RBSE Class 12th 2020 -SS-01-2020 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2020
Subject -SS-01-2020
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th -SS-01-2020 2020 solved Previous Year Question Papers

हिन्दी (अनिवार्य)

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2020

समय : 3¼ घण्टे      पूर्णांक : 80

प्रश्नों की संख्या : 29      मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 7

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में निर्धारित शब्द-सीमा में लिखें।
  4. जिस प्रश्न के अ, ब, स, द भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें।

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खण्ड-क

1. निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : (उत्तर सीमा 20 से 30 शब्द)

वाजिद अली शाह का समय था | लखनऊ विलासिता के रंग में डूबा हुआ था | छोटे-बड़े, गरीब-अमीर सभी विलासिता में डूबे हुए थे | कोई नृत्य और गान की मजलिस सजाता था, तो कोई अफीम की पिनक ही में मजे लेता था | जीवन के प्रत्येक विभाग में आमोद-प्रमोद का प्राधान्य था | शासन-विभाग में, साहित्य-क्षेत्र में, सामाजिक अवस्था में, कला-कौशल में, उद्योग-धंधों में, आहार-व्यवहार में सर्वत्र विलासिता व्याप्त हो रही थी | राजकर्मचारी विषय-वासना में, कविगण प्रेम और fare के वर्णन में, कारीगर कलाबत्तू और चिकन बनाने में, व्यवसायी सुरमे, इत्र, मिस्सी और उबटन का रोजगार करने में लिप्त थे |

(अ) वाजिद अली शाह के शासन काल की सामाजिक व्यवस्था को स्पष्ट कीजिए |

वाजिद अली शाह के शासन काल में समाज विलासिता में डूबा हुआ था। छोटे-बड़े, गरीब-अमीर सभी नृत्य, गान, अफीम आदि में लिप्त थे। जीवन के हर क्षेत्र में आमोद-प्रमोद का प्राधान्य था।

(ब) जीवन के किस-किस क्षेत्र में आमोद-प्रमोद का प्राधान्य था ?

जीवन के शासन-विभाग, साहित्य-क्षेत्र, सामाजिक अवस्था, कला-कौशल, उद्योग-धंधों और आहार-व्यवहार में आमोद-प्रमोद का प्राधान्य था।

2. निम्नलिखित अपठित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

घबरा के भागना अलग है
क्षिप्र गति अलग है
क्षिप्र तो वह है
जो सही क्षण में सजग है
सूरज, इसे जगाओ
पवन, इसे हिलाओ
पंछी, इसके कानों पर चिल्लाओ |

(A) काव्यांश के माध्यम से कवि ने मनुष्य को क्या संदेश दिया है ?

कवि ने मनुष्य को संदेश दिया है कि घबराकर भागना और सही समय पर सजग रहकर तेजी से कार्य करना अलग-अलग हैं। मनुष्य को सही क्षण में सजग और सक्रिय रहना चाहिए, न कि भय से भागना चाहिए।

(ब) कवि ने कौन-कौन से प्राकृतिक उपादानों के माध्यम से मनुष्य को जगाने का भाव उत्पन्न किया है ?

कवि ने सूरज, पवन और पंछी जैसे प्राकृतिक उपादानों के माध्यम से मनुष्य को जगाने का भाव उत्पन्न किया है। वह सूरज से जगाने, पवन से हिलाने और पंछी से चिल्लाने का आह्वान करता है।

खण्ड-ख

3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक से दो पंक्तियों में लिखिए :

(अ) मानव समाज के लिए भाषा का क्या महत्त्व है ?

