RBSE Class 12th 2020 Economics-SS-10-2020 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2020
Subject Economics-SS-10-2020
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th Economics-SS-10-2020 2020 solved Previous Year Question Papers

अर्थशास्त्र (ECONOMICS)

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2020

समय : 3¼ घण्टे    पूर्णांक : 80

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.

No. of Questions — 30
No. of Printed Pages — 7
SS-10-Econ.


निर्देश (Instructions)

  1. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.
  2. प्रश्न-पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपांतर में किसी प्रकार की त्रुटि/अंतर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को ही सही मानें।
    If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

खण्ड (Section) विवरण

खण्ड (Section) प्रश्न संख्या (Q. Nos.) अंक प्रत्येक प्रश्न (Marks per question) उत्तर की शब्द सीमा (Word limit of answer)
a 1 1 10 शब्द (10 words)
2-8 2 20 शब्द (20 words)
9-27 4 30-40 शब्द (30-40 words)
28-30 6 250-300 शब्द (250-300 words)

प्रश्न क्रमांक 28, 29 तथा 30 में आन्तरिक विकल्प हैं।
Question Nos. 28, 29 and 30 have internal choices.

खण्ड -अ / SECTION —-A

  1. अर्थशास्त्र की किस शाखा में हम सामान्य आय व रोजगार के सिद्धांत का अध्ययन करते हैं ?

    In which branch of economics do we study the general theory of income and employment?

    उत्तर: समष्टि अर्थशास्त्र (Macroeconomics) में।

    Answer: In Macroeconomics.

  2. किसके अनुसार अर्थशास्त्र धन का अध्ययन है ?

    According to whom economics is the study of wealth?

    उत्तर: एडम स्मिथ (Adam Smith) के अनुसार।

    Answer: According to Adam Smith.

  3. साधनों की सीमितता से क्या अभिप्राय है ?

    What is meant by limitation of resources?

    उत्तर: साधनों की सीमितता का अर्थ है कि उत्पादन के साधन (भूमि, श्रम, पूंजी, उद्यम) मानवीय आवश्यकताओं की तुलना में अपर्याप्त या सीमित मात्रा में उपलब्ध होते हैं।

    Answer: Limitation of resources means that the factors of production (land, labour, capital, enterprise) are available in insufficient or limited quantity compared to human wants.

  4. पूर्ति से क्या आशय है ?

    What is meant by supply?

    उत्तर: पूर्ति से आशय किसी वस्तु की वह मात्रा है जो विक्रेता किसी निश्चित समय में दी गई कीमत पर बेचने को तैयार होते हैं।

    Answer: Supply refers to the quantity of a commodity that sellers are willing to sell at a given price during a specific period.

  5. श्रम प्रधान तकनीक को परिभाषित कीजिए।

    Define labour intensive techniques.

    उत्तर: श्रम प्रधान तकनीक वह उत्पादन विधि है जिसमें पूंजी की तुलना में श्रम का अधिक उपयोग किया जाता है। इसमें उत्पादन के लिए अधिक श्रमिकों की आवश्यकता होती है।

    Answer: Labour intensive technique is a method of production in which more labour is used compared to capital. It requires more workers for production.

  6. दो शीघ्रनाशक वस्तुओं के नाम लिखिए।

    Write the name of two perishable goods.

    उत्तर: दूध और फल (जैसे केला, आम) शीघ्रनाशक वस्तुएँ हैं।

    Answer: Milk and fruits (like banana, mango) are perishable goods.

  7. स्टॉक से क्या आशय है ?

    What is meant by stock?

    उत्तर: स्टॉक से आशय किसी वस्तु की वह कुल मात्रा है जो किसी निश्चित समय पर बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध होती है या उपलब्ध कराई जा सकती है।

    Answer: Stock refers to the total quantity of a commodity that is available or can be made available for sale in the market at a given point of time.

  8. मूल्यहास से क्या आशय है ?

    What is meant by depreciation?

