RBSE Class 12th 2020 -SS-31-2020 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2020 |
| Subject | -SS-31-2020 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2020 -SS-31-2020
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Rajasthan Board Class 12th -SS-31-2020 2020 solved Previous Year Question Papers
व्यवसाय अध्ययन (BUSINESS STUDIES)
उच्च माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2020
समय : 3¼ घण्टे पूर्णाक : 80
No. of Questions — 30 No. of Printed Pages — 8
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only.
SS-3-Bus. Studies (Supp.) [ Turn over
परीक्षा निर्देश (Exam Instructions)
(4) जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.
(5) प्रश्न-पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपांतर में किसी प्रकार की त्रुटि/अंतर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को ही सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
(6) खण्ड, प्रश्न संख्या, अंक, प्रत्येक प्रश्न उत्तर की शब्द / पृष्ठ सीमा:
| खण्ड (Section) | प्रश्न संख्या (Q. Nos.) | अंक (Marks per question) | उत्तर की शब्द / पृष्ठ सीमा (Words/Page limit of answer) |
|---|---|---|---|
| अ (A) | -0 | 1 | 20 शब्द (20 words) |
| ब (B) | I-8 | 2 | आधे पृष्ठ (Half page) |
| स (C) | 9-27 | 4 | एक पृष्ठ (One page) |
| द (D) | 28-30 | 6 | तीन पृष्ठ (Three pages) |
(7) प्रश्न क्रमांक 28 से 30 में आन्तरिक विकल्प हैं।
Question Nos. 28 to 30 have internal choices.
SS-3-Bus. Studies (Supp.)
खण्ड-अ
SECTION—A
-
प्रबन्ध क्या है ?
What is Management ?प्रबन्ध एक सतत प्रक्रिया है जिसके द्वारा संगठन के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त करने के लिए मानवीय एवं भौतिक संसाधनों का नियोजन, संगठन, निर्देशन, समन्वय एवं नियंत्रण किया जाता है।
Management is a continuous process of planning, organizing, directing, coordinating and controlling human and physical resources to achieve organizational goals effectively.
-
मध्य स्तरीय प्रबन्ध का क्या अर्थ है ?
What is the meaning of Middle Level Management ?मध्य स्तरीय प्रबन्ध वह प्रबन्ध स्तर है जो शीर्ष प्रबन्ध और निम्न प्रबन्ध के बीच कार्य करता है। इसमें विभागाध्यक्ष, शाखा प्रबन्धक आदि शामिल होते हैं जो शीर्ष प्रबन्ध के निर्देशों को क्रियान्वित करने और निम्न स्तर के कर्मचारियों का पर्यवेक्षण करने का कार्य करते हैं।
Middle Level Management is the management level that works between top management and lower management. It includes department heads, branch managers, etc., who implement the instructions of top management and supervise lower-level employees.
-
विक्रय अधिनियम कब लागू हुआ ?
When did the Sale of Goods Act come into force ?विक्रय अधिनियम (Sale of Goods Act) 1930 में लागू हुआ। यह भारत में माल की बिक्री और खरीद से संबंधित नियमों को नियंत्रित करता है।
The Sale of Goods Act came into force in 1930. It governs the rules related to the sale and purchase of goods in India.
-
अनुबन्ध अधिनियम की किस धारा के अनुसार “बिना प्रतिफल के करार शून्य माना जाता है” ?
According to which Section of the Contract Act, “An agreement without consideration is void” ?अनुबन्ध अधिनियम (Indian Contract Act, 1872) की धारा 25 के अनुसार, बिना प्रतिफल के करार शून्य माना जाता है, सिवाय कुछ अपवादों के।
According to Section 25 of the Indian Contract Act, 1872, an agreement without consideration is void, except for certain exceptions.
-
वृद्धावस्था बीमा का अर्थ बताइए।
Mention the meaning of old age insurance.वृद्धावस्था बीमा एक प्रकार का बीमा है जो व्यक्ति को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें बीमित व्यक्ति नियमित प्रीमियम का भुगतान करता है और सेवानिवृत्ति के बाद एक निश्चित राशि या पेंशन प्राप्त करता है।
Old age insurance is a type of insurance that provides financial security to a person in old age. In this, the insured person pays regular premiums and receives a fixed amount or pension after retirement.
-
“अभिप्रेरणा व्यावहारिक प्रबन्ध की कुंजी है ।” कैसे ?