भाषा मानव समाज में विचारों के आदान-प्रदान, भावनाओं की अभिव्यक्ति और सामाजिक संबंधों को सुदृढ़ करने का मुख्य साधन है। यह सभ्यता के विकास और ज्ञान के संरक्षण में भी सहायक होती है।

(ब) लिपि को परिभाषित करते हुए देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली दो भाषाओं के नाम लिखिए।

लिपि भाषा के ध्वनियों को लिखित रूप देने की प्रणाली है। देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली दो भाषाएँ हैं – हिंदी और संस्कृत।

4. रेखांकित शब्दों का पद परिचय लिखिए :

(अ) यह सपेरा बहुत चतुर है ।

रेखांकित शब्द: सपेरा
पद परिचय: जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक, 'चतुर है' का कर्ता।

(ब) मैं सवेरे उठा ।

रेखांकित शब्द: सवेरे
पद परिचय: कालवाचक क्रियाविशेषण, 'उठा' क्रिया का समय बताता है।

5. अभिधा शब्द-शक्ति को उदाहरण सहित समझाइए ।

अभिधा शब्द-शक्ति वह शक्ति है जिसके द्वारा किसी शब्द का सीधा, शाब्दिक अर्थ ग्रहण किया जाता है। इसमें शब्द अपने मूल अर्थ में प्रयुक्त होता है।
उदाहरण: "गंगा नदी है।" – यहाँ 'गंगा' का अर्थ सीधा नदी है, कोई लाक्षणिक या व्यंजनार्थ नहीं।

6. 'स्वगत रूपक' अलंकार को उदाहरण सहित समझाइए ।

स्वगत रूपक अलंकार में उपमेय और उपमान में अभिन्नता दिखाई जाती है, अर्थात् उपमेय को ही उपमान मान लिया जाता है।
उदाहरण: "मुख चंद्रमा है।" – यहाँ मुख (उपमेय) को चंद्रमा (उपमान) के समान नहीं, बल्कि चंद्रमा ही बता दिया गया है।

7. निम्नलिखित अंग्रेजी शब्दों का अर्थ हिन्दी में लिखिए :

  • (i) Thesis – शोध प्रबंध / निबंध
  • (ii) Vigilance – सतर्कता / जागरूकता

8. राजस्थान सरकार के वित्त विभाग (आय-व्ययक) अनुभाग की ओर से विविध प्रशासनिक विभागों में मितव्ययिता अपनाने हेतु एक परिपत्र लिखिए ।

परिपत्र
दिनांक: [तिथि]
वित्त विभाग (आय-व्ययक अनुभाग)
राजस्थान सरकार, जयपुर

विषय: मितव्ययिता अपनाने हेतु निर्देश

सभी प्रशासनिक विभागों के प्रमुखों को सूचित किया जाता है कि सरकारी संसाधनों के कुशल उपयोग हेतु मितव्ययिता अपनाना आवश्यक है। अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाई जाए, यात्रा व्यय में कमी की जाए, और कार्यालयीन सामग्री का सीमित उपयोग सुनिश्चित किया जाए। यह निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

(हस्ताक्षर)
वित्त सचिव

9. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में सारगर्भित निबंध लिखिए :

  • (अ) विद्यार्थियों का राष्ट्र निर्माण में योगदान
  • (ब) राजस्थान में लोक देवताओं का महत्त्व
  • (स) नारी सशक्तिकरण
  • (द) मेरी प्रिय पुस्तक
नमूना निबंध (विषय: विद्यार्थियों का राष्ट्र निर्माण में योगदान)

विद्यार्थी किसी भी राष्ट्र की भावी पीढ़ी होते हैं और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा प्राप्त कर वे देश के विकास में योगदान दे सकते हैं। विद्यार्थी समाज में जागरूकता फैलाने, सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध आवाज उठाने और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने में सक्षम होते हैं। वे स्वच्छता अभियान, मतदाता जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यक्रमों में भाग लेकर राष्ट्र को मजबूत बना सकते हैं। इसके अलावा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार कर वे देश को आत्मनिर्भर बना सकते हैं। अतः विद्यार्थियों को अनुशासन, कर्तव्यपरायणता और देशभक्ति की भावना से प्रेरित होकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

खण्ड-ग

  1. निम्नलिखित पद्यांशों में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : (4+2=6)

