RBSE Class 12th 2023 Physics-SS-40-2023 Previous Year Papers
You opened the RBSE Class 12th 2023 Physics-SS-40-2023 Previous Year Papers page — a focused place to read the real previous year question paper for that subject and year. RBSE Solution keeps exam-year sets together so you can practise the same cycle your seniors faced.
Previous year papers reward patience: read instructions, note mark distribution, then attempt questions before peeking at solutions elsewhere on the site. This URL always loads the same free previous year papers content for Physics-SS-40-2023 (2023).
Use the details table to confirm class and year, then scroll to the paper images or PDF below. More subjects from 2023 are linked later on this page.
Paper details
Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.
| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2023 |
| Subject | Physics-SS-40-2023 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 12th, year 2023, and subject Physics-SS-40-2023 before studying.
RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.
How to practise with this question paper
Stage one: read the Physics-SS-40-2023 question paper from 2023 without a timer and highlight command words — explain, prove, calculate, discuss. Stage two: attempt selected questions closed-book. Stage three: compare with solutions or teacher feedback.
Previous Year Papers work best when you log mistakes by topic, not only by question number. That log becomes your revision index before pre-boards.
RBSE Class 12th 2023 Physics-SS-40-2023
Scroll through the Previous Year Papers pages for Physics-SS-40-2023 (2023).
Rajasthan Board Class 12th Physics-SS-40-2023 2023 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2023
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2023
भौतिक विज्ञान
PHYSICS
समय : 3 घण्टे 5 मिनट
पूर्णांक : 56
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - सभी प्रश्नों का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to all questions in the given answer-book only.
SS+0-Physics
[Turn Over]
Physics – SS–40–2023
5. यदि पत्र के हिन्दी एवं अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को ही सही माना जाएगा।
If there is any error/difference/contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi Version should be treated valid.
6. प्रश्न का उत्तर लिखने से पूर्व प्रश्न का क्रमांक अवश्य लिखें।
Write down the serial number of the question before attempting it.
7. प्रश्न क्रमांक 9 व 20 में आन्तरिक विकल्प हैं।
There are internal choices in Question Nos. 9 & 20.
Page content could not be transcribed.
खण्ड - अ (Section - A)
I) बहुविकल्प प्रश्न (i से ix)
निम्न प्रश्नों के उत्तर का सही विकल्प का चयन कर दी गई उत्तर पुस्तिका में लिखिए।
Choose the correct answer from multiple choice questions (i to ix) and write in the given answer book.
-
(i) मुक्त आकाश या निर्वात की विद्युतशीलता (ε₀) का SI मान है:
- A) 9 × 10⁹ Nm²/C²
- B) 9 × 10⁹ Nm²C⁻²
- C) 8.854 × 10⁻¹² C²/N·m²
- D) 8.854 × 10⁻¹² C/N·m²
व्याख्या: निर्वात की विद्युतशीलता (ε₀) का SI मान 8.854 × 10⁻¹² C²/N·m² होता है।
-
(ii) नीचे प्रदर्शित चित्र में रंग सूचक प्रतिरोधक में प्रतिशत सहनता (टोलरेन्स) होगी:
(पीला - बैंगनी - भूरा - सुनहरा)
- A) 10%
- B) 5%
- C) 20%
- D) 5%
व्याख्या: चार बैंड वाले प्रतिरोधक में चौथा बैंड (गोल्ड) सहनता दर्शाता है, जो 5% होती है।
-
(iii) लोहे का क्यूरी ताप होता है:
- A) 043 K
- B) 143 K
- C) 893 K
- D) 317 K
व्याख्या: लोहे का क्यूरी ताप लगभग 893 K (या 770°C) होता है, जिसके ऊपर यह लौहचुम्बकीय गुण खो देता है।
प्रश्न (iv)
प्रत्यावर्ती धारा I = 200 sin (60πt + π/6) में विद्युत धारा की आवृत्ति होगी।
- a) 20 Hz
- b) 60 Hz
- c) 90 Hz
- d) 30 Hz
हल: दिए गए समीकरण I = 200 sin (60πt + π/6) में, कोणीय आवृत्ति ω = 60π rad/s है। आवृत्ति f = ω / (2π) = (60π) / (2π) = 30 Hz।
सही उत्तर: d) 30 Hz
प्रश्न (v)
FM प्रसारण के लिए संचार आवृत्ति बैंड परास है-
- a) 530-710 MHz
- b) 540-890 MHz
- c) 88-108 MHz
- d) 54-85 MHz
हल: FM (Frequency Modulation) प्रसारण के लिए मानक आवृत्ति बैंड 88 MHz से 108 MHz है।
सही उत्तर: c) 88-108 MHz
प्रश्न (vi)
उत्तल लेंस की फोकस दूरी क्या होगी जिसकी क्षमता +2.5 D है?
