RBSE Class 12th 2020 Agriculture-SS-84-2020 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2020
Subject Agriculture-SS-84-2020
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 12th 2020 Agriculture-SS-84-2020

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Rajasthan Board Class 12th Agriculture-SS-84-2020 2020 solved Previous Year Question Papers

कृषि विज्ञान (AGRICULTURE)

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2020

समय : ३ घण्टे १५ मिनट | पूर्णांक : 56

नामांक Roll No.

No. of Questions — 30

No. of Printed Pages — 7

SS-84-Agriculture

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.
  5. प्रश्न-पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपांतर में किसी प्रकार की त्रुटि/अंतर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को ही सही मानें।
    If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

SS-84-Agriculture [ Turn over

समोच्च खेती को परिभाषित कीजिए |

Define Contour farming.

समोच्च खेती (Contour Farming): यह एक कृषि पद्धति है जिसमें ढलान वाली भूमि पर फसलों की बुवाई और जुताई समोच्च रेखाओं (समान ऊँचाई वाली रेखाओं) के अनुदिश की जाती है। इसका उद्देश्य मिट्टी के कटाव को रोकना और जल संरक्षण करना है।

पी.के.वी.वाई. का पूरा नाम लिखिए |

Write the full name of PKVY.

पी.के.वी.वाई. (PKVY) का पूरा नाम: परंपरागत कृषि विकास योजना (Paramparagat Krishi Vikas Yojana) है।

मूँगफली की फसल में सिंचाई की क्रांतिक अवस्थाएँ लिखिए |

Write the critical stages for irrigation in groundnut crop.

मूँगफली की फसल में सिंचाई की क्रांतिक अवस्थाएँ:

  • फूल आने की अवस्था (Flowering stage)
  • फलियाँ बनने की अवस्था (Pegging stage)
  • फलियाँ भरने की अवस्था (Pod filling stage)

नकलची खरपतवार का एक उदाहरण लिखिए |

Give one example of Mimicry weed.

नकलची खरपतवार का उदाहरण: गेहूँ की फसल में उगने वाला बथुआ (Chenopodium album) या जंगली जई (Avena fatua) नकलची खरपतवार के उदाहरण हैं।

मिश्रित फसलें किसे कहते हैं ?

What are Mixed Crops ?

मिश्रित फसलें (Mixed Crops): जब एक ही खेत में एक साथ दो या दो से अधिक फसलों को बिना किसी निश्चित पंक्ति अनुपात के उगाया जाता है, तो उसे मिश्रित फसल कहते हैं। इसमें फसलों के बीजों को मिलाकर बोया जाता है।

मल्चिंग से क्या अभिप्राय है ? समझाइए |

What is meant by Mulching ? Explain it.

मल्चिंग (Mulching): मल्चिंग एक कृषि तकनीक है जिसमें मिट्टी की सतह को पुआल, पत्तियाँ, प्लास्टिक शीट या अन्य कार्बनिक/अकार्बनिक पदार्थों से ढक दिया जाता है। इसके लाभ हैं:

  • मिट्टी की नमी का संरक्षण होता है
  • खरपतवारों की वृद्धि नियंत्रित होती है
  • मिट्टी का तापमान नियंत्रित रहता है
  • मिट्टी के कटाव से बचाव होता है

“पंचगव्य” क्या है ?

What is ‘Panchgavya’ ?

पंचगव्य (Panchgavya): पंचगव्य एक जैविक खाद एवं कीटनाशक है जो गाय के पाँच उत्पादों - गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी से तैयार किया जाता है। इसका उपयोग फसलों की वृद्धि बढ़ाने और रोगों से बचाने के लिए किया जाता है।

गाय की कोई दो विदेशी नस्लों के नाम लिखिए |

Write any two names of exotic breeds of cow.

गाय की दो विदेशी नस्लें:

  • जर्सी (Jersey)
  • होल्सटीन फ्रीजियन (Holstein Friesian)

“एन्थ्रेक्स रोग” के रोगकारक का नाम लिखिए |

Write the name of causal organism of “Anthrax disease”.

एन्थ्रेक्स रोग का रोगकारक: एन्थ्रेक्स रोग का कारक जीवाणु बैसिलस एन्थ्रेसिस (Bacillus anthracis) है।

प्रश्न पत्र – कृषि (SS-84) 2020

लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. "टिक फीवर" रोग के दो लक्षण लिखिए।
    Write the two symptoms of Tick Fever disease.

