RBSE Class 12th 2026 HALF-YEARLY-HINDI-LITERATURE-1218-041225 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2026 |
| Subject | HALF-YEARLY-HINDI-LITERATURE-1218-041225 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2026 HALF-YEARLY-HINDI-LITERATURE-1218-041225
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Rajasthan Board Class 12th HALF-YEARLY-HINDI-LITERATURE-1218-041225 2026 solved Previous Year Question Papers
कक्षा 12वीं अर्द्ध वार्षिक परीक्षा, 2025-26
हिन्दी साहित्य / HINDI LITERATURE
समय : 3.15 घंटे (3:45 बजे से) | पूर्णांक : 70
सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी प्रश्न-पत्र के पहले पृष्ठ पर अपना अनुक्रमांक अवश्य लिखें।
- प्रत्येक प्रश्न के सामने उसका अंक अंकित है।
खण्ड - अ : बहुविकल्पात्मक प्रश्न
-
1. "कोई सौ लाख बार झोंपड़ी को आग दे तो" – यह कथन किसका है?
- (अ) झूरी का
- (ब) हीरा का
- (स) सुभागी का
- (द) नायकराम का
व्याख्या : यह कथन 'पूस की रात' कहानी के पात्र नायकराम का है, जो झूरी से कहता है कि वह सौ लाख बार झोंपड़ी को आग लगा सकता है।
-
2. 'बिस्कोहर की माटी' पाठ में किस गाँव का वर्णन चित्रित किया गया है?
- (अ) लमहीं गाँव का
- (ब) नंगातलाई गाँव का
- (स) कर्लों गाँव का
- (द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
व्याख्या : 'बिस्कोहर की माटी' पाठ में नंगातलाई गाँव का वर्णन है, जो बिहार के मुंगेर जिले में स्थित है।
-
3. 'डग-डग रोटी, पग-पग नीर' किसे धरती कहा गया है?
- (अ) मालवा
- (ब) मेवाड़
- (स) हाड़ौती
- (द) बूंदी
व्याख्या : यह पंक्ति हाड़ौती क्षेत्र की उर्वरा भूमि के लिए कही गई है, जहाँ हर कदम पर पानी और रोटी मिलती है।
-
4. देवसेना को जीवन के अंतिम समय में क्या मिला?
- (अ) प्रेम
- (ब) शांति
- (स) परिश्रम
- (द) धन
व्याख्या : देवसेना को जीवन के अंतिम समय में शांति मिली, जो उसके संघर्षपूर्ण जीवन का अंतिम सत्य है।
-
5. 'यह दीप अकेला' कविता में 'दीप' किसका प्रतीक है?
- (अ) रोशनी का
- (ब) अकेलेपन का
- (स) संघर्ष का
- (द) समाज का
व्याख्या : 'यह दीप अकेला' कविता में दीप अकेलेपन और एकांत का प्रतीक है, जो समाज से अलग होने की पीड़ा को दर्शाता है।
-
6. 'छाया-स्मृति' पाठ के लेखक कौन हैं?
- (अ) हजारी प्रसाद द्विवेदी
- (ब) रामचंद्र शुक्ल
- (स) विष्णु प्रभाकर
- (द) बद्रीनारायण चौधरी
व्याख्या : 'छाया-स्मृति' पाठ के लेखक विष्णु प्रभाकर हैं, जो एक प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार हैं।
-
7. 'संवदिया' कहानी में 'संवदिया' का क्या अर्थ है?
- (अ) संवाद ले जाने वाला
- (ब) जमींदारी का काम करने वाला
- (स) सूदखोर
- (द) नकलची
व्याख्या : 'संवदिया' का अर्थ संवाद या संदेश ले जाने वाला व्यक्ति होता है, जो कहानी में पात्रों के बीच संवाद का माध्यम बनता है।
-
8. नाटक का सबसे जरूरी व प्रभावशाली माध्यम कौनसा है?
- (अ) पद्य
- (ब) अंक
- (स) संवाद
- (द) दृश्य
व्याख्या : नाटक का सबसे जरूरी और प्रभावशाली माध्यम संवाद है, जो पात्रों के विचारों और भावनाओं को व्यक्त करता है।
-
9. कहानी का केंद्रीय बिन्दु किसे माना जाता है?