“Motivation is the key of Behavioural Management.” How ?अभिप्रेरणा व्यावहारिक प्रबन्ध की कुंजी है क्योंकि यह कर्मचारियों को उनके कार्यों को प्रभावी ढंग से करने के लिए प्रेरित करती है। यह उनकी आवश्यकताओं और इच्छाओं को समझकर उन्हें संगठन के लक्ष्यों की ओर निर्देशित करती है। बिना अभिप्रेरणा के, कर्मचारी निष्क्रिय हो सकते हैं और उत्पादकता कम हो सकती है।
Motivation is the key of Behavioural Management because it inspires employees to perform their tasks effectively. It understands their needs and desires and directs them towards organizational goals. Without motivation, employees may become passive and productivity may decline.
-
“नेतृत्व एक गतिशील प्रक्रिया है ।” कैसे ?
“Leadership is a dynamic process.” How ?नेतृत्व एक गतिशील प्रक्रिया है क्योंकि यह लगातार बदलती परिस्थितियों, आवश्यकताओं और वातावरण के अनुसार अनुकूलित होता है। एक प्रभावी नेता अपनी शैली और दृष्टिकोण को समय और स्थिति के अनुसार बदलता है, जिससे यह एक स्थिर नहीं बल्कि निरंतर विकसित होने वाली प्रक्रिया बन जाती है।
Leadership is a dynamic process because it continuously adapts to changing circumstances, needs, and environment. An effective leader changes their style and approach according to time and situation, making it a constantly evolving process rather than a static one.
8. “विपणन उपभोक्ता संतुष्टि में सहायक है ।” कैसे ?
“Marketing is helpful in consumer satisfaction.” How ?
उत्तर: विपणन उपभोक्ता संतुष्टि में निम्नलिखित प्रकार से सहायक है:
- यह उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं और इच्छाओं को पहचानता है और उनके अनुसार उत्पाद विकसित करता है।
- यह उचित मूल्य, गुणवत्ता और वितरण सुनिश्चित करता है, जिससे उपभोक्ता संतुष्ट रहते हैं।
- विपणन के माध्यम से उपभोक्ताओं को उत्पाद की जानकारी और सेवा मिलती है, जिससे उनकी संतुष्टि बढ़ती है।
Answer: Marketing helps in consumer satisfaction by identifying consumer needs, developing products accordingly, ensuring proper pricing, quality, and distribution, and providing information and service to consumers.
9. बीमा में 'प्रीमियम' शब्द को स्पष्ट कीजिए।
Explain the word ‘Premium’ in insurance.
उत्तर: बीमा में 'प्रीमियम' वह नियमित राशि है जो बीमित व्यक्ति (पॉलिसीधारक) बीमा कंपनी को भुगतान करता है। इसके बदले में बीमा कंपनी निर्धारित जोखिम (जैसे दुर्घटना, मृत्यु, चोरी आदि) होने पर बीमित राशि का भुगतान करने का वादा करती है। प्रीमियम की राशि बीमा की अवधि, बीमित राशि, जोखिम के स्तर और अन्य कारकों पर निर्भर करती है।
Answer: In insurance, ‘Premium’ is the regular amount paid by the insured (policyholder) to the insurance company. In return, the insurance company promises to pay the insured amount in case of a specified risk (e.g., accident, death, theft). The premium amount depends on the policy term, sum insured, risk level, and other factors.
10. विक्रय प्रोत्साहन से नये बाजारों में प्रवेश कैसे सम्भव है ?
How is it possible to enter new markets from sales promotion ?
उत्तर: विक्रय प्रोत्साहन (Sales Promotion) निम्नलिखित तरीकों से नये बाजारों में प्रवेश संभव बनाता है:
- नए ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए छूट, कूपन, नमूने आदि प्रदान करना।
- उत्पाद के प्रति जागरूकता बढ़ाना और परीक्षण को प्रोत्साहित करना।
- प्रतिस्पर्धी बाजार में तेजी से पैठ बनाने के लिए अल्पकालिक प्रोत्साहन देना।
Answer: Sales promotion helps enter new markets by offering discounts, coupons, samples to attract new customers, increasing product awareness, encouraging trial, and providing short-term incentives for quick market penetration.
खण्ड-ब / SECTION - B
1. एक प्रबन्धक की किन्हीं दो विशेषताओं को लिखिए।
Write any two characteristics of a Manager.