    उत्तर: टिक फीवर (Tick Fever) रोग के दो प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:

    1. पशु के शरीर का तापमान अचानक बहुत अधिक बढ़ जाना (तेज बुखार आना)।
    2. पशु की भूख कम हो जाना और दूध उत्पादन में गिरावट आना।
  2. भारत में ऑपरेशन फ्लड का प्रथम चरण कब प्रारंभ किया गया?
    When was first phase of operation flood started in India?

    उत्तर: भारत में ऑपरेशन फ्लड का प्रथम चरण वर्ष 1970 में प्रारंभ किया गया था।

  3. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड का मुख्यालय कहाँ पर स्थित है?
    Where is the headquarters of National Dairy Development Board situated?

    उत्तर: राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) का मुख्यालय आनंद (गुजरात) में स्थित है।

  4. धान की फसल की जल माँग लिखिए।
    Write the water demand of Paddy crop.

    उत्तर: धान की फसल की जल माँग लगभग 1200-1500 मिमी (या 120-150 सेमी) होती है। यह फसल की अवधि, मिट्टी के प्रकार और जलवायु पर निर्भर करती है।

  5. मृदा उर्वरता व मृदा उत्पादकता में कोई दो अंतर लिखिए।
    Write any two differences between soil fertility and soil productivity.

    उत्तर: मृदा उर्वरता और मृदा उत्पादकता में दो अंतर:

    क्रम मृदा उर्वरता (Soil Fertility) मृदा उत्पादकता (Soil Productivity)
    1. यह मृदा में पोषक तत्वों की उपलब्धता को दर्शाती है। यह मृदा की फसल उत्पादन करने की क्षमता को दर्शाती है।
    2. यह मृदा का एक गुण है, जो पोषक तत्वों पर निर्भर करता है। यह मृदा के गुणों के साथ-साथ जलवायु, प्रबंधन आदि पर भी निर्भर करती है।
  6. बॉर्डर पट्टी सिंचाई विधि के कोई चार लाभ लिखिए।
    Write any four advantages of Border Strip Irrigation Method.

    उत्तर: बॉर्डर पट्टी सिंचाई विधि के चार लाभ:

    1. इस विधि में जल का समान वितरण होता है।
    2. जल की बर्बादी कम होती है और सिंचाई दक्षता अधिक होती है।
    3. इस विधि में श्रम और समय की बचत होती है।
    4. यह विधि विभिन्न प्रकार की फसलों के लिए उपयुक्त है।
  7. कोई चार शाकनाशियों के नाम लिखिए।
    Write any four name of herbicides.

    उत्तर: चार प्रमुख शाकनाशियों (Herbicides) के नाम:

    1. 2,4-D (2,4-डाइक्लोरोफेनोक्सीएसिटिक एसिड)
    2. ग्लाइफोसेट (Glyphosate)
    3. एट्राजीन (Atrazine)
    4. पैराक्वाट (Paraquat)
  8. चना की फसल में बीजोपचार को समझाइए।
    Explain the seed treatment in gram crop.

    उत्तर: चना की फसल में बीजोपचार का अर्थ बुवाई से पूर्व बीजों को रासायनिक या जैविक पदार्थों से उपचारित करना है। इसके अंतर्गत बीजों को फफूंदनाशक (जैसे थीरम या कार्बेन्डाजिम) से उपचारित किया जाता है ताकि मृदा जनित रोगों से बचाव हो सके। साथ ही, राइजोबियम कल्चर से बीजोपचार करने पर नाइट्रोजन स्थिरीकरण बढ़ता है, जिससे फसल की पैदावार में वृद्धि होती है।

  9. बाग में पौधे लगाने की आयताकार व पूरक/पंचवृक्ष विधियों का वर्णन कीजिए।
    Describe the rectangular and filler/quincunx system of planting in orchard.

    उत्तर:

    आयताकार विधि (Rectangular System): इस विधि में पौधों को आयताकार पैटर्न में लगाया जाता है, जहाँ पंक्तियों के बीच की दूरी और पौधों के बीच की दूरी समान नहीं होती। इसमें पंक्तियों के बीच की दूरी अधिक रखी जाती है, जिससे अंतर-पंक्ति कृषि कार्य आसानी से किए जा सकते हैं।

    पूरक/पंचवृक्ष विधि (Filler/Quincunx System): इस विधि में मुख्य पौधों के बीच में अतिरिक्त पौधे (फिलर पौधे) लगाए जाते हैं। इसमें चार कोनों पर मुख्य पौधे और बीच में एक फिलर पौधा लगाया जाता है, जिससे भूमि का अधिकतम उपयोग होता है। फिलर पौधे अल्पकालिक होते हैं और मुख्य पौधों के बड़े होने पर हटा दिए जाते हैं।

प्रश्न 9: फलोद्यान में अफलन के किन्हीं दो बाह्य कारकों का वर्णन कीजिए।

Describe any two external causes of unfruitfulness in orchard.

