mallakshya Sangeetam" granth?

    उत्तर: पंडित भातखण्डेजी ने "श्री मल्लक्ष्य संगीतम्" ग्रन्थ 'विष्णु शर्मा' उपनाम से लिखा है।

    Answer: Pandit Bhatkhandeji wrote "Shri Mallakshya Sangeetam" under the pen name 'Vishnu Sharma'.

SS - 6,63,64,65,66,67,68,69,70,71 - Music (V&I&D) [ann Tames]

प्रश्न (Questions)

अति लघुत्तरात्मक (Very Short Answer) – 1 अंक

  1. किसी एक महिला सुरबहार वादिका का नाम लिखिये।

    Write the name of any one (Lady) Mahila Surbahar Vadika.

    उत्तर: श्रीमती सन्निधि सिंह (Smt. Sannidhi Singh) / श्रीमती अन्नपूर्णा देवी (Smt. Annapurna Devi) – कोई एक नाम।

  2. मोहन वीणा का जनक किसे माना जाता है?

    Who is the creator of Mohan Veena?

    उत्तर: पंडित विश्व मोहन भट्ट (Pt. Vishwa Mohan Bhatt) को मोहन वीणा का जनक माना जाता है।

लघुत्तरात्मक (Short Answer) – 2 अंक (शब्द सीमा 20-50 शब्द)

  1. संधि प्रकाश राग को समझाइये।

    Explain Sandhi Prakash rag.

    उत्तर: संधि प्रकाश राग वे राग हैं जो संधि काल (सूर्योदय या सूर्यास्त के समय) गाए या बजाए जाते हैं। इनमें कोमल रिषभ और कोमल धैवत का प्रयोग होता है। उदाहरण: राग भैरव, राग मारवा, राग पूरिया आदि।

  2. मैहर बाज की दो विशेषताएँ लिखिये।

    Write the two speciality of Maihar Baj.

    उत्तर: मैहर बाज की दो विशेषताएँ: (1) इसमें मीड (Meend) और गमक (Gamak) का विशेष प्रयोग होता है। (2) इसमें तानों की बजाय आलाप और जोड़ पर अधिक बल दिया जाता है।

  3. दिए गए स्वरों से राग पहचानिये।

    Identify rag by given swars.

    (अ) पनिपमपनिसां (PA NI PA MA PA Ni SA)

    (ब) गमप निपगमग (GA MA PA NI PA GA MA GA)

    उत्तर: (अ) राग भैरवी (Rag Bhairavi) – स्वर समूह पनिपमपनिसां राग भैरवी का संकेत है। (ब) राग यमन (Rag Yaman) – स्वर समूह गमप निपगमग राग यमन का संकेत है।

  4. समान मात्रा की दो तालों के नाम लिखिये।

    Write the name of two tal of same matra (beats).

    उत्तर: समान मात्रा की दो तालें: (1) तीन ताल (16 मात्रा) और आड़ा चौताल (16 मात्रा)। (2) झपताल (10 मात्रा) और सूलताल (10 मात्रा)।

  5. “शिव-हरि” नामक जोड़ी ने किन हिन्दी फिल्मों में संगीत दिया है?

    In which Hindi films Music composed by "Shiv - Hari"?

    उत्तर: शिव-हरि (पंडित शिवकुमार शर्मा और पंडित हरिप्रसाद चौरसिया) ने फिल्मों में संगीत दिया: (1) सिलसिला (1981), (2) चाँदनी (1989), (3) लम्हे (1991), (4) डर (1993) आदि।

लघुत्तरात्मक II (Short Answer II) – 2 अंक (शब्द सीमा 20-50 शब्द)

  1. उत्तरी एवं दक्षिण संगीत पद्धति के स्वरों के नाम लिखिये।

    Write the name of swar of North and South music system.