    पद्यांश 1:

    बिनु गोपाल बैरिन भई कुंजैं |
    तब ये लता लगति अति सीतल, अब भई विषम ज्वाल अंगैं ||

    सु बहति जमुना, खग बोलत, फूलैं अलि गुंजैं |
    पवन, पानी, धनसार, संजीवनि किरन भानु भई भुंजैं ||

    ए ऊधो, कहियो माधव सों करि करि मारत अंगैं |
    सूरदास प्रभु को मग जोवत अँखियाँ भई बरन ज्यों भुंगैं ||

    सप्रसंग व्याख्या:

    संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश महाकवि सूरदास द्वारा रचित 'सूरसागर' से लिया गया है। इसमें गोपियों की विरह-वेदना का मार्मिक चित्रण है। गोपियाँ श्रीकृष्ण के वियोग में व्याकुल हैं और उद्धव के माध्यम से अपनी पीड़ा श्रीकृष्ण तक पहुँचाना चाहती हैं।

    प्रसंग: श्रीकृष्ण मथुरा चले गए हैं और उद्धव को गोपियों को समझाने भेजा है। गोपियाँ उद्धव से कहती हैं कि कृष्ण के बिना वृंदावन की कुंजियाँ भी उन्हें शत्रु-सी लगती हैं। प्रकृति का हर तत्व, जो पहले सुखद था, अब दुःखदायी हो गया है।

    व्याख्या: गोपियाँ कहती हैं कि श्रीकृष्ण के बिना ये कुंजियाँ (बगीचे) हमें शत्रु-सी लगती हैं। पहले ये लताएँ अत्यंत शीतल लगती थीं, पर अब ये हमारे अंगों को भयंकर आग की तरह जला रही हैं। यमुना बह रही है, पक्षी बोल रहे हैं, कमल खिले हैं और भौंरे गुंजार कर रहे हैं, लेकिन ये सब अब हमें सताने वाले लगते हैं। हवा, पानी, धूप, संजीवनी बेल और सूर्य की किरणें सब हमारे लिए दुःखदायी हो गई हैं। गोपियाँ उद्धव से कहती हैं कि माधव (श्रीकृष्ण) से जाकर कहो कि वे हमारे अंगों को मार रहे हैं। सूरदास कहते हैं कि प्रभु के मार्ग की प्रतीक्षा करते-करते गोपियों की आँखें भौंरे के समान रंगहीन हो गई हैं।

    पद्यांश 2:

    कविता एक उड़ान है चिड़िया के बहाने
    कविता की उड़ान भला चिड़िया क्या जाने
    बाहर भीतर
    इस घर, उस घर
    कविता के पंख लगा उड़ने के माने
    चिड़िया क्या जाने ?

    सप्रसंग व्याख्या:

    संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हिंदी कविता की आधुनिक धारा से लिया गया है। इसमें कविता की प्रकृति और उसकी व्यापकता पर विचार किया गया है। कवि कविता को एक उड़ान के रूप में देखता है जो चिड़िया के माध्यम से अभिव्यक्त होती है।

    प्रसंग: कवि यह बताना चाहता है कि कविता केवल बाहरी उड़ान नहीं है, बल्कि वह आंतरिक अनुभूतियों और विचारों की उड़ान है। चिड़िया तो केवल एक माध्यम है, कविता की वास्तविक उड़ान तो मानवीय भावनाओं और कल्पना के स्तर पर होती है।

    व्याख्या: कवि कहता है कि कविता एक उड़ान है जो चिड़िया के बहाने व्यक्त होती है। लेकिन चिड़िया कविता की वास्तविक उड़ान को नहीं जान सकती, क्योंकि वह तो केवल भौतिक उड़ान भरती है। कविता की उड़ान बाहर और भीतर दोनों जगह होती है - वह इस घर और उस घर तक फैली होती है। कविता के पंख लगाकर उड़ने का अर्थ है कल्पना और भावनाओं के माध्यम से असीमित आकाश में विचरण करना। यह उड़ान चिड़िया की सीमित उड़ान से कहीं अधिक व्यापक और गहरी है।