    उत्तर: मूल्यहास से आशय स्थायी परिसंपत्तियों (जैसे मशीनरी, भवन) के मूल्य में समय के साथ घिसावट, अप्रचलन या उपयोग के कारण होने वाली कमी से है।

    Answer: Depreciation refers to the decrease in the value of fixed assets (like machinery, buildings) over time due to wear and tear, obsolescence, or usage.

  9. सकल निवेश से आप क्या समझते हैं ?

    What do you understand by Gross Investment?

    उत्तर: सकल निवेश से आशय किसी अर्थव्यवस्था में एक निश्चित अवधि में पूंजीगत वस्तुओं (जैसे मशीनरी, भवन, उपकरण) पर किए गए कुल व्यय से है, जिसमें मूल्यहास भी शामिल होता है।

    Answer: Gross Investment refers to the total expenditure on capital goods (like machinery, buildings, equipment) in an economy during a specific period, which includes depreciation.

  10. सन्तुलित बजट को परिभाषित कीजिए।

    Define Balanced Budget.

    उत्तर: सन्तुलित बजट वह बजट है जिसमें सरकार का कुल अनुमानित राजस्व, उसके कुल अनुमानित व्यय के बराबर होता है। अर्थात्, आय = व्यय।

    Answer: A balanced budget is a budget in which the government's total estimated revenue equals its total estimated expenditure. That is, Income = Expenditure.

खण्ड-ब / SECTION - B

  1. स्थैतिक विश्लेषण एवं प्रावैगिक विश्लेषण को संक्षेप में समझाइए।

    Explain briefly static analysis and dynamic analysis. [2]

    स्थैतिक विश्लेषण (Static Analysis): इसमें अर्थव्यवस्था का अध्ययन एक निश्चित बिंदु पर किया जाता है, जहाँ समय का कोई परिवर्तन नहीं माना जाता। यह संतुलन की स्थिति का विश्लेषण करता है।

    प्रावैगिक विश्लेषण (Dynamic Analysis): इसमें अर्थव्यवस्था का अध्ययन समय के विभिन्न बिंदुओं पर किया जाता है। यह एक संतुलन से दूसरे संतुलन तक पहुँचने की प्रक्रिया का विश्लेषण करता है तथा समय को एक चर के रूप में शामिल करता है।

  2. बजट रेखा का रेखाचित्र बनाइए।

    Draw the budget line diagram. [2]

    बजट रेखा (Budget Line) उन सभी संभावित उपभोग बंडलों को दर्शाती है जिन्हें उपभोक्ता अपनी दी गई आय और वस्तुओं की कीमतों पर खरीद सकता है।

    रेखाचित्र: एक ग्राफ लें जिसमें X-अक्ष पर वस्तु X (जैसे सेब) और Y-अक्ष पर वस्तु Y (जैसे संतरे) की मात्रा हो। बजट रेखा एक नीचे की ओर ढलान वाली सीधी रेखा होती है जो दोनों अक्षों को काटती है। यदि आय ₹100 है, वस्तु X की कीमत ₹10 प्रति इकाई और वस्तु Y की कीमत ₹5 प्रति इकाई है, तो बजट रेखा X-अक्ष पर 10 इकाई (100/10) और Y-अक्ष पर 20 इकाई (100/5) पर काटेगी।

  3. पूर्ण प्रतियोगिता बाजार की कोई दो विशेषताएँ बताइए।

    State any two features of perfect competition market. [2]

    1. बड़ी संख्या में क्रेता और विक्रेता (Large number of buyers and sellers): बाजार में इतने अधिक क्रेता और विक्रेता होते हैं कि कोई भी एक क्रेता या विक्रेता बाजार मूल्य को प्रभावित नहीं कर सकता।
    2. समरूप उत्पाद (Homogeneous product): सभी फर्मों द्वारा बेचा जाने वाला उत्पाद एक-दूसरे का पूर्ण स्थानापन्न होता है। खरीदार किसी एक विक्रेता के उत्पाद को दूसरे से अलग नहीं कर सकता।
  4. बाजार कीमत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNPMP) से साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।

    Write the formula to calculate Net National Product at factor cost from Net National Product at Market Price (NNPMP). [2]

