RBSE Class 12th 2022 Urdu Sahitya-SS-22-2022 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2022
Subject Urdu Sahitya-SS-22-2022
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th Urdu Sahitya-SS-22-2022 2022 solved Previous Year Question Papers

URDU SAHITYA

Time: 3¼ Hours
Maximum Marks: 80

No. of Questions: 28
No. of Printed Pages: 7

SENIOR SECONDARY EXAMINATION - 2022

SS-22-Urdu Sah.


Instructions:

  1. All questions are compulsory.
  2. This question paper is divided into four sections: (i), (ii), (iii), (iv).
  3. Section (i) contains objective type questions. Each question carries 1 mark.
  4. Section (ii) contains very short answer type questions. Each question carries 2 marks.
  5. Section (iii) contains short answer type questions. Each question carries 3 marks.
  6. Section (iv) contains long answer type questions. Each question carries 5 marks.
  7. Read the questions carefully and answer accordingly.

Note: This is page 1 of 7. Please turn over for further questions.

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Urdu Sahitya (SS-22-2022) – Page 3

प्रश्न 2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में दीजिए –

  1. "उर्दू साहित्य का प्रारंभिक काल" किसे कहा जाता है?
  2. "दक्कनी उर्दू" का प्रथम कवि कौन माना जाता है?
  3. "सब्ज़-ए-हिंद" किस शायर की रचना है?
  4. "गुलिस्ताँ" किस फ़ारसी कवि की कृति है?
  5. "मीर तकी मीर" का असली नाम क्या था?
  6. "उर्दू नाटक" के जन्मदाता किसे माना जाता है?
  7. "अनारकली" नाटक के लेखक कौन हैं?

उत्तर:

  1. उर्दू साहित्य का प्रारंभिक काल "दक्कनी काल" (13वीं-14वीं शताब्दी) कहा जाता है।
  2. दक्कनी उर्दू का प्रथम कवि "ख्वाजा मसूद साद सलमान" माना जाता है।
  3. "सब्ज़-ए-हिंद" शायर "मीर तकी मीर" की रचना है।
  4. "गुलिस्ताँ" फ़ारसी कवि "शेख सादी" की कृति है।
  5. "मीर तकी मीर" का असली नाम "मीर मुहम्मद तकी" था।
  6. उर्दू नाटक के जन्मदाता "आगा हश्र कश्मीरी" माने जाते हैं।
  7. "अनारकली" नाटक के लेखक "इम्तियाज़ अली ताज" हैं।

प्रश्न 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

  1. "उर्दू शायरी" की प्रमुख विधाओं के नाम लिखिए।
  2. "मीर अनीस" किस विधा के लिए प्रसिद्ध हैं?
  3. "दास्तान" और "नावेल" में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  4. "उर्दू गद्य" के विकास में "सर सैयद अहमद खाँ" का योगदान बताइए।
  5. "प्रेमचंद" की उर्दू कहानियों की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:

  1. उर्दू शायरी की प्रमुख विधाएँ हैं: ग़ज़ल, नज़्म, रुबाई, क़सीदा, मर्सिया, मसनवी, और क़ता।
  2. मीर अनीस "मर्सिया" विधा के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने कर्बला के शहीदों की याद में मर्सिया लिखे।
  3. दास्तान और नावेल में अंतर: दास्तान काल्पनिक और अतिरंजित घटनाओं पर आधारित होती है, जबकि नावेल यथार्थवादी और सामाजिक जीवन को चित्रित करता है। दास्तान में लंबी श्रृंखला होती है, नावेल में एक केंद्रीय कथानक होता है।
  4. सर सैयद अहमद खाँ ने उर्दू गद्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने "तहज़ीब-उल-अख़लाक" पत्रिका निकाली और आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा दिया। उनके लेखों ने उर्दू गद्य को सरल और प्रभावी बनाया।
  5. प्रेमचंद की उर्दू कहानियों की विशेषताएँ: यथार्थवादी चित्रण, ग्रामीण जीवन का चित्रण, सामाजिक समस्याओं पर प्रकाश, सरल भाषा, और मानवीय मूल्यों पर जोर।