- a) 50 cm
- b) 25 cm
- c) 250 cm
- d) 40 cm
हल: लेंस की क्षमता P = +2.5 D है। फोकस दूरी f (मीटर में) = 1/P = 1/2.5 = 0.4 m = 40 cm।
सही उत्तर: d) 40 cm
प्रश्न (vii)
4π कलांतर के तुल्य पथान्तर होता है-
- a) 8λ
- b) 2λ
- c) 6λ
- d) 4λ
हल: कलांतर Δφ और पथान्तर Δx में संबंध: Δφ = (2π/λ) × Δx। यहाँ Δφ = 4π, तो Δx = (Δφ × λ) / (2π) = (4π × λ) / (2π) = 2λ।
सही उत्तर: b) 2λ
Physics (SS-40-2023) – Page 5
Question (ix)
De-Broglie wavelength associated with an electron, accelerated through a potential difference of 100 volt is:
- 2.27 nm
- 0.227 nm
- 22.7 nm
- 0.0227 nm
Correct Answer: B) 0.227 nm
Explanation: The de Broglie wavelength of an electron accelerated through a potential difference V is given by λ = h / √(2meV). For V = 100 V, λ ≈ 0.227 nm.
Question (x)
The output (Y) of the logic circuit shown in the figure will be:
- Y = A + B
- Y = A - B
- Y = A + B̅
- Y = A̅ + B
Correct Answer: A) Y = A + B
Explanation: The logic circuit shown is an OR gate, where the output Y is the logical sum of inputs A and B, i.e., Y = A + B.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (i) से (iv)
Fill in the blanks (i) to (iv)
-
एकसमान आवेशित पतले गोलीय खोल के कारण उसके भीतर स्थित सभी बिंदुओं पर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है।
A uniformly charged thin spherical shell has an electric field at all points zero inside it.
-
अर्धचालकों की प्रतिरोधकता ताप में वृद्धि होने पर घटती है।
On increasing the temperature, the resistivity of semiconductors decreases.
-
दो समान दिशा में प्रवाहित होने वाली विद्युत धाराओं के चालकों के मध्य आकर्षण बल है।
The force between two parallel current carrying conductors carrying current in the same direction is attractive.
-
प्राथमिक इन्द्रधनुष में, प्रकाश का एक बार अपवर्तन एवं एक बार आन्तरिक परावर्तन होता है।
In the primary rainbow, light is refracted once and internally reflected once.
निम्न प्रश्नों (i से viii) के उत्तर एक पंक्ति में दीजिए
Give the answer of the following questions (i to viii) in one line:
-
एकल धनावेश (q > 0) के कारण विद्युत क्षेत्र रेखाओं को दर्शाइए।
Show the electric field lines due to a single positive charge (q > 0).
उत्तर: एकल धनावेश के कारण विद्युत क्षेत्र रेखाएँ आवेश से बाहर की ओर त्रिज्यतः (radially outward) निकलती हैं।
-
किसी विद्युत द्विध्रुव के कारण इसके अक्ष पर स्थित बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र का मान लिखिए।
Write the value of electric field due to an electric dipole at a point on its axis.
उत्तर: विद्युत द्विध्रुव के अक्ष पर स्थित बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र का मान E = (1/4πε₀) × (2p/r³) होता है, जहाँ p द्विध्रुव आघूर्ण है और r द्विध्रुव के केंद्र से बिन्दु की दूरी है।
प्रश्न (v) स्थायी चुम्बक बनाने के लिए पदार्थ की दो विशेषताएँ लिखिए।
Write two characteristics of a material to produce a permanent magnet.
उत्तर / Answer:
- उच्च धारणशीलता (High retentivity) – चुम्बकीय क्षेत्र हटाने के बाद भी चुम्बकत्व बनाए रखने की क्षमता।
- उच्च निग्राहिता (High coercivity) – चुम्बकत्व को नष्ट करने के लिए आवश्यक विपरीत चुम्बकीय क्षेत्र का अधिक होना।
प्रश्न (vi) निम्न में से दो अनुचुंबकीय पदार्थ छाँटिए :
Select two paramagnetic materials from the following: Sodium (Na), Bismuth (Bi), Copper (Cu), Aluminum (Al), Lead (Pb).