    उत्तर: उत्तरी संगीत पद्धति (हिंदुस्तानी) के स्वर: सा, रे, ग, म, प, ध, नि। दक्षिण संगीत पद्धति (कर्नाटक) के स्वर: सा, रि, ग, म, प, ध, नि। दोनों में मुख्य अंतर रे/रि और ध/ध के उच्चारण में है।

प्रश्न 5: शारंगदेव कृत श्रुति स्वर विभाजन को समझाइये। [2]

शारंगदेव ने अपने ग्रंथ 'संगीत रत्नाकर' में 22 श्रुतियों का विभाजन किया। उनके अनुसार सप्तक में 22 श्रुतियाँ होती हैं, जिनमें से प्रत्येक स्वर में निश्चित संख्या में श्रुतियाँ होती हैं:

  • सा (षड्ज) - 4 श्रुतियाँ
  • रे (ऋषभ) - 3 श्रुतियाँ
  • ग (गांधार) - 2 श्रुतियाँ
  • म (मध्यम) - 4 श्रुतियाँ
  • प (पंचम) - 4 श्रुतियाँ
  • ध (धैवत) - 3 श्रुतियाँ
  • नि (निषाद) - 2 श्रुतियाँ

यह विभाजन श्रुतियों की सूक्ष्म ध्वनि पर आधारित है, जो स्वरों के बीच के अंतर को दर्शाता है।

प्रश्न 6: अपने पाठ्यक्रम में से किसी एक संगीतज्ञ का जीवन परिचय एवं संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान को लिखिये। [1+1=2]

तानसेन (मियाँ तानसेन)

जीवन परिचय: तानसेन का जन्म 1506 ई. में ग्वालियर के पास बेहटा गाँव में हुआ। इनका बचपन का नाम रामतनु था। ये अकबर के दरबार के नवरत्नों में से एक थे। इनके गुरु स्वामी हरिदास थे।

संगीत में योगदान: तानसेन ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को नई ऊँचाई दी। उन्होंने राग दरबारी कान्हड़ा, मियाँ की मल्हार, मियाँ की तोड़ी जैसे कई रागों की रचना की। वे ध्रुपद गायन में निपुण थे और उनकी गायकी ने संगीत को जन-जन तक पहुँचाया।

निबन्धात्मक प्रश्न (प्रत्येक 3 अंक, शब्द सीमा 300-400 शब्द)

प्रश्न 7: आप द्वारा चयनित वाद्य का चित्र सहित वर्णन करो। [2+1=3]

सितार

सितार एक तार वाद्य है जो भारतीय शास्त्रीय संगीत में प्रमुख स्थान रखता है। इसका आकार लौकी जैसा होता है। इसमें मुख्यतः 7 तार होते हैं - 4 मुख्य तार और 3 चिकारी के तार। इसके अलावा 11-13 सहायक तार (तरफदार) होते हैं जो गूंज उत्पन्न करते हैं।

चित्र: [चित्र का वर्णन] सितार का ऊपरी भाग तुंबा (गोलाकार) होता है, बीच में दांडी (लंबी गर्दन) और नीचे छोटा तुंबा। इसमें 20-22 पर्दे (फ्रेट) होते हैं जो धातु के बने होते हैं।

विशेषताएँ: सितार को बैठकर बजाया जाता है, इसमें मिजराब (तार का प्लेक्ट्रम) का उपयोग होता है। यह मुख्यतः ख्याल गायन और वादन में प्रयुक्त होता है।

प्रश्न 8: अपने पाठ्यक्रम की किसी एक राग का पूर्ण परिचय आरोह अवरोह एवं पकड़ सहित लिखिये। [3]

राग यमन

परिचय: राग यमन हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का एक प्रमुख राग है। यह संधिप्रकाश राग है जो रात्रि के प्रथम प्रहर में गाया-बजाया जाता है। इसका वादी स्वर 'ग' और संवादी स्वर 'नि' है।

आरोह: नि रे ग म प ध नि सां

अवरोह: सां नि ध प म ग रे सा

पकड़: नि रे ग म प म ग रे सा

विशेषता: इसमें तीव्र मध्यम (म) का प्रयोग होता है, जो इस राग को मधुर बनाता है। यह राग शांत और गंभीर रस प्रदान करता है।

प्रश्न 9: धमार ताल को दुगुन सहित लिखिये। [4½ + 4½ = 3]

धमार ताल

धमार ताल 14 मात्राओं का ताल है। इसके बोल निम्न हैं:

मात्रा 1234567891011121314
बोल धाधाधातातिटकटगदिगेनधाधाधातातिटकट
ताली/खाली तालीतालीखालीतालीताली

दुगुन (दोगुनी लय): दुगुन में प्रति मात्रा में दो बोल बोले जाते हैं। धमार ताल के दुगुन के बोल:

धाधा धाधा ताता तिटकट गदिगेन धाधा धाधा ताता तिटकट

यह ताल ध्रुपद गायन में प्रयुक्त होता है और इसकी लय गंभीर होती है।

प्रश्न 9 (वैकल्पिक): अपने पाठ्यक्रम में से किसी एक राग में मसीतखानी गत दो तोड़ों सहित लिखिये। [3]

राग यमन में मसीतखानी गत

मसीतखानी गत चार ताल (तेताल) में बजाई जाती है। यह धीमी लय (विलंबित) में होती है।

गत: धा धिं धिं धा | धा धिं धिं धा | धा तिं तिं ता | ता धिं धिं धा ||

पहला तोड़ा: धा धिं धिं धा | धा धिं धिं धा | धा तिं तिं ता | ता धिं धिं धा | धा धिं धिं धा | धा तिं तिं ता | ता धिं धिं धा ||

दूसरा तोड़ा: धा धिं धिं धा | धा धिं धिं धा | धा तिं तिं ता | ता धिं धिं धा | धा धिं धिं धा | धा तिं तिं ता | ता धिं धिं धा | धा धिं धिं धा | धा तिं तिं ता | ता धिं धिं धा ||

यह गत मसीतखान (सेनी घराने के संस्थापक) द्वारा रचित शैली में है, जिसमें मीड़ और गमक का प्रयोग होता है।

भाग - C (Part - C)

संगीत (ताल वाद्य) - तबला/पखावज

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न (½ अंक, शब्द सीमा 20 शब्द)

प्रश्न: रेला कितने प्रकार का होता है? नाम लिखिये। [½]

रेला मुख्यतः 3 प्रकार का होता है:

  1. सीधा रेला
  2. उल्टा रेला
  3. मिला रेला

लघुत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Questions)

2) साधारण एवम् फरमाइशी' किसका प्रकार है?

"Sadharan and farmaishi" is type of which?

उत्तर: साधारण और फरमाइशी 'गीत' के प्रकार हैं। ये दोनों प्रकार के गीत शास्त्रीय संगीत में गाए जाते हैं। साधारण गीत सरल होता है जबकि फरमाइशी गीत में कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करता है।

Answer: Sadharan and Farmaishi are types of 'Geet' (song). These are two types of songs sung in classical music. Sadharan geet is simple while Farmaishi geet showcases the artist's skill.

3) संगीत का प्राण किसे कहते है?

Who is called Pran of Music?

उत्तर: संगीत का प्राण 'लय' को कहा जाता है। लय संगीत की आत्मा है, जो संगीत को गति और जीवन प्रदान करती है। बिना लय के संगीत अधूरा माना जाता है।

Answer: 'Laya' (rhythm) is called the Pran (life) of music. Laya is the soul of music, which gives motion and life to music. Without Laya, music is considered incomplete.

4) किस ताल में चार बार तिरकिट का प्रयोग होता है?

In which tal Trikit is used four times?

उत्तर: 'तिरकिट' का चार बार प्रयोग 'एकताल' में होता है। एकताल में 12 मात्राएँ होती हैं और इसमें चार बार तिरकिट (धि धि ना, धा तिरकिट, तू ना, कत ता) का प्रयोग किया जाता है।

Answer: 'Trikit' is used four times in 'Ektaal'. Ektaal has 12 beats and uses Trikit four times (Dhi Dhi Na, Dha Trikit, Tu Na, Kat Ta).

5) वैदिक कालीन किसी एक वाद्य का नाम लिखो।

Write name of any one instrument of Vaidik Period.

उत्तर: वैदिक कालीन एक प्रमुख वाद्य 'वीणा' है। वीणा का उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है और यह उस समय का एक महत्वपूर्ण तंत्र वाद्य था।

Answer: One major instrument of the Vaidik period is 'Veena'. Veena is mentioned in the Rigveda and was an important string instrument of that time.