  2. निम्नलिखित गद्यांशों में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : (4)

    गद्यांश 1:

    किसी आती हुई आपदा की भावना या दुःख के कारण के साक्षात्कार से जो एक प्रकार का आवेगपूर्ण अथवा स्तम्भ कारक मनोविकार होता है उसी को भय कहते हैं। क्रोध दुःख के कारण पर प्रभाव डालने के लिए आकुल करता है और भय उसकी पहुँच से बाहर होने के लिए। क्रोध दुःख के कारण के स्वरूप-बोध के बिना नहीं होता। यदि दुःख का कारण चेतन होगा और यह समझा जाएगा कि उसने जान-बूझकर दुःख पहुँचाया है, तभी क्रोध होगा।

    सप्रसंग व्याख्या:

    संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश मनोविज्ञान पर आधारित एक निबंध से लिया गया है। इसमें भय और क्रोध जैसी मानवीय मनोवृत्तियों का विश्लेषण किया गया है। लेखक भय और क्रोध के स्वरूप और उनके कारणों को स्पष्ट करता है।

    प्रसंग: लेखक भय और क्रोध के बीच अंतर स्पष्ट कर रहा है। वह बताता है कि भय और क्रोध दोनों ही दुःख से उत्पन्न होते हैं, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया भिन्न होती है।

    व्याख्या: लेखक कहता है कि जब किसी आने वाली विपत्ति का आभास होता है या दुःख के कारण का सामना होता है, तो जो आवेगपूर्ण या स्तब्ध कर देने वाली मानसिक स्थिति उत्पन्न होती है, उसे भय कहते हैं। क्रोध दुःख के कारण को प्रभावित करने के लिए व्याकुल करता है, जबकि भय उस कारण से दूर रहने के लिए प्रेरित करता है। क्रोध तभी उत्पन्न होता है जब दुःख के कारण का स्वरूप समझ में आता है। यदि दुःख का कारण कोई चेतन प्राणी है और यह ज्ञात हो कि उसने जानबूझकर दुःख पहुँचाया है, तभी क्रोध उत्पन्न होता है। इस प्रकार भय और क्रोध में मूलभूत अंतर है - भय निष्क्रिय करता है जबकि क्रोध सक्रिय प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है।

    गद्यांश 2:

    प्रजातंत्रवाद चाहता है कि न केवल पाँच वर्ष की समाप्ति पर सरकार का निषेध किया जा सके, बल्कि ऐसी भी व्यवस्था होनी चाहिए कि सरकार के विरुद्ध किसी भी समय और तुरन्त निषेधात्मक कार्रवाई की जा सके। अब यदि आपको मेरे कहने का आशय स्पष्ट हो तो प्रजातंत्र का मतलब है कि किसी भी आदमी को सदैव शासन करते रहने का अधिकार नहीं। यह शासन करने का अधिकार लोगों की स्वेच्छा पर निर्भर करता है। उस अधिकार को लोकसभा भवन में चैलेंज किया जा सकता है।

    सप्रसंग व्याख्या:

    संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश लोकतंत्र और प्रजातंत्रवाद पर आधारित एक राजनीतिक निबंध से लिया गया है। इसमें प्रजातंत्र की मूल अवधारणा और उसकी आवश्यकताओं पर प्रकाश डाला गया है।

    प्रसंग: लेखक प्रजातंत्रवाद के मूल सिद्धांतों को समझा रहा है। वह बताता है कि प्रजातंत्र में सरकार को सीमित अवधि के लिए ही शासन करने का अधिकार होता है और जनता किसी भी समय सरकार को बदल सकती है।