प्रश्न 4. निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

  1. "उर्दू साहित्य में दक्कनी काल" का महत्व बताइए।
  2. "मीर तकी मीर" की शायरी की विशेषताएँ लिखिए।
  3. "उर्दू नाटक" के विकास पर प्रकाश डालिए।

उत्तर (किन्हीं दो):

  1. उर्दू साहित्य में दक्कनी काल का महत्व: दक्कनी काल (13वीं-18वीं शताब्दी) उर्दू साहित्य का प्रारंभिक काल है। इस काल में दक्कन के सुल्तानों के संरक्षण में उर्दू भाषा और साहित्य का विकास हुआ। प्रमुख कवियों में ख्वाजा मसूद साद सलमान, मीर अजीमुल्लाह, और वली दक्कनी शामिल हैं। इस काल ने उर्दू को एक साहित्यिक भाषा के रूप में स्थापित किया।
  2. मीर तकी मीर की शायरी की विशेषताएँ: मीर तकी मीर (1723-1810) उर्दू शायरी के महान कवि हैं। उनकी शायरी में प्रेम, दर्द, और फ़क़ीरी का गहरा चित्रण मिलता है। भाषा सरल और प्रभावशाली है। उन्होंने ग़ज़ल को नई ऊँचाई दी। उनकी रचनाओं में "कुल्लियात-ए-मीर" प्रसिद्ध है।
  3. उर्दू नाटक का विकास: उर्दू नाटक का विकास 19वीं शताब्दी में हुआ। आगा हश्र कश्मीरी को उर्दू नाटक का जन्मदाता माना जाता है। उन्होंने "सैयद-उल-अंबिया", "अनारकली" जैसे नाटक लिखे। बाद में इम्तियाज़ अली ताज, मोहम्मद हसन, और अन्य ने नाटक को समृद्ध किया। आधुनिक काल में उर्दू नाटक ने सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को उठाया।

[Turn over] SS-22-Urdu Sah.

Urdu Sahitya (S5-22-Urdu Sah.)

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प्रश्न 4. निम्नलिखित में से किसी एक प्रश्न का उत्तर दीजिए।

“उर्दू साहित्य में ग़ज़ल का विशेष स्थान है।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: उर्दू साहित्य में ग़ज़ल का विशेष स्थान है क्योंकि यह एक ऐसी विधा है जो प्रेम, दर्द, सुंदरता और दार्शनिक विचारों को संक्षिप्त और प्रभावशाली रूप में व्यक्त करती है। ग़ज़ल में शेर (दोहे) होते हैं जो स्वतंत्र होते हैं लेकिन एक ही रदीफ़ और क़ाफ़िया में बंधे होते हैं। इसकी लोकप्रियता इसकी संगीतात्मकता और भावनात्मक गहराई के कारण है। मीर, ग़ालिब, दाग़ और फ़ैज़ जैसे शायरों ने ग़ज़ल को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। यह विधा आम जनता से लेकर विद्वानों तक सभी को प्रभावित करती है।

प्रश्न 5. निम्नलिखित में से किसी एक का सारांश लिखिए।

“उर्दू नस्र का विकास” – इस विषय पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।

उत्तर: उर्दू नस्र का विकास 18वीं शताब्दी के आसपास शुरू हुआ। प्रारंभ में यह धार्मिक और ऐतिहासिक विषयों तक सीमित था। सर सैयद अहमद खान ने उर्दू नस्र को आधुनिक रूप दिया और ‘तहज़ीब-उल-अख़्लाक़’ जैसी पत्रिकाओं के माध्यम से इसे लोकप्रिय बनाया। मुंशी प्रेमचंद, अब्दुल हलीम शरर और राशिद अहमद सिद्दीकी जैसे लेखकों ने कहानी और उपन्यास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज उर्दू नस्र में कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध और आलोचना सभी विधाएं समृद्ध हैं।

प्रश्न 6. निम्नलिखित शेरों की व्याख्या कीजिए।

“दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त, दर्द से भर न आए क्यों
रोएंगे हम हज़ार बार, कोई हमें सताए क्यों”

व्याख्या: यह शेर मीर तक़ी मीर का है। इसमें शायर कहता है कि दिल तो पत्थर या ईंट नहीं है, बल्कि कोमल भावनाओं का केंद्र है। जब दिल में दर्द होता है तो उसका बाहर आना स्वाभाविक है। शायर पूछता है कि हम हज़ार बार रोएंगे, लेकिन कोई हमें क्यों सताता है? यह शेर प्रेम में व्यथा और असहायता को दर्शाता है। दिल की कोमलता और दर्द की अभिव्यक्ति इस शेर की मुख्य विशेषता है।