फलोद्यान में अफलन के दो बाह्य कारक:

  1. परागण की कमी (Lack of Pollination): यदि परागण करने वाले कीट (जैसे मधुमक्खियाँ) पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं या मौसम प्रतिकूल है, तो परागण ठीक से नहीं हो पाता, जिससे फल नहीं लगते।
  2. पोषक तत्वों की कमी (Nutrient Deficiency): मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश या सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होने पर पेड़ फल नहीं देते। विशेष रूप से फास्फोरस की कमी से फूल और फल कम लगते हैं।

प्रश्न 20: नमक व सिरका खाद्य पदार्थों के परिरक्षण में किस प्रकार सहायक है? समझाइए।

How salt and vinegar are helpful in preservation of food material? Explain it.

नमक (Salt): नमक खाद्य पदार्थों से पानी को बाहर निकालता है (परासरण द्वारा), जिससे सूक्ष्मजीवों (बैक्टीरिया, फफूंद) के विकास के लिए आवश्यक नमी कम हो जाती है। यह उनकी वृद्धि को रोकता है और भोजन को खराब होने से बचाता है।

सिरका (Vinegar): सिरका में एसिटिक अम्ल होता है, जो अम्लीय वातावरण बनाता है। अधिकांश हानिकारक सूक्ष्मजीव अम्लीय वातावरण में जीवित नहीं रह सकते। सिरका खाद्य पदार्थों के pH को कम करके उन्हें सुरक्षित रखता है।

प्रश्न 21: "पशु आवास प्रबंधन" हेतु ध्यान देने योग्य किन्हीं चार बिन्दुओं का उल्लेख कीजिए।

Write down any four points to be considered for "management of animal housing".

पशु आवास प्रबंधन के चार महत्वपूर्ण बिंदु:

  1. स्वच्छता (Cleanliness): आवास को नियमित रूप से साफ करना चाहिए ताकि बीमारियों से बचाव हो सके।
  2. वायु संचार (Ventilation): पर्याप्त हवा और रोशनी के लिए खिड़कियाँ और दरवाजे उचित स्थान पर होने चाहिए।
  3. जल निकासी (Drainage): पशुओं के मूत्र और पानी के निकास के लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए ताकि गंदगी न जमा हो।
  4. स्थान (Space): प्रत्येक पशु के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए ताकि वे आराम से खड़े हो सकें और लेट सकें।

प्रश्न 22: गाय की हरियाणा व राठी नस्ल की उपयोगिता लिखिए।

Write the utility of Haryana and Rathi breeds of cow.

हरियाणा नस्ल (Haryana breed): यह एक अच्छी दुधारू नस्ल है। इसका दूध पौष्टिक होता है और यह गर्म जलवायु में आसानी से ढल जाती है। इसका उपयोग दूध उत्पादन और खेती के कामों में भी किया जाता है।

राठी नस्ल (Rathi breed): यह राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती है। यह कम पानी और चारे में भी अच्छा दूध देती है। इसका दूध वसा से भरपूर होता है और यह रोगों से लड़ने की क्षमता रखती है।

प्रश्न 23: पशुओं में गलघोंट रोग के कोई चार लक्षण लिखिए।

Write any four symptoms of Haemorrhagic septicemia in animal.

गलघोंट रोग (Haemorrhagic Septicemia) के चार लक्षण:

  1. तेज बुखार (High Fever): पशु का तापमान 104-106°F तक बढ़ जाता है।
  2. सांस लेने में कठिनाई (Difficulty in Breathing): गले में सूजन के कारण सांस लेने में तकलीफ होती है और मुंह से लार निकलती है।
  3. गले में सूजन (Swelling in Throat): गले के नीचे और जीभ के पास सूजन आ जाती है।
  4. भूख न लगना (Loss of Appetite): पशु चारा-पानी छोड़ देता है और उदास रहता है।

प्रश्न 24: निम्न पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए:

Write short note on following:

(i) की विलेज योजना (Key Village Scheme)