उत्तर: एक प्रबन्धक की दो विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- नेतृत्व क्षमता (Leadership): प्रबन्धक अपने अधीनस्थों को प्रेरित और मार्गदर्शन करता है ताकि संगठनात्मक लक्ष्य प्राप्त हो सकें।
- निर्णय लेने की क्षमता (Decision Making): प्रबन्धक विभिन्न विकल्पों में से सर्वोत्तम निर्णय लेता है और समस्याओं का समाधान करता है।
Answer: Two characteristics of a manager are: (1) Leadership – motivating and guiding subordinates to achieve organizational goals. (2) Decision Making – choosing the best option among alternatives and solving problems.
2. आप एक प्रबन्धक हैं, अपने संगठन में एक सम्पर्क अधिकारी की भूमिका कैसे अदा करेंगे ? समझाइए।
You are a Manager, how will you play the role of a Liaison Officer in your organization ? Explain.
उत्तर: एक प्रबन्धक के रूप में, मैं सम्पर्क अधिकारी (Liaison Officer) की भूमिका निम्नलिखित प्रकार से निभाऊंगा:
- संगठन के विभिन्न विभागों (जैसे उत्पादन, विपणन, वित्त) के बीच समन्वय स्थापित करना।
- बाहरी पक्षों (जैसे सरकारी एजेंसियाँ, आपूर्तिकर्ता, ग्राहक) से संपर्क बनाए रखना और सूचनाओं का आदान-प्रदान करना।
- संगठन के हितों का प्रतिनिधित्व करना और बाहरी संस्थाओं के साथ सहयोग सुनिश्चित करना।
- आंतरिक और बाहरी संचार को सुगम बनाना ताकि संगठन के लक्ष्य प्रभावी ढंग से प्राप्त हो सकें।
Answer: As a manager, I will play the role of a Liaison Officer by coordinating between different departments, maintaining contact with external parties (government, suppliers, customers), representing the organization’s interests, and facilitating internal and external communication to achieve organizational goals effectively.
3. विलियम औची की 'Z' विचारधारा के संदर्भ में 'सामूहिक निर्णयन' क्या है ?
What is the ‘Collective Decision Making’ in reference of William Ouchi’s ‘Z’ theory ?
उत्तर: विलियम औची की 'Z' विचारधारा में 'सामूहिक निर्णयन' (Collective Decision Making) का अर्थ है कि संगठन में निर्णय लेने की प्रक्रिया में सभी स्तरों के कर्मचारियों को शामिल किया जाता है। यह जापानी प्रबंधन शैली पर आधारित है, जहाँ सहमति और सहभागिता पर जोर दिया जाता है। इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है, निर्णयों की गुणवत्ता में सुधार होता है, और संगठन में सामंजस्य स्थापित होता है।
Answer: In William Ouchi’s ‘Z’ theory, ‘Collective Decision Making’ means involving employees at all levels in the decision-making process. Based on Japanese management style, it emphasizes consensus and participation, which boosts employee morale, improves decision quality, and fosters harmony in the organization.
4. “उद्यमिता पूँजी निर्माण को प्रोत्साहित करता है |” कैसे ?
“Entrepreneurship encourages capital formation.” How ?
उत्तर: उद्यमिता निम्नलिखित प्रकार से पूँजी निर्माण को प्रोत्साहित करती है:
- उद्यमी नए व्यवसाय शुरू करते हैं, जिससे बचत और निवेश को बढ़ावा मिलता है।
- वे संसाधनों का कुशल उपयोग करके अधिक उत्पादन और लाभ उत्पन्न करते हैं, जो पूँजी संचय में सहायक होता है।
- उद्यमिता से रोजगार के अवसर बढ़ते हैं, जिससे लोगों की आय बढ़ती है और बचत में वृद्धि होती है।
- यह वित्तीय संस्थाओं (बैंक, निवेशक) को ऋण और निवेश के माध्यम से पूँजी निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करता है।
Answer: Entrepreneurship encourages capital formation by starting new businesses that promote savings and investment, efficient use of resources to generate profits, creating employment and increasing income, and motivating financial institutions to contribute through loans and investments.
SS-3-Bus. Studies (Supp.)
5. “उद्यमी पैदा होते हैं, विकसित नहीं किए जा सकते हैं ।” कैसे ?
“Entrepreneurs are born, cannot be developed.” How ?
