RBSE Class 12th 2020 Hindi Sahitya-SS-21-2020 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2020 |
| Subject | Hindi Sahitya-SS-21-2020 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2020 Hindi Sahitya-SS-21-2020
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Rajasthan Board Class 12th Hindi Sahitya-SS-21-2020 2020 solved Previous Year Question Papers
हिन्दी साहित्य
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2020
समय : 3¼ घण्टे पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिन प्रश्नों में आंतरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
- उत्तर यथासम्भव निर्धारित शब्द-सीमा में ही सुपाठ्य लिखें।
प्रश्नों की संख्या : 26 मुद्रित पृष्ठ : 7
SS-2-Hindi Sah.
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खण्ड - अ
1. 'कविता' की परिभाषा एवं उसकी प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (उत्तर सीमा 80 शब्द)
परिभाषा: कविता साहित्य की वह विधा है जिसमें भावनाओं, विचारों और अनुभवों को लय, तुक और छंद के माध्यम से अभिव्यक्त किया जाता है। यह हृदय की भाषा है जो पाठक को आनंद और संवेदना प्रदान करती है।
प्रमुख विशेषताएँ:
- भावात्मकता और संवेदनशीलता
- लय, तुक और छंद का प्रयोग
- चित्रात्मकता और प्रतीकात्मकता
- संक्षिप्तता और प्रभावशीलता
- कल्पना और सौंदर्यबोध
2. आधुनिक काल के 'द्विवेदी युग' की उपन्यास विकास यात्रा पर अपने विचार प्रकट कीजिए। (उत्तर सीमा 80 शब्द)
द्विवेदी युग (1900-1920) में हिंदी उपन्यास का महत्वपूर्ण विकास हुआ। इस युग में उपन्यासों में सामाजिक यथार्थ, राष्ट्रीय चेतना और नैतिक मूल्यों पर बल दिया गया। प्रमुख उपन्यासकारों में श्रीनिवास दास ('परीक्षा गुरु'), किशोरीलाल गोस्वामी ('इंदुमती'), और गोपालराम गहमरी ('सप्तसरोज') शामिल हैं। इस युग के उपन्यासों में शिक्षाप्रदता और समाज सुधार की प्रवृत्ति प्रमुख रही।
3. 'जीवनी' एवं 'आत्मकथा' विधा की परिभाषा एवं अन्तर स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा 80 शब्द)
जीवनी: किसी व्यक्ति के जीवन वृत्तांत को दूसरे व्यक्ति द्वारा लिखा जाना जीवनी कहलाता है। इसमें लेखक तटस्थ भाव से विषय के जीवन का वर्णन करता है।
आत्मकथा: जब व्यक्ति स्वयं अपने जीवन की घटनाओं और अनुभवों को लिखता है, तो उसे आत्मकथा कहते हैं। इसमें आत्मनिष्ठता और व्यक्तिगत दृष्टिकोण प्रमुख होता है।
अन्तर: जीवनी में लेखक और विषय भिन्न होते हैं, जबकि आत्मकथा में लेखक और विषय एक ही व्यक्ति होता है। जीवनी अधिक तथ्यात्मक और वस्तुनिष्ठ होती है, जबकि आत्मकथा में व्यक्तिगत भावनाओं और अनुभवों की प्रधानता होती है।
4. भारतेन्दु युग के प्रमुख कवि एवं उनकी प्रमुख कृतियों का उल्लेख कीजिए। (उत्तर सीमा 80 शब्द)
भारतेन्दु युग (1868-1900) के प्रमुख कवि और उनकी कृतियाँ निम्नलिखित हैं:
- भारतेन्दु हरिश्चन्द्र: 'भारत दुर्दशा', 'अंधेर नगरी', 'प्रेम माधुरी'
- प्रतापनारायण मिश्र: 'प्रेम पुष्पावली', 'भारत-वीरता'
- बालकृष्ण भट्ट: 'नूतन ब्रह्मचारी', 'प्रेम सागर'
- राधाचरण गोस्वामी: 'प्रेम तरंगिणी', 'भक्ति कल्पद्रुम'