6) फरूखाबाद घराने के प्रणेता का नाम बताइये।

Write name of founder of Farukhabad Gharana.

उत्तर: फरूखाबाद घराने के प्रणेता 'उस्ताद हाजी विलायत अली खाँ' हैं। उन्होंने 19वीं शताब्दी में इस घराने की स्थापना की थी।

Answer: The founder of Farukhabad Gharana is 'Ustad Haji Vilayat Ali Khan'. He established this gharana in the 19th century.

7) "ना धि धिन ना" के जादूगर का नाम लिखो।

Write the name of magician of "NA Dhi Dhin NA".

उत्तर: "ना धि धिन ना" के जादूगर 'पंडित किशन महाराज' हैं। वे बनारस घराने के प्रसिद्ध तबला वादक थे और अपनी अद्भुत तबला वादन कला के लिए जाने जाते थे।

Answer: The magician of "Na Dhi Dhin Na" is 'Pandit Kishan Maharaj'. He was a famous tabla player of the Banaras gharana and known for his amazing tabla playing art.

8) पुरूषोत्तमदास कौनसा वाद्य बजाते हैं?

Which instrument is played by Purushottam das?

उत्तर: पुरूषोत्तमदास 'पखावज' वाद्य बजाते हैं। वे एक प्रसिद्ध पखावज वादक हैं।

Answer: Purushottam das plays 'Pakhavaj' instrument. He is a famous Pakhavaj player.

लघुत्तरात्मक प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न 4 अंक, शब्द सीमा 20-50 शब्द)

9) क्रिया को समझाइये।

Explain Kriya.

उत्तर: क्रिया ताल में हाथ से मात्राओं को दर्शाने की क्रिया को कहते हैं। ताल बजाते समय हाथ की ताली और खाली (हाथ हिलाना) के माध्यम से मात्राओं को प्रदर्शित किया जाता है। ताली को 'सशब्द क्रिया' और खाली को 'निःशब्द क्रिया' कहते हैं। क्रिया ताल के विभागों को समझने में सहायक होती है।

Answer: Kriya is the action of showing beats in a tal through hand gestures. While playing a tal, beats are shown through clapping (Sashabd Kriya) and waving (Nishabd Kriya). Kriya helps in understanding the divisions of a tal.

10) रूपक और तीव्र ताल में समानता बताइये।

Explain similarities in Rupak and Tivra tal.

उत्तर: रूपक ताल (7 मात्राएँ) और तीव्र ताल (7 मात्राएँ) दोनों में 7 मात्राएँ होती हैं। दोनों तालों में 3 विभाग होते हैं। रूपक ताल का विभाजन 3+2+2 होता है जबकि तीव्र ताल का विभाजन 3+2+2 होता है। दोनों तालों में पहले विभाग में 3 मात्राएँ और अंतिम दो विभागों में 2-2 मात्राएँ होती हैं।

Answer: Both Rupak tal (7 beats) and Tivra tal (7 beats) have 7 beats. Both have 3 divisions. Rupak tal has division 3+2+2 and Tivra tal also has division 3+2+2. In both, the first division has 3 beats and the last two divisions have 2 beats each.

11) अपने पाठ्यक्रम से चार विभाग वाली किसी भी ताल का ठेका लिखिये।

Write theka of any tal of four divisions from your syllabus.

उत्तर: चार विभाग वाली ताल 'चौताल' का ठेका इस प्रकार है:

चौताल (12 मात्राएँ, 4 विभाग)

धा | धा | धिं | ता || किट | धिं | धिं | ता || तिट | कट | गदि | गेन ||

विभाग: 3+3+3+3

ताली: 1, 5, 9 (पहली, पाँचवीं, नौवीं मात्रा पर ताली)

खाली: 13वीं मात्रा पर (अर्थात पहली मात्रा के बाद)

Answer: The theka of 'Chautal' (a tal with four divisions) is:

Chautal (12 beats, 4 divisions)

Dha | Dha | Dhing | Ta || Kit | Dhing | Dhing | Ta || Tit | Kat | Gadi | Gen ||

Divisions: 3+3+3+3

Clap: 1st, 5th, 9th beat

Khali: 13th beat (i.e., after the first beat)

प्रश्न (Questions)

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

2) चार अवनद्ध वाद्यों के नाम लिखो जिसमें डोरी बंधी होती है।
Write name of four Avnadh instruments which is tightened by rope.

