RBSE Class 12th 2026 HALF-YEARLY-HINDI-1203 Previous Year Papers

Class 12th students hunting authentic previous year papers for HALF-YEARLY-HINDI-1203 (2026) land here for a reason: the paper below matches how RBSE assessments are remembered from that year. RBSE Solution does not mix years on one page; each combination gets its own notes.

Skim the overview sections, then work through the scanned pages. Pair this practice with RBSE books and solutions when you need to relearn a concept a question exposed.

Paper details

Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.

Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2026
Subject HALF-YEARLY-HINDI-1203
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 12th, year 2026, and subject HALF-YEARLY-HINDI-1203 before studying.

RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.

How to practise with this question paper

Stage one: read the HALF-YEARLY-HINDI-1203 question paper from 2026 without a timer and highlight command words — explain, prove, calculate, discuss. Stage two: attempt selected questions closed-book. Stage three: compare with solutions or teacher feedback.

Previous Year Papers work best when you log mistakes by topic, not only by question number. That log becomes your revision index before pre-boards.

RBSE Class 12th 2026 HALF-YEARLY-HINDI-1203

Scroll through the Previous Year Papers pages for HALF-YEARLY-HINDI-1203 (2026).

RBSE Class 12th 2026 HALF-YEARLY-HINDI-1203 Previous Year Papers 0
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2026 HALF-YEARLY-HINDI-1203 Previous Year Papers 1
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2026 HALF-YEARLY-HINDI-1203 Previous Year Papers 2
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2026 HALF-YEARLY-HINDI-1203 Previous Year Papers 3
https://rbsesolution.com

Rajasthan Board Class 12th HALF-YEARLY-HINDI-1203 2026 solved Previous Year Question Papers

कक्षा 12वीं अर्द्ध वार्षिक परीक्षा: 2025-26
Class 12 Half Yearly Examination, 2025-26

हिन्दी अनिवार्य / HINDI COMPULSORY [ 203 ]

सामान्य निर्देश : General Instructions:

  1. परीक्षार्थी प्रश्न-पत्र के पहले पृष्ठ पर अपना अनुक्रमांक अवश्य लिखें। Candidate must write his/her Roll Number on the first page of the Question Paper.
  2. प्रत्येक प्रश्न के सामने उसका अंक भार अंकित हैं। Marks for every question are indicated alongside.

निर्देश :-

  1. सर्वप्रथम परीक्षार्थी प्रश्न-पत्र पर अपने अनुक्रमांक लिखें।
  2. सभी प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य हैं।
  3. जिन प्रश्नों में आवंटित खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
  4. उत्तर लिखने के पूर्व प्रश्न का सही क्रमांक लिखें।

सही विकल्प चुनकर उत्तर पुस्तिका में लिखिए -

  1. कर्णाट-राज की प्रिया विज्जिका ने निम्न में से किसे कवि नहीं माना?

    • (i) ब्रह्मा को
    • (ii) वाल्मीकि को
    • (iii) व्यास को
    • (iv) कालिदास को

    सही उत्तर: (i) ब्रह्मा को

    व्याख्या: विज्जिका ने ब्रह्मा, वाल्मीकि, व्यास और कालिदास में से केवल ब्रह्मा को कवि नहीं माना, क्योंकि ब्रह्मा को सृष्टिकर्ता माना जाता है, कवि नहीं।

  2. शाब्दिक अर्थ में असंभव होते हुए भी नियामक सिद्धान्त है -

    • (i) समता
    • (ii) दासता
    • (iii) स्वतंत्रता
    • (iv) प्रतिष्ठा

    सही उत्तर: (iii) स्वतंत्रता

    व्याख्या: स्वतंत्रता एक नियामक सिद्धान्त है, जो शाब्दिक अर्थ में असंभव होते हुए भी मानव जीवन का मार्गदर्शन करता है।

  3. भगतजी बेचते थे -

    • (i) जर्दा
    • (ii) चूरन
    • (iii) बीड़ी
    • (iv) मूंगफली

    सही उत्तर: (ii) चूरन

    व्याख्या: पाठ के अनुसार भगतजी चूरन बेचते थे।

  4. बालक रोता है -

    • (i) दर्पण पे
    • (ii) खिलौने पे
    • (iii) चाँद पे
    • (iv) मिठाई पे

    सही उत्तर: (iii) चाँद पे

    व्याख्या: यह एक काव्य पंक्ति है जिसमें बालक चाँद पे रोता है।

  5. किसी भी भाषा को जानने के लिए किसका ज्ञान बहुत आवश्यक है?