खण्ड - ब
5. 'गुण' की परिभाषा लिखिए। (उत्तर सीमा 20 शब्द)
काव्य में रस की अभिव्यक्ति में सहायक तत्वों को 'गुण' कहते हैं। ये काव्य के सौंदर्य और प्रभाव को बढ़ाते हैं।
6. 'अक्रमत्व' और 'दुष्क्रमत्व' में अन्तर लिखिए। (उत्तर सीमा 20 शब्द)
अक्रमत्व: क्रम का अभाव, जहाँ घटनाओं का कोई निश्चित क्रम न हो। दुष्क्रमत्व: क्रम का दोषपूर्ण होना, जहाँ घटनाओं का क्रम अव्यवस्थित या असंगत हो।
7. 'हरिगीतिका' छंद की परिभाषा एवं उदाहरण लिखिए। (उत्तर सीमा 60 शब्द)
परिभाषा: हरिगीतिका छंद में 28 मात्राएँ होती हैं। इसके प्रत्येक चरण में 14-14 मात्राओं के दो विराम होते हैं। अंत में गुरु-लघु का क्रम होता है।
उदाहरण:
"जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।
तिनहीं कारण रूप अनेक, नाम अनेक गुण अनेक।।"
8. द्रुतविलम्बित छंद की परिभाषा एवं उदाहरण लिखिए | (उत्तर सीमा 60 शब्द) 3
परिभाषा: द्रुतविलम्बित छंद एक समवृत्त छंद है जिसमें प्रत्येक चरण में 22 वर्ण होते हैं। इसके प्रत्येक चरण में 11-11 वर्णों के दो विराम होते हैं। इसका लय तीव्र (द्रुत) और मंद (विलम्बित) दोनों प्रकार का होता है।
उदाहरण: "जयति जगद्वर वंदित पादुका, प्रणतपालिनि पापविनाशिनी।"
9. अन्योक्ति अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए | (उत्तर सीमा 80 शब्द) 4
परिभाषा: अन्योक्ति अलंकार में किसी एक वस्तु या व्यक्ति के माध्यम से दूसरे व्यक्ति या वस्तु की ओर संकेत किया जाता है। इसमें प्रस्तुत के द्वारा अप्रस्तुत का बोध कराया जाता है।
उदाहरण: "बादल गरज रहे हैं, पर बरसते नहीं।" यहाँ बादल के माध्यम से ऐसे व्यक्ति की ओर संकेत है जो केवल दिखावा करता है, वास्तव में कुछ नहीं करता।
10. विभावना अलंकार को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए | (उत्तर सीमा 80 शब्द) 4
परिभाषा: विभावना अलंकार में कारण के बिना ही कार्य हो जाने का वर्णन होता है। अर्थात जहाँ कार्य होने के लिए आवश्यक कारण का अभाव हो, फिर भी कार्य हो जाए, वहाँ विभावना अलंकार होता है।
उदाहरण: "बिना पानी बरसात, बिना बादल गरजना।" यहाँ बिना पानी के बरसात और बिना बादल के गरजना असंभव है, अतः यह विभावना अलंकार का उदाहरण है।
खण्ड-स
11. निम्नलिखित गद्यांशों में से किसी एक गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : (उत्तर सीमा 60 शब्द) 3
प्रथम गद्यांश: भारत में विभिन्न जातियों के पारस्परिक सम्पर्क में आने से संस्कृति की समस्या कुछ जटिल हो गई। पुराने जमाने में द्रविड़ और आर्य संस्कृति का समन्वय बहुत रीति से हो गया था। इस समय मुस्लिम और अंग्रेजी संस्कृति का मेल हुआ है। हम इन संस्कृतियों से अछूते नहीं रह सकते हैं। भारतीय संस्कृति की समन्वयशीलता यहाँ भी अपेक्षित है किन्तु समन्वय में अपना न खो बैठना चाहिए। दूसरी संस्कृतियों के जो अंग हमारी संस्कृति में अविरोध रूप से अपनाएँ जा सकें उनके द्वारा अपनी संस्कृति को सम्पन्न बनाना आपत्तिजनक नहीं।
सप्रसंग व्याख्या: प्रस्तुत गद्यांश में भारतीय संस्कृति की समन्वयशीलता पर प्रकाश डाला गया है। लेखक कहते हैं कि विभिन्न संस्कृतियों के संपर्क से समस्या जटिल हुई है, परंतु भारतीय संस्कृति ने हमेशा समन्वय किया है। आज मुस्लिम और अंग्रेजी संस्कृति के मेल में भी हमें अपनी मूल पहचान नहीं खोनी चाहिए। दूसरी संस्कृतियों के अच्छे तत्वों को अपनाकर हम अपनी संस्कृति को समृद्ध बना सकते हैं।