उत्तर: चार अवनद्ध वाद्य जिनमें डोरी बंधी होती है:

  1. तबला (Tabla)
  2. पखावज (Pakhawaj)
  3. मृदंग (Mridangam)
  4. ढोलक (Dholak)

3) पंडित राम सहाय किस घराने से सम्बन्धित हैं?
Pt. Ram Sahay is related to which Gharana?

उत्तर: पंडित राम सहाय बनारस घराने (Benares Gharana) से सम्बन्धित हैं। वे तबला वादन के प्रसिद्ध कलाकार थे।

लघुत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions) – प्रत्येक प्रश्न 2 अंक (शब्द सीमा 50-100 शब्द)

4) त्रिताल में एक चककरदार तिहाई लिखो।
Write one Chakkardar Tihai in Trital.

उत्तर: त्रिताल (16 मात्राएँ) में एक चक्करदार तिहाई इस प्रकार है:

तिहाई: धा तिरकिट धा तिरकिट धा | धा तिरकिट धा तिरकिट धा | धा तिरकिट धा तिरकिट धा ||

यह तिहाई तीन बार दोहराई जाती है और सम (पहली मात्रा) पर समाप्त होती है।

5) पंडित चतुरलाल के सांगीतिक योगदान को स्पष्ट कीजिये।
Explain the musical contribution of Pt. Chaturlal.

उत्तर: पंडित चतुरलाल (1925-1965) एक प्रसिद्ध तबला वादक थे। उन्होंने तबला वादन में नई तकनीकों का विकास किया और तालों की रचना में योगदान दिया। वे बनारस घराने से सम्बन्धित थे और उन्होंने तबले को शास्त्रीय संगीत में एक प्रमुख स्थान दिलाया। उनकी शैली में लयकारी और तिहाइयों का विशेष महत्व था।

6) नाट्यशास्त्र के अनुसार संगीत के वाद्य वर्गीकरण को उदाहरण सहित समझाइये।
Explain classification of instrument of Music according to Natya Shastra with example.

उत्तर: नाट्यशास्त्र के अनुसार वाद्यों का चार वर्गों में वर्गीकरण किया गया है:

  1. तत वाद्य (String instruments): जैसे सितार, वीणा – इनमें तार बंधे होते हैं।
  2. अवनद्ध वाद्य (Percussion instruments): जैसे तबला, पखावज – इनमें चमड़ा मढ़ा होता है।
  3. सुषिर वाद्य (Wind instruments): जैसे बांसुरी, शहनाई – इनमें हवा भरकर बजाया जाता है।
  4. घन वाद्य (Solid instruments): जैसे मंजीरा, घुंघरू – ये ठोस पदार्थों से बने होते हैं।

निबंधात्मक प्रश्न (Essay Type Questions) – प्रत्येक प्रश्न 3 अंक (शब्द सीमा 300-400 शब्द)

7) समान मात्रा की दो तालों की तुलना करते हुये उनमें से किसी भी एक ताल को दुगुन चौगुन सहित लिखिये।
Compare two tals of same beats and write any one of them with dugun and Chaugun.

उत्तर: समान मात्रा की दो तालें – त्रिताल (16 मात्राएँ) और झपताल (10 मात्राएँ) की तुलना:

  • त्रिताल: 16 मात्राएँ, 4 विभाग (4+4+4+4), ताली: 1, 5, 13; खाली: 9।
  • झपताल: 10 मात्राएँ, 4 विभाग (2+3+2+3), ताली: 1, 3, 8; खाली: 6।

त्रिताल का दुगुन और चौगुन:

त्रिताल का ठेका: धा धिं धिं धा | धा धिं धिं धा | धा तिं तिं ता | ता धिं धिं धा ||

दुगुन (दोगुनी गति): प्रति मात्रा में दो बोल – धाधिं धिंधा धाधिं धिंधा धातिं तिंता ताधिं धिंधा

चौगुन (चौगुनी गति): प्रति मात्रा में चार बोल – धाधिंधिंधा धाधिंधिंधा धातिंतिंता ताधिंधिंधा

8) राजस्थान के तीन लोक अवनद्ध वाद्यों का चित्र बनाइये।
Make diagram of any three folk Avnadh Instruments of Rajasthan.