    • (i) लिपि
    • (ii) व्याकरण
    • (iii) ध्वनि
    • (iv) शब्द

    सही उत्तर: (ii) व्याकरण

    व्याख्या: भाषा को जानने के लिए व्याकरण का ज्ञान आवश्यक है, क्योंकि यह भाषा के नियमों को समझाता है।

  6. समाचार लेखन में किस शैली का प्रयोग होता है?

    • (i) खोजपरक शैली
    • (ii) उल्टा पिरामिड शैली
    • (iii) व्याख्यात्मक शैली
    • (iv) विश्लेषणात्मक शैली

    सही उत्तर: (ii) उल्टा पिरामिड शैली

    व्याख्या: समाचार लेखन में उल्टा पिरामिड शैली का प्रयोग किया जाता है, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण जानकारी पहले दी जाती है।

  7. “मैं पहुँचा तो सरकार मेरी राह देख रहे थे।” यह शब्द प्रयुक्त हुआ है -

    • (i) नेताजी के लिए
    • (ii) राजा के लिए
    • (iii) मास्टर के लिए
    • (iv) दत्ताणी राव के लिए

    सही उत्तर: (iv) दत्ताणी राव के लिए

    व्याख्या: यह पंक्ति दत्ताणी राव के संदर्भ में प्रयुक्त हुई है।

  8. भारत में पहला छापाखाना खुला -

    • (i) गोवा में
    • (ii) मुंबई में
    • (iii) कोलकाता में
    • (iv) बेंगलुरु में

    सही उत्तर: (i) गोवा में

    व्याख्या: भारत में पहला छापाखाना गोवा में खुला था।

  9. ____ के बीच काम का विभाजन आमतौर पर उनकी दिलचस्पी और ज्ञान को ध्यान में रखते हुए किया जाता है।

    • (i) माता-पिता
    • (ii) शिक्षक-विद्यार्थी
    • (iii) पति-पत्नी
    • (iv) एरिया (क्षेत्र)

    सही उत्तर: (iii) पति-पत्नी

    व्याख्या: पति-पत्नी के बीच काम का विभाजन उनकी रुचि और ज्ञान के अनुसार किया जाता है।

प्रश्न 0: किस शब्द शक्ति में मुख्यार्थ बाधित होता है?

  • (अ) अभिधा
  • (ब) लक्षणा
  • (स) व्यंजना
  • (द) रूढ़ा

व्याख्या: रूढ़ा शब्द शक्ति में शब्द का अर्थ रूढ़ (प्रचलित) होता है और मुख्यार्थ बाधित नहीं होता। लक्षणा में मुख्यार्थ बाधित होता है।

प्रश्न (i): जब किसी वर्ण की आवृत्ति एक बार होती है, तो उसे कहते हैं

  • (अ) लाटानुप्रास अलंकार
  • (ब) श्रुत्यानुप्रास अलंकार
  • (स) अंत्यानुप्रास अलंकार
  • (द) छेकानुप्रास अलंकार

व्याख्या: श्रुत्यानुप्रास में किसी वर्ण की आवृत्ति एक बार होती है, जबकि लाटानुप्रास में पूरे शब्द या वाक्यांश की आवृत्ति होती है।

प्रश्न (2): रुबाइयाँ कविता में कवि ने किस भाषा का प्रयोग किया है?