    सूत्र:

    NNPFC = NNPMP – शुद्ध अप्रत्यक्ष कर (Net Indirect Taxes)

    जहाँ, शुद्ध अप्रत्यक्ष कर = अप्रत्यक्ष कर – सब्सिडी

  5. यदि बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद (GDPMP) ₹ 4,000 करोड़ तथा मूल्यह्रास ₹ 800 करोड़ है, तो बाजार कीमत पर शुद्ध घरेलू उत्पाद (NDPMP) ज्ञात कीजिए।

    If Gross Domestic Product at market price is ₹ 4,000 crore and depreciation is ₹ 800 crore then calculate Net Domestic Product at market price. [2]

    हल:

    NDPMP = GDPMP – मूल्यह्रास (Depreciation)

    NDPMP = ₹ 4,000 करोड़ – ₹ 800 करोड़

    NDPMP = ₹ 3,200 करोड़

  6. प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों के अनुसार समग्र पूर्ति संकल्पना को समझाइए।

    According to classical economists explain the concept of aggregate supply. [2]

    प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों के अनुसार, समग्र पूर्ति (Aggregate Supply) का तात्पर्य अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार स्तर पर उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं के कुल मूल्य से है। उनका मानना था कि अर्थव्यवस्था सदैव पूर्ण रोजगार स्तर पर संचालित होती है (से का बाजार नियम - Say's Law of Markets), जिसके अनुसार "पूर्ति अपनी मांग स्वयं सृजित करती है"। इस प्रकार, समग्र पूर्ति वक्र (AS Curve) पूर्ण रोजगार स्तर पर ऊर्ध्वाधर (Vertical) होता है, जो दर्शाता है कि उत्पादन मूल्य स्तर से स्वतंत्र है।

  7. पूरक बजट को संक्षेप में समझाइए।

    Explain briefly the supplementary budget. [2]

    पूरक बजट (Supplementary Budget) वह बजट होता है जो मुख्य बजट पारित होने के बाद वित्तीय वर्ष के दौरान संसद में प्रस्तुत किया जाता है। इसकी आवश्यकता तब होती है जब किसी मद पर मूल बजट में आवंटित राशि अपर्याप्त हो या कोई नई अनियोजित व्यय आवश्यकता उत्पन्न हो जाए। यह सरकार को अतिरिक्त व्यय करने या करों में परिवर्तन करने की अनुमति देता है।

  8. 'भीम ऐप' को समझाइए।

    Explain 'BHIM app'. [2]

    भीम ऐप (BHIM App - Bharat Interface for Money) भारत सरकार द्वारा विकसित एक डिजिटल भुगतान एप्लिकेशन है। यह यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर आधारित है, जो स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं को बैंक खातों के बीच तुरंत और सुरक्षित रूप से धन हस्तांतरण करने की सुविधा देता है। इसका उपयोग करने के लिए केवल एक UPI पिन की आवश्यकता होती है, और लेन-देन वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA) या मोबाइल नंबर के माध्यम से किया जा सकता है।

खण्ड-स

SECTION — C

9. SOMA के संतुलन को तटस्थता वक्रों की सहायता से समझाइए।

Explain the consumer’s equilibrium with the help of the indifference curves. (2+2=4)

उत्तर: उपभोक्ता का संतुलन वह स्थिति है जहाँ वह अपनी आय से अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करता है। तटस्थता वक्र विश्लेषण में यह संतुलन निम्नलिखित शर्तों पर निर्भर करता है:

  1. स्पर्श रेखा की शर्त: तटस्थता वक्र (IC) बजट रेखा (BL) को स्पर्श करे। इस बिंदु पर, MRS (सीमांत प्रतिस्थापन दर) = वस्तुओं की कीमतों का अनुपात (Px/Py) होता है।
  2. उत्तलता की शर्त: तटस्थता वक्र मूल बिंदु की ओर उत्तल होना चाहिए, ताकि MRS घटती रहे।