    व्याख्या: लेखक कहता है कि प्रजातंत्रवाद यह चाहता है कि न केवल पाँच वर्ष की अवधि पूरी होने पर सरकार को हटाया जा सके, बल्कि ऐसी व्यवस्था भी होनी चाहिए कि सरकार के विरुद्ध किसी भी समय तुरंत अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सके। लेखक स्पष्ट करता है कि प्रजातंत्र का अर्थ है कि किसी भी व्यक्ति को जीवनभर शासन करने का अधिकार नहीं है। शासन करने का अधिकार जनता की इच्छा पर निर्भर करता है। इस अधिकार को लोकसभा में चुनौती दी जा सकती है, अर्थात जनता के प्रतिनिधि सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाकर उसे हटा सकते हैं। यह प्रजातंत्र की मूल भावना है कि सत्ता जनता में निहित है और जनता अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार को नियंत्रित कर सकती है।

2. 'तौलिये' एकांकी के माध्यम से लेखक ने किस आडम्बर व खोखलेपन को अभिव्यक्त किया है ? (उत्तर सीमा 80 शब्द) 4

'तौलिये' एकांकी में लेखक ने समाज में व्याप्त ऊपरी दिखावे और खोखलेपन को उजागर किया है। यह एकांकी उन लोगों पर व्यंग्य करती है जो बाहरी आडम्बरों में तो विश्वास रखते हैं, लेकिन उनके भीतर कोई वास्तविकता या गंभीरता नहीं होती। लेखक ने दिखाया है कि कैसे लोग केवल दिखावे के लिए धार्मिक या सामाजिक क्रियाकलापों में भाग लेते हैं, जबकि उनका आचरण और विचार पूरी तरह से खोखले होते हैं। इस प्रकार, एकांकी मानवीय स्वभाव के इस दोष को उजागर करती है।

अथवा

“बाजार से हठपूर्वक विमुखता उनमें नहीं ।” वाक्यांश किसके लिए क्यों कहा गया है ? विवेचना कीजिए | (उत्तर सीमा 80 शब्द)

यह वाक्यांश 'बाजार दर्शन' पाठ के लेखक के लिए कहा गया है। लेखक बाजार से पूरी तरह दूर नहीं हैं, बल्कि वे बाजार की वस्तुओं और सेवाओं का उपयोग करते हैं, लेकिन उसके प्रति आसक्त नहीं होते। वे बाजार की चकाचौंध और उपभोक्तावाद से प्रभावित हुए बिना, अपनी आवश्यकताओं के अनुसार ही बाजार का उपयोग करते हैं। इस प्रकार, वे बाजार से विमुख न होकर, उसके प्रति एक संतुलित और विवेकपूर्ण दृष्टिकोण रखते हैं।

3. बिहारी के पठित दोहों के आधार पर उनकी नीति व भक्ति को समझाइए | (उत्तर सीमा 80 शब्द) 4

बिहारी के दोहों में नीति और भक्ति दोनों का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। नीति के दोहों में वे जीवन के व्यावहारिक पक्षों पर प्रकाश डालते हैं, जैसे मित्रता, व्यवहार कुशलता, और समय की पहचान। वे मानवीय स्वभाव और सामाजिक संबंधों की गहरी समझ रखते हैं। भक्ति के दोहों में वे ईश्वर के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना व्यक्त करते हैं। उनकी भक्ति सरल और सहज है, जिसमें बाहरी आडम्बरों की कोई जगह नहीं है। इस प्रकार, बिहारी के दोहे जीवन के दोनों पक्षों को संतुलित रूप से प्रस्तुत करते हैं।

अथवा

“आत्म-परिचय' कविता की मूल संवेदना को स्पष्ट कीजिए | (उत्तर सीमा 80 शब्द)