उत्तर / Answer:
दो अनुचुंबकीय पदार्थ हैं: सोडियम (Na) और ऐलुमिनियम (Al)।
स्पष्टीकरण: अनुचुंबकीय पदार्थों में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं जो बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में दुर्बल आकर्षण प्रदर्शित करते हैं। Na और Al में अयुग्मित इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं, जबकि Bi प्रतिचुंबकीय, Cu और Pb विषम चुंबकीय व्यवहार दर्शाते हैं।
प्रश्न (vii) निर्वात नलिका मैग्नेट्रॉन द्वारा उत्पन्न विद्युत चुम्बकीय तरंग का नाम लिखिए।
Write the name of electromagnetic wave produced by vacuum tube magnetron.
उत्तर / Answer:
मैग्नेट्रॉन द्वारा उत्पन्न विद्युत चुम्बकीय तरंग सूक्ष्म तरंग (Microwave) है।
प्रश्न (viii) एक अवतल दर्पण की वक्रता त्रिज्या 28 cm है, इसकी फोकस दूरी होगी?
The radius of curvature of a concave mirror is 28 cm, its focal length will be?
उत्तर / Answer:
अवतल दर्पण के लिए फोकस दूरी (f) = वक्रता त्रिज्या (R) / 2
f = 28 cm / 2 = 14 cm
स्पष्टीकरण: अवतल दर्पण की फोकस दूरी धनात्मक होती है, अतः फोकस दूरी 14 cm होगी।
प्रश्न (ix) फ्रेनल दूरी, प्रकाश की तरंगदैर्ध्य तथा द्वारक की साइज में संबंध बताने वाला सूत्र लिखिए।
Write the formula which shows the relation between Fresnel distance, wavelength of light and size of aperture.
उत्तर / Answer:
फ्रेनल दूरी (F) का सूत्र:
F = a² / λ
जहाँ a = द्वारक का आकार (size of aperture), λ = प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (wavelength of light)।
प्रश्न (x) p-प्रकार के अर्द्धचालक में बहुसंख्यक आवेशवाहक तथा अल्पसंख्यक आवेशवाहक के नाम लिखिए।
Write name of majority charge carriers and minority charge carriers in p-type semiconductor.
उत्तर / Answer:
- बहुसंख्यक आवेशवाहक (Majority charge carriers): होल (Holes)
- अल्पसंख्यक आवेशवाहक (Minority charge carriers): इलेक्ट्रॉन (Electrons)
खण्ड - ब
5.
23 H0°C आवेश के कारण इससे 0.1 मीटर दूरी पर स्थित किसी बिंदु पर विद्युत विभव परिकलित कीजिए।
Calculate the electric potential at a point due to a charge of 2 × 10⁻⁶ C located 0.1 m away from it.
हल:
दिया गया है: आवेश q = 2 × 10⁻⁶ C, दूरी r = 0.1 m
विद्युत विभव का सूत्र: V = (1/4πε₀) × (q/r)
जहाँ 1/4πε₀ = 9 × 10⁹ Nm²/C²
V = (9 × 10⁹) × (2 × 10⁻⁶ / 0.1)
V = (9 × 10⁹) × (2 × 10⁻⁵)
V = 18 × 10⁴ V = 1.8 × 10⁵ V
अतः विद्युत विभव 1.8 × 10⁵ वोल्ट है।
6.
तीन बिंदु आवेशों के निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Find the expression for electric potential energy of a system of three point charges.
हल:
तीन बिंदु आवेशों q₁, q₂, q₃ के निकाय पर विचार करें जो क्रमशः r₁₂, r₂₃, r₃₁ दूरियों पर स्थित हैं।
निकाय की कुल वैद्युत स्थितिज ऊर्जा = सभी युग्मों की स्थितिज ऊर्जाओं का योग
U = U₁₂ + U₂₃ + U₃₁
U = (1/4πε₀) [q₁q₂/r₁₂ + q₂q₃/r₂₃ + q₃q₁/r₃₁]
यह तीन बिंदु आवेशों के निकाय की वैद्युत स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक है।
7.
किसी परिपथ में 0.1 s में धारा 5.0 A से 1.0 A तक गिरती है। यदि औसत प्रेरित विद्युत वाहक बल 200 V है तो परिपथ में स्वप्रेरकत्व का आकलन कीजिए।
Current in a circuit falls from 5.0 A to 1.0 A in 0.1 s. If an average e.m.f. of 200 V is induced, give an estimate of the self inductance of the circuit.
हल:
दिया गया है: प्रारंभिक धारा I₁ = 5.0 A, अंतिम धारा I₂ = 1.0 A, समय Δt = 0.1 s, प्रेरित विद्युत वाहक बल ε = 200 V
धारा में परिवर्तन ΔI = I₂ - I₁ = 1.0 - 5.0 = -4.0 A
प्रेरित विद्युत वाहक बल का सूत्र: ε = -L (ΔI/Δt)
200 = L × (4.0/0.1) (चिह्न को ध्यान में न लेते हुए)
200 = L × 40
L = 200/40 = 5 H
अतः परिपथ का स्वप्रेरकत्व 5 हेनरी है।
8.
विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के लिए कथन लिखिए:
i) फैराडे का नियम ii) लेंज का नियम
Write statement for electromagnetic induction:
i) Faraday's law ii) Lenz's law
उत्तर:
i) फैराडे का प्रथम नियम: जब किसी कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो कुंडली में एक विद्युत वाहक बल प्रेरित होता है।
फैराडे का द्वितीय नियम: प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण, चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर के बराबर होता है। ε = -dΦ/dt
ii) लेंज का नियम: प्रेरित धारा की दिशा सदैव इस प्रकार होती है कि वह उस कारण का विरोध करे जिससे वह उत्पन्न हुई है।
9.
शक्ति गुणांक का मान निम्नांकित परिपथों के लिए ज्ञात कीजिए:
i) शुद्ध धारितीय परिपथ ii) श्रेणी LCR अनुनादी परिपथ
Find out value of power factor for following circuit:
i) Purely capacitive circuit ii) Series LCR resonance circuit
उत्तर:
i) शुद्ध धारितीय परिपथ: शुद्ध धारितीय परिपथ में धारा, वोल्टता से 90° अग्रगामी होती है। अतः कला कोण φ = 90°
शक्ति गुणांक = cos φ = cos 90° = 0
ii) श्रेणी LCR अनुनादी परिपथ: अनुनाद की स्थिति में प्रेरणिक प्रतिघात (XL) और धारितीय प्रतिघात (XC) बराबर होते हैं, अतः कला कोण φ = 0°
शक्ति गुणांक = cos φ = cos 0° = 1
10.
ट्रांसफार्मर में होने वाली किन्हीं तीन ऊर्जा क्षय (हानि) का उल्लेख कीजिए। इन्हें कैसे कम किया जा सकता है? समझाइए।
Describe any three energy losses in transformers. How can these be minimized? Explain.
उत्तर:
ट्रांसफार्मर में तीन प्रमुख ऊर्जा क्षय निम्नलिखित हैं:
- ताम्र क्षय (Copper loss): यह कुंडलियों के तारों में प्रतिरोध के कारण होता है। इसे कम करने के लिए मोटे तारों का उपयोग किया जाता है।
- लौह क्षय या भँवर धारा क्षय (Iron loss or Eddy current loss): क्रोड में प्रेरित भँवर धाराओं के कारण ऊर्जा क्षय होता है। इसे कम करने के लिए क्रोड को पतली पट्टियों (लैमिनेशन) का बनाया जाता है।
- शैथिल्य क्षय (Hysteresis loss): क्रोड के बार-बार चुंबकन और विचुंबकन के कारण ऊर्जा क्षय होता है। इसे कम करने के लिए नर्म लोहे या सिलिकॉन स्टील जैसे कम शैथिल्य गुणांक वाले पदार्थ का उपयोग किया जाता है।
प्रकाश विद्युत प्रभाव (Photoelectric Effect)
प्रश्न 1: प्रकाश विद्युत प्रभाव की घटना में निम्न को परिभाषित कीजिए।
Define the following in photoelectric effect phenomenon:
- कार्य फलन (Work function)
- निरोधी विभव (Stopping potential)
परिभाषाएँ (Definitions):
i) कार्य फलन (Work function): किसी धातु से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को कार्य फलन कहते हैं। इसे प्रायः φ (phi) से दर्शाया जाता है और इसका मात्रक इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) होता है।
ii) निरोधी विभव (Stopping potential): वह न्यूनतम विभवांतर जिसे प्रकाश-इलेक्ट्रॉनों की गति को रोकने के लिए लगाया जाता है, निरोधी विभव कहलाता है। इसे V₀ से दर्शाया जाता है। इस विभव पर, उत्सर्जित सबसे तीव्र गति वाले इलेक्ट्रॉन भी एनोड तक पहुँचने से पहले रुक जाते हैं, जिससे फोटोकरंट शून्य हो जाता है।
प्रश्न 2: यदि सीजियम धातु का कार्यफलन 2.14 eV है तो इसकी देहली आवृत्ति Hz में ज्ञात कीजिए।
If the work function of caesium metal is 2.14 eV then find its threshold frequency in Hz.