उत्तर: यह कथन इस विचार को दर्शाता है कि उद्यमिता के गुण जन्मजात होते हैं, जैसे जोखिम लेने की क्षमता, नवाचार, नेतृत्व और दूरदर्शिता। कुछ लोगों में ये गुण स्वाभाविक रूप से होते हैं, जिन्हें शिक्षा या प्रशिक्षण से पूरी तरह विकसित नहीं किया जा सकता। हालांकि, आधुनिक दृष्टिकोण यह मानता है कि उद्यमिता को प्रशिक्षण और अनुभव से भी विकसित किया जा सकता है।
6. बीमा के निम्न सामान्य कार्यों को समझाइए :
(अ) बचत का साधन
(ब) सामाजिक सुरक्षा
Explain the following general functions of insurance :
(A) Medium of saving
(B) Social Security
उत्तर:
- (अ) बचत का साधन: बीमा पॉलिसी के माध्यम से व्यक्ति नियमित प्रीमियम का भुगतान करता है, जो एक प्रकार की बचत है। पॉलिसी की अवधि पूरी होने पर बीमित राशि मिलती है, जो भविष्य की जरूरतों के लिए बचत का काम करती है।
- (ब) सामाजिक सुरक्षा: बीमा परिवार को आर्थिक संकट से बचाता है। दुर्घटना, बीमारी या मृत्यु की स्थिति में बीमा कंपनी आर्थिक सहायता प्रदान करती है, जिससे समाज में सुरक्षा की भावना बढ़ती है।
7. कौन-कौन सी वस्तु एवं सेवाएँ जी.एस.टी. में शामिल नहीं हैं ? किन्हीं दो के नाम लिखिए।
Which goods and services are not included in G.S.T. ? Write any two names.
उत्तर: जी.एस.टी. में शामिल नहीं होने वाली वस्तुएँ/सेवाएँ:
- पेट्रोलियम उत्पाद (पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, प्राकृतिक गैस)
- शराब (मानव उपभोग के लिए)
8. वस्तु व सेवा कर की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
Mention any two characteristics of Goods and Service Tax.
उत्तर: वस्तु एवं सेवा कर (GST) की दो विशेषताएँ:
- एकल कर: यह एक ही कर है जो केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए कई अप्रत्यक्ष करों (जैसे वैट, सेवा कर, उत्पाद शुल्क) को समाप्त करता है।
- इनपुट टैक्स क्रेडिट: इसमें व्यवसायों को अपने इनपुट पर चुकाए गए कर का क्रेडिट मिलता है, जिससे कर का बोझ कम होता है और कर चोरी पर रोक लगती है।
खण्ड-स (SECTION — C)
9. अपवाद द्वारा प्रबन्ध क्यों महत्त्वपूर्ण है ? किन्हीं चार बिन्दुओं को समझाइए।
Why management by exception is important ? Explain any four points.
उत्तर: अपवाद द्वारा प्रबंध (Management by Exception) का महत्व निम्नलिखित चार बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- समय की बचत: प्रबंधक केवल असामान्य या महत्वपूर्ण समस्याओं पर ध्यान देते हैं, नियमित कार्यों को अधीनस्थों पर छोड़ देते हैं, जिससे समय की बचत होती है।
- निर्णय क्षमता में सुधार: प्रबंधक केवल उन मामलों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो मानक से भिन्न होते हैं, जिससे उनकी निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
- अधिकार का विकेंद्रीकरण: यह अधीनस्थों को अधिक अधिकार और जिम्मेदारी देता है, जिससे उनका विकास होता है और प्रबंधक पर बोझ कम होता है।
- लागत में कमी: अनावश्यक निगरानी और रिपोर्टिंग से बचकर संगठन की परिचालन लागत कम होती है।
10. आपके विचार में, अभिप्रेरणा की किन्हीं चार विशेषताओं को बताइए।
In your opinion, mention any four characteristics of motivation.
उत्तर: अभिप्रेरणा (Motivation) की चार विशेषताएँ:
- मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया: यह एक आंतरिक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है जो व्यक्ति को लक्ष्य प्राप्ति की ओर प्रेरित करती है।
- लक्ष्य-उन्मुख: अभिप्रेरणा हमेशा किसी विशिष्ट लक्ष्य या उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए होती है।
- निरंतर प्रक्रिया: यह एक सतत प्रक्रिया है, क्योंकि मानवीय आवश्यकताएँ कभी समाप्त नहीं होतीं।
- व्यवहार को प्रभावित करना: यह व्यक्ति के व्यवहार को दिशा और तीव्रता प्रदान करती है, जिससे वह अधिक प्रयास करता है।
21.