प्रश्न 7. निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

  1. उर्दू कविता में ‘हमद’ और ‘नात’ का क्या महत्व है?
  2. ‘उर्दू अफ़साना’ की परिभाषा दीजिए और इसके प्रमुख तत्व बताइए।
  3. मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी की विशेषताएं लिखिए।

उत्तर (1): उर्दू कविता में ‘हमद’ ईश्वर की स्तुति में लिखी गई कविता है, जो अल्लाह की महिमा और एकता का गुणगान करती है। ‘नात’ पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) की प्रशंसा में लिखी गई कविता है। इन दोनों का उर्दू कविता में बहुत महत्व है क्योंकि ये धार्मिक भावनाओं को अभिव्यक्त करते हैं और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होते हैं। कई प्रसिद्ध शायरों ने हमद और नात लिखी हैं।

उत्तर (2): उर्दू अफ़साना (कहानी) गद्य की एक विधा है जिसमें एक घटना या जीवन के किसी पहलू को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इसके प्रमुख तत्व हैं: कथानक, पात्र, संवाद, देशकाल, शैली और उद्देश्य। एक अच्छे अफ़साने में ये सभी तत्व संतुलित होते हैं और पाठक को प्रभावित करते हैं।

उत्तर (3): मिर्ज़ा ग़ालिब की शायरी की विशेषताएं: (i) गहन दार्शनिकता और जीवन के रहस्यों पर चिंतन, (ii) प्रेम और दर्द का सुंदर चित्रण, (iii) नए और अनोखे प्रतीकों का प्रयोग, (iv) भाषा पर अद्भुत पकड़ और शब्दों का कुशल प्रयोग, (v) व्यंग्य और हास्य का मिश्रण, (vi) रूमानियत और यथार्थ का संतुलन। ग़ालिब ने उर्दू ग़ज़ल को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

— पृष्ठ 4 समाप्त —

Urdu Sahitya (SS-22-2022) – Page 5

प्रश्न 9. निम्नलिखित में से किसी एक प्रश्न का उत्तर दीजिए।

(क) "उर्दू साहित्य में ग़ज़ल का विकास" पर एक निबंध लिखिए।

(ख) "उर्दू नाटक की परंपरा और विकास" पर एक निबंध लिखिए।

उत्तर (क): उर्दू साहित्य में ग़ज़ल का विकास एक महत्वपूर्ण विषय है। ग़ज़ल की शुरुआत फारसी साहित्य से हुई और बाद में यह उर्दू साहित्य का अभिन्न अंग बन गई। उर्दू ग़ज़ल के प्रमुख कवियों में मीर तकी मीर, ग़ालिब, दाग़ देहलवी, और फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ शामिल हैं। ग़ज़ल में प्रेम, दर्द, और दार्शनिक विचारों को अभिव्यक्त किया जाता है। इसका विकास 18वीं शताब्दी में दिल्ली और लखनऊ में हुआ। आधुनिक युग में ग़ज़ल ने नए विषयों और शैलियों को अपनाया है।

उत्तर (ख): उर्दू नाटक की परंपरा 19वीं शताब्दी में शुरू हुई। पहले उर्दू नाटक "इंद्रसभा" (1853) को माना जाता है, जिसे आगा हसन अमानत ने लिखा था। इसके बाद मुंशी प्रेमचंद, इम्तियाज़ अली ताज, और अन्य नाटककारों ने उर्दू नाटक को समृद्ध किया। उर्दू नाटक में सामाजिक, राजनीतिक, और ऐतिहासिक विषयों को प्रमुखता दी गई। आधुनिक युग में उर्दू नाटक ने रेडियो, टेलीविजन, और रंगमंच पर अपनी पहचान बनाई है।