हल (Solution):
दिया है:
- कार्य फलन (φ) = 2.14 eV
- 1 eV = 1.6 × 10⁻¹⁹ J
- प्लांक स्थिरांक (h) = 6.63 × 10⁻³⁴ Js
सूत्र: कार्य फलन और देहली आवृत्ति (f₀) में संबंध: φ = h f₀
गणना:
सर्वप्रथम कार्य फलन को जूल में बदलते हैं:
φ = 2.14 × 1.6 × 10⁻¹⁹ J = 3.424 × 10⁻¹⁹ J
अब, f₀ = φ / h = (3.424 × 10⁻¹⁹) / (6.63 × 10⁻³⁴)
f₀ = 5.16 × 10¹⁴ Hz
अतः सीजियम धातु की देहली आवृत्ति 5.16 × 10¹⁴ Hz है।
प्रश्न 3: हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था में कुल ऊर्जा -13.6 eV है। इस अवस्था में इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
The total energy of the electron in the ground state of Hydrogen atom is -13.6 eV. Find the kinetic energy and potential energy of electron in this state.
हल (Solution):
दिया है: कुल ऊर्जा (E) = -13.6 eV
सूत्र: बोहर मॉडल के अनुसार, हाइड्रोजन परमाणु की किसी कक्षा में:
- गतिज ऊर्जा (K) = -E (कुल ऊर्जा का ऋणात्मक मान)
- स्थितिज ऊर्जा (U) = 2E (कुल ऊर्जा का दोगुना)
गणना:
गतिज ऊर्जा (K) = -(-13.6 eV) = +13.6 eV
स्थितिज ऊर्जा (U) = 2 × (-13.6 eV) = -27.2 eV
अतः निम्नतम अवस्था में इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा +13.6 eV और स्थितिज ऊर्जा -27.2 eV है।
प्रश्न 4:
i) परमाणु के रदरफोर्ड मॉडल की दो कमियाँ लिखिए।
ii) हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की उस श्रेणी का नाम लिखिए जिसकी रेखाएँ दृश्य प्रकाश क्षेत्र में पड़ती हैं।
i) Write two drawbacks of Rutherford's atomic model.
ii) Name the series of the hydrogen spectrum whose lines fall in the visible region.
उत्तर (Answer):
i) रदरफोर्ड मॉडल की दो कमियाँ (Drawbacks of Rutherford's model):
- अस्थिरता (Instability): रदरफोर्ड मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार पथों में घूमते हैं। लेकिन शास्त्रीय विद्युत चुंबकत्व के अनुसार, त्वरित आवेशित कण (इलेक्ट्रॉन) लगातार ऊर्जा विकिरित करता है। इससे इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा घटती जाती है और वह सर्पिलाकार पथ में नाभिक में गिर जाता है, जिससे परमाणु अस्थिर हो जाता है। वास्तव में परमाणु स्थिर होते हैं।
- रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या (Inability to explain line spectra): यह मॉडल यह नहीं समझा पाया कि हाइड्रोजन जैसे परमाणु असतत (discrete) रेखीय स्पेक्ट्रम क्यों उत्सर्जित करते हैं। शास्त्रीय सिद्धांत के अनुसार, परमाणु को सतत (continuous) स्पेक्ट्रम उत्सर्जित करना चाहिए।
ii) दृश्य प्रकाश क्षेत्र में पड़ने वाली श्रेणी: बामर श्रेणी (Balmer series)
प्रश्न 5: रेडियोएक्टिव क्षयता का नियम लिखिए। किसी रेडियोएक्टिव तत्त्व का क्षय स्थिरांक 0.693 प्रति मिनट है। अर्ध आयु का मान मिनट में ज्ञात कीजिए।
Write the law of radioactive decay. The decay constant of a radioactive substance is 0.693 per minute. Calculate its half-life time in minute.
उत्तर (Answer):
रेडियोएक्टिव क्षयता का नियम (Law of Radioactive Decay):
इस नियम के अनुसार, किसी क्षण पर रेडियोएक्टिव पदार्थ के नाभिकों के क्षय होने की दर (अर्थात प्रति सेकंड क्षय होने वाले नाभिकों की संख्या) उस क्षण पर उपस्थित अक्षयित नाभिकों की संख्या के समानुपाती होती है।
गणितीय रूप में: dN/dt = -λN, जहाँ N अक्षयित नाभिकों की संख्या है, t समय है, और λ क्षय स्थिरांक है।
अर्ध आयु की गणना (Calculation of Half-life):
दिया है: क्षय स्थिरांक (λ) = 0.693 प्रति मिनट
सूत्र: अर्ध आयु (T₁/₂) = ln(2) / λ = 0.693 / λ
गणना:
T₁/₂ = 0.693 / 0.693 = 1 मिनट
अतः रेडियोएक्टिव तत्त्व की अर्ध आयु 1 मिनट है।
खण्ड - स (Section - C)
6. व्हीटस्टोन सेतु का नामांकित परिपथ चित्र बनाकर सेतु में शून्य विक्षेप के लिए प्रतिबन्ध की व्युत्पत्ति कीजिए।
Drawing a labelled circuit diagram of Wheatstone bridge, derive condition for zero deflection in the bridge.