रेखाचित्र में, बिंदु E पर IC₂ बजट रेखा AB को स्पर्श करता है, जो उपभोक्ता के लिए अधिकतम संतुष्टि का बिंदु है। इस बिंदु पर उपभोक्ता वस्तु X की OX₁ मात्रा और वस्तु Y की OY₁ मात्रा खरीदता है।

20. निम्न समंकों से उत्पादक 'B' की पूर्ति की गणना कीजिए:

Calculate the supply of Producer ‘B’ from the following data: (4)

वस्तु की कीमत (₹) 5 10 15 20
उत्पादक 'A' द्वारा पूर्ति 7 2 9 28
उत्पादक 'B' द्वारा पूर्ति ? ? ? ?
बाजार पूर्ति 20 30 50 100

हल: बाजार पूर्ति = उत्पादक 'A' की पूर्ति + उत्पादक 'B' की पूर्ति। अतः उत्पादक 'B' की पूर्ति = बाजार पूर्ति - उत्पादक 'A' की पूर्ति।

  • ₹5 कीमत पर: 20 - 7 = 13
  • ₹10 कीमत पर: 30 - 2 = 28
  • ₹15 कीमत पर: 50 - 9 = 41
  • ₹20 कीमत पर: 100 - 28 = 72

अतः उत्पादक 'B' की पूर्ति क्रमशः 13, 28, 41 और 72 इकाई है।

21. पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत अल्पकालीन बाजार में रेखाचित्र की सहायता से साम्य कीमत को समझाइए।

Explain the equilibrium price in short-period market in perfect competition with the help of diagram. (2+2=4)

उत्तर: पूर्ण प्रतियोगिता में अल्पकालीन साम्य कीमत वह कीमत है जिस पर बाजार की माँग और बाजार की पूर्ति बराबर होती है। रेखाचित्र में, माँग वक्र DD और पूर्ति वक्र SS बिंदु E पर प्रतिच्छेद करते हैं, जहाँ साम्य कीमत OP और साम्य मात्रा OQ निर्धारित होती है।

यदि कीमत OP से अधिक है, तो पूर्ति अधिक होगी और कीमत घटकर OP पर आ जाएगी। यदि कीमत OP से कम है, तो माँग अधिक होगी और कीमत बढ़कर OP पर आ जाएगी। इस प्रकार, बाजार स्वतः साम्य की ओर बढ़ता है।

22. आपकी दृष्टि में, एकाधिकारात्मक प्रतियोगिता की कोई चार विशेषताएँ बताइए।

In your view, mention any four features of Monopolistic competition. (1×4=4)

उत्तर: एकाधिकारात्मक प्रतियोगिता की चार प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  1. बड़ी संख्या में विक्रेता: बाजार में अनेक विक्रेता होते हैं, जो समान लेकिन विभेदित उत्पाद बेचते हैं।
  2. उत्पाद विभेदीकरण: प्रत्येक विक्रेता अपने उत्पाद को ब्रांड, गुणवत्ता, डिज़ाइन आदि के आधार पर अलग बनाता है, जिससे उसे एकाधिकार जैसी शक्ति मिलती है।
  3. प्रवेश और निकास की स्वतंत्रता: नई फर्में बाजार में आसानी से प्रवेश कर सकती हैं और पुरानी फर्में बाहर निकल सकती हैं।
  4. गैर-मूल्य प्रतियोगिता: फर्में कीमत के अलावा विज्ञापन, पैकेजिंग, बिक्री-पश्चात सेवा आदि के माध्यम से प्रतिस्पर्धा करती हैं।

खण्ड - स (Section - C)

23. बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद की परिभाषा एवं सूत्र लिखिए।

Write the definition and formula of Gross Domestic Product at market price. (2+2=4)

परिभाषा: बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP at Market Price) किसी देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर एक निश्चित अवधि (सामान्यतः एक वर्ष) में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के बाजार मूल्य का योग है। इसमें उत्पादन पर अप्रत्यक्ष कर (जैसे GST) शामिल होते हैं और सरकारी सब्सिडी घटा दी जाती है।

सूत्र:

GDPMP = GDPFC + अप्रत्यक्ष कर - सब्सिडी

या

GDPMP = C + I + G + (X - M)

जहाँ: C = निजी उपभोग व्यय, I = सकल निजी निवेश, G = सरकारी व्यय, X = निर्यात, M = आयात

24. साख सूजन की कोई चार सीमाएँ स्पष्ट कीजिए।

Explain any four limitations of credit creations. (1×4=4)

साख सूजन (Credit Creation) की प्रक्रिया की निम्नलिखित चार प्रमुख सीमाएँ हैं:

  1. नकद आरक्षित अनुपात (CRR): बैंकों को अपनी कुल जमा का एक निश्चित प्रतिशत केंद्रीय बैंक के पास नकद रखना होता है, जिससे ऋण देने की क्षमता सीमित हो जाती है।
  2. नकदी निकासी की प्रवृत्ति: यदि लोग बैंकों से अधिक नकदी निकालते हैं, तो बैंकों के पास ऋण देने के लिए कम धनराशि बचती है।
  3. सुरक्षा के लिए अतिरिक्त आरक्षित निधि: बैंक अपनी सुरक्षा के लिए कानूनी आवश्यकता से अधिक नकदी रखते हैं, जिससे साख सूजन की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
  4. ऋण की माँग: यदि अर्थव्यवस्था में ऋण लेने की माँग कम है, तो बैंक अधिक ऋण नहीं दे सकते, भले ही उनके पास पर्याप्त निधि हो।

25. प्रेरित निवेश को रेखाचित्र की सहायता से स्पष्ट कीजिए।

Explain the induced investment with the help of diagram. (2+2=4)

प्रेरित निवेश (Induced Investment): प्रेरित निवेश वह निवेश है जो आय या उत्पादन के स्तर में परिवर्तन के कारण होता है। जब आय बढ़ती है, तो वस्तुओं और सेवाओं की माँग बढ़ती है, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश किया जाता है। यह आय का एक फलन है: I = f(Y), जहाँ I निवेश और Y आय है।

रेखाचित्र:

[रेखाचित्र: एक ग्राफ जिसमें X-अक्ष पर आय (Y) और Y-अक्ष पर निवेश (I) दर्शाया गया है। प्रेरित निवेश वक्र (II) ऊपर की ओर ढलान वाला है, जो दर्शाता है कि आय बढ़ने पर निवेश बढ़ता है।]

ग्राफ में, प्रेरित निवेश वक्र (II) धनात्मक ढलान वाला होता है, जो आय और निवेश के बीच सीधा संबंध दर्शाता है। जब आय Y₁ से बढ़कर Y₂ होती है, तो निवेश I₁ से बढ़कर I₂ हो जाता है।

26. आपकी दृष्टि में, राजकोषीय नीति के अन्तर्गत सरकार द्वारा कौन से उपाय अपनाने चाहिए?

In your view, what are the steps taken by the government under the fiscal policy? (4)

राजकोषीय नीति (Fiscal Policy) के अंतर्गत सरकार द्वारा निम्नलिखित प्रमुख उपाय अपनाए जाने चाहिए:

  1. सरकारी व्यय में परिवर्तन: मंदी के समय सरकारी व्यय बढ़ाकर माँग को प्रोत्साहित किया जाता है, जबकि मुद्रास्फीति के समय व्यय घटाकर माँग को नियंत्रित किया जाता है।
  2. करों में परिवर्तन: मंदी में करों में कमी करके लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाई जाती है, जबकि मुद्रास्फीति में कर बढ़ाकर माँग को कम किया जाता है।
  3. सार्वजनिक ऋण प्रबंधन: सरकार बाजार से उधार लेकर या ऋण चुकाकर अर्थव्यवस्था में तरलता को नियंत्रित करती है।
  4. बजट घाटा/अधिशेष: मंदी में घाटे का बजट (व्यय > आय) और मुद्रास्फीति में अधिशेष बजट (आय > व्यय) अपनाया जाता है।

27. आपके अनुसार, आर्थिक नीति के उपकरण के रूप में बजट का क्या महत्त्व है?