- (अ) चरित्र चित्रण
- (ब) परिवेश
- (स) कथानक
- (द) विषयवस्तु
व्याख्या : कहानी का केंद्रीय बिन्दु कथानक होता है, जो घटनाओं की श्रृंखला को व्यवस्थित करता है।
-
10. 'जनसंचार' के आधुनिक माध्यमों में से सबसे पुराना है –
- (अ) रेडियो
- (ब) टेलीविजन
- (स) समाचार पत्र
- (द) इंटरनेट पत्रकारिता
व्याख्या : जनसंचार के आधुनिक माध्यमों में समाचार पत्र सबसे पुराना है, जो 17वीं शताब्दी से प्रचलित है।
-
11. समाचार लेखन के ककार होते हैं –
- (अ) चार
- (ब) पाँच
- (स) छः
- (द) सात
व्याख्या : समाचार लेखन में छः ककार होते हैं – क्या, कब, कहाँ, कौन, क्यों, कैसे।
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रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
- काव्य का वह गुण है जिसके कारण अर्थ तुरंत पढ़ने के साथ ही समझ में आ जाता है।
- काव्य की रसानुभूति में बाधक तत्त्वों को विघ्न कहा जाता है।
- दोहा और रोला छंद के मेल से कुण्डलिया छंद बनता है।
- हरिगीतिका छंद के प्रत्येक चरण में 16, 12 मात्राएँ होती हैं।
- जब दो शब्दों में बिम्ब-प्रतिबिम्ब का भाव हो, वहाँ उपमा अलंकार होता है।
- जहाँ कारण के होने पर भी कार्य का न होना पाया जाए, वहाँ विभावना अलंकार होता है।
अपठित गद्यांश पर आधारित प्रश्न
गद्यांश: साहित्य और संस्कृति किसी भी राष्ट्र की पहचान है। यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज के विचारों, भावनाओं और परंपराओं का दर्पण है। कहानी, कविता, नाटक और लोककला हमें न केवल मनोरंजन देती हैं, बल्कि हमारे मूल्यों, इतिहास और सामाजिक कर्तव्यों का भी ज्ञान कराती हैं। संस्कृति का विकास तब होता है जब साहित्य और कला के माध्यम से अनुभव साझा किए जाते हैं और ज्ञान का प्रसार होता है। साहित्य समाज में मानवीय संवेदनाओं को उजागर करता है और आने वाली पीढ़ियों को नैतिक और सामाजिक मार्गदर्शन प्रदान करता है। इसीलिए प्रत्येक नागरिक को अपने देश की साहित्यिक और सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान करना चाहिए और उसे संरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए।
-
संस्कृति का विकास कैसे होता है?
- (अ) धार्मिक गतिविधियों से
- (ब) साहित्य एवं कला के माध्यम से
- (स) केवल सरकार के प्रयासों से
- (द) विदेशी ज्ञान अर्जन से
व्याख्या: गद्यांश के अनुसार, "संस्कृति का विकास तब होता है जब साहित्य और कला के माध्यम से अनुभव साझा किए जाते हैं और ज्ञान का प्रसार होता है।" अतः सही विकल्प (ब) है।
-
नागरिकों का साहित्य एवं संस्कृति के प्रति क्या कर्तव्य है?
- (अ) उन्हें नजरअंदाज करना
- (ब) उनका सम्मान करना और संरक्षित करना
- (स) केवल अध्ययन करना
- (द) सिर्फ मनोरंजन के रूप में देखना
व्याख्या: गद्यांश के अंत में कहा गया है कि "प्रत्येक नागरिक को अपने देश की साहित्यिक और सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान करना चाहिए और उसे संरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए।" अतः सही विकल्प (ब) है।
-
साहित्य समाज में क्या योगदान करता है?
साहित्य समाज में मानवीय संवेदनाओं को उजागर करता है और आने वाली पीढ़ियों को नैतिक एवं सामाजिक मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह समाज के विचारों, भावनाओं और परंपराओं का दर्पण है तथा मूल्यों, इतिहास और सामाजिक कर्तव्यों का ज्ञान कराता है।
-
किसी भी राष्ट्र की पहचान क्या है?
गद्यांश के अनुसार, साहित्य और संस्कृति किसी भी राष्ट्र की पहचान है।
अपठित पद्यांश पर आधारित प्रश्न
पद्यांश:
जागो नवयुवक भारत के, जागो, अब तो देश पुकारे। मिट्टी की सुगंध, रक्त से सींची दे रही फिर से इशारे। तेह का दीप जलाओ तुम, अपना परिश्रम, अपना अन्न। परिश्रम की गंगा बहाओ अब, यही है श्रद्धा-वंदन। जिसने त्यागा सुख निज घर का, देशहित जिसने प्राण लुटाए - उन बलिदानों की धरती पर, हम स्वावलंबन के गीत गाएं।
-
कवि नवयुवकों को क्या संदेश दे रहा है?
कवि नवयुवकों को जागृत होने का संदेश दे रहा है। वह कहता है कि देश पुकार रहा है, इसलिए युवकों को अपने परिश्रम और अन्न से देश की सेवा करनी चाहिए। उन्हें बलिदानियों की धरती पर स्वावलंबन के गीत गाने चाहिए और देशहित में अपना सब कुछ त्यागने के लिए तैयार रहना चाहिए।
-
"परिश्रम की गंगा बहाओ" से कवि का क्या आशय है?