उत्तर: राजस्थान के तीन लोक अवनद्ध वाद्य:

  1. ढोल: एक बड़ा वाद्य जिसे लकड़ी से बनाया जाता है और दोनों ओर चमड़ा मढ़ा होता है।
  2. नगाड़ा: एक छोटा वाद्य जो घोड़े या ऊँट पर बांधा जाता है और लाठी से बजाया जाता है।
  3. डफ: एक गोल वाद्य जिसमें एक ओर चमड़ा मढ़ा होता है और हाथ से बजाया जाता है।

(चित्र के लिए कागज पर इन वाद्यों का सरल रेखाचित्र बनाएं।)

9) पखावज या तबले का सचित्र वर्णन करिये।
Describe Pakhawaj or Tabla with diagram.

उत्तर: तबला एक प्रमुख अवनद्ध वाद्य है जिसमें दो भाग होते हैं:

  • दायाँ तबला (दया): छोटा, ऊँची आवाज वाला, लकड़ी से बना।
  • बायाँ तबला (बायाँ): बड़ा, धातु या मिट्टी से बना, गहरी आवाज वाला।

दोनों पर चमड़ा मढ़ा होता है और बीच में स्याही (गाब) लगी होती है। तबले को हाथों से बजाया जाता है।

(चित्र के लिए दो गोल वाद्यों का रेखाचित्र बनाएं – एक छोटा और एक बड़ा।)


भाग - 0 (Part - 0) – कथक नृत्य (Kathak Dance)

अति लघुत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions) – शब्द सीमा 20 शब्द, प्रत्येक प्रश्न 1/2 अंक

J) ठुमरी गायन की शैलियां (अंग) कौनसी हैं? नाम लिखिए।
What are the styles of "Thumri"? Write names.

उत्तर: ठुमरी गायन की दो मुख्य शैलियाँ (अंग) हैं:

  1. पूरब अंग (Poorab Ang)
  2. पंजाब अंग (Punjab Ang)

प्रश्न 2

चतुरंग गीत रचना के 4 अंगों के नाम लिखिए।

Write the names of four parts of Chaturang Song.

उत्तर: चतुरंग गीत रचना के चार अंग हैं:

  1. ध्रुपद
  2. ख्याल
  3. तराना
  4. ठुमरी

प्रश्न 3-6 (सुमेलित कीजिए)

सुमेलित कीजिए—

सूची I सूची II
3) वल्लथोल i) मोहिनीअट्टम
4) सितेंद्र योगी ii) कथकलि
5) श्रीमंत शंकरदेव iii) कुचिपुड़ी
6) स्वाति तिरूनाल iv) सत्रिया

सही मिलान:

  • 3) वल्लथोल — i) मोहिनीअट्टम
  • 4) सितेंद्र योगी — ii) कथकलि
  • 5) श्रीमंत शंकरदेव — iv) सत्रिया
  • 6) स्वाति तिरूनाल — iii) कुचिपुड़ी

प्रश्न 7

पाठ्यक्रम की किस ताल में 'खाली' नहीं है?

Which tal of the syllabus has not 'Khali'?

उत्तर: पाठ्यक्रम की दादरा ताल में 'खाली' नहीं होती है।

प्रश्न 8

पाठ्यक्रम की किस ताल में 5 बार 'धिं' शब्द (बोल) का प्रयोग हुआ है?

In which tal of the syllabus has been used the term (Bol) 'Dhin' five times?

उत्तर: पाठ्यक्रम की झपताल में 'धिं' शब्द का प्रयोग पाँच बार होता है।

लघुत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 9

तांडव अथवा लास्य को परिभाषित कीजिए।

Define the Tandava or Lasya.

