RBSE Class 12th 2022 Hindi Sahitya-SS-21-2022 Previous Year Papers

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2022
Subject Hindi Sahitya-SS-21-2022
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th Hindi Sahitya-SS-21-2022 2022 solved Previous Year Question Papers

हिन्दी साहित्य

उच्च प्राध्यमिक परीक्षा, 2022

समय : 2 घंटे 45 मिनट    पूर्णांक : 80


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
  5. प्रश्न का उत्तर लिखने से पूर्व प्रश्न का क्रमांक अवश्य लिखें।

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खण्ड-अ

निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए : 6×1=6

संस्कृति के आंतरिक अंगों पर भारत में विशेष बल दिया गया है । धर्म ग्रंथों में अच्छे मनुष्यों के जो लक्षण बतलाए गए हैं । मनु स्मृति में धृति, क्षमा, दया, अस्तेय, शौच, इन्द्रिय निग्रह, धी, विद्या, सत्य और अक्रोध धर्म के दस लक्षण बतलाए गए हैं, वे सब भारतीयों की मानसिकता और आध्यात्मिक संस्कृति के अंग हैं । श्रीमद्भगवद्‌ गीता में देवी सम्पदा वालों के लक्षण दिए गए हैं जिनमें 'अभय' को पहला स्थान दिया गया है । स्थित प्रज्ञ के लक्षण (दूसरा अध्याय) सात्त्विक चीजों के लक्षण (सत्रहवाँ अध्याय) आदि सब भारतीय संस्कृति के अनुकूल सभ्य और सज्जन पुरुष के लक्षण हैं । इसलिए सभी महाकाव्य ऐसे लक्षणों से भरे पड़े हैं । रघुवंश में रघुकुल राजाओं के जो गुण बतलाए गए हैं, वे न केवल भारत के सांस्कृतिक आदर्शों के परिचायक हैं, बल्कि उनसे अतीत का भव्य चित्र हमारे सम्मुख आ जाता है।

  1. (i) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक है :

    • (अ) रघुवंश
    • (ब) अध्यात्म
    • (स) तप
    • (द) भारतीय संस्कृति

    व्याख्या : गद्यांश में भारतीय संस्कृति के आंतरिक अंगों, धर्म के लक्षणों और महाकाव्यों में वर्णित गुणों पर चर्चा की गई है, अतः 'भारतीय संस्कृति' उपयुक्त शीर्षक है।

  2. (ii) मनु स्मृति में धर्म के कितने लक्षण बतलाए गए हैं ?

    • (अ) छह
    • (ब) सात
    • (स) दस
    • (द) चार

    व्याख्या : गद्यांश के अनुसार, मनु स्मृति में धृति, क्षमा, दया, अस्तेय, शौच, इन्द्रिय निग्रह, धी, विद्या, सत्य और अक्रोध – ये दस लक्षण धर्म के बताए गए हैं।

  3. (iii) श्रीमद्भगवद्‌ गीता में देवी सम्पदा वालों के लक्षणों में पहला स्थान किसे दिया गया है ?

    • (अ) क्षमा
    • (ब) अभय
    • (स) दया
    • (द) शौच

    व्याख्या : गद्यांश में स्पष्ट कहा गया है कि श्रीमद्भगवद्‌ गीता में देवी सम्पदा वालों के लक्षणों में 'अभय' को पहला स्थान दिया गया है।

  4. (iv) 'रघुबंश' में किस कुल के राजाओं के गुण बतलाए गए हैं ?

    • (अ) यदु कुल के
    • (ब) सूर्य कुल के
    • (स) पांडव कुल के
    • (द) रघुकुल के

    व्याख्या : गद्यांश में कहा गया है कि रघुवंश में रघुकुल के राजाओं के गुण बतलाए गए हैं।

  5. (v) “अनुकूल' शब्द का विपरीतार्थक शब्द है :

    • (अ) रघुकुल
    • (ब) प्रतिकूल
    • (स) संकुल
    • (द) बकुल

    व्याख्या : 'अनुकूल' का अर्थ है अनुसरण करने वाला या सहायक, इसका विपरीत 'प्रतिकूल' है जिसका अर्थ है विरोधी या बाधक।

(vi) भारत में किस पर विशेष बल दिया गया है ?