प्रश्न 10. निम्नलिखित में से किसी एक प्रश्न का उत्तर दीजिए।

(क) "उर्दू कहानी की विशेषताएँ" पर प्रकाश डालिए।

(ख) "उर्दू साहित्य में प्रेमचंद का योगदान" पर एक निबंध लिखिए।

उत्तर (क): उर्दू कहानी की प्रमुख विशेषताएँ हैं: (1) यथार्थवादी चित्रण, (2) सामाजिक समस्याओं पर केंद्रित, (3) सरल और प्रभावशाली भाषा, (4) पात्रों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण, (5) संक्षिप्तता और प्रभावशीलता। उर्दू कहानी ने ग्रामीण और शहरी जीवन दोनों को चित्रित किया है। प्रमुख कहानीकारों में प्रेमचंद, कृश्न चंदर, राजेंद्र सिंह बेदी, और सआदत हसन मंटो शामिल हैं।

उत्तर (ख): मुंशी प्रेमचंद उर्दू साहित्य के महानतम लेखकों में से एक हैं। उन्होंने उर्दू कहानी और उपन्यास को नई दिशा दी। उनकी प्रमुख रचनाएँ "गोदान", "गबन", "कफ़न", और "पंच परमेश्वर" हैं। प्रेमचंद ने ग्रामीण भारत की समस्याओं, गरीबी, सामंती व्यवस्था, और सामाजिक अन्याय को अपनी रचनाओं में चित्रित किया। उनकी भाषा सरल और प्रभावशाली है। उन्हें "उर्दू कहानी का जनक" भी कहा जाता है।

प्रश्न 11. निम्नलिखित में से किसी एक प्रश्न का उत्तर दीजिए।

(क) "उर्दू शायरी में रूमानियत" पर टिप्पणी लिखिए।

(ख) "उर्दू साहित्य में मीर तकी मीर का स्थान" पर प्रकाश डालिए।

उत्तर (क): उर्दू शायरी में रूमानियत का प्रभाव 19वीं शताब्दी के अंत और 20वीं शताब्दी की शुरुआत में देखा गया। रूमानी शायरी में प्रेम, प्रकृति, और भावनाओं को प्रमुखता दी गई। इस धारा के प्रमुख कवियों में अकबर इलाहाबादी, जोश मलीहाबादी, और फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ शामिल हैं। रूमानी शायरी में व्यक्तिगत अनुभवों और भावनाओं को अभिव्यक्त किया गया।

उत्तर (ख): मीर तकी मीर उर्दू शायरी के सबसे महान कवियों में से एक हैं। उन्हें "ख़ुदा-ए-सुख़न" (शायरी का भगवान) कहा जाता है। मीर की शायरी में प्रेम, दर्द, और दार्शनिक गहराई है। उनकी प्रमुख रचनाएँ "कुल्लियात-ए-मीर" और "ज़िक्र-ए-मीर" हैं। मीर ने उर्दू ग़ज़ल को नई ऊँचाई दी और उनकी शैली आज भी कवियों को प्रभावित करती है।

प्रश्न 12. निम्नलिखित में से किसी एक प्रश्न का उत्तर दीजिए।

(क) "उर्दू साहित्य में नवाब मिर्ज़ा खाँ दाग़ का योगदान" पर एक निबंध लिखिए।

(ख) "उर्दू साहित्य में अल्ताफ़ हुसैन हाली का योगदान" पर प्रकाश डालिए।

उत्तर (क): नवाब मिर्ज़ा खाँ दाग़ उर्दू शायरी के प्रमुख कवियों में से एक हैं। उन्होंने ग़ज़ल और शायरी को नई शैली दी। दाग़ की शायरी में प्रेम, सौंदर्य, और सामाजिक विषयों को चित्रित किया गया। उनकी प्रमुख रचनाएँ "गुलज़ार-ए-दाग़" और "यादगार-ए-दाग़" हैं। दाग़ ने उर्दू शायरी को सरल और प्रभावशाली बनाया।

उत्तर (ख): अल्ताफ़ हुसैन हाली उर्दू साहित्य के महान आलोचक और कवि हैं। उन्होंने उर्दू शायरी में नई चेतना जगाई। हाली की प्रमुख रचनाएँ "मुकद्दमा-ए-शेर-ओ-शायरी" और "यादगार-ए-ग़ालिब" हैं। उन्होंने उर्दू साहित्य में आलोचना और शोध को बढ़ावा दिया। हाली का योगदान उर्दू साहित्य के विकास में अमूल्य है।

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