'आत्म-परिचय' कविता की मूल संवेदना आत्म-चिंतन और आत्म-साक्षात्कार की है। कवि अपने अस्तित्व, अपने विचारों और अपने जीवन के उद्देश्य पर गहन चिंतन करता है। वह समाज और दुनिया से अलग होकर अपने भीतर झांकता है और अपनी पहचान को समझने का प्रयास करता है। कविता में एकांत और आत्म-निरीक्षण की भावना प्रमुख है, जहां कवि बाहरी दुनिया के शोर से दूर अपने मन की गहराइयों में उतरता है और अपने सच्चे स्वरूप को पहचानने का प्रयास करता है।

4. 'सारिये आसा सांपनी, जिन डसिया संसार' काव्य पंक्ति का भावार्थ स्पष्ट कीजिए | (उत्तर सीमा 40 शब्द) 2

इस पंक्ति का भावार्थ है कि आशा एक ऐसा सांप है जिसने पूरे संसार को डस लिया है। आशा के कारण मनुष्य जीवन भर भटकता रहता है और कभी संतुष्ट नहीं होता। यह आशा ही है जो मनुष्य को मोह और भ्रम में डालकर उसके वास्तविक स्वरूप को ढक लेती है।

5. “राजिया रा सोरठा' में कवि ने बुरे एवं अच्छे मित्र के क्या लक्षण बताए हैं ? (उत्तर सीमा 40 शब्द) 2

कवि के अनुसार, अच्छा मित्र वह है जो संकट के समय साथ दे, सच्ची सलाह दे और स्वार्थ न रखे। बुरा मित्र वह है जो केवल अपने स्वार्थ के लिए मित्रता निभाता है, विपत्ति में साथ छोड़ देता है और पीठ पीछे बुराई करता है।

6. “हाँ, इन सबकी आँखें किसी के आगे शब्द-रहित संकल्प-रहित मौन प्रार्थना में खुली हैं |” प्रस्तुत पंक्ति किसके लिए और क्यों कही गई है ? (उत्तर सीमा 40 शब्द) 2

यह पंक्ति 'जूझ' पाठ में वृद्ध माता-पिता के लिए कही गई है। वे अपने बच्चों से कुछ नहीं मांगते, बल्कि मौन प्रार्थना में लीन रहते हैं। उनकी आँखों में बच्चों के प्रति असीम प्रेम और चिंता है, लेकिन वे अपनी इच्छाओं को शब्दों में व्यक्त नहीं करते।

7. 'स्क्रैच हिमालय' पाठ के आधार पर पर्वतीय क्षेत्रों के प्राकृतिक सौन्दर्य के बारे में लिखिए | (उत्तर सीमा 40 शब्द) 2

'स्क्रैच हिमालय' पाठ में पर्वतीय क्षेत्रों के प्राकृतिक सौन्दर्य का अद्भुत वर्णन है। यहाँ बर्फ से ढकी चोटियाँ, हरे-भरे जंगल, नदियाँ और झरने हैं। यहाँ की शांति और प्राकृतिक छटा मन को मोह लेती है। पाठ में पर्वतों की भव्यता और प्रकृति के अनुपम सौन्दर्य को बहुत ही सजीवता से चित्रित किया गया है।

खण्ड-ग

  1. कबीरदास अथवा कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का परिचय लिखिए।

    (उत्तर सीमा 40 शब्द) 2+2=4

    कबीरदास: कबीरदास भक्तिकाल के निर्गुण संत कवि थे। उनकी रचनाएँ 'बीजक', 'सबद', 'साखी' आदि में संग्रहित हैं। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों और पाखंड का विरोध किया।

    अथवा

    कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर': ये हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध निबंधकार एवं कहानीकार थे। इनकी प्रमुख रचनाएँ 'बूँद-बूँद', 'स्वप्न-पथ' आदि हैं। इन्होंने सरल एवं प्रभावशाली शैली में सामाजिक समस्याओं को उठाया।

  2. ‘एक’ ने सज्जन व्यक्ति को बार-बार मनाने के लिए क्यों कहा है?