  • (अ) अतीत के गौरव गान पर
  • (ब) संकीर्ण मानसिकता पर
  • (स) असभ्य और अशिष्ट लक्षणों पर
  • (द) संस्कृति के आंतरिक अंगों पर

सही उत्तर: (द) संस्कृति के आंतरिक अंगों पर

व्याख्या: भारत में संस्कृति के आंतरिक अंगों पर विशेष बल दिया गया है, जो समाज की गहरी नींव को दर्शाता है।

निम्नलिखित अपठित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए:

बार बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी ।
गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी ।
चिंता रहित खेलना-खाना वह फिरना निर्भय स्वच्छंद ।
कैसे भूला जा सकता है, बचपन का अतुलित आनंद ।
ऊँच-नीच का ज्ञान नहीं था, छुआ-छूत किसने जानी ।
बनी हुई थी वहाँ झोंपड़ी और चिथड़ों में रानी ।
किए दूध के हील मैंने चूस अँगूठा सुधा पिया ।
किलकारी किललोल मचाकर सूना घर आबाद किया ।
रोना और मचल जाना भी क्या आनंद दिलाते थे ।
बड़े-बड़े मोती से आँसू जयमाला पहनाते थे ।

(vii) उपर्युक्त पद्यांश का उचित शीर्षक है

  • (अ) जयमाला
  • (ब) फूल
  • (स) आँसू
  • (द) बचपन

सही उत्तर: (द) बचपन

व्याख्या: पद्यांश में बचपन की मधुर यादों, चिंतामुक्त खेल-खाने और निर्भयता का वर्णन है, अतः 'बचपन' उचित शीर्षक है।

(viii) बचपन में क्या नहीं होता था ?

  • (अ) अँगूठा चूसना
  • (ब) निर्भय स्वच्छंद फिरना
  • (स) पुरुषार्थ, ज्ञान का मोह
  • (द) चिंता रहित खेलना-खाना

सही उत्तर: (स) पुरुषार्थ, ज्ञान का मोह

व्याख्या: पद्यांश में बचपन में ऊँच-नीच, छुआ-छूत का ज्ञान न होने का उल्लेख है, जो पुरुषार्थ और ज्ञान के मोह के विपरीत है।

(ix) ‘मधुर’ शब्द का विलोम शब्द है

  • (अ) शहद
  • (ब) शर्करा
  • (स) कटु
  • (द) मीठा

सही उत्तर: (स) कटु

व्याख्या: 'मधुर' का अर्थ मीठा होता है, इसका विलोम 'कटु' (कड़वा) है।

प्रश्न 1: बहुविकल्पीय प्रश्न

(७) 'छुआ-छूत किसने जानी' पंक्ति का अर्थ है

  • (अ) छुआ-छूत को नहीं जानते थे।
  • (ब) छुआ-छूत को मानते थे।
  • (स) उपर्युक्त दोनों
  • (द) इनमें से कोई नहीं

सही उत्तर: (अ) छुआ-छूत को नहीं जानते थे।

व्याख्या: यह पंक्ति कबीरदास जी के दोहे से ली गई है, जिसमें वे कहते हैं कि प्रेमी को छुआ-छूत का भेद नहीं होता, अर्थात वे इसे नहीं मानते।

(८) अँगूठा चूसने को किसके समकक्ष माना?

  • (अ) रोना मचाने के
  • (ब) चीथड़ों में रानी बनने के
  • (स) अपृत पीने के
  • (द) दूध के कुल्ले करने के

सही उत्तर: (ब) चीथड़ों में रानी बनने के

व्याख्या: यह बाल मनोविज्ञान से संबंधित है, जहाँ अँगूठा चूसने की क्रिया को बच्चे के कल्पनालोक में रानी बनने के समान माना गया है।

(xii) आँसू शब्द का तत्सम शब्द है

  • (अ) अश्क
  • (ब) श्वेत
  • (स) स्वेद
  • (द) 34

सही उत्तर: (स) स्वेद

व्याख्या: 'आँसू' का तत्सम रूप 'अश्रु' है, लेकिन दिए गए विकल्पों में 'स्वेद' (पसीना) सबसे निकट है। वास्तव में 'अश्क' उर्दू शब्द है, अतः सही विकल्प 'स्वेद' नहीं है; यहाँ प्रश्न में त्रुटि हो सकती है, परंतु दिए गए विकल्पों में 'स्वेद' ही तत्सम है।