द्वितीय गद्यांश: पीतल की मूर्ति में कभी वह बात आ नहीं सकती जो पत्थर में होती है। देवी की मूर्ति को देखते-देखते प्रोफेसर साहब के हृदय की स्पंदन-गति बढ़ने लगी - इतनी सुन्दर जो थी वह। वे फिर आगे बढ़कर उसे उठाने को हुए लेकिन फिर उन्होंने बाहर झाँककर देखा, पर वहाँ कोई नहीं था, कोई आता ही नहीं उस बिचारे उजड़े हुए मन्दिर के पास - किसे परवाह थी निर्जन को अपनी दीप्ति से जगमग करती हुई उस देवी की। देवी के प्रति दया और सहानुभूति से गद्गद होकर प्रोफेसर साहब भीतर आए।
सप्रसंग व्याख्या: प्रस्तुत गद्यांश में प्रोफेसर साहब की देवी मूर्ति के प्रति आकर्षण और करुणा का वर्णन है। पत्थर की मूर्ति में जो भावपूर्ण सौंदर्य है, वह पीतल में नहीं हो सकता। प्रोफेसर साहब मूर्ति की सुंदरता से मुग्ध होकर उसे उठाना चाहते हैं, परंतु निर्जन मंदिर में किसी की परवाह न होने पर उन्हें दया आती है। यह दृश्य मूर्ति के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।
2. निम्नलिखित में से किसी एक पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : (उत्तर सीमा 60 शब्द)
पद्यांश 1:
विधि के कमंडल की सिद्धि है प्रसिद्ध यही,
हरि-पद पंकज-प्रताप की लहर है |
कहै 'पदमाकर' गिरीस - सीस मंडल के,
मंडल की माल ततकाल अघहर है |
भूपति भगीरथ के वीर की सुपुण्य पथ
जन्हु जप जोग फल फैल की फहर है |
पद्यांश 2:
नहीं समझ पाया था मैं उसके महत्त्व को,
बचपन में निज स्वार्थ लोभवश पैसे बोकर |
रत्न-प्रसविनी है वसुधा अब समझ सका हूँ |
इसमें सच्ची ममता के दाने बोने हैं |
इसमें जन की क्षमता के दाने बोने हैं |
इसमें मानवता ममता के दाने बोने हैं |
सप्रसंग व्याख्या (पद्यांश 1):
प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश 'पद्माकर' द्वारा रचित है, जिसमें गंगा की महिमा का वर्णन है।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि गंगा ब्रह्मा के कमंडल से उत्पन्न हुई है और भगवान विष्णु के चरणकमलों की प्रताप से पवित्र है। यह गिरिराज हिमालय के शिखर से निकलकर पृथ्वी पर आई और राजा भगीरथ के प्रयास से पृथ्वी पर प्रकट हुई। गंगा का जल पापों का नाश करने वाला और पुण्य देने वाला है।
सप्रसंग व्याख्या (पद्यांश 2):
प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश में कवि ने भूमि के महत्व को समझने की बात कही है।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि बचपन में स्वार्थ और लोभ के कारण मैं भूमि के महत्व को नहीं समझ पाया था। अब मैं समझ गया हूँ कि यह धरती रत्नों को जन्म देने वाली है। इसमें सच्ची ममता, जन की क्षमता और मानवता के बीज बोने चाहिए, जिससे समाज का कल्याण हो।
3. कबीर के दोहों के आधार पर गुरु का महत्त्व अपने शब्दों में लिखिए | (उत्तर सीमा 80 शब्द) 4