  • (अ) ब्रज
  • (ब) अवधी
  • (स) खड़ी बोली
  • (द) फारसी

व्याख्या: 'रुबाइयाँ' कविता में कवि ने फारसी भाषा का प्रयोग किया है, क्योंकि रुबाई फारसी काव्य की एक विधा है।

प्रश्न 3: निम्नलिखित प्रश्नों के रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. विचार विनियम के माध्यम को भाषा कहते हैं।
  2. किसी व्यक्ति के मूल उद्देश्य को प्रकट करने वाली शब्द शक्ति को व्यंजना कहते हैं।
  3. 'सुवरन को ढूँढत फिरै, कवि व्याभिचारी' पंक्ति में लक्षणा शब्द शक्ति है।
  4. रचना के आधार पर शब्द के दो भेद होते हैं।

प्रश्न 4: निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए

जिस सौन्दर्य की भावना में मग्न होकर मनुष्य अपनी पृथक सत्ता की प्रतीति का विसर्जन करता है वह अवश्य एक विभूति है। भक्त लोग अपनी उपासना या ध्यान में इसी विभूति का अवलंबन करते हैं। तुलसी और सूर जैसे सगुणोपासक भक्त राम और कृष्ण की सौंदर्य-भावना में मग्न होकर ऐसी मंगल-दशा का अनुभव कर गए हैं जिसके सामने कैवल्य या मुक्ति की कामना का कहीं पता नहीं लगता।

कविता केवल वस्तुओं के ही रंग-रूप के सौन्दर्य की झलक नहीं दिखाती प्रत्युत कर्म और मनोवृत्ति के सौन्दर्य के भी अत्यंत मार्मिक दृश्य सामने रखती है। वह जिस प्रकार विकसित कमल, रमणी के मुखमंडल आदि का सौन्दर्य मन में लाती है उसी प्रकार उदारता, वीरता, त्याग, दया, प्रेमोत्कर्ष इत्यादि कर्मों और मनोवृत्तियों का सौन्दर्य भी मन में जमाती है। जिस प्रकार वह शव को खाते हुए कुत्तों और गीदड़ों के वीभत्स व्यापार की झलक दिखाती है उसी प्रकार मनुष्य की हिंसावृत्ति और दुष्टों की ईर्ष्या आदि की कुरूपता से भी क्षुब्ध करती है। इस कुरूपता का अवस्थान सौन्दर्य की पूर्ण और स्पष्ट अभिव्यक्ति के लिए ही समझना चाहिए। जिन मनोवृत्तियों को अधिकतर बुरा रूप हम संसार में देखा करते हैं उनका भी सुन्दर रूप कविता ढूँढकर दिखाती है। दशवदन-निधनकारी राम के क्रोध के सौन्दर्य पर कौन मोहित नहीं होता?

  1. (1) भक्त लोग किस विभूति का अवलंबन करते हैं?

    भक्त लोग उस सौन्दर्य-भावना का अवलंबन करते हैं जिसमें मग्न होकर मनुष्य अपनी पृथक सत्ता की प्रतीति का विसर्जन करता है। यह सौन्दर्य-भावना एक विभूति है जिसका सहारा भक्त अपनी उपासना या ध्यान में लेते हैं।

  2. (2) कविता क्या दृश्य दिखाती है?

    कविता वस्तुओं के रंग-रूप के सौन्दर्य के साथ-साथ कर्म और मनोवृत्ति के सौन्दर्य के भी मार्मिक दृश्य दिखाती है। वह उदारता, वीरता, त्याग, दया, प्रेमोत्कर्ष जैसे कर्मों का सौन्दर्य और हिंसा, ईर्ष्या जैसी कुरूपता के दृश्य भी प्रस्तुत करती है।

  3. (3) कैवल्य या मुक्ति की कामना का कहीं पता नहीं लगता, क्यों?