2. रिक्त स्थानों की पूर्ति

  1. (i) अर्थ पढ़ने के साथ सहज समझ आ जाए वहाँ प्रसाद गुण होता है।
  2. (ii) काव्य के मार्ग में बाधा पहुँचाने वाले तत्त्व विघ्न कहलाते हैं।
  3. (iii) गीतिका छंद के प्रत्येक चरण में 26 मात्राएँ होती हैं।
  4. (iv) छंद में लघु वर्ण का संकेत चिह्न एवं गुरु वर्ण का संकेत चिह्न होता है।
  5. (v) अलंकार मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं।
  6. (vi) एक ही वर्ण की आवृत्ति बार-बार होना अनुप्रास अलंकार होता है।

3. अति-लघूत्तरात्मक प्रश्न (अधिकतम 20 शब्द)

(i) रूपक अलंकार की परिभाषा लिखिए।

जहाँ उपमेय पर उपमान का आरोप किया जाए, वहाँ रूपक अलंकार होता है। जैसे- 'चरण-कमल'।

(ii) मानवीकरण अलंकार का उदाहरण लिखिए।

उदाहरण: 'हवा धीरे-धीरे बोली' – यहाँ हवा को बोलने का मानवीय गुण दिया गया है।

(iii) जनसंचार के माध्यमों में सबसे पुराना माध्यम कौन सा है?

समाचार पत्र (प्रिंट मीडिया) जनसंचार का सबसे पुराना माध्यम है।

(iv) समाचार की शुरुआत में प्रयुक्त होने वाले कोई दो ककार लिखिए।

कब, कहाँ, कौन, क्या, क्यों, कैसे – इनमें से कोई दो: 'कब' और 'कहाँ'।

(v) विशेष लेखन की सूचनाओं के स्रोतों में से किन्हीं दो के नाम लिखिए।

पुस्तकें और इंटरनेट (या समाचार पत्र, साक्षात्कार आदि)।

(vi) 'कार्नेलिया का गीत' किस प्रसिद्ध नाटक से लिया गया है?

यह 'चंद्रगुप्त' नाटक से लिया गया है, जिसके रचयिता जयशंकर प्रसाद हैं।

खण्ड-अ

  1. (शा) दूसरा देवदास' कहानी में बुआ का क्या नाम था ?

    उत्तर: 'दूसरा देवदास' कहानी में बुआ का नाम बुआ ही था, उनका कोई अलग नाम नहीं दिया गया है।

  2. (viii) निराला को कविता के क्षेत्र में किस नये प्रयोग का प्रवर्तक माना जाता है ?

    उत्तर: निराला को कविता के क्षेत्र में मुक्त छंद (Free Verse) के प्रयोग का प्रवर्तक माना जाता है।

  3. (ix) भरत ने बचपन में राम कृपा की कैसी रीति देखी ?

    उत्तर: भरत ने बचपन में राम कृपा की ऐसी रीति देखी कि राम बिना किसी भेदभाव के सब पर समान रूप से कृपा करते थे।

  4. (x) कविता के प्रमुख तत्त्व कौन-कौन से हैं ?

    उत्तर: कविता के प्रमुख तत्त्व हैं – भाव, विचार, कल्पना, भाषा-शैली, छंद, अलंकार आदि।

  5. (xi) “चिट्ठी लिखें कहानी' पाठ के आधार पर बताइए कि कथानक के आमतौर पर कौन-कौन से भाग होते हैं ?

    उत्तर: कथानक के आमतौर पर निम्नलिखित भाग होते हैं – आरंभ, प्रयास, परिणाम, उपसंहार

  6. (xii) नाटककार को नाटक लिखते समय सबसे पहले किसका चुनाव करना पड़ता है ?

    उत्तर: नाटककार को नाटक लिखते समय सबसे पहले विषय का चुनाव करना पड़ता है।

खण्ड-ब

निर्देश : प्रश्न संख्या 4 से 5 तक प्रत्येक प्रश्न के लिए अधिकतम शब्द-सीमा 40 शब्द है।

  1. रेडियो के लिए समाचार लेखन में किन-किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए ?

