RBSE Class 12th 2019 Shorthand Hindi-SS-32-2019 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2019 |
| Subject | Shorthand Hindi-SS-32-2019 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2019 Shorthand Hindi-SS-32-2019
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Rajasthan Board Class 12th Shorthand Hindi-SS-32-2019 2019 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2019
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2019
हिन्दी शीघ्रलिपि (SHORTHAND HINDI)
समय : 3½ घण्टे पूर्णांक : 40
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें।
- तीनों खण्ड एक ही बैठक में लिखाये जायें।
- प्रथम एवं द्वितीय खण्डों तथा द्वितीय एवं तृतीय खण्डों के बीच में 5-5 मिनट का मध्यान्तर दिया जाये।
- तीनों खण्डों के संकेत लिपि श्रुतलेखों के हिन्दी अक्षरीकरण के लिए 3½ घंटे का समय दिया जाए।
- केवल निम्न विराम-चिह्न ही लगाएं : पूर्ण विराम, अर्द्ध-विराम और प्रश्न-चिह्न एवं कोष्ठक।
- संकेत लिपि पेन्सिल से लिखा जाए तथा उसका अनुवाद हिन्दी में टंकण यंत्र / कम्प्यूटर से ही टंकित किया जाय। हाथ से लिखा मान्य नहीं होगा।
- संकेत लिपि में लिखा हुआ श्रुतलेख उत्तर-पुस्तिका के साथ नत्थी कर दिया जाए।
- संकेत लिपि के 20% अंक रखे गये हैं।
- खण्ड प्रथम 4 मिनट, खण्ड द्वितीय 5 मिनट तथा खण्ड तृतीय 7 मिनट लिखवाने के रखे गए हैं। प्रत्येक खण्ड 80 शब्द प्रति मिनट की गति से बोला जाय।
SLNo. : ________ नामांक : ________ Roll No. : ________
No. of Sections : 3 SS-32-SH. HD. (Hindi)
No. of Printed Pages : 07
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SS-32-SH. HD. (Hindi) 326 [ Turn Over ]
प्रथम-खण्ड
(इसे 80 शब्द प्रति मिनिट की गति से लिखा जाए)
रतनलाल मदनलाल कम्पनी
(कपड़े के थोक व्यापारी एवं कमीशन एजेन्ट)
पत्र क्रमांक : 998
कनाट प्लेस,
चर्च गेट,
न्यू देहली-6
फोन : 089760529
ईमेल: रतन@gmail.com
सेवा में,
सर्व श्री मार्कण्ड,
हवा सड़क, इण्डस्ट्रीयल एरिया,
पानीपत (हरियाणा)
विषय: आर्थिक स्थिति की पूछताछ के क्रम में
प्रिय महोदय,
आपका पत्र संख्या - एन/5-773 दिनांक 02.02.2019 इसके लिये धन्यवाद। आपने हमारे ही शहर के सर्वश्री राधाचन्द कृष्णचन्द गोटेबाला, कपड़े के थोक व्यापारी, कपड़ा मार्केट नई दिल्ली की आर्थिक स्थिति के बारे में हमसे जानकारी प्राप्त करनी चाही है।
इस संबंध में हमारा आपसे निवेदन है कि उक्त फर्म अपने शहर में पिछले 15 वर्षों से स्थापित है। हमारा इस फर्म से पिछले 12 वर्षों से मधुर संबंध हैं। यह फर्म शहर के प्रतिष्ठित फर्मों में है।
इस फर्म द्वारा भुगतान प्राप्त करने में कभी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा है। इस फर्म द्वारा दिये गये चैक कभी भी अप्रतिष्ठित नहीं हुए हैं। ये नकद एवं अग्रिम भुगतान करके सदैव नकद छूट प्राप्त करने में विश्वास रखते हैं।
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द्वितीय-खण्ड
(इसे 80 शब्द प्रति मिनिट की गति से लिखा जाए)
जयपुर नगर,
प्रदूषण विरोधी समिति,
जे.डी. ए. सर्किल,
जयपुर-2
दिनांक: 0 aratt,/209
सेवा में,
श्रीमान् संपादक,
नव उजाला टाइम्स,
जयपुर-2
हमारे मतानुसार आप इस फर्म को नकद के साथ उधार माल का अनुबंध भी कर सकते हैं। आपके द्वारा नकद एवम् उधार अनुबंध करने पर हमारा कोई भी दायित्व नहीं होगा।
हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि हमारे द्वारा प्रदत्त की गई सूचना आप अत्यन्त ही गोपनीय रखेंगे। यदि आप उचित समझें तो उक्त फर्म की जानकारी यहां स्थित बैंक एस.बी. आई. बैंक, राणी सती नगर, न्यू देहलती-शाखा से भी प्राप्त कर सकते हैं, जिससे आप पूर्णरूप से वाले प्राप्त कर सकें।
सधन्यवाद।
भवदीय,
दिनांक : 8 फरवरी, 209
अजय कुमार,
रतनलाल मदनलाल कम्पनी के लिये,
साझेदार
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तृतीय खण्ड
(इसे 80 शब्द प्रति मिनिट की गति से लिखा जाए) [20]