की विलेज योजना (Key Village Scheme): यह भारत सरकार द्वारा पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई एक योजना है। इसके तहत चुनिंदा गांवों में उन्नत नस्ल के पशु रखे जाते हैं और कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा दी जाती है। इसका उद्देश्य देशी नस्लों में सुधार करना और दूध उत्पादन बढ़ाना है।

(ii) सहकारी डेयरी (Co-operative Dairy)

सहकारी डेयरी (Co-operative Dairy): यह एक ऐसा संगठन है जहाँ दूध उत्पादक किसान मिलकर दूध का संग्रह, प्रसंस्करण और विपणन करते हैं। इसका सबसे अच्छा उदाहरण अमूल (Amul) है। सहकारी डेयरी से किसानों को उचित मूल्य मिलता है और उपभोक्ताओं को शुद्ध दूध मिलता है।

प्रश्न 25: वानस्पतिक प्रवर्धन की निम्नांकित विधियों के उपयुक्त चित्र बनाइए:

Draw the suitable diagram of following vegetative propagation methods:

(i) शील्ड कलिकायन विधि (Shield budding method)

शील्ड कलिकायन विधि: इस विधि में एक कली (bud) को 'T' आकार के चीरे में डाला जाता है। चित्र में दिखाया गया है कि कैसे कली को छाल के नीचे रखा जाता है और फिर बांध दिया जाता है।

       _______
      |       |
      |  T    |
      |  आकार |
      |_______|
         |
         कली
         |
    ______|______
   |             |
   |   मूल पौधा  |
   |_____________|

(ii) साधारण लेयरिंग विधि (Simple layering method)

साधारण लेयरिंग विधि: इसमें एक शाखा को मोड़कर मिट्टी में दबा दिया जाता है। चित्र में दिखाया गया है कि शाखा का एक भाग मिट्टी में दबा है और उसमें से जड़ें निकल रही हैं।

    मूल पौधा
       |
       | शाखा
       |
    ___|___ मिट्टी
   |       |
   | जड़ें  |
   |_______|

(iii) माउण्ड या स्टूल लेयरिंग विधि (Mound or stool layering method)

माउण्ड या स्टूल लेयरिंग विधि: इसमें पौधे के आधार पर मिट्टी का ढेर (mound) लगाया जाता है। चित्र में दिखाया गया है कि कैसे तने के चारों ओर मिट्टी चढ़ाई जाती है और उसमें से नए पौधे निकलते हैं।

       नए पौधे
       / | \
      /  |  \
     /   |   \
    /    |    \
   /  मिट्टी   \
  /    का ढेर   \
 /_______________\
       मूल तना

प्रश्न 26

“हरी खाद” को परिभाषित कीजिए | हरी खाद की फसल के कोई चार वांछित गुण लिखिए |

Define Green Manure. Write any four desirable characters of a green manure crop.

हरी खाद की परिभाषा: हरी खाद एक कृषि पद्धति है जिसमें हरे पौधों (जैसे ढैंचा, सनई, लोबिया आदि) को खेत में जुताई करके मिट्टी में मिला दिया जाता है, ताकि वे सड़कर जैविक खाद का काम करें और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाएं।

हरी खाद की फसल के चार वांछित गुण:

  1. तेजी से बढ़ने वाली और अधिक हरा द्रव्यमान उत्पन्न करने वाली हो।
  2. नाइट्रोजन स्थिरीकरण की क्षमता हो (जैसे दलहनी फसलें)।
  3. मिट्टी में आसानी से सड़ने वाली हो।
  4. कम पानी और उर्वरक में भी अच्छी पैदावार देने वाली हो।

प्रश्न 27

पानक किसे कहते हैं ? पानक बनाने की विधि का वर्णन कीजिए ।

What is Squash ? Describe the method of squash preparation.

पानक (Squash) की परिभाषा: पानक एक गाढ़ा, मीठा फलों का रस होता है जिसे चीनी या शक्कर के साथ तैयार किया जाता है। इसे पानी में मिलाकर पेय के रूप में पिया जाता है।

पानक बनाने की विधि:

  1. ताजे फलों (जैसे नींबू, संतरा, आम) का रस निकाल लें।
  2. रस में चीनी (लगभग 1:1 अनुपात में) और साइट्रिक एसिड मिलाएं।
  3. मिश्रण को अच्छी तरह गर्म करें जब तक चीनी पूरी तरह घुल न जाए।
  4. ठंडा होने पर इसे साफ बोतलों में भरकर फ्रिज में रखें।
  5. पीने से पहले पानक को ठंडे पानी में मिलाकर परोसें।