    उत्तर: रेडियो के लिए समाचार लेखन में भाषा सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली होनी चाहिए। वाक्य छोटे हों, शब्दों का उच्चारण स्पष्ट हो, और समाचार को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किया जाए। ध्वनि प्रभावों का उपयोग भी महत्वपूर्ण है।

  2. विशेष लेखन स्वरूप और प्रकृति अध्याय के आधार पर लिखिए कि विशेष लेखन की भाषा-शैली कैसी होनी चाहिए ?

    उत्तर: विशेष लेखन की भाषा-शैली सरल, स्पष्ट, रोचक और तथ्यपरक होनी चाहिए। इसमें विषय के अनुसार शब्दों का चयन किया जाना चाहिए और पाठकों को आकर्षित करने के लिए उदाहरणों का प्रयोग करना चाहिए।

  3. “तुम गाँव छोड़कर मत जाओ |” 'संबदिया' कहानी में प्रयुक्त इस कथन में निहित भाव को स्पष्ट कीजिए।

    उत्तर: इस कथन में गाँव के प्रति गहरा लगाव और मोह व्यक्त किया गया है। यह भाव दर्शाता है कि गाँव छोड़ने से जड़ें टूट जाती हैं और व्यक्ति अपनी पहचान खो देता है। यह ग्रामीण जीवन के महत्व को रेखांकित करता है।

  4. प्र चार हाथ' लघुकथा में मिल मालिक ने मजदूरों के अतिरिक्त हाथ लगवाने के लिए क्या-क्या प्रयत्न किए ?

    उत्तर: मिल मालिक ने मजदूरों के अतिरिक्त हाथ लगवाने के लिए मशीनों का उपयोग किया, नए उपकरण लगाए, और काम के घंटे बढ़ाए। उसने मजदूरों को अधिक काम करने के लिए प्रोत्साहित भी किया।

  5. पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी या असगर वजाहत में से किसी एक रचनाकार का साहित्यिक परिचय लिखिए।

    उत्तर: पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध निबंधकार और कहानीकार थे। इनकी प्रमुख रचनाएँ 'उसने कहा था', 'सुखमय जीवन' आदि हैं। इनकी भाषा सरल और प्रभावशाली है।

  6. ‘साना-साना हाथ जोड़ि' कविता का मूल भाव लिखिए।

    उत्तर: इस कविता का मूल भाव प्रकृति के प्रति श्रद्धा और समर्पण है। कवि प्रकृति के विभिन्न रूपों में ईश्वर की उपस्थिति को देखता है और उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है।

  7. माँ सरस्वती की उदारता का बखान करने में कवि केशवदास कवियों को असमर्थ क्यों मानते हैं ?

    उत्तर: केशवदास मानते हैं कि माँ सरस्वती की उदारता इतनी अपार है कि कोई भी कवि उसका पूर्ण वर्णन नहीं कर सकता। उनकी कृपा असीम है और शब्दों में बाँधना संभव नहीं।

  8. सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' अथवा विद्यापति में से किसी एक का साहित्यिक परिचय लिखिए।

    उत्तर: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि, उपन्यासकार और निबंधकार थे। इनकी प्रमुख रचनाएँ 'शेखर: एक जीवनी', 'हरी घास पर क्षण भर' आदि हैं। ये प्रयोगवादी धारा के प्रवर्तक माने जाते हैं।

  9. 'सूरदास की झोंपड़ी' पाठ के आधार पर लिखिए कि पूरे मोहल्ले में सूरदास की बदनामी क्यों हुई ?

    उत्तर: सूरदास की बदनामी इसलिए हुई क्योंकि वह अंधा था और उसकी झोंपड़ी में चोरी हो गई थी। लोगों ने उस पर संदेह किया और उसे चोर समझ लिया, जिससे पूरे मोहल्ले में उसकी बदनामी फैल गई।

  10. भूष दादा को पहाड़ पर अकेला बताने की रूप की बात का भूष दादा क्या उत्तर देते हैं ?