परिपथ चित्र (Circuit Diagram):
व्हीटस्टोन सेतु में चार प्रतिरोध P, Q, R, S एक चतुर्भुज ABCD में जुड़े होते हैं। A और C के बीच एक सेल E जुड़ा होता है, तथा B और D के बीच एक संवेदी धारामापी G जुड़ा होता है।
व्युत्पत्ति (Derivation):
जब सेतु संतुलित होता है, तो धारामापी में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती (शून्य विक्षेप)। इस स्थिति में, बिंदु B और D समान विभव पर होते हैं।
माना सेल से निकलने वाली धारा I है, जो बिंदु A पर दो भागों I₁ और I₂ में विभाजित हो जाती है।
I₁ प्रतिरोध P से होकर बहती है, और I₂ प्रतिरोध R से होकर बहती है।
चूंकि B और D समान विभव पर हैं, इसलिए:
P और Q में विभव पतन: VAB = I₁P, VBC = I₁Q
R और S में विभव पतन: VAD = I₂R, VDC = I₂S
चूंकि VAB = VAD और VBC = VDC, इसलिए:
I₁P = I₂R ...(1)
I₁Q = I₂S ...(2)
समीकरण (1) को (2) से भाग देने पर:
P/Q = R/S
यही व्हीटस्टोन सेतु के शून्य विक्षेप के लिए आवश्यक प्रतिबन्ध है।
7. एम्पियर का परिपथीय नियम से एक अत्यधिक लम्बी धारावाही परिनालिका के अक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र का व्यंजक प्राप्त कीजिए। आवश्यक चित्र बनाइए।
Obtain an expression for magnetic field on the axis of current carrying very long solenoid by Ampere's circuital law. Draw necessary diagram.
चित्र (Diagram):
एक लम्बी परिनालिका पर विचार करें जिसमें प्रति मीटर n फेरे हैं और I धारा प्रवाहित हो रही है। परिनालिका के अक्ष पर एक आयताकार एम्पियर पाश abcd लें, जहाँ ab अक्ष के अनुदिश है और cd अक्ष से बाहर है।
व्युत्पत्ति (Derivation):
एम्पियर के परिपथीय नियम के अनुसार:
∮ B·dl = μ₀ × (पाश द्वारा घिरी कुल धारा)
आयताकार पाश abcd के लिए:
∮ B·dl = ∫a→b B·dl + ∫b→c B·dl + ∫c→d B·dl + ∫d→a B·dl
भुजा ab पर: B और dl समान दिशा में, अतः ∫ B·dl = B × L (जहाँ L = ab की लंबाई)
भुजा bc और da पर: B और dl परस्पर लंबवत, अतः ∫ B·dl = 0
भुजा cd पर: परिनालिका के बाहर चुम्बकीय क्षेत्र शून्य माना जाता है, अतः ∫ B·dl = 0
इस प्रकार, ∮ B·dl = B × L
पाश द्वारा घिरी कुल धारा = (n × L) × I
एम्पियर के नियम से:
B × L = μ₀ × n × L × I
B = μ₀ n I
यह अत्यधिक लम्बी धारावाही परिनालिका के अक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र का व्यंजक है।
8. व्यतिकरण फ्रिंज प्रतिरूप उत्पन्न करने के लिए यंग द्वि-स्लिट प्रयोग का आवश्यक चित्र बनाइये। दीप्त फ्रिंजों के लिए फ्रिंज चौड़ाई का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए।
To produce interference fringe pattern, draw a necessary diagram of Young's double slit experiment. Derive an expression of fringe width for bright fringes.
चित्र (Diagram):
एक एकवर्णी प्रकाश स्रोत S, दो संकीर्ण स्लिट S₁ और S₂ पर प्रकाश डालता है। S₁ और S₂ के बीच की दूरी d है। स्लिटों से D दूरी पर एक पर्दा रखा जाता है। पर्दे पर व्यतिकरण फ्रिंजें दिखाई देती हैं।
व्युत्पत्ति (Derivation):
माना पर्दे पर कोई बिंदु P है, जो केंद्र O से x दूरी पर है।
S₁P और S₂P के बीच पथांतर:
Δx = S₂P - S₁P
ज्यामिति से, S₂P - S₁P = d sinθ ≈ d × (x/D) (जब θ छोटा हो)
दीप्त फ्रिंज के लिए, पथांतर λ का पूर्ण गुणज होना चाहिए:
d × (x/D) = nλ, जहाँ n = 0, 1, 2, ...