निम्न को समझाइए :
(अ) स्पष्ट अनुबन्ध
(ब) विवक्षित अनुबन्ध
Explain the following :
(A) Express contract
(B) Implied contract
उत्तर / Answer:
(अ) स्पष्ट अनुबन्ध (Express Contract): यह वह अनुबन्ध है जिसमें प्रस्ताव और स्वीकृति शब्दों (मौखिक या लिखित) द्वारा स्पष्ट रूप से व्यक्त की जाती है। उदाहरण: A, B को 500 रुपये में एक पुस्तक बेचने का लिखित प्रस्ताव करता है और B उसे स्वीकार कर लेता है।
(ब) विवक्षित अनुबन्ध (Implied Contract): यह वह अनुबन्ध है जो पक्षों के आचरण या परिस्थितियों से निहित होता है, न कि शब्दों द्वारा स्पष्ट रूप से व्यक्त किया जाता है। उदाहरण: एक व्यक्ति बस में चढ़ता है और किराया देता है; यहाँ यात्रा का अनुबन्ध विवक्षित है।
22.
बाजी के ठहराव को उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Explain the wagering agreement with example.
उत्तर / Answer:
बाजी का ठहराव (Wagering Agreement) वह समझौता है जिसमें दो पक्ष किसी अनिश्चित घटना के परिणाम पर शर्त लगाते हैं, और विजेता को हारने वाले से एक निश्चित राशि मिलती है। यह भारतीय अनुबन्ध अधिनियम के अनुसार शून्य है।
उदाहरण: A और B इस बात पर शर्त लगाते हैं कि कल बारिश होगी या नहीं। यदि बारिश होती है, तो A, B से 100 रुपये जीतेगा; यदि नहीं होती, तो B, A से 100 रुपये जीतेगा। यह एक बाजी का ठहराव है क्योंकि दोनों पक्षों का लाभ या हानि पूरी तरह से अनिश्चित घटना पर निर्भर है।
23.
आपके विचार में, “उद्यमिता परिवर्तनों का परिणाम है” | कैसे ?
In your point of view, “Entrepreneurship is the result of changes”. How ?
उत्तर / Answer:
उद्यमिता परिवर्तनों का परिणाम है क्योंकि:
- तकनीकी परिवर्तन: नई तकनीकों (जैसे इंटरनेट, AI) के आने से उद्यमी नए उत्पाद और सेवाएँ विकसित करते हैं।
- सामाजिक परिवर्तन: बदलती जीवनशैली और उपभोक्ता प्राथमिकताएँ नए व्यवसायों के अवसर पैदा करती हैं।
- आर्थिक परिवर्तन: बाजार में उतार-चढ़ाव, मुद्रास्फीति आदि उद्यमियों को नए समाधान खोजने के लिए प्रेरित करते हैं।
- राजनीतिक/कानूनी परिवर्तन: सरकारी नीतियों में बदलाव (जैसे नए नियम, कर प्रोत्साहन) उद्यमिता को बढ़ावा देते हैं।
इस प्रकार, परिवर्तन ही उद्यमिता के लिए अवसर और आवश्यकता पैदा करते हैं।
24.
“बीमा दान नहीं है ।” क्या आप इस कथन से सहमत हैं ? स्पष्ट कीजिए ।
“Insurance is not donation.” Do you agree with this statement ? Explain.
उत्तर / Answer:
हाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ। बीमा दान नहीं है, क्योंकि:
- प्रीमियम का भुगतान: बीमा में बीमित व्यक्ति नियमित प्रीमियम का भुगतान करता है, जबकि दान में कोई भुगतान अपेक्षित नहीं होता।
- पारस्परिकता: बीमा एक अनुबन्ध है जिसमें बीमाकर्ता जोखिम उठाने के बदले प्रीमियम प्राप्त करता है; दान एकतरफा होता है।
- क्षतिपूर्ति का सिद्धांत: बीमा का उद्देश्य हानि की क्षतिपूर्ति करना है, न कि लाभ देना। दान में कोई क्षतिपूर्ति का सिद्धांत नहीं होता।
- कानूनी प्रवर्तनीयता: बीमा अनुबन्ध कानूनी रूप से बाध्यकारी है; दान स्वैच्छिक होता है और इसे लागू नहीं किया जा सकता।
इसलिए, बीमा एक वाणिज्यिक व्यवस्था है, दान नहीं।
25.