In your view, what is the importance of budget as an instrument of economic policies? (4)

आर्थिक नीति के उपकरण के रूप में बजट का निम्नलिखित महत्त्व है:

  1. संसाधनों का आवंटन: बजट के माध्यम से सरकार विभिन्न क्षेत्रों (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढाँचा) में संसाधनों का आवंटन करती है, जिससे आर्थिक विकास को दिशा मिलती है।
  2. आय का पुनर्वितरण: प्रगतिशील कर प्रणाली और कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से बजट आय असमानता को कम करने में सहायक होता है।
  3. आर्थिक स्थिरीकरण: बजट के माध्यम से सरकार मंदी और मुद्रास्फीति जैसी आर्थिक अस्थिरताओं को नियंत्रित करती है।
  4. आर्थिक विकास को प्रोत्साहन: बजट में पूंजीगत व्यय, कर प्रोत्साहन और सब्सिडी के माध्यम से निवेश और उत्पादन को बढ़ावा दिया जाता है।

खण्ड - द (Section - D)

28. माँग वक्र किसे कहते हैं? माँग वक्र के दाहिनी ओर एवं बायीं ओर खिसकने को रेखाचित्र की सहायता से समझाइए।

What is Demand Curve? Explain the shift in demand curve to the right and left with the help of diagrams. (2+2+2=6)

माँग वक्र (Demand Curve): माँग वक्र एक रेखाचित्रीय निरूपण है जो किसी वस्तु की कीमत और उसकी माँगी गई मात्रा के बीच संबंध को दर्शाता है। यह सामान्यतः नीचे की ओर ढलान वाला होता है, जो माँग के नियम (कीमत बढ़ने पर माँग घटती है) को प्रदर्शित करता है।

माँग वक्र का दाहिनी ओर खिसकना (Shift to the Right):

[रेखाचित्र 1: X-अक्ष पर मात्रा, Y-अक्ष पर कीमत। मूल माँग वक्र D₁ से दाईं ओर D₂ पर स्थानांतरण।]

जब माँग वक्र दाईं ओर खिसकता है, तो प्रत्येक कीमत पर माँगी गई मात्रा बढ़ जाती है। यह निम्न कारणों से होता है:

  • उपभोक्ताओं की आय में वृद्धि
  • संबंधित वस्तु की कीमत में परिवर्तन (पूरक वस्तु की कीमत घटना या स्थानापन्न वस्तु की कीमत बढ़ना)
  • उपभोक्ताओं की पसंद में बदलाव
  • जनसंख्या में वृद्धि

माँग वक्र का बायीं ओर खिसकना (Shift to the Left):

[रेखाचित्र 2: X-अक्ष पर मात्रा, Y-अक्ष पर कीमत। मूल माँग वक्र D₁ से बाईं ओर D₂ पर स्थानांतरण।]

जब माँग वक्र बाईं ओर खिसकता है, तो प्रत्येक कीमत पर माँगी गई मात्रा घट जाती है। यह निम्न कारणों से होता है:

  • उपभोक्ताओं की आय में कमी
  • संबंधित वस्तु की कीमत में परिवर्तन (पूरक वस्तु की कीमत बढ़ना या स्थानापन्न वस्तु की कीमत घटना)
  • उपभोक्ताओं की पसंद में प्रतिकूल बदलाव
  • जनसंख्या में कमी

अथवा (OR)

पूरक एवं स्थानापन्न वस्तुएँ किसे कहते हैं? वस्तु की कीमत में वृद्धि का इन वस्तुओं की माँग पर प्रभाव को रेखाचित्र की सहायता से समझाइए।

What are the complementary goods and substitute goods? Explain the effect of increase of price on the demand of these goods with the help of diagrams. (2+2+2=6)

पूरक वस्तुएँ (Complementary Goods): पूरक वस्तुएँ वे वस्तुएँ हैं जिनका उपयोग एक साथ किया जाता है, जैसे कार और पेट्रोल, चाय और चीनी। एक वस्तु की कीमत में परिवर्तन दूसरी वस्तु की माँग को विपरीत दिशा में प्रभावित करता है।