अतः nवीं दीप्त फ्रिंज की स्थिति: xn = nλD/d
फ्रिंज चौड़ाई (β) दो क्रमागत दीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी है:
β = xn+1 - xn = [(n+1)λD/d] - [nλD/d]
β = λD/d
यह दीप्त फ्रिंजों के लिए फ्रिंज चौड़ाई का व्यंजक है।
SECTION - D
9. अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब निर्माण का किरण चित्र बनाकर वस्तु दूरी (u), प्रतिबिंब दूरी (v) तथा फोकस दूरी (f) में संबंध स्थापित कीजिए।
Draw a ray diagram for image formation by concave mirror and establish a relation between object distance (u), image distance (v) and focal length (f).
हल / Solution:
किरण चित्र (Ray Diagram): अवतल दर्पण के मुख्य अक्ष पर एक वस्तु AB रखी गई है। वस्तु के बिंदु B से दो किरणें निकलती हैं:
- एक किरण मुख्य अक्ष के समांतर चलती है और परावर्तन के बाद फोकस F से होकर जाती है।
- दूसरी किरण वक्रता केंद्र C से होकर जाती है और परावर्तन के बाद उसी मार्ग से वापस लौटती है।
ये दोनों परावर्तित किरणें बिंदु B' पर मिलती हैं, जहाँ वस्तु का प्रतिबिंब बनता है।
संबंध स्थापना (Relation Establishment):
माना अवतल दर्पण का ध्रुव P है। वस्तु AB की दूरी u (P से), प्रतिबिंब A'B' की दूरी v (P से) तथा फोकस दूरी f (PF) है।
समरूप त्रिभुजों ABC और A'B'C से:
AB/A'B' = (u - f)/f ...(1)
समरूप त्रिभुजों ABP और A'B'P से:
AB/A'B' = u/v ...(2)
समीकरण (1) और (2) से:
u/v = (u - f)/f
⇒ uf = v(u - f)
⇒ uf = uv - vf
⇒ uv = uf + vf
⇒ 1/f = 1/u + 1/v
यही अवतल दर्पण के लिए अभीष्ट संबंध है।
अथवा / OR
काँच के त्रिभुजाकार प्रिज्म से किसी प्रकाश किरण के गुजरने का किरण चित्र बनाइए। यदि प्रिज्म कोण A है तो μ = sin[(A + δm)/2] / sin(A/2) सम्बन्ध का निगमन कीजिए। (यहाँ μ = प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक एवं δm न्यूनतम विचलन है)
Draw a ray diagram of light passing through a triangular glass prism. If prism angle is A then deduce the relation μ = sin[(A + δm)/2] / sin(A/2) (where μ = refractive index of substance of prism and δm = minimum deviation)
हल / Solution:
किरण चित्र (Ray Diagram): एक त्रिभुजाकार प्रिज्म ABC लिया गया है जिसका प्रिज्म कोण A है। एक प्रकाश किरण PQ प्रिज्म के फलक AB पर आपतित होती है, अपवर्तित होकर QR मार्ग से फलक AC से निर्गत होती है। निर्गत किरण RS है। आपतित किरण और निर्गत किरण के बीच के कोण को विचलन कोण δ कहते हैं। न्यूनतम विचलन की स्थिति में δ = δm होता है।
संबंध निगमन (Relation Deduction):
न्यूनतम विचलन की स्थिति में:
- आपतन कोण i = निर्गमन कोण e
- प्रिज्म के अंदर अपवर्तन कोण r1 = r2 = r
प्रिज्म कोण A = r1 + r2 = 2r ⇒ r = A/2
विचलन कोण δ = i + e - A = 2i - A
न्यूनतम विचलन δm = 2i - A ⇒ i = (A + δm)/2
स्नेल के नियम से, प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक:
μ = sin i / sin r = sin[(A + δm)/2] / sin(A/2)
यही अभीष्ट संबंध है।
20. दिष्टकरण किसे कहते हैं? पूर्णतरंग दिष्टकारी का परिपथ चित्र बनाकर इसकी कार्यविधि को समझाइये। निवेशी प्रत्यावर्ती तथा निर्गम वोल्टता के तरंग प्रारूप को प्रदर्शित कीजिए।
What is rectification? Draw the circuit diagram of full wave rectifier and explain its working. Show the input ac voltage and output voltage waveforms from the rectifier circuit.