    (उत्तर सीमा 20 शब्द) 2

    ‘एक’ ने सज्जन व्यक्ति को बार-बार मनाने के लिए कहा क्योंकि सज्जन व्यक्ति कभी किसी से द्वेष नहीं करता और सबका भला चाहता है।

  3. “हाँ कौन दुर्ग है! यही झोपड़ी न; जो चाहे ले-ले।” प्रस्तुत वाक्य किसने-किससे कहा?

    (उत्तर सीमा 20 शब्द) 2

    यह वाक्य बूढ़ी काकी ने अपने पुत्र से कहा, जब वह अपनी झोपड़ी को ही अपना दुर्ग बताती है।

खण्ड-घ

  1. “हट जा जीणे जोगिए, हट जा करमाँ वालिए, हट जा प्यारिए, बच जा लम्बी उमराँ वालिए।” प्रस्तुत शब्द कौन और क्यों कह रहा है?

    (उत्तर सीमा 40 शब्द) 2

    ये शब्द गाँव की एक बूढ़ी स्त्री कह रही है। वह अपने बेटे को युद्ध में जाने से रोकने के लिए ऐसा कहती है, क्योंकि उसे अपने पुत्र की जान की चिंता है और वह उसे सुरक्षित रखना चाहती है।

  2. “बलवान से भिड़न्त” पाठांश से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

    (उत्तर सीमा 40 शब्द) 2

    इस पाठांश से हमें यह शिक्षा मिलती है कि बलवान से भिड़ने से पहले अपनी क्षमता का आकलन करना चाहिए। साथ ही, चतुराई और सूझबूझ से काम लेकर बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है।

  3. “अन्त में एक ऐसा निर्मम सत्य उद्घाटित हुआ जिसकी कल्पना भी मेरे लिए संभव नहीं थी।” लेखिका ने ऐसा क्यों कहा?

    (उत्तर सीमा 40 शब्द) 2

    लेखिका ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि उन्हें पता चला कि उनके पति ने उनके साथ धोखा किया था और उनकी सारी संपत्ति हड़प ली थी। यह सत्य उनके लिए अत्यंत क्रूर और अप्रत्याशित था।

    अथवा

    “मैं राम के लिए तड़पता हूँ वह मेरे लिए” प्रस्तुत वाक्य में तुलसी के अन्तर्द्वन्द्व को स्पष्ट कीजिए।

    इस वाक्य में तुलसीदास के अन्तर्द्वन्द्व को दर्शाया गया है। वे राम के प्रति अपने प्रेम और समर्पण को व्यक्त करते हैं, लेकिन साथ ही यह भी महसूस करते हैं कि राम उनके प्रति उतने ही आतुर हैं। यह द्वन्द्व भक्त और भगवान के बीच के गहरे प्रेम को दर्शाता है।

  4. एलीफेण्टा की गुफाएँ, एलोरा की गुफाओं से किस प्रकार भिन्न हैं? इनके प्राकृतिक एवं शिल्प-सौंदर्य को लिखिए।

    (उत्तर सीमा 80 शब्द) 2+2+2=6

    एलीफेण्टा की गुफाएँ: ये गुफाएँ मुंबई के पास एक द्वीप पर स्थित हैं। इनमें मुख्यतः हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ हैं, विशेषकर त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की विशाल प्रतिमा। प्राकृतिक सौंदर्य में यहाँ का समुद्री दृश्य और हरियाली मनमोहक है। शिल्प-सौंदर्य में बारीक नक्काशी और भव्यता देखने को मिलती है।

    एलोरा की गुफाएँ: ये गुफाएँ औरंगाबाद के पास स्थित हैं और इनमें हिंदू, बौद्ध एवं जैन धर्म से संबंधित मंदिर और मूर्तियाँ हैं। प्राकृतिक सौंदर्य में यहाँ की पहाड़ियाँ और झरने आकर्षक हैं। शिल्प-सौंदर्य में कैलाश मंदिर जैसी एक ही चट्टान को काटकर बनाई गई संरचनाएँ अद्वितीय हैं।