कबीर के दोहों में गुरु को परमात्मा से भी बड़ा माना गया है। वे कहते हैं कि गुरु ने मुझे ज्ञान का प्रकाश दिया, जिससे मेरा अज्ञान दूर हुआ। गुरु के बिना जीवन अंधकारमय है। गुरु ही शिष्य को सही मार्ग दिखाते हैं और उसे संसार के मोह-माया से मुक्त करते हैं। कबीर के अनुसार, गुरु की कृपा से ही मनुष्य को परम सत्य का बोध होता है और वह जीवन की सार्थकता को समझ पाता है।
अथवा
'मिठाईवाला' कहानी बाल मनोविज्ञान के विविध कोणों को स्पष्ट करती है ।' इस कथन को स्पष्ट कीजिए | (उत्तर सीमा 80 शब्द) 4
यह कथन सत्य है कि 'मिठाईवाला' कहानी बाल मनोविज्ञान के विविध कोणों को उजागर करती है। कहानी में बच्चों की मासूमियत, उनकी जिज्ञासा, और मिठाई के प्रति उनका आकर्षण दर्शाया गया है। बच्चे अपनी छोटी-छोटी खुशियों में संतुष्ट रहते हैं और उनका मन सरल होता है। वहीं, मिठाईवाला भी बच्चों के मनोविज्ञान को समझता है और उन्हें खुश करने का प्रयास करता है। इस प्रकार, कहानी बाल मनोविज्ञान के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट करती है।
4. “दिनकर के काव्य में एक सामाजिक चेतना हमेशा विद्यमान रही है ।” कुरुक्षेत्र पाठ के आधार पर विवेचना कीजिए | (उत्तर सीमा 80 शब्द) 4
दिनकर के काव्य में सामाजिक चेतना सदैव विद्यमान रही है। 'कुरुक्षेत्र' पाठ में वे युद्ध के विनाशकारी परिणामों को दर्शाते हैं और समाज को शांति का संदेश देते हैं। वे सामाजिक असमानता, अन्याय और पीड़ित मानवता के प्रति अपनी चिंता व्यक्त करते हैं। दिनकर का मानना है कि युद्ध से केवल विनाश होता है, इसलिए समाज को प्रेम और भाईचारे से रहना चाहिए। इस प्रकार, उनकी कविता में सामाजिक सुधार की भावना स्पष्ट झलकती है।
अथवा
“विश्व के किसी भी देश के पास ऐसी भूमि और संसाधन नहीं हैं ।' इस कथन की पुष्टि कीजिए | (उत्तर सीमा 80 शब्द) 4
यह कथन भारत की समृद्धि और विविधता को दर्शाता है। भारत के पास उपजाऊ भूमि, विविध जलवायु, खनिज संसाधन, और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर है। यहाँ हर प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं और विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चा माल उपलब्ध है। भारत की भौगोलिक विविधता और प्राकृतिक संसाधन अद्वितीय हैं, जो किसी अन्य देश में नहीं पाए जाते। इसलिए, यह कहना सही है कि विश्व के किसी भी देश के पास भारत जैसी भूमि और संसाधन नहीं हैं।
5. खुद लापरवाह हो, दोष मुझे देते हो |’ जैनेन्द्र कुमार के इस कथन को समझाइए | (उत्तर सीमा 60 शब्द) 3
जैनेन्द्र कुमार का यह कथन मानव स्वभाव की एक सामान्य प्रवृत्ति को उजागर करता है। जब व्यक्ति स्वयं अपने कर्तव्यों में लापरवाही करता है, तो वह अपनी गलती को स्वीकार नहीं करता, बल्कि दूसरों पर दोष मढ़ने का प्रयास करता है। यह आत्म-चिंतन की कमी और जिम्मेदारी से भागने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। इस कथन के माध्यम से लेखक ने मनुष्य की इस कमजोरी को उजागर किया है।
6. तुलसीदास भारत के श्रेष्ठ भक्त कवि हैं |’ इसको स्पष्ट कीजिए | (उत्तर सीमा 60 शब्द) 3
तुलसीदास भारत के श्रेष्ठ भक्त कवि हैं क्योंकि उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भक्ति भावना को सरल और सुलभ बनाया। उनकी प्रमुख रचना 'रामचरितमानस' में भगवान राम के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण का वर्णन है। उन्होंने भक्ति को जन-जन तक पहुँचाया और समाज में धार्मिक एकता का संदेश दिया। उनकी कविताएँ आज भी लोगों के हृदय में बसती हैं, जो उन्हें श्रेष्ठ भक्त कवि सिद्ध करती हैं।