हल / Solution:
दिष्टकरण (Rectification): प्रत्यावर्ती धारा (AC) को दिष्ट धारा (DC) में बदलने की प्रक्रिया को दिष्टकरण कहते हैं।
पूर्णतरंग दिष्टकारी का परिपथ चित्र (Circuit Diagram of Full Wave Rectifier):
इसमें एक केंद्र-टैप ट्रांसफॉर्मर और दो डायोड (D1 और D2) होते हैं। ट्रांसफॉर्मर की द्वितीयक कुंडली के सिरों को डायोड के एनोड से जोड़ा जाता है, जबकि केंद्र-टैप को भू-संपर्कित किया जाता है। दोनों डायोड के कैथोड को एक साथ जोड़कर लोड प्रतिरोध RL से जोड़ा जाता है।
कार्यविधि (Working):
- प्रथम अर्धचक्र (Positive Half Cycle): जब निवेशी AC का प्रथम अर्धचक्र आता है, तो डायोड D1 अग्र-अभिनत (forward biased) होता है और D2 उत्क्रम-अभिनत (reverse biased) होता है। धारा D1 से होकर लोड RL में प्रवाहित होती है।
- द्वितीय अर्धचक्र (Negative Half Cycle): जब निवेशी AC का द्वितीय अर्धचक्र आता है, तो डायोड D2 अग्र-अभिनत होता है और D1 उत्क्रम-अभिनत होता है। धारा D2 से होकर लोड RL में उसी दिशा में प्रवाहित होती है।
इस प्रकार, दोनों अर्धचक्रों में लोड में धारा एक ही दिशा में प्रवाहित होती है, जिससे निर्गम पर स्पंदित DC प्राप्त होता है।
तरंग प्रारूप (Waveforms):
- निवेशी तरंग (Input Waveform): यह एक ज्या तरंग (sine wave) होती है जो धनात्मक और ऋणात्मक दोनों अर्धचक्रों में दोलन करती है।
- निर्गम तरंग (Output Waveform): यह केवल धनात्मक अर्धचक्रों वाली स्पंदित DC तरंग होती है, जिसमें ऋणात्मक भाग पूर्णतः हटा दिया जाता है।
अथवा / OR
अर्धचालक किसे कहते हैं? p-n संधि निर्माण की प्रक्रिया को आवश्यक चित्र बनाकर समझाइये। निम्नांकित डायोडों का प्रतीक बनाइए:
i) जेनर डायोड ii) p-n संधि डायोड
What is intrinsic semiconductor? Explain the processes of p-n junction formation with necessary diagram. Draw the symbol of the following diodes: i) Zener diode ii) p-n junction diode
हल / Solution:
अर्धचालक (Semiconductor): वे पदार्थ जिनकी चालकता चालक और कुचालक के बीच होती है, अर्धचालक कहलाते हैं। जैसे- सिलिकॉन (Si), जर्मेनियम (Ge) आदि।
p-n संधि निर्माण की प्रक्रिया (Process of p-n Junction Formation):
p-n संधि बनाने के लिए एक अर्धचालक क्रिस्टल (जैसे Si) के एक भाग में त्रिसंयोजी अशुद्धि (जैसे Al, B) मिलाकर p-प्रकार और दूसरे भाग में पंचसंयोजी अशुद्धि (जैसे P, As) मिलाकर n-प्रकार बनाया जाता है।
चित्र (Diagram):
- एक Si क्रिस्टल लें।
- बाएँ भाग में Al मिलाकर p-प्रकार बनाएँ (जहाँ होल अधिक हों)।
- दाएँ भाग में P मिलाकर n-प्रकार बनाएँ (जहाँ इलेक्ट्रॉन अधिक हों)।
- दोनों भागों के मिलने पर, n-क्षेत्र से इलेक्ट्रॉन p-क्षेत्र में और p-क्षेत्र से होल n-क्षेत्र में विसरित होते हैं।
- इस विसरण से संधि के निकट एक अवक्षय क्षेत्र (depletion region) बनता है, जहाँ कोई मुक्त आवेश वाहक नहीं होते।
- इस प्रकार p-n संधि का निर्माण होता है।
डायोडों के प्रतीक (Symbols of Diodes):
i) जेनर डायोड (Zener Diode): एक तीर के आकार का प्रतीक जिसमें कैथोड की ओर एक Z आकार का चिह्न होता है।
ii) p-n संधि डायोड (p-n Junction Diode): एक तीर के आकार का प्रतीक जिसमें एनोड (p-क्षेत्र) और कैथोड (n-क्षेत्र) को दर्शाया जाता है।