    भिन्नता: एलीफेण्टा में केवल हिंदू धर्म से संबंधित कला है, जबकि एलोरा में तीनों धर्मों का समन्वय है। एलोरा की गुफाएँ आकार में बड़ी और अधिक विस्तृत हैं।

    अथवा

    देवनारायणजी एवं महाराजा सूरजमल के सामाजिक एवं धार्मिक महत्त्व को लिखिए।

    (उत्तर सीमा 80 शब्द) 6

    देवनारायणजी: ये राजस्थान के लोकदेवता हैं। सामाजिक महत्त्व: इन्होंने जाति-पाँति के भेदभाव को मिटाकर समाज में समानता का संदेश दिया। धार्मिक महत्त्व: इन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है और इनकी पूजा से भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।

    महाराजा सूरजमल: ये भरतपुर के शासक थे। सामाजिक महत्त्व: इन्होंने जाट समुदाय को संगठित किया और किसानों के हितों की रक्षा की। धार्मिक महत्त्व: इन्होंने सभी धर्मों का सम्मान किया और मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया।

खण्ड - ड

  1. समाचार-लेखन में इंट्रो क्या है ? इसका महत्त्व लिखिए | (उत्तर सीमा 40 शब्द)

    समाचार-लेखन में इंट्रो (Intro) समाचार का प्रारंभिक भाग होता है, जो सबसे महत्वपूर्ण तथ्यों को संक्षेप में प्रस्तुत करता है। इसका महत्त्व यह है कि यह पाठक का ध्यान आकर्षित करता है और समाचार का सार तुरंत बताता है।

  2. फीचर-लेखन को परिभाषित करते हुए फीचर के चार प्रकार लिखिए | (उत्तर सीमा 40 शब्द)

    फीचर-लेखन एक रचनात्मक पत्रकारिता विधा है, जो किसी विषय को रोचक और विस्तृत रूप में प्रस्तुत करती है। फीचर के चार प्रकार हैं: (1) मानवीय रुचि फीचर, (2) जीवन-शैली फीचर, (3) ऐतिहासिक फीचर, (4) यात्रा फीचर।

  3. साक्षात्कार को परिभाषित करते हुए साक्षात्कार के प्रकार लिखिए | (उत्तर सीमा 40 शब्द)

    साक्षात्कार दो व्यक्तियों के बीच प्रश्न-उत्तर पर आधारित एक संवाद है, जिसमें साक्षात्कारकर्ता जानकारी प्राप्त करता है। साक्षात्कार के प्रकार हैं: (1) व्यक्तिगत साक्षात्कार, (2) समूह साक्षात्कार, (3) टेलीफोनिक साक्षात्कार, (4) ई-मेल साक्षात्कार।

  4. रिपोर्ताज एवं यात्रा-वृत्तांत के अन्तर को स्पष्ट कीजिए | (उत्तर सीमा 60 शब्द)

    रिपोर्ताज और यात्रा-वृत्तांत में मुख्य अंतर यह है कि रिपोर्ताज किसी घटना या स्थिति का प्रत्यक्ष और वस्तुनिष्ठ वर्णन करता है, जबकि यात्रा-वृत्तांत यात्री के व्यक्तिगत अनुभवों और भावनाओं पर केंद्रित होता है। रिपोर्ताज में तथ्यात्मकता प्रमुख होती है, जबकि यात्रा-वृत्तांत में व्यक्तिगत दृष्टिकोण और वर्णनात्मकता अधिक होती है।

  5. डायरी-लेखन को स्पष्ट करते हुए इसके महत्त्व को समझाइए | (उत्तर सीमा 60 शब्द)

    डायरी-लेखन एक व्यक्तिगत लेखन विधा है, जिसमें लेखक अपने दैनिक अनुभवों, विचारों और भावनाओं को नियमित रूप से लिखता है। इसका महत्त्व यह है कि यह आत्म-चिंतन को बढ़ावा देता है, भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम प्रदान करता है, और भविष्य के लिए ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में कार्य करता है।

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