    उत्तर: भूष दादा रूप की बात का उत्तर देते हैं कि वह पहाड़ पर अकेला नहीं है, बल्कि प्रकृति और ईश्वर उसके साथ हैं। वह कहते हैं कि अकेलापन तो शहर में होता है, पहाड़ों पर नहीं।

खण्ड-स

16. “अपना मालवा – खाऊ-उजाड़ सभ्यता पे!” पाठ के आधार पर “मनाओ दसेरा-दिवाली” पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

इस पंक्ति में व्यंग्यात्मक रूप से कहा गया है कि जब समाज और संस्कृति ही नष्ट हो रही हो, तब दशहरा-दिवाली जैसे त्योहार मनाने का कोई अर्थ नहीं रह जाता। लेखक ने यह बताने का प्रयास किया है कि विकास के नाम पर हो रहे अंधाधुंध दोहन और औद्योगीकरण ने मालवा की मूल संस्कृति, पर्यावरण और जीवनशैली को तहस-नहस कर दिया है। ऐसी स्थिति में त्योहारों का उल्लास निरर्थक हो जाता है।

17. “आरोहण” कहानी में वर्णित पर्वतीय सौंदर्य को अपने शब्दों में लिखिए।

“आरोहण” कहानी में पर्वतीय सौंदर्य का अत्यंत सजीव और मनोरम चित्रण किया गया है। लेखक ने ऊँचे-नीचे पहाड़ों, हरी-भरी घाटियों, झरनों के कल-कल करते पानी, बादलों से घिरी चोटियों और वन्य जीवों का वर्णन किया है। पहाड़ों पर सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य अत्यंत मनमोहक हैं। चारों ओर फैली हरियाली, फूलों की सुगंध और पक्षियों की चहचहाहट वातावरण को स्वर्गीय बना देती है। यह सौंदर्य मन को शांति और आनंद प्रदान करता है।

खण्ड-स

18. “दूसरा देवदास” कहानी का कथानक संक्षेप में अपने शब्दों में लिखिए।

“दूसरा देवदास” कहानी एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो देवदास की तरह प्रेम में असफल रहता है। वह अपनी प्रेमिका से विवाह नहीं कर पाता और जीवन भर शराब पीकर अपना दुख भुलाने की कोशिश करता है। कहानी में उसके संघर्ष, अकेलेपन और मानसिक पीड़ा को दर्शाया गया है। अंत में वह अपने प्रेम और जीवन दोनों से हार मान लेता है। यह कहानी प्रेम में असफल व्यक्ति की मनोदशा और समाज की विडंबना को उजागर करती है।

अथवा

“विकास के नाम पर पर्यावरण विनाश एवं विस्थापन की यातना को मनुष्य भोग रहा है।” “जहाँ कोई नहीं” पाठ के आधार पर कथन की समीक्षा कीजिए।

“जहाँ कोई नहीं” पाठ में यह दिखाया गया है कि विकास के नाम पर बड़े-बड़े बाँध, बिजली परियोजनाएँ और उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण का भारी नुकसान हो रहा है। जंगल काटे जा रहे हैं, नदियाँ प्रदूषित हो रही हैं और वन्य जीवों का आवास नष्ट हो रहा है। साथ ही, आदिवासी और ग्रामीण लोग अपनी जमीन और घरों से विस्थापित हो रहे हैं। उन्हें नई जगह पर बसने में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार, विकास की अंधी दौड़ में मनुष्य पर्यावरण विनाश और विस्थापन की भयानक यातना भोग रहा है।

19. भारत की किन-किन विशेषताओं को “कार्नेलिया का गीत” कविता में चित्रित किया गया है?

“कार्नेलिया का गीत” कविता में भारत की निम्नलिखित विशेषताओं का चित्रण किया गया है:

  • भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता
  • यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता – हिमालय, नदियाँ, मैदान
  • धार्मिक सहिष्णुता और अध्यात्मिकता
  • प्राचीन सभ्यता और गौरवशाली इतिहास
  • यहाँ के लोगों का प्रेम और आतिथ्य
  • भारत की कला, संगीत और साहित्य की समृद्ध परंपरा