स्थानापन्न वस्तुएँ (Substitute Goods): स्थानापन्न वस्तुएँ वे वस्तुएँ हैं जो एक-दूसरे की जगह ले सकती हैं, जैसे चाय और कॉफी, कोक और पेप्सी। एक वस्तु की कीमत में परिवर्तन दूसरी वस्तु की माँग को समान दिशा में प्रभावित करता है।

वस्तु की कीमत में वृद्धि का प्रभाव:

पूरक वस्तुओं पर प्रभाव:

[रेखाचित्र 1: X-अक्ष पर पूरक वस्तु की मात्रा, Y-अक्ष पर कीमत। मूल वस्तु की कीमत बढ़ने पर पूरक वस्तु का माँग वक्र बाईं ओर खिसकता है।]

यदि वस्तु A (जैसे कार) की कीमत बढ़ती है, तो इसकी माँग घटती है। परिणामस्वरूप, इसकी पूरक वस्तु B (जैसे पेट्रोल) की माँग भी घट जाती है, जिससे वस्तु B का माँग वक्र बाईं ओर खिसक जाता है।

स्थानापन्न वस्तुओं पर प्रभाव:

[रेखाचित्र 2: X-अक्ष पर स्थानापन्न वस्तु की

प्रश्न 29

औसत उत्पादन एवं सीमान्त उत्पादन की व्याख्या रेखाचित्र की सहायता से कीजिए।

अथवा

दीर्घकालीन औसत लागत एवं दीर्घकालीन सीमान्त लागत की व्याख्या रेखाचित्र की सहायता से कीजिए।

Explain the average product and marginal product with the help of diagrams. (4+2=6)

OR

Explain the long-run average cost and long-run marginal cost with the help of diagrams. (4+2=6)

औसत उत्पादन (AP) और सीमान्त उत्पादन (MP) की व्याख्या

औसत उत्पादन (Average Product - AP): यह प्रति इकाई परिवर्तनशील साधन (जैसे श्रम) से प्राप्त कुल उत्पादन है। सूत्र: AP = TP / L (जहाँ TP = कुल उत्पादन, L = श्रम की इकाइयाँ)।

सीमान्त उत्पादन (Marginal Product - MP): यह एक अतिरिक्त इकाई श्रम लगाने से कुल उत्पादन में होने वाली वृद्धि है। सूत्र: MP = ΔTP / ΔL।

रेखाचित्र सहित व्याख्या:

  • प्रारंभ में, जैसे-जैसे श्रम बढ़ता है, AP और MP दोनों बढ़ते हैं (बढ़ते प्रतिफल का नियम)।
  • एक बिंदु के बाद, MP घटने लगता है और AP अधिकतम हो जाता है (जहाँ MP = AP)।
  • इसके बाद, MP और AP दोनों घटने लगते हैं (ह्रासमान प्रतिफल का नियम), लेकिन MP, AP से तेजी से घटता है।
  • जब MP शून्य हो जाता है, तब कुल उत्पादन अधिकतम होता है। उसके बाद MP ऋणात्मक हो जाता है और कुल उत्पादन घटने लगता है।

रेखाचित्र में X-अक्ष पर श्रम और Y-अक्ष पर उत्पादन दर्शाया जाता है। AP वक्र उल्टे U आकार का होता है, और MP वक्र भी उल्टे U आकार का होता है, लेकिन MP वक्र AP वक्र को उसके अधिकतम बिंदु पर काटता है।


दीर्घकालीन औसत लागत (LAC) और दीर्घकालीन सीमान्त लागत (LMC) की व्याख्या

दीर्घकालीन औसत लागत (Long-Run Average Cost - LAC): यह दीर्घकाल में प्रति इकाई उत्पादन की न्यूनतम लागत है। यह विभिन्न अल्पकालीन औसत लागत (SAC) वक्रों का आवरण वक्र (envelope curve) होता है।