राष्ट्र का स्वरूप
भूमि, भूमि पर बसने वाला जन और जन की संस्कृति, इन तीनों के सम्मिलन से राष्ट्र का स्वरूप बनता है।
भूमि का निर्माण देवप्रकृति ने किया है, वह अनन्त काल से है। उसके भौतिक रूप, सौन्दर्य और समृद्धि के प्रति सचेत होना हमारा आवश्यक कर्त्तव्य है। भूमि के पार्थिव स्वरूप के प्रति हम जितने अधिक जागृत होंगे उतनी ही हमारी राष्ट्रीयता बलवती हो सकेगी। यह पृथ्वी सच्चे अर्थों में समस्त राष्ट्रीय विचार धाराओं की जननी है। जो राष्ट्रीयता पृथ्वी के साथ नहीं जुड़ी वह निर्मूल है। राष्ट्रीयता की जड़ें पृथ्वी में जितनी गहरी होंगी उतना ही राष्ट्रीयभावों का अंकुर पल्लवित होगा। इसलिये पृथ्वी के प्रति हमारा प्रेम और कर्तव्य अटूट होना चाहिए।
व्याख्या: यह गद्यांश राष्ट्र के स्वरूप को तीन तत्वों – भूमि, जन और संस्कृति – के सम्मिलन से बताता है। भूमि को देवप्रकृति की देन और राष्ट्रीयता की जननी कहा गया है। लेखक के अनुसार, भूमि के प्रति जागरूकता और प्रेम से ही राष्ट्रीय भावनाएँ मजबूत होती हैं। यह पाठ राष्ट्रीयता की भौतिक और सांस्कृतिक नींव पर जोर देता है।
पत्र लेखन (पूर्व भाग):
- संपादक- जागरण समाचार पत्र, शास्त्रीनगर, जयपुर-2 [44]
- संपादक- नव युवक पत्रिका, वी.टी. रोड, जयपुर-2
- संपादक/ सांध्यकालीन उजाला पत्र, वैशाली नगर, जयपुर-2 [4]
- संपादक- मॉर्निंग न्यूज़ पत्र, मालवीय नगर, जयपुर [4%]
भवदीय,
मधुसूदन दयाल शर्मा,
जयपुर नगर प्रदूषण विरोधी समिति, प्रबन्धक। [5]
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भौतिक स्वरूप की आद्योपान्त जानकारी प्राप्त करना उसकी सुन्दरता, उपयोगिता और महिमा को पहचानना आवश्यक है।
इस कर्त्तव्य की पूर्ति सैकड़ों / हजारों प्रकार से होनी चाहिये। पृथ्वी से जिस वस्तु का संबंध है, चाहे वह छोटी हो या बड़ी, उसकी कुशल-प्रश्न पूछने के लिये हमें कमर कसनी चाहिये। पृथ्वी का सांगोपांग अध्ययन जागरणशील राष्ट्र के लिये बहुत ही आनन्दप्रिय कर्त्तव्य माना जाता है। गांवों और नगरों में सैकड़ों केन्द्रों से इस प्रकार के अध्ययन का सूत्रपात होना आवश्यक है।
धरती माता की कोख में जो अमूल्य निधियां भरी हैं, जिनके कारण वह वसुन्धरा कहलाती है उससे कौन परिचित नहीं होना चाहेगा? दिन-रात बहने वाली नदियों ने पहाड़ों की पीस-पीस कर अगणित प्रकार की मिट्टियों से पृथ्वी की देह को सजाया है। हमारे भावी आर्थिक अभ्युदय के लिये इन सबकी जांच-पड़ताल अत्यन्त आवश्यक है। पृथ्वी की गोद में जन्म लेने वाले खड़ पत्थर कुशल शिल्पियों से संवारे जाने पर अत्यन्त सौन्दर्य का प्रतीक बन जाते हैं। नाना भाँति के अनगढ़ नग विंध्य की नदियों के प्रवाह में सूर्य की धूप से चिलकते रहते हैं, उन चीलवटों को जब चतुर कारीगर पहलदार कटाव पर लाते हैं तब उनके प्रत्येक घाट से नई शोभा और सुन्दरता फूट पड़ती है। देश के नर-नारियों के रूपमण्डल और सौन्दर्यप्रधान में इन पत्थरों का भी सदा भाग रहा है, अतएव हमें इनका भी ज्ञान होना आवश्यक है।
पृथ्वी और आकाश के साथ कुछ सामग्री भरी है, पृथ्वी के चारों ओर फैले हुए गम्भीर सागर में जो जलचर एवं रत्नों की राशियां हैं, उन सबके प्रति चेतना और स्वागत के नये भाव राष्ट्र में फैलने चाहिये। राष्ट्र के नवयुवकों के हृदय में उन सबके प्रति जिज्ञासा की नई किरणें जबतक नहीं फूटतीं तब तक हम सोये हुए के समान हैं।
SS-32-SH. HD. (Hindi) 326
यह भाव जब सशक्त रूप में जागता है तब राष्ट्र निर्माण के स्वर वायुमण्डल में भरने लगते हैं। जहाँ यह भाव नहीं हैं वहाँ जन और भूमि का संबंध अचेतन और जड़ बना रहता है। जिस समय भी जन का हृदय भूमि के साथ माता और पुत्र के संबंध को पहचानता है उसी क्षण आनन्द और श्रद्धा से भरा हुआ उसका प्रणामभाव मातृभूमि के लिये प्रकट होता है।
इतिहास के अनेक उतार-चढ़ाव पार करने के बाद भी राष्ट्रनिवासी जन नई उठती लहरों से आगे बढ़ने के लिये आज भी अजर-अमर हैं। जन का सततवाही जीवन नदी के प्रवाह की तरह कर्म और श्रम के उत्थान के अनेक घाटों का निर्माण करना परम आवश्यक सा प्रतीत होता है।