अथवा

“सरोज-स्मृति” कविता का केन्द्रीय भाव लिखिए।

“सरोज-स्मृति” कविता का केन्द्रीय भाव प्रियजनों की याद में व्यक्त की गई गहरी पीड़ा और विरह है। कवि अपनी प्रेयसी सरोज को याद करते हुए उसके बिछोह में व्याकुल है। वह उसके साथ बिताए पलों को याद करता है और उसकी अनुपस्थिति में जीवन को सूना और नीरस पाता है। कविता में प्रेम, स्मृति और विरह की मार्मिक अभिव्यक्ति हुई है।

20. “सूरदास की झोंपड़ी” पाठ के आधार पर सूरदास की चारित्रिक विशेषताएँ लिखिए।

“सूरदास की झोंपड़ी” पाठ के अनुसार सूरदास की प्रमुख चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • ईश्वर में अटूट आस्था: वह अंधा होने के बावजूद ईश्वर पर पूर्ण विश्वास रखता है और निरंतर भजन-कीर्तन करता है।
  • सादगी और संतोष: वह अत्यंत सादा जीवन जीता है और अपनी झोंपड़ी में संतोषपूर्वक रहता है।
  • दयालुता और परोपकार: वह दूसरों की मदद करने में हमेशा तत्पर रहता है और किसी को दुखी नहीं देख सकता।
  • धैर्य और सहनशीलता: वह जीवन की कठिनाइयों को धैर्यपूर्वक सहन करता है और कभी शिकायत नहीं करता।
  • आत्मनिर्भरता: वह दूसरों पर निर्भर नहीं रहता और अपना काम स्वयं करता है।

अथवा

“आरोहण” कहानी के आधार पर भूप दादा की चारित्रिक विशेषताएँ लिखिए।

“आरोहण” कहानी में भूप दादा की प्रमुख चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • साहसी और दृढ़निश्चयी: वह कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानते और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहते हैं।
  • अनुभवी और ज्ञानी: उन्हें पहाड़ों और जंगलों का गहरा ज्ञान है, जो वे दूसरों को सिखाते हैं।
  • सहानुभूतिपूर्ण और मददगार: वह दूसरों की मदद करने में हमेशा आगे रहते हैं और उनकी भावनाओं को समझते हैं।
  • प्रकृति प्रेमी: उन्हें पहाड़ों और प्रकृति से अत्यधिक प्रेम है और वे इसकी रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
  • सरल और मिलनसार: वह सरल स्वभाव के हैं और सभी से मिल-जुलकर रहते हैं।

खण्ड-द

21. निम्नलिखित पठित पद्यांशों में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:

(क)

यह दीप अकेला स्नेह भरा
है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो ।
यह जन है – गाता गीत जिन्हें फिर और कौन गाएगा ?
पनडुब्बा – ये मोती सच्चे फिर कौन कृती लाएगा ?
यह समिधा ऐसी आग हठीला बिरला सुलगाएगा |
यह अद्वितीय – यह मेरा – यह मैं स्वयं विसर्जित –
यह दीप अकेला स्नेह भरा
है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो ।

संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित कविता “यह दीप अकेला” से लिया गया है। इसके रचयिता सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ हैं।

प्रसंग: कवि कहता है कि यह दीप अकेला होते हुए भी स्नेह और गर्व से भरा है, लेकिन इसे भी पंक्ति में शामिल होना चाहिए। वह अपने अस्तित्व और विशिष्टता पर गर्व करता है, फिर भी समाज से जुड़ने की इच्छा रखता है।

व्याख्या: कवि इस दीप के माध्यम से अपने व्यक्तित्व की विशिष्टता को दर्शाता है। यह दीप अकेला है, लेकिन स्नेह और गर्व से भरा हुआ है। कवि कहता है कि यह व्यक्ति (जन) ऐसे गीत गाता है जिन्हें कोई और नहीं गा सकता। यह पनडुब्बा (गोताखोर) सच्चे मोती लाता है, जो दुर्लभ हैं। यह समिधा (लकड़ी) ऐसी आग है जिसे कोई हठीला और बिरला व्यक्ति ही सुलगा सकता है। यह अद्वितीय है, यह मेरा है, यह मैं स्वयं हूँ, लेकिन फिर भी इसे समाज की पंक्ति में शामिल होना चाहिए। कवि व्यक्ति की विशिष्टता और समाज से जुड़ने की आवश्यकता दोनों पर बल देता है।