    क्योंकि तुलसी और सूर जैसे सगुणोपासक भक्त राम और कृष्ण के सौन्दर्य-भावना में इतने मग्न हो गए कि उन्होंने ऐसी मंगल-दशा का अनुभव किया जिसके सामने कैवल्य या मुक्ति की कामना तुच्छ हो गई। उनके लिए सौन्दर्य-भावना ही सर्वोच्च लक्ष्य बन गई।

  4. (4) कवि ने किन कर्मों और मनोवृत्तियों का उल्लेख किया है?

    कवि ने उदारता, वीरता, त्याग, दया, प्रेमोत्कर्ष जैसे सकारात्मक कर्मों और मनोवृत्तियों का उल्लेख किया है। साथ ही हिंसावृत्ति, ईर्ष्या जैसी नकारात्मक मनोवृत्तियों का भी उल्लेख किया है।

  5. (5) दशवदन का क्या अर्थ है?

    दशवदन का अर्थ है 'दस मुखों वाला'। यह रावण का विशेषण है, जिसके दस सिर थे। गद्यांश में 'दशवदन-निधनकारी राम' का अर्थ है रावण का वध करने वाले राम।

  6. (6) उक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।

    उचित शीर्षक: कविता में सौन्दर्य और कुरूपता का चित्रण या सौन्दर्य-भावना और कविता

प्रश्न 7. निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

जीवन की आपाधापी में भागता निदान है
संबंधों में स्वयं को तलाशता
अक्सर ही स्वयं को जानने को
जीवन के पक्ष को निहारता
प्रश्न करता मैं स्वयं ही स्व से
कि कौन हूँ मैं?

कसक कोई दिल में दबाए
जज्बातों पर ताले लगाए
सुनते हुए आवाजों के शोर को
काल की मर्यादा से बंधा
कि मैं मौन हूँ।

फिर भी रचता मैं पदभावों के
गाती गीत में प्रच्छन्न घावों के
अनुभावों को करके शब्दबद्ध
रच अनुराग का संसार
जोड़ता मनोभावों को भव से
कि कवि हूँ मैं।

  1. कवि स्वयं से प्रश्न क्यों करता है?
    उत्तर: कवि जीवन की आपाधापी और संबंधों में स्वयं को खोजते हुए अपने अस्तित्व और पहचान को जानने के लिए स्वयं से प्रश्न करता है कि "कौन हूँ मैं?"।
  2. कवि मौन क्यों है?
    उत्तर: कवि मौन है क्योंकि वह दिल में कसक दबाए, जज्बातों पर ताले लगाए, और समय की मर्यादा में बंधा हुआ है। वह बाहरी शोर के बीच अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाता, इसलिए मौन धारण कर लेता है।
  3. कवि अनुराग का संसार कैसे रचता है?
    उत्तर: कवि अपने अनुभवों को शब्दबद्ध करके, पदों और गीतों के माध्यम से प्रच्छन्न घावों को व्यक्त करता है। वह मनोभावों को भव (संसार) से जोड़कर अनुराग (प्रेम) का संसार रचता है।
  4. कवि स्वयं को कहाँ और क्यों तलाशता है?
    उत्तर: कवि स्वयं को संबंधों में तलाशता है क्योंकि वह जीवन की आपाधापी में भागता हुआ अपनी पहचान और अस्तित्व को समझना चाहता है। वह संबंधों के माध्यम से स्वयं को जानने का प्रयास करता है।
  5. कविता का उचित शीर्षक लिखिए।
    उत्तर: कविता का उचित शीर्षक "कवि हूँ मैं" या "आत्म-अन्वेषण" हो सकता है।

प्रश्न 8. निम्नलिखित लघुत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर 40 शब्दों में लिखिए:

  1. "आपको अपाहिज होकर कैसा लगता है?" इस प्रश्न में समाज की किस मनोवृत्ति का पता चलता है?
    उत्तर: इस प्रश्न में समाज की संवेदनहीनता और दया-भाव की मनोवृत्ति का पता चलता है। समाज अपाहिज व्यक्ति को सामान्य न मानकर उसकी पीड़ा को तुच्छ समझता है और उसकी भावनाओं को ठेस पहुँचाता है।
  2. यशोधर बाबू सारे सेक्शन के इसरार करने पर भी अपनी 'सिल्वर वेडिंग' की दावत में नहीं रुके, क्यों?
    उत्तर: यशोधर बाबू अपनी 'सिल्वर वेडिंग' की दावत में नहीं रुके क्योंकि वे अपने बेटे की शादी के लिए लड़की देखने गए थे। उनके लिए बेटे का भविष्य अधिक महत्वपूर्ण था, इसलिए उन्होंने दावत को छोड़ दिया।
  3. खाना खाते-खाते दादा ने लेखक से क्या वचन लिया?
    उत्तर: खाना खाते-खाते दादा ने लेखक से वचन लिया कि वह अपनी पढ़ाई-लिखाई पूरी करने के बाद ही शादी करेगा। दादा चाहते थे कि लेखक पहले शिक्षित हो, फिर विवाह करे।
  4. सूचनाओं के स्रोत कौन-कौन से हैं?
    उत्तर: सूचनाओं के मुख्य स्रोत हैं - समाचार पत्र, पत्रिकाएँ, रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट, सोशल मीडिया, पुस्तकें, सरकारी प्रकाशन, और प्रत्यक्षदर्शी। ये सभी स्रोत विभिन्न प्रकार की सूचनाएँ प्रदान करते हैं।

प्रश्न 9. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 60-80 शब्दों में लिखिए:

  1. भक्तिन और मेरे बीच में सेवक-स्वामी का संबंध है?
    उत्तर: भक्तिन और लेखिका के बीच सेवक-स्वामी का संबंध नहीं है, बल्कि यह एक आत्मीय और पारस्परिक सम्मान पर आधारित संबंध है। भक्तिन लेखिका की सेवा करती है, लेकिन लेखिका उसे एक स्वतंत्र व्यक्ति के रूप में देखती है। दोनों के बीच विश्वास और स्नेह का बंधन है, जो सेवक-स्वामी के रिश्ते से ऊपर है।
  2. "काले मेघा पानी दे" संस्मरण में लेखक का उद्देश्य लिखिए।
    उत्तर: "काले मेघा पानी दे" संस्मरण में लेखक का उद्देश्य वर्षा के महत्व और किसानों की जीवन-संघर्ष को उजागर करना है। लेखक बारिश की प्रतीक्षा कर रहे किसानों की पीड़ा और आशा को दर्शाता है। साथ ही, वह प्रकृति के प्रति मानव की निर्भरता और कृषि जीवन की कठिनाइयों को चित्रित करना चाहता है।
  3. पहलवान की ढोलक कहानी की मूल संवेदना लिखिए।
    उत्तर: "पहलवान की ढोलक" कहानी की मूल संवेदना गाँव के पारंपरिक खेलों और संस्कृति के लुप्त होने की पीड़ा है। कहानी में पहलवान की ढोलक गाँव की एकता और उत्सव का प्रतीक है। आधुनिकता के आगमन से यह परंपरा समाप्त हो रही है, जो लेखक को गहरा दुख देती है। कहानी बदलते समय के साथ पुरानी मूल्यों के क्षरण को दर्शाती है।
  4. राजनीतिज्ञ पुरुष के व्यवहार के विषय में डॉ. अंबेडकर के क्या विचार हैं?
    उत्तर: डॉ. अंबेडकर के अनुसार, राजनीतिज्ञ पुरुष का व्यवहार स्वार्थपूर्ण और अवसरवादी होता है। वे जनता की भलाई के बजाय अपने लाभ के लिए काम करते हैं। डॉ. अंबेडकर का मानना था कि राजनीतिज्ञ सिद्धांतों से अधिक सत्ता और प्रतिष्ठा को महत्व देते हैं, जिससे समाज में भ्रष्टाचार और असमानता बढ़ती है।
  5. लक्ष्मण की मूर्च्छा पर राम के प्रलाप का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
    उत्तर: लक्ष्मण की मूर्च्छा पर राम का प्रलाप अत्यंत मार्मिक है। राम लक्ष्मण को पुकारते हुए कहते हैं कि तुम्हारे बिना मेरा जीवन अधूरा है। वे लक्ष्मण के बलिदान को याद करते हैं और कहते हैं कि यदि तुम नहीं उठे तो मैं भी जीवित नहीं रहूँगा। राम का यह विलाप भाई-प्रेम और वियोग की गहरी पीड़ा को दर्शाता है।
  6. कविता के काव्य सौन्दर्य का वर्णन कीजिए।
    उत्तर: कविता का काव्य सौन्दर्य उसकी भाषा, शैली, अलंकारों और भाव-पक्ष में निहित होता है। इसमें शब्दों का चयन, लय, तुक और बिम्बों का प्रयोग कविता को सुंदर बनाता है। काव्य सौन्दर्य पाठक के मन में भावनाओं और चित्रों को उत्पन्न करता है, जिससे कविता प्रभावशाली और आनंददायक बनती है।