इस पंक्ति से कवि का आशय है कि युवकों को निरंतर और अथक परिश्रम करना चाहिए। जिस प्रकार गंगा निरंतर बहती रहती है, उसी प्रकार परिश्रम की धारा को भी निरंतर प्रवाहित रखना चाहिए। यही सच्ची श्रद्धा और वंदन है।
प्रश्न 4 (बहुविकल्पीय प्रश्न)
(क) "स्वदेशी का दीप जलाओ" का अर्थ है -
- (अ) दीपक जलाना
- (ब) विदेशी वस्तुएँ अपनाना
- (स) स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना
- (द) नई परंपराएँ बनाना
व्याख्या: 'स्वदेशी का दीप जलाओ' का अर्थ है देश में बनी वस्तुओं को अपनाना और उनका उपयोग करना, जिससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।
(ख) कवि ने बलिदान देने वालों के प्रति क्या भावना व्यक्त की है?
- (अ) उपेक्षा
- (ब) श्रद्धा और कृतज्ञता
- (स) भय
- (द) उदासीनता
व्याख्या: कवि बलिदान देने वालों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता की भावना रखता है, क्योंकि उन्होंने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
(ग) कवि ने युवाओं को किस दिशा में जागृत होने का आह्वान किया है?
- (अ) देशभक्ति और स्वदेशी अपनाने की दिशा में
- (ब) विदेश जाने की दिशा में
- (स) आलस्य की दिशा में
- (द) व्यापार की दिशा में
व्याख्या: कवि युवाओं को देशभक्ति और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने के लिए जागृत होने का आह्वान करता है।
(घ) "परिश्रम की गंगा बहाओ अब" पंक्ति के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहता है?
- (अ) कड़ी मेहनत करने का संदेश
- (ब) आराम करने का संदेश
- (स) युद्ध करने का संदेश
- (द) यात्रा करने का संदेश
व्याख्या: इस पंक्ति के माध्यम से कवि कड़ी मेहनत और निरंतर प्रयास करने का संदेश देता है, जैसे गंगा निरंतर बहती रहती है।
खण्ड-ब (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)
निर्देश: प्रश्न संख्या 5 से 14 तक प्रत्येक प्रश्न के लिए अधिकतम शब्द सीमा 20 शब्द है।
प्रश्न 5: कविता के प्रमुख तत्व कौन-कौन से हैं?
उत्तर: कविता के प्रमुख तत्व हैं - भाव, कल्पना, भाषा, छंद, अलंकार और रस।
प्रश्न 6: कहानी मनोरंजन के साथ-साथ किसका माध्यम है?
उत्तर: कहानी मनोरंजन के साथ-साथ जीवन के यथार्थ, नैतिकता और सामाजिक संदेश का माध्यम है।
प्रश्न 7: पत्रकार कितने प्रकार के होते हैं? नाम लिखिए।
उत्तर: पत्रकार तीन प्रकार के होते हैं - (1) संवाददाता, (2) संपादक, (3) स्तंभकार।
प्रश्न 8: समाचार लेखन की शैली बताइए।
उत्तर: समाचार लेखन की शैली उल्टा पिरामिड शैली है, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण जानकारी पहले दी जाती है।
प्रश्न 9: छंद में सर्वमान्य भुण कितने होते हैं? नाम लिखिए।
उत्तर: छंद में सर्वमान्य भुण चार होते हैं - (1) गुरु, (2) लघु, (3) यति, (4) गति।
प्रश्न 10: वर्णिक छंद किसे कहते हैं?
उत्तर: वर्णिक छंद वे छंद हैं जिनमें वर्णों (अक्षरों) की गणना और मात्रा के आधार पर रचना की जाती है, जैसे दोहा, सोरठा आदि।
खण्ड-स (लघु उत्तरीय प्रश्न)
निर्देश: प्रश्न संख्या 11 से 20 तक प्रत्येक प्रश्न के लिए अधिकतम शब्द सीमा 40 शब्द है।
प्रश्न 11: सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" का साहित्यिक परिचय लिखिए।
उत्तर: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख कवि हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं - 'परिमल', 'गीतिका', 'अनामिका' आदि। ये प्रकृति और मानवीय भावनाओं के चित्रण में सिद्धहस्त थे।
प्रश्न 12: पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी का साहित्यिक परिचय लिखिए।
उत्तर: पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी हिंदी के प्रसिद्ध कहानीकार और निबंधकार हैं। इनकी प्रसिद्ध कहानी 'उसने कहा था' है। ये मार्मिक और संवेदनशील लेखन के लिए जाने जाते हैं।
प्रश्न 13: 'वसंत आया' कविता का मूलभाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 'वसंत आया' कविता में वसंत ऋतु के आगमन का वर्णन है। कवि ने प्रकृति में होने वाले परिवर्तनों - फूलों का खिलना, पक्षियों का गाना, और हवा की सुगंध को चित्रित किया है, जो जीवन में नई ऊर्जा और उल्लास लाती है।
प्रश्न 14: रानी नागमति की आकांक्षा फागुन मास में क्या थी और क्यों?
उत्तर: रानी नागमति फागुन मास में अपने पति से मिलने की आकांक