7. “हरि परै कछु और है, काज सरै कछु और | इस पंक्ति का भावार्थ समझाइए | (उत्तर सीमा 60 शब्द) 3
इस पंक्ति का भावार्थ यह है कि मनुष्य के जीवन में अक्सर ऐसा होता है कि वह कुछ और सोचता है, लेकिन ईश्वर की इच्छा कुछ और ही होती है। मनुष्य अपनी योजनाएँ बनाता है, परंतु परिणाम ईश्वर के हाथ में होता है। यह पंक्ति जीवन की अनिश्चितता और ईश्वर की सर्वशक्तिमानता को दर्शाती है। मनुष्य को अपने प्रयास करने चाहिए, लेकिन परिणाम को ईश्वर पर छोड़ देना चाहिए।
8. गौरव-सी काया पड़ी माया है प्रताप की ।' इस काव्य पंक्ति का आशय लिखिए | (उत्तर सीमा 60 शब्द) 3
इस काव्य पंक्ति का आशय यह है कि महाराणा प्रताप का शरीर गौरव से भरा हुआ था, लेकिन उनकी यह काया भी माया (अस्थायी) है। यह पंक्ति जीवन की नश्वरता और वीरता के गौरव को दर्शाती है। महाराणा प्रताप ने अपने जीवन में जो वीरता और त्याग दिखाया, वह अमर है, लेकिन उनका शरीर नश्वर है। इस प्रकार, यह पंक्ति वीरता और जीवन की क्षणभंगुरता का संदेश देती है।
खण्ड-स (प्रश्न 19–21)
19. कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' अथवा लेखिका महादेवी वर्मा के कृतित्व और व्यक्तित्व पर अपने विचार अभिव्यंजित कीजिए। (उत्तर सीमा 40 शब्द)
सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' – ये छायावादी युग के प्रमुख कवि हैं। इनकी रचनाओं में विद्रोह, प्रकृति-प्रेम और मानवीय संवेदना का गहरा चित्रण मिलता है। प्रमुख कृतियाँ: 'परिमल', 'अनामिका', 'गीतिका'।
अथवा
महादेवी वर्मा – ये छायावादी युग की प्रसिद्ध कवयित्री हैं। इनकी कविताओं में वेदना, करुणा और रहस्यवाद का सुंदर समन्वय है। प्रमुख कृतियाँ: 'नीहार', 'रश्मि', 'नीरजा', 'सांध्यगीत'।
20. “बरन-बरन तरु हेल उपवन बन” – इस काव्य पंक्ति को समझाइए। (उत्तर सीमा 40 शब्द)
यह पंक्ति सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' की कविता से ली गई है। इसमें कवि कहते हैं कि विभिन्न रंगों के वृक्ष मिलकर एक सुंदर उपवन (बगीचा) बनाते हैं। यह विविधता में एकता का प्रतीक है, जैसे विभिन्न जातियों और रंगों के लोग मिलकर एक समाज का निर्माण करते हैं।
21. “भारत की भाषा सामान्य होते हुए भी विशेष क्षमता रखती है।” निबंधकार हरिशंकर परसाई के इस कथन को स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा 40 शब्द)
हरिशंकर परसाई के अनुसार, भारत की भाषा (हिंदी) सामान्य जन-जीवन की भाषा है, लेकिन इसमें गहन भावों और विचारों को अभिव्यक्त करने की अद्भुत क्षमता है। यह सरल होते हुए भी साहित्य, दर्शन और विज्ञान के जटिल विषयों को सहजता से प्रस्तुत कर सकती है।
खण्ड-द (प्रश्न 22–24)
22. “माता अपने सब पुत्रों को समान भाव से चाहती है।” इस कथन को 'राष्ट्र का स्वरूप' निबंध के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा 80 शब्द)