प्रश्न 10. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 60-80 शब्दों में लिखिए:

  1. रघुवीर सहाय का कवि परिचय लिखिए।
    उत्तर: रघुवीर सहाय हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि और पत्रकार थे। उनका जन्म 1935 में हुआ था। वे नई कविता के प्रमुख हस्ताक्षर माने जाते हैं। उनकी कविताओं में सामाजिक यथार्थ, राजनीतिक चेतना और मानवीय संवेदना का गहरा चित्रण मिलता है। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'हंसो हंसो जल्दी हंसो', 'आत्महत्या के विरुद्ध' आदि शामिल हैं।
  2. हजारी प्रसाद द्विवेदी का लेखक परिचय लिखिए।
    उत्तर: हजारी प्रसाद द्विवेदी हिंदी साहित्य के महान निबंधकार, आलोचक और इतिहासकार थे। उनका जन्म 1907 में हुआ था। वे हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन में अग्रणी माने जाते हैं। उनकी रचनाओं में 'हिंदी साहित्य का आदिकाल', 'कबीर', 'सूर साहित्य' आदि प्रमुख हैं। उनकी शैली विद्वत्तापूर्ण और सरल है।
  3. पत्रकारिता लेखन क्या है? पत्रकार कितने प्रकार के होते हैं? विस्तार से

प्रश्न 4. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए – (6 अंक)

छोटा मेरा खेत चौकोना,
कागज का एक टुकड़ा,
कोई कवि कहीं से आया,
क्षण का बीज वहाँ बोया गया।

फर्ट के रसायनों को पी,
बीज गल गया निःशेष;
शब्द के अंकुर फूटे,
पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष।

लगे फल,
अलौकिक,
अमृत रस से फूटती।
रोपाई क्षण की,
कटाई अनंतता की,
लुटते रहने से ज़रा भी नहीं कम होती।
रस का अक्षय पात्र सदा का,
यह छोटा मेरा खेत चौकोना।

सप्रसंग व्याख्या:

प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित कविता 'छोटा मेरा खेत' से लिया गया है। इसके रचयिता कवि 'उमाशंकर जोशी' हैं। इस कविता में कवि ने कागज के एक छोटे से टुकड़े (खेत) को कविता रचने की प्रक्रिया का प्रतीक बनाया है।

व्याख्या: कवि कहता है कि मेरा यह खेत (कागज) बहुत छोटा और चौकोर है। इसमें कहीं से एक कवि आता है और एक क्षणभंगुर विचार (बीज) को बो जाता है। यह बीज कवि की कल्पना और भावनाओं (फर्ट के रसायनों) को पीकर पूरी तरह से घुल-मिल जाता है। फिर इस बीज से शब्दों के अंकुर फूटने लगते हैं, जो पत्तों और फूलों (पल्लव-पुष्पों) से सज जाते हैं। इस प्रकार यह कविता विशेष रूप से सुंदर बन जाती है।