प्रश्न 28

आलू की वैज्ञानिक खेती का वर्णन निम्न बिन्दुओं के आधार पर कीजिए :

(i) चार उन्नत किस्में
(ii) बीज दर प्रति हेक्टर व बीजोपचार
(iii) दो प्रमुख रोग
(iv) उपज प्रति हेक्टर

Describe the scientific cultivation of Potato on the basis of following points :

(i) Four improved varieties
(ii) Seed rate per hectare and seed treatment
(iii) Two important diseases
(iv) Yield per hectare

अथवा / OR

सरसों की वैज्ञानिक खेती का वर्णन निम्न बिन्दुओं के आधार पर कीजिए :

(i) चार उन्नत किस्में
(ii) बीज दर प्रति हेक्टर व बीजोपचार
(iii) दो प्रमुख रोग
(iv) उपज प्रति हेक्टर

Describe the scientific cultivation of Mustard on the basis of following points :

(i) Four improved varieties
(ii) Seed rate per hectare and seed treatment
(iii) Two important diseases
(iv) Yield per hectare

आलू की वैज्ञानिक खेती:

  1. चार उन्नत किस्में: कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी ज्योति, कुफरी बहार, कुफरी सिंदूरी।
  2. बीज दर प्रति हेक्टर व बीजोपचार: बीज दर 20-25 क्विंटल प्रति हेक्टर। बीजोपचार के लिए कंदों को मैंकोजेब या कार्बेन्डाजिम से उपचारित करें।
  3. दो प्रमुख रोग: अगेती झुलसा रोग (Early Blight) और पिछेती झुलसा रोग (Late Blight)।
  4. उपज प्रति हेक्टर: 200-250 क्विंटल प्रति हेक्टर (सिंचित क्षेत्रों में)।

सरसों की वैज्ञानिक खेती:

  1. चार उन्नत किस्में: वरुणा, पूसा बोल्ड, आरएच-30, आरएच-749।
  2. बीज दर प्रति हेक्टर व बीजोपचार: बीज दर 4-5 किग्रा प्रति हेक्टर। बीजोपचार के लिए थीरम या कार्बेन्डाजिम से उपचार करें।
  3. दो प्रमुख रोग: सफेद रस्ट (White Rust) और तना सड़न (Stem Rot)।
  4. उपज प्रति हेक्टर: 15-20 क्विंटल प्रति हेक्टर (सिंचित क्षेत्रों में)।

प्रश्न 29: आम की वैज्ञानिक खेती का वर्णन निम्न बिन्दुओं के आधार पर कीजिए :

(i) चार उन्नत किस्में (Four improved varieties)

  • दशहरी (Dasheri)
  • लंगड़ा (Langra)
  • चौसा (Chausa)
  • आल्फांसो (Alphonso)

(ii) प्रवर्धन (Propagation)

आम का प्रवर्धन प्रायः कलम (grafting) या बीज (seed) द्वारा किया जाता है। व्यावसायिक खेती में कलम विधि (जैसे वी-ग्राफ्टिंग) अधिक उपयुक्त है क्योंकि इससे पौधे की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता बनी रहती है।

(iii) पौधे लगाने की विधि (Planting method)

पौधों को 10 मीटर x 10 मीटर की दूरी पर गड्ढों में लगाया जाता है। गड्ढे 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के होते हैं, जिनमें खाद और मिट्टी मिलाकर भरा जाता है। रोपण वर्षा ऋतु (जुलाई-अगस्त) में किया जाता है।

(iv) दो प्रमुख कीट नाशी (Two important insect pests)

  • मैंगो हॉपर (Mango hopper) – इसके नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड (Imidacloprid) का छिड़काव करें।
  • फल मक्खी (Fruit fly) – इसके नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप (Pheromone trap) का उपयोग करें।

व्याख्या: आम की वैज्ञानिक खेती में उन्नत किस्मों का चयन, उचित प्रवर्धन विधि, सही रोपण दूरी और कीट नियंत्रण आवश्यक है। दशहरी, लंगड़ा, चौसा और आल्फांसो प्रमुख किस्में हैं। कलम विधि से पौधे तैयार किए जाते हैं और 10 मीटर की दूरी पर लगाए जाते हैं। मैंगो हॉपर और फल मक्खी मुख्य कीट हैं, जिनका रासायनिक या जैविक नियंत्रण किया जाता है।


अथवा

अमरूद की वैज्ञानिक खेती का वर्णन निम्न बिन्दुओं के आधार पर कीजिए :