उत्तर: तांडव नृत्य का एक पुरुष प्रधान रूप है जो शिव के रौद्र रूप से संबंधित है। इसमें उग्र, तीव्र और शक्तिशाली गतियाँ होती हैं। लास्य नृत्य का स्त्री प्रधान रूप है जो कोमल, मधुर और भाव प्रधान होता है। यह पार्वती के नृत्य से संबंधित है और इसमें भावों की अभिव्यक्ति पर अधिक बल दिया जाता है।

प्रश्न 10

किन्हीं 10 संयुक्त हस्तकों के नाम लिखिए।

Write any 10 Samyukt hastakas.

उत्तर: दस संयुक्त हस्तकों के नाम:

  1. अंजलि
  2. कपोत
  3. कर्कट
  4. स्वस्तिक
  5. डोला
  6. पुष्पपुट
  7. उत्संग
  8. शिवलिंग
  9. कटकावर्धन
  10. कर्तरीमुख

प्रश्न 11

'प्रम्लु' रचना की विशेषता क्या है?

What is the characteristic of 'Pramlu' composition?

उत्तर: 'प्रम्लु' रचना की विशेषता यह है कि इसमें गीत, वाद्य और नृत्य तीनों का समन्वय होता है। यह एक प्रकार की संगीत रचना है जिसमें ताल और लय का विशेष महत्व होता है। इसमें मुख्यतः शृंगार रस की प्रधानता होती है और इसे प्रायः नृत्य के साथ प्रस्तुत किया जाता है।

लघुत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Questions)

2) लखनऊ घराने के चार नृत्यकारों के नाम लिखिए।

Write the name of any four dancers of Lucknow Gharana.

लखनऊ घराने के चार प्रमुख नृत्यकार निम्नलिखित हैं:

  1. बिंदादीन महाराज
  2. कालिका प्रसाद
  3. अच्छन महाराज
  4. लच्छू महाराज

Four famous dancers of Lucknow Gharana are: Bindadin Maharaj, Kalika Prasad, Achhan Maharaj, and Lachhu Maharaj.

3) कालबेलिया नृत्य में प्रयुक्त वाद्यों के नाम लिखिए।

Write the name of instruments used in Kalbelia Dance.

कालबेलिया नृत्य में प्रयुक्त प्रमुख वाद्य निम्नलिखित हैं:

  • पुंगी (बीन)
  • खंजरी
  • ढोलक
  • मंजीरा

Instruments used in Kalbelia dance include: Pungi (Been), Khanjari, Dholak, and Manjira.

लघुत्तरात्मक प्रश्न - II (Short Answer Questions - II) (प्रत्येक प्रश्न 2 अंक, शब्द सीमा 100-150 शब्द)

4) अभिनय के 4 अंगों (आंगिक, वाचिक, सात्विक, आहार्य) को समझाइये। [2]

Explain the four parts (Angik, Vachik, Satvik, Aharya) of Abhinaya.

अभिनय के चार अंग निम्नलिखित हैं:

  1. आंगिक अभिनय: शरीर के विभिन्न अंगों जैसे हाथ, पैर, आँख, मुख आदि के माध्यम से भाव प्रकट करना।
  2. वाचिक अभिनय: वाणी, गायन, संवाद और उच्चारण के माध्यम से अभिव्यक्ति।
  3. सात्विक अभिनय: मन के भावों जैसे रोमांच, अश्रु, स्वरभंग आदि का स्वाभाविक प्रदर्शन।
  4. आहार्य अभिनय: वेशभूषा, आभूषण, मेकअप और मंच सज्जा के माध्यम से अभिनय।

The four parts of Abhinaya are: Angik (body movements), Vachik (speech and song), Satvik (mental expressions), and Aharya (costume and makeup).

5) जयपुर घराने की नृत्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। [2]

Describe the characteristics of Jaipur dance style.

जयपुर घराने की प्रमुख नृत्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • तेज और जटिल लयकारी पर बल
  • पैरों की तेज गति और चक्करों का प्रचुर प्रयोग
  • ठुमरी और भाव प्रधान नृत्य की अपेक्षा ताल प्रधान नृत्य
  • खुले और बड़े मुद्राओं का प्रयोग
  • परंपरागत बंदिशों और तुकड़ों का विशेष महत्व

Jaipur Gharana is characterized by fast footwork, complex rhythmic patterns, emphasis on tala, large movements, and traditional compositions.