आर.जोसेफ मोनसेन के अनुसार, प्रबन्ध के सामाजिक उत्तरदायित्व के निम्न स्तरों को स्पष्ट कीजिए :
(अ) जन आकांक्षाओं का पूर्वानुमान
(ब) जन आकांक्षाओं का पोषण
According to R. Joseph Monsen, explain the following levels of social responsibility of management :
(A) Gauging the expectations of society.
(B) Nurturing the expectations of society.
उत्तर / Answer:
(अ) जन आकांक्षाओं का पूर्वानुमान (Gauging the expectations of society): इस स्तर पर प्रबंधन समाज की वर्तमान और भविष्य की अपेक्षाओं को समझने और मापने का प्रयास करता है। इसमें बाजार अनुसंधान, सर्वेक्षण, और हितधारकों के साथ संवाद शामिल है ताकि यह जाना जा सके कि समाज व्यवसाय से क्या चाहता है (जैसे पर्यावरण संरक्षण, नैतिक व्यवहार)।
(ब) जन आकांक्षाओं का पोषण (Nurturing the expectations of society): इस स्तर पर प्रबंधन समाज की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य करता है। इसमें सामाजिक कल्याण कार्यक्रम, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, और पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देना शामिल है। प्रबंधन समाज के साथ दीर्घकालिक संबंध बनाने और सकारात्मक प्रभाव डालने का प्रयास करता है।
खण्ड- स (SECTION - C)
26. आपूर्तिकर्ताओं के प्रति प्रबन्ध के सामाजिक उत्तरदायित्व के किन्हीं चार बिन्दुओं को समझाइए।
Explain any four points of social responsibility of management towards suppliers.
आपूर्तिकर्ताओं के प्रति प्रबन्ध के सामाजिक उत्तरदायित्व के चार बिन्दु:
- समय पर भुगतान: आपूर्तिकर्ताओं को उनके माल या सेवाओं का भुगतान निर्धारित समय पर किया जाना चाहिए, जिससे उनकी वित्तीय स्थिरता बनी रहे।
- उचित मूल्य: आपूर्तिकर्ताओं को उनके उत्पादों या सेवाओं का उचित और न्यायसंगत मूल्य दिया जाना चाहिए, न कि अनुचित दबाव डालकर मूल्य कम कराया जाए।
- सूचना का आदान-प्रदान: आपूर्तिकर्ताओं को मांग, गुणवत्ता मानकों और भविष्य की योजनाओं के बारे में समय पर और सटीक जानकारी प्रदान की जानी चाहिए।
- दीर्घकालिक संबंध: आपूर्तिकर्ताओं के साथ पारस्परिक विश्वास और सम्मान पर आधारित दीर्घकालिक संबंध विकसित किए जाने चाहिए, न कि केवल अल्पकालिक लाभ के लिए उनका शोषण किया जाए।
27. जी.एस.टी. के अन्तर्गत व्यापारी को कौन-कौन सी कर विवरणियाँ जमा करवानी होती हैं ? किन्हीं दो को समझाइए।
Which returns are submitted by the dealer under G.S.T. ? Explain any two.
जी.एस.टी. के अन्तर्गत व्यापारी द्वारा जमा करवाई जाने वाली प्रमुख कर विवरणियाँ:
- GSTR-1: यह बाह्य आपूर्तियों (आउटवर्ड सप्लाई) की विवरणी है, जिसमें व्यापारी अपनी सभी बिक्री, निर्यात और डेबिट/क्रेडिट नोट का विवरण देता है। यह मासिक या त्रैमासिक रूप से जमा की जाती है।
- GSTR-3B: यह एक सरलीकृत मासिक रिटर्न है, जिसमें व्यापारी अपनी कुल बिक्री, खरीद, देय कर और इनपुट टैक्स क्रेडिट का सारांश प्रस्तुत करता है। यह सबसे महत्वपूर्ण रिटर्न है जिसके आधार पर कर का भुगतान किया जाता है।
अन्य महत्वपूर्ण रिटर्न: GSTR-2A (ऑटो-पॉपुलेटेड इनवर्ड सप्लाई), GSTR-9 (वार्षिक रिटर्न)।
खण्ड- द (SECTION - D)
28. प्रबन्ध की किन्हीं छ: विशेषताओं को समझाइए।
अथवा
प्रबन्ध के किन्हीं छ: सिद्धान्तों को समझाइए।
Explain any six characteristics of Management. OR Explain any six principles of Management.