(i) चार उन्नत किस्में (Four improved varieties)

  • लखनऊ-49 (Lucknow-49)
  • अलाहाबाद सफेदा (Allahabad Safeda)
  • हिसार सफेदा (Hisar Safeda)
  • बीबी-1 (BB-1)

(ii) प्रवर्धन (Propagation)

अमरूद का प्रवर्धन बीज, कलम (cutting) या ग्राफ्टिंग द्वारा किया जाता है। व्यावसायिक खेती में एयर लेयरिंग (air layering) या ग्राफ्टिंग विधि अधिक प्रचलित है।

(iii) पौधे लगाने की विधि (Planting method)

पौधों को 6 मीटर x 6 मीटर की दूरी पर गड्ढों में लगाया जाता है। गड्ढे 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर आकार के होते हैं, जिनमें गोबर की खाद और मिट्टी मिलाकर भरा जाता है। रोपण वर्षा ऋतु में किया जाता है।

(iv) दो प्रमुख कीट नाशी (Two important insect pests)

  • फल मक्खी (Fruit fly) – इसके नियंत्रण के लिए मैलाथियान (Malathion) का छिड़काव करें।
  • स्केल कीट (Scale insect) – इसके नियंत्रण के लिए नीम तेल (Neem oil) का उपयोग करें।

व्याख्या: अमरूद की वैज्ञानिक खेती में लखनऊ-49, अलाहाबाद सफेदा, हिसार सफेदा और बीबी-1 उन्नत किस्में हैं। प्रवर्धन एयर लेयरिंग या ग्राफ्टिंग द्वारा किया जाता है। पौधों को 6 मीटर की दूरी पर लगाया जाता है। फल मक्खी और स्केल कीट मुख्य कीट हैं, जिनका रासायनिक या जैविक नियंत्रण किया जाता है।

प्रश्न 30

गाय की नागौरी नस्ल का वर्णन निम्न बिन्दुओं के आधार पर कीजिए :

  1. उत्पत्ति स्थान
  2. वितरण
  3. कोई दो विशेषताएँ
  4. उपयोगिता

अथवा

गाय की थारपारकर नस्ल का वर्णन निम्न बिन्दुओं के आधार पर कीजिए :

  1. उत्पत्ति स्थान
  2. वितरण
  3. कोई दो विशेषताएँ
  4. उपयोगिता

Describe the Nagori breed of cow on the basis of following points :

  1. Origin
  2. Distribution
  3. Any two characteristics
  4. Utility

OR

Describe the Tharparkar breed of cow on the basis of following points :

  1. Origin
  2. Distribution
  3. Any two characteristics
  4. Utility

नागौरी नस्ल का वर्णन

  1. उत्पत्ति स्थान (Origin): यह नस्ल राजस्थान के नागौर जिले से उत्पन्न हुई है।
  2. वितरण (Distribution): यह मुख्यतः राजस्थान के नागौर, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर जिलों में पाई जाती है।
  3. कोई दो विशेषताएँ (Any two characteristics):
    • इस नस्ल का शरीर मध्यम आकार का, सफेद या हल्के भूरे रंग का होता है।
    • इसके सींग छोटे और मोटे होते हैं तथा यह अत्यधिक सहनशील और कठोर परिस्थितियों में रहने में सक्षम होती है।
  4. उपयोगिता (Utility): यह मुख्यतः दुधारू नस्ल है, जो अच्छी मात्रा में दूध देती है। इसके अलावा इसका उपयोग कृषि कार्यों में भी किया जाता है।

थारपारकर नस्ल का वर्णन

  1. उत्पत्ति स्थान (Origin): यह नस्ल राजस्थान के थारपारकर क्षेत्र (वर्तमान पाकिस्तान के सिंध प्रांत) से उत्पन्न हुई है।
  2. वितरण (Distribution): यह मुख्यतः राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर जिलों में पाई जाती है।
  3. कोई दो विशेषताएँ (Any two characteristics):
    • इस नस्ल का शरीर मध्यम से बड़ा, सफेद या हल्के भूरे रंग का होता है तथा इसकी त्वचा ढीली और मुलायम होती है।
    • इसके सींग मध्यम आकार के, पीछे की ओर मुड़े होते हैं और यह अत्यधिक गर्मी सहन करने में सक्षम होती है।
  4. उपयोगिता (Utility): यह एक उत्कृष्ट दुधारू नस्ल है, जो अधिक मात्रा में दूध देती है। इसका उपयोग कृषि कार्यों और बोझा ढोने में भी किया जाता है।