दीर्घकालीन सीमान्त लागत (Long-Run Marginal Cost - LMC): यह दीर्घकाल में एक अतिरिक्त इकाई उत्पादन बढ़ाने पर कुल लागत में होने वाली वृद्धि है।

रेखाचित्र सहित व्याख्या:

  • LAC वक्र U आकार का होता है, जो पैमाने के बढ़ते प्रतिफल (economies of scale) और फिर पैमाने के घटते प्रतिफल (diseconomies of scale) को दर्शाता है।
  • LMC वक्र LAC वक्र को उसके न्यूनतम बिंदु पर काटता है।
  • जब LAC घट रहा होता है, LMC, LAC से नीचे होता है। जब LAC बढ़ रहा होता है, LMC, LAC से ऊपर होता है।
  • LAC वक्र अल्पकालीन SAC वक्रों को स्पर्श करता है, प्रत्येक SAC वक्र एक विशिष्ट संयंत्र आकार को दर्शाता है।

रेखाचित्र में X-अक्ष पर उत्पादन और Y-अक्ष पर लागत दर्शाई जाती है। LAC और LMC दोनों U आकार के वक्र होते हैं, जहाँ LMC, LAC को न्यूनतम बिंदु पर काटता है।

प्रश्न 30

केन्द्रीय बैंक के किन्हीं तीन कार्यों को विस्तार से समझाइए।

अथवा

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के तीन प्रमुख उपकरणों को विस्तार से समझाइए।

Explain broadly any three functions of Central Bank. (2+2+2=6)

OR

Explain broadly any three principal tools of monetary policy of Reserve Bank of India. (2+2+2=6)

केन्द्रीय बैंक के तीन प्रमुख कार्य

  1. मुद्रा जारी करना (Currency Issuance): केन्द्रीय बैंक (भारत में RBI) को देश में मुद्रा (नोट और सिक्के) जारी करने का एकाधिकार प्राप्त है। यह सुनिश्चित करता है कि मुद्रा की आपूर्ति अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं के अनुसार हो और मुद्रा की स्थिरता बनी रहे।
  2. सरकार का बैंकर (Banker to the Government): केन्द्रीय बैंक केंद्र और राज्य सरकारों के लिए बैंकर के रूप में कार्य करता है। यह सरकार के खाते रखता है, सरकार को ऋण देता है, और सरकार की ओर से भुगतान करता है। यह सरकार के वित्तीय लेन-देन का प्रबंधन भी करता है।
  3. बैंकों का बैंकर (Banker to Banks): केन्द्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों के लिए अंतिम ऋणदाता (Lender of Last Resort) के रूप में कार्य करता है। यह बैंकों को आवश्यकता पड़ने पर ऋण प्रदान करता है, उनके नकद आरक्षित अनुपात (CRR) और वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) को नियंत्रित करता है, और बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित करता है।

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति के तीन प्रमुख उपकरण

  1. बैंक दर (Bank Rate): यह वह दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को दीर्घकालिक ऋण प्रदान करता है। बैंक दर में वृद्धि से बैंकों की उधार लागत बढ़ जाती है, जिससे वे अपनी ब्याज दरें बढ़ा देते हैं और मुद्रा आपूर्ति कम हो जाती है। इसका उपयोग मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
  2. नकद आरक्षित अनुपात (Cash Reserve Ratio - CRR): यह वह अनुपात है जो वाणिज्यिक बैंकों को अपनी कुल जमा राशि का एक निश्चित प्रतिशत RBI के पास नकद के रूप में रखना होता है। CRR बढ़ाने से बैंकों की उधार देने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे मुद्रा आपूर्ति घटती है।
  3. खुले बाजार की क्रियाएँ (Open Market Operations - OMO): इसमें RBI खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों (जैसे बॉन्ड) की खरीद और बिक्री करता है। जब RBI प्रतिभूतियाँ खरीदता है, तो बैंकिंग प्रणाली में नकदी बढ़ जाती है (मुद्रा आपूर्ति बढ़ती है), और जब बेचता है, तो नकदी कम हो जाती है (मुद्रा आपूर्ति घटती है)।