अथवा

(ख)

राघौ ! एक बार फिरि आबौ |
ए बर बाजि बिलोकि आपने बहुरो घनहिं सिधावौ ||
जे पय पियत कर-पंकज वार बार चुचकारे |
क्यों जीवहिं मेरे राम लाडिले | ते अब निपट बिसारे ||

संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित है। यह सूरदास द्वारा रचित ‘सूरसागर’ से लिया गया है।

प्रसंग: यहाँ गोपियाँ श्रीकृष्ण से विनती कर रही हैं कि वे एक बार फिर से वृंदावन आएँ। वे उन दिनों को याद कर रही हैं जब कृष

प्रश्न 20: निम्नलिखित पठित गद्यांश में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए

प्रथम गद्यांश

"एक बात और | इसके पहिले कि मैं इस लेख को समाप्त करूँ, मैं उन लोगों से क्षमा माँगता हूँ जिन्हें मैंने छला है और फिर सिवाय मेरे क्षमा माँगने और उनके क्षमा करने के और कोई चारा भी तो नहीं है । अपने पापों का (यदि आप उन्हें पाप समझें, मैं नहीं समझता) प्रायश्चित्त तो मैंने लिखकर कर लिया । परंतु समाप्त करते-करते मैं ऐसी कृतघ्नता का पाप नहीं कर सकता जिसके प्रायश्चित्त का विधान शास्त्रों में भी नहीं है | यह संग्रहालय चार महानुभावों के सहाय्य और सहानुभूति से बन सका है।"

सप्रसंग व्याख्या

संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक 'हजारी प्रसाद द्विवेदी' द्वारा रचित निबंध 'कुटज' से लिया गया है। इसमें लेखक ने अपने संग्रहालय निर्माण के अनुभव और उससे जुड़ी भावनाओं को व्यक्त किया है।

प्रसंग: लेखक अपने लेख को समाप्त करने से पहले उन लोगों से क्षमा माँग रहा है जिन्हें उसने धोखा दिया है। वह अपने पापों का प्रायश्चित्त लिखकर कर चुका है, लेकिन कृतघ्नता के पाप से बचना चाहता है। वह बताता है कि यह संग्रहालय चार महानुभावों की सहायता से बना है।

व्याख्या: लेखक विनम्रतापूर्वक स्वीकार करता है कि उसने कुछ लोगों को धोखा दिया है और अब उनसे क्षमा माँगना चाहता है। वह कहता है कि इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है। वह अपने पापों को पाप नहीं मानता, लेकिन फिर भी उनका प्रायश्चित्त लिखकर कर चुका है। सबसे बड़ी बात यह है कि वह कृतघ्नता का पाप नहीं कर सकता, क्योंकि उसका प्रायश्चित्त शास्त्रों में भी नहीं है। वह चार महानुभावों का आभार व्यक्त करता है जिनके सहयोग से यह संग्रहालय बन सका। इस गद्यांश में लेखक की विनम्रता, आत्मचिंतन और कृतज्ञता की भावना स्पष्ट झलकती है।


द्वितीय गद्यांश

"चौधरी साहब से तो अब अच्छी तरह परिचय हो गया था । अब उनके यहाँ मेरा जाना एक लेखक की हैसियत से होता था । हम लोग उन्हें एक पुरानी चीज़ समझा करते थे । इस पुरातत्व की दृष्टि में प्रेम और हास्य का एक अदभुत मिश्रण रहता था । यहाँ पर यह कह देना आवश्यक है कि चौधरी साहब एक खासे हिंदुस्तानी रईस थे | वसंत पंचमी, होली इत्यादि अवसरों पर उनके यहाँ खूब नाचरंग और उत्सव हुआ करते थे | उनकी हर एक अदा से रियासत और तबीयतदारी टपकती थी । कंधों तक बाल लटक रहे हैं | आप इधर से उधर टहल रहे थे । एक छोटा लड़का पान की तश्तरी लिए पीछे-पीछे लगा हुआ है | बात की काँट-छाँट का क्या कहना ! जो बातें उनके मुँह से निकलती थीं, उनमें एक विलक्षण वक्रता रहती थी |"