प्रबन्ध की छ: विशेषताएँ:
- सतत प्रक्रिया: प्रबन्ध एक सतत और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जो तब तक जारी रहती है जब तक संगठन अस्तित्व में है।
- लक्ष्य-उन्मुख: प्रबन्ध का प्रत्येक कार्य संगठन के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
- सार्वभौमिक: प्रबन्ध के सिद्धांत और तकनीकें सभी प्रकार के संगठनों (व्यावसायिक, सरकारी, गैर-लाभकारी) पर लागू होती हैं।
- बहु-आयामी: प्रबन्ध केवल एक कार्य नहीं है, बल्कि इसमें कार्य प्रबन्ध, लोगों का प्रबन्ध और उत्पादन/संचालन प्रबन्ध शामिल है।
- गतिशील: प्रबन्ध एक गतिशील प्रक्रिया है जो बदलते परिवेश के अनुसार स्वयं को ढालती है।
- अमूर्त शक्ति: प्रबन्ध को देखा या छुआ नहीं जा सकता, लेकिन इसके प्रभाव को संगठन के परिणामों में महसूस किया जा सकता है।
अथवा, प्रबन्ध के छ: सिद्धान्त (हेनरी फेयोल के अनुसार):
- कार्य का विभाजन: कार्य को छोटे-छोटे भागों में बांटने से विशेषज्ञता और दक्षता बढ़ती है।
- अधिकार और उत्तरदायित्व: अधिकार और उत्तरदायित्व का आपस में गहरा संबंध है; जहां अधिकार है, वहां उत्तरदायित्व भी होना चाहिए।
- अनुशासन: संगठन के नियमों और आदेशों का पालन करना आवश्यक है।
- आदेश की एकता: प्रत्येक कर्मचारी को केवल एक ही वरिष्ठ से आदेश प्राप्त करने चाहिए।
- दिशा की एकता: एक ही उद्देश्य वाली सभी गतिविधियों का संचालन एक ही योजना और एक ही प्रबन्धक के अंतर्गत होना चाहिए।
- पारिश्रमिक: कर्मचारियों को उनके कार्य के अनुरूप उचित और न्यायसंगत वेतन मिलना चाहिए।
29. विधि या सन्नियम क्या है ? भारतीय व्यापारिक विधि के स्रोतों को समझाइए।
अथवा
प्रपीड़न क्या है ? इसके वैधानिक प्रावधानों को समझाइए।
What is Law ? Explain the sources of Indian Business Law. OR What is Coercion ? Explain it’s legal provisions.
विधि (Law) की परिभाषा: विधि वह नियमों और विनियमों का समूह है जिसे राज्य द्वारा लागू किया जाता है और जो समाज में न्याय, व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए बनाया गया है। यह नागरिकों के आचरण को नियंत्रित करता है और उनके अधिकारों व कर्तव्यों को निर्धारित करता है।
भारतीय व्यापारिक विधि के स्रोत:
- विधानमंडल द्वारा निर्मित विधि (Legislation): संसद और राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित अधिनियम, जैसे भारतीय संविदा अधिनियम, 1872, कंपनी अधिनियम, 2013 आदि।
- न्यायिक निर्णय (Judicial Precedents): उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय, जो भविष्य के मामलों के लिए बाध्यकारी उदाहरण बन जाते हैं।
- रिवाज और परंपराएँ (Customs and Usages): लंबे समय से चली आ रही व्यापारिक प्रथाएँ, जिन्हें न्यायालयों द्वारा मान्यता प्राप्त है, जैसे व्यापारिक रीति-रिवाज।
- न्याय, समानता और सद्विवेक (Justice, Equity and Good Conscience): जहां कोई लिखित विधि या रिवाज नहीं है, वहां न्यायालय न्याय और समानता के सिद्धांतों के आधार पर निर्णय देते हैं।
- अंग्रेजी विधि (English Law): भारतीय विधि का अधिकांश भाग अंग्रेजी विधि पर आधारित है, विशेषकर व्यापारिक विधि के क्षेत्र में।
अथवा, प्रपीड़न (Coercion) की व्याख्या:
प्रपीड़न वह कार्य है जिसमें किसी व्यक्ति को किसी कार्य को करने या न करने के लिए बल प्रयोग या अवैध धमकी द्वारा मजबूर किया जाता है। भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 15 के अनुसार, प्रपीड़न में निम्नलिखित शामिल हैं:
- किसी व्यक्ति की मृत्यु या शारीरिक क्षति पहुंचाने की धमकी देना।
- किसी व्यक्ति को अवैध रूप से बंदी बनाना या उसकी संपत्ति को नष्ट करने की धमकी देना।
- किसी ऐसे कार्य को करना जो भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत अपराध है।
प्रपीड़न के वैधानिक प्रावधान:
- प्रपीड़न के तहत की गई संविदा (अनुबंध) वैकल्पिक (voidable) होती है, अर्थात पीड़ित पक्ष के पास संविदा को रद्द करने का अधिकार होता है।
- प्रपीड़न का प्रभाव केवल संविदा के पक्षकारों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यदि किसी तीसरे पक्ष पर प्रपीड़न किया गया हो, तब भी संविदा प्रभावित हो सकती है।
- प्रपीड़न के कारण संविदा के तहत प्राप्त लाभ को वापस करना होता है।
30. एक व्यापारी के नाते, कोई छ: व्यापार संवर्द्धन विधियों को समझाइए।
अथवा
एक व्यापारी के नाते, विज्ञापन के कोई छ: उद्देश्यों को समझाइए।
As a trader, explain any six Trade Promotion methods.
OR
As a trader, explain any six objectives of Advertisement.
व्यापार संवर्द्धन विधियाँ (Trade Promotion Methods) – कोई छः
- छूट एवं प्रोत्साहन (Discounts and Incentives): व्यापारी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए मूल्य में छूट, बल्क खरीद पर विशेष ऑफर या नकद छूट देते हैं।
- निःशुल्क नमूने (Free Samples): नए उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए ग्राहकों को मुफ्त नमूने वितरित किए जाते हैं, जिससे वे उत्पाद आज़मा सकें।
- प्रतियोगिताएँ एवं स्वीपस्टेक (Contests and Sweepstakes): ग्राहकों को भाग लेने और पुरस्कार जीतने का अवसर देकर उत्पाद में रुचि बढ़ाई जाती है।
- कूपन एवं वाउचर (Coupons and Vouchers): ग्राहकों को कूपन प्रदान किए जाते हैं जो अगली खरीद पर छूट या मुफ्त उत्पाद दिलाते हैं।
- प्रदर्शन एवं मेले (Demonstrations and Fairs): दुकानों या व्यापार मेलों में उत्पादों का प्रदर्शन किया जाता है ताकि ग्राहक उनके उपयोग और लाभों को समझ सकें।
- उपहार एवं बोनस (Gifts and Bonuses): एक निश्चित खरीद पर मुफ्त उपहार या अतिरिक्त उत्पाद दिए जाते हैं, जैसे "एक खरीदें, एक मुफ्त पाएं" ऑफर।
विज्ञापन के उद्देश्य (Objectives of Advertisement) – कोई छः
- जागरूकता पैदा करना (Creating Awareness): नए उत्पाद या सेवा के बारे में लोगों को सूचित करना और उनका ध्यान आकर्षित करना।
- जानकारी प्रदान करना (Providing Information): उत्पाद की विशेषताओं, उपयोग, मूल्य और उपलब्धता के बारे में विस्तृत जानकारी देना।
- रुचि उत्पन्न करना (Generating Interest): उपभोक्ताओं में उत्पाद के प्रति रुचि जगाना ताकि वे अधिक जानने के लिए प्रेरित हों।
- इच्छा निर्माण करना (Creating Desire): विज्ञापन के माध्यम से उपभोक्ताओं में उत्पाद को खरीदने की तीव्र इच्छा पैदा करना।
- कार्रवाई को प्रोत्साहित करना (Encouraging Action): उपभोक्ताओं को तुरंत खरीदारी करने या सेवा का उपयोग करने के लिए प्रेरित करना।
- ब्रांड निष्ठा बनाना (Building Brand Loyalty): मौजूदा ग्राहकों को ब्रांड के प्रति वफादार बनाए रखना और बार-बार खरीदारी को प्रोत्साहित करना।