6) ताल पंजाबी अथवा झपताल का ठेका तथा दुगुन लिखिए। [2]

Write the Theka and Dugun of Tal Punjabi or Jhaptal.

झपताल (Jhaptal) - 10 मात्राएँ:

ठेका (Theka): धिन् ना | धिन् धिन् ना | तिन् ना | धिन् धिन् ना

दुगुन (Dugun): धिन् ना धिन् धिन् ना तिन् ना धिन् धिन् ना | धिन् ना धिन् धिन् ना तिन् ना धिन् धिन् ना

Jhaptal has 10 beats. Theka: Dhin Na | Dhin Dhin Na | Tin Na | Dhin Dhin Na. Dugun is double speed.

निबंधात्मक प्रश्न (Essay Type Questions) (प्रत्येक प्रश्न 3 अंक, शब्द सीमा 300-400 शब्द)

7) कथक नृत्य का संक्षिप्त इतिहास लिखिए। [3]

Write the brief history of Kathak Dance.

कथक नृत्य का इतिहास अत्यंत प्राचीन है। इसकी उत्पत्ति भारत के मंदिरों में हुई, जहाँ कथाकार (कहानी सुनाने वाले) भक्ति गीतों और नृत्य के माध्यम से पौराणिक कथाओं का वर्णन करते थे। मुगल काल में कथक ने दरबारी संरक्षण प्राप्त किया और इसमें लयकारी, चक्कर और भाव प्रधानता का विकास हुआ।

कथक के तीन प्रमुख घराने हैं: लखनऊ घराना (भाव प्रधान), जयपुर घराना (लय प्रधान), और बनारस घराना (ठुमरी प्रधान)। आधुनिक काल में पंडित बिरजू महाराज, पंडित लच्छू महाराज, और पंडित गोपीकृष्ण जैसे नर्तकों ने कथक को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

Kathak originated in temples where storytellers (Kathakars) narrated mythological tales through dance. It evolved under Mughal patronage and developed three main gharanas: Lucknow (expression), Jaipur (rhythm), and Banaras (thumri). Modern exponents like Birju Maharaj popularized it globally.

8) पं. अच्छन महाराज अथवा पं. गोपीकृष्ण का जीवन परिचय तथा नृत्य योगदान का उल्लेख कीजिए। [3]

Write the Life sketch and Dance contribution of Pt. Achhan Maharaj or Pt. Gopi Krishna.

पं. अच्छन महाराज (Pt. Achhan Maharaj):

पं. अच्छन महाराज का जन्म 1883 में लखनऊ में हुआ। वे लखनऊ घराने के प्रसिद्ध नर्तक और गुरु थे। उन्होंने कथक नृत्य को नई ऊँचाइयाँ दीं और अनेक शिष्यों को प्रशिक्षित किया। उनके प्रमुख शिष्यों में पं. बिरजू महाराज (उनके पुत्र) और पं. लच्छू महाराज शामिल हैं। उनका नृत्य योगदान भाव प्रधानता और लयकारी के समन्वय के लिए जाना जाता है।

Pt. Achhan Maharaj (1883-?) was a legendary Kathak dancer of Lucknow Gharana. He trained many disciples including his son Birju Maharaj. His contribution lies in blending expression and rhythm.

9) कथकलि अथवा गैर नृत्य शैली का विस्तृत वर्णन कीजिए। [3]

Explain the Kathakali or Gair dance form in detail.

कथकलि (Kathakali):

कथकलि केरल का प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य है। इसकी विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • रंगीन मुखौटे और विस्तृत मेकअप (हरा, लाल, काला रंग)
  • पौराणिक कथाओं का नृत्य-नाटिका के रूप में प्रस्तुतीकरण
  • मुद्राओं (हस्त मुद्राएँ) और नेत्र अभिनय का विशेष महत्व
  • पारंपरिक वाद्यों जैसे चेंडा, मद्दलम का प्रयोग
  • पुरुष नर्तकों द्वारा प्रमुख रूप से प्रस्तुत

Kathakali is a classical dance from Kerala known for elaborate makeup, colorful costumes, storytelling through mudras and eye movements, and traditional percussion instruments.