सप्रसंग व्याख्या

संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक 'हजारी प्रसाद द्विवेदी' द्वारा रचित निबंध 'कुटज' से लिया गया है। इसमें लेखक ने चौधरी साहब नामक एक रईस व्यक्ति का चित्रण किया है।

प्रसंग: लेखक का चौधरी साहब से अच्छा परिचय हो चुका था और अब वह एक लेखक के रूप में उनके यहाँ जाता था। लेखक और उसके साथी चौधरी साहब को एक पुरानी चीज़ समझते थे, लेकिन इस पुरातत्व की दृष्टि में प्रेम और हास्य का अद्भुत मिश्रण था।

व्याख्या: लेखक बताता है कि चौधरी साहब एक विशिष्ट हिंदुस्तानी रईस थे। वसंत पंचमी, होली जैसे त्योहारों पर उनके यहाँ नाच-रंग और उत्सव होते थे। उनकी हर अदा से रियासत और उदारता झलकती थी। उनके कंधों तक बाल लटकते थे और वे इधर-उधर टहलते रहते थे। एक छोटा लड़का पान की तश्तरी लिए उनके पीछे-पीछे लगा रहता था। उनकी बातों में एक विलक्षण वक्रता (टेढ़ापन या व्यंग्य) होती थी। इस गद्यांश में चौधरी साहब के व्यक्तित्व, उनकी जीवनशैली और उनके स्वभाव का सजीव चित्रण किया गया है।

प्रश्न 21: निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर 400 शब्दों में निबंध लिखिए

  1. पर्यावरण संरक्षण : समय की माँग
  2. कम्प्यूटर क्रांति : बदलता जीवन
  3. कोरोना काल : नयी चुनौतियाँ
  4. विज्ञान और हमारा जीवन

निबंध: पर्यावरण संरक्षण : समय की माँग

प्रस्तावना: पर्यावरण वह आधार है जिस पर समस्त जीवन टिका है। वायु, जल, भूमि, वनस्पति और जीव-जंतु मिलकर पर्यावरण का निर्माण करते हैं। आज पर्यावरण प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन गया है, जिससे मानव जीवन और पृथ्वी का अस्तित्व संकट में है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी माँग है।

पर्यावरण प्रदूषण के कारण: औद्योगीकरण, शहरीकरण, वनों की कटाई, वाहनों का बढ़ता उपयोग, रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग, प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग आदि पर्यावरण प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। कारखानों से निकलने वाला धुआँ और रसायन वायु और जल को प्रदूषित कर रहे हैं। वनों की कटाई से पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो रहा है।

पर्यावरण प्रदूषण के दुष्परिणाम: वायु प्रदूषण से श्वसन संबंधी बीमारियाँ बढ़ रही हैं। जल प्रदूषण से जलजनित रोग फैल रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग के कारण जलवायु परिवर्तन हो रहा है, जिससे बाढ़, सूखा, चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ रही हैं। जैव विविधता नष्ट हो रही है और कई प्रजातियाँ विलुप्त होने के कगार पर हैं।

पर्यावरण संरक्षण के उपाय: पर्यावरण संरक्षण के लिए हमें कई कदम उठाने होंगे। वृक्षारोपण को बढ़ावा देना, प्लास्टिक का उपयोग कम करना, जल संरक्षण करना, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करना, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाना, रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करना आदि महत्वपूर्ण उपाय हैं। सरकार को भी सख्त कानून बनाने और उन्हें लागू करने की आवश्यकता है।

नागरिकों की भूमिका: पर्यावरण संरक्षण में प्रत्येक नागरिक की महत्वपूर्ण भूमिका है। हमें अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव लाने होंगे जैसे पानी और बिजली बचाना, कम से कम कचरा उत्पन्न करना, पेड़ लगाना और उनकी देखभाल करना। हमें पर्यावरण के प्रति जागरूक होना होगा और दूसरों को भी जागरूक करना होगा।

उपसंहार: पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या कुछ संगठनों का काम नहीं है, बल्कि यह हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि हमने अभी नहीं चेते, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। इसलिए आज ही से पर्यावरण संरक्षण के प्रति संकल्प लेना समय की सबसे बड़ी माँग है।