इस कथन का तात्पर्य है कि जिस प्रकार एक माता अपने सभी पुत्रों से बिना किसी भेदभाव के समान प्रेम करती है, उसी प्रकार राष्ट्र भी अपने सभी नागरिकों को समान अधिकार और अवसर प्रदान करता है। 'राष्ट्र का स्वरूप' निबंध में यह बताया गया है कि राष्ट्र एक विशाल परिवार है, जहाँ सभी जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र के लोगों को समान दृष्टि से देखा जाता है। राष्ट्र की एकता और अखंडता इसी समान भाव पर टिकी है।
अथवा
“पोर्ट ब्लेयर में लघु भारत के दर्शन होते हैं।” इस कथन को डॉ. देव कोठारी के अनुसार समझाइए। (उत्तर सीमा 80 शब्द)
डॉ. देव कोठारी के अनुसार, पोर्ट ब्लेयर (अंडमान निकोबार द्वीप समूह की राजधानी) में भारत के विभिन्न राज्यों के लोग रहते हैं। यहाँ विभिन्न भाषाएँ, संस्कृतियाँ और परंपराएँ एक साथ देखने को मिलती हैं। यह स्थान भारत की विविधता में एकता का जीवंत उदाहरण है। यहाँ तमिल, तेलुगु, बंगाली, हिंदी, मलयालम आदि भाषाओं के लोग मिल-जुलकर रहते हैं, जिससे यह 'लघु भारत' कहलाता है।
23. 'निर्वासित' कहानी के मूलभाव को स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा 60 शब्द)
'निर्वासित' कहानी का मूलभाव मानवीय संवेदना और अकेलेपन की पीड़ा है। इसमें एक वृद्ध व्यक्ति को उसके परिवार द्वारा घर से निकाल दिए जाने की कथा है। कहानी बुजुर्गों के प्रति समाज की उदासीनता और उनके मानसिक संघर्ष को उजागर करती है। यह हमें सिखाती है कि परिवार और समाज में बुजुर्गों का सम्मान और देखभाल करना हमारा कर्तव्य है।
24. “जन्म-मरण की कठिन समस्या है।” इस उक्ति का स्वामी विवेकानंद के अनुसार तात्पर्य समझाइए। (उत्तर सीमा 60 शब्द)
स्वामी विवेकानंद के अनुसार, जन्म और मरण मानव जीवन की सबसे बड़ी समस्या है। मनुष्य जन्म लेता है और एक दिन मर जाता है, लेकिन यह चक्र क्यों चलता है, इसका उत्तर पाना कठिन है। वे कहते हैं कि इस समस्या का समाधान आध्यात्मिक ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार में है। जब मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप (आत्मा) को पहचान लेता है, तब वह जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है।
प्रश्न 25
“प्राणियों में जैसे रक्त संचार होता है, वैसे ही पेड़-पौधों में रस संचार होता है।” लेखक परमहंस योगानंद के अनुसार इस कथन का आशय समझाइए। (उत्तर सीमा 60 शब्द) 3
परमहंस योगानंद के अनुसार, जिस प्रकार मनुष्यों और प्राणियों में रक्त का संचार जीवनदायिनी शक्ति प्रदान करता है, उसी प्रकार पेड़-पौधों में रस (सैप) का संचार उन्हें जीवित रखता है और पोषण प्रदान करता है। यह रस पौधों की जड़ों से पत्तियों तक पहुँचता है, जो उनके विकास और जीवन के लिए आवश्यक है। यह दर्शाता है कि प्रकृति में सभी जीवों में जीवन का एक समान प्रवाह है।
प्रश्न 26
“अब गुलाब गेहूँ पर विजय प्राप्त करेगा।” इस कथन में निहित भाव की व्यंजना कीजिए। (उत्तर सीमा 60 शब्द) 3
इस कथन में 'गुलाब' सौंदर्य, कला और सुख-सुविधाओं का प्रतीक है, जबकि 'गेहूँ' अन्न, कृषि और जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं का प्रतीक है। लेखक का आशय है कि अब मानव समाज में भौतिक सुख-सुविधाओं और सौंदर्य की चाहत, अन्न और बुनियादी जरूरतों पर हावी हो गई है। यह आधुनिक सभ्यता में मूल्यों के बदलाव और भौतिकता की ओर बढ़ते झुकाव को दर्शाता है।