इस कविता में अलौकिक फल लगते हैं, जिनमें से अमृत जैसा रस बहता है। यह रस कभी खत्म नहीं होता। कवि कहता है कि इस कविता की रोपाई (रचना) तो एक क्षण में हुई थी, लेकिन इसकी कटाई (आनंद लेना) अनंत काल तक चलती है। इसे जितना बाँटा जाए, यह कम नहीं होता, बल्कि यह रस का अक्षय पात्र बना रहता है। इस प्रकार कवि का यह छोटा सा कागज का खेत अनंत काल तक पाठकों को रस प्रदान करता रहता है।

अथवा

नभ में उड़ते बगुलों के पंख,
चुराए लिए जाती वे मेरी आँखें,
कजरारे बादलों की छाई नम छाया,
तैरती साँझ की सतेज श्वेत काया।
हौले हौले जाती मुझे बाँध निज माया से।
उसे कोई नहीं पकड़ पाता,
वह तो चुराए लिए जाती मेरी आँखें,
नभ में उड़ते बगुलों की पाँखें।

सप्रसंग व्याख्या:

प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित कविता 'बगुलों के पंख' से लिया गया है। इसके रचयिता कवि 'सर्वेश्वर दयाल सक्सेना' हैं। इस कविता में कवि ने प्रकृति के सौंदर्य और उसके मोहक प्रभाव का वर्णन किया है।

व्याख्या: कवि कहता है कि आकाश में उड़ते हुए बगुलों के सफेद पंख मेरी आँखों को चुरा ले जाते हैं। काले-काले बादलों की नम छाया और शाम के समय तैरती हुई सफेद आकृति (बादल या बगुले) मुझे धीरे-धीरे अपने मोहक जाल में बाँध लेती है। यह सौंदर्य इतना मोहक है कि कोई इसे पकड़ नहीं सकता। यह तो बस मेरी आँखों को चुराकर ले जाता है। कवि यहाँ प्रकृति के अनंत और अमूर्त सौंदर्य को व्यक्त कर रहा है, जो मनुष्य को मोहित कर लेता है लेकिन उसे पकड़ा नहीं जा सकता।


प्रश्न 5. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए – (6 अंक)

वैसे तप की राह रेगिस्तान को जाती होगी, मोक्ष की राह वह नहीं है। ठाठ देकर मन को बंद कर रखना जड़ता है। लोभ का यह जीतना नहीं है कि जहाँ लोभ होता है, यानी मन में, वहाँ नकार हो! यह तो लोभ की ही जीत है और आदमी की हार। आँख अपनी फोड़ डाली, तब लोभनीय के दर्शन से बच्चे तो क्या हुआ? ऐसे क्या लोभ मिट जाएगा? और कौन कहता है कि आँख फूटने पर रूप दीखना बंद हो जाएगा? क्या आँख बंद करके ही हम सपने नहीं लेते हैं?

सप्रसंग व्याख्या:

प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित पाठ 'लोभ का निवारण' से लिया गया है। इसके लेखक 'जैनेंद्र कुमार' हैं। इस गद्यांश में लेखक ने लोभ को जीतने के सही तरीके पर विचार किया है।

व्याख्या: लेखक कहता है कि तपस्या का मार्ग कठोर और सूखा (रेगिस्तान जैसा) हो सकता है, लेकिन मोक्ष का मार्ग वह नहीं है जो मन को बंद कर दे। मन को बाहरी सुख-सुविधाओं (ठाठ) से दूर करके बंद कर देना जड़ता (मूर्खता) है। लोभ को जीतने का अर्थ यह नहीं है कि जहाँ लोभ उत्पन्न हो, वहाँ उसे नकार दिया जाए या उससे भागा जाए। ऐसा करना लोभ की ही जीत है और मनुष्य की हार।

लेखक एक उदाहरण देता है: यदि कोई व्यक्ति लोभनीय वस्तुओं को देखने से बचने के लिए अपनी आँखें फोड़ ले, तो क्या लोभ मिट जाएगा? नहीं, क्योंकि लोभ मन में है, आँखों में नहीं। आँखें बंद होने पर भी मन सपने देख सकता है और लोभ कर सकता है। इस प्रकार लेखक यह सिद्ध करना चाहता है कि लोभ पर विजय पाने के लिए बाहरी इंद्रियों को दबाना नहीं, बल्कि मन को समझाना और उसे सही दिशा देना आवश्यक है।

अथवा

"सेवक-धर्म में हनुमानजी से स्पर्धा करने वाली भक्तिन किसी अंजनी की पुत्री न होकर एक अनामधन्या गोपालिका की कन्या है — वह है लछमिन अर्थात लक्ष्मी। पर जैसे मेरी नाम की विशालता मेरे लिए दुर्वह है, वैसे ही लक्ष्मी की समृद्धि भक्तिन के कपाल की कुंचित रेखाओं में नहीं बंध सकी।"

सप्रसंग व्याख्या:

प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित पाठ 'भक्तिन' से लिया गया है। इसकी लेखिका 'महादेवी वर्मा' हैं। इस गद्यांश में लेखिका ने अपनी सेविका भक्तिन के चरित्र का वर्णन किया है।

व्याख्या: लेखिका कहती है कि भक्तिन ने सेवा-धर्म में हनुमानजी से भी स्पर्धा की है। वह किसी प्रसिद्ध अंजनी की पुत्री नहीं है, बल्कि एक साधारण ग्वालिन (गोपालिका) की बेटी है, जिसका नाम लछमिन (लक्ष्मी) है। लेखिका अपने नाम 'महादेवी' की विशालता को अपने लिए भारी (दुर्वह) मानती हैं। उसी प्रकार, लक्ष्मी (धन-समृद्धि) की समृद्धि भक्तिन के भाग्य (कपाल की रेखाओं) में नहीं लिखी गई थी। अर्थात भक्तिन का नाम लक्ष्मी होने के बावजूद वह धन-समृद्धि से वंचित रही। लेखिका यहाँ भक्तिन की साधारण पृष्ठभूमि और उसके असाधारण सेवा-भाव के बीच विरोधाभास दिखा रही हैं।


प्रश्न 6. स्वयं को उपखण्ड अधिकारी रानी मानते हुए विकास अधिकारी को एक अर्द्ध सरकारी पत्र लिखिए, जिसमें आगामी चुनाव में चुनाव दल के लिए भौतिक संसाधनों की माकूल व्यवस्था का उल्लेख हो। (6 अंक)

पत्र:

कार्यालय उपखण्ड अधिकारी,
[स्थान का नाम]
दिनांक: [तिथि]

सेवा में,
श्रीमान विकास अधिकारी,
[कार्यालय का नाम],
[स्थान]

विषय: आगामी चुनाव हेतु चुनाव दल के लिए भौतिक संसाधनों की व्यवस्था के संबंध में।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि आगामी विधानसभा चुनाव के सफल संचालन हेतु हमारे उपखण्ड में विभिन्न चुनाव दलों का गठन किया जाना है। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार, सभी चुनाव दलों को समय पर आवश्यक भौतिक संसाधन उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाना है।

अतः आपसे निवेदन है कि कृपया निम्नलिखित भौतिक संसाधनों की माकूल व्यवस्था सुनिश्चित करने का कष्ट करें:

  1. प्रत्येक चुनाव दल के लिए पर्याप्त संख्या में वाहनों की व्यवस्था।
  2. मतदान केंद्रों पर आवश्यक फर्नीचर (टेबल, कुर्सी) एवं प्रकाश की व्यवस्था।
  3. मतदान सामग्री (मतपेटियाँ, स्याही, पर्दे आदि) का समय पर वितरण।
  4. चुनाव दल के सदस्यों के लिए भोजन एवं जलपान की व्यवस्था।
  5. आपातकालीन स्थिति के लिए चिकित्सा किट एवं संचार साधनों की उपलब्धता।

कृपया इस कार्य को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कार्रवाई करने का कष्ट करें, ताकि चुनाव प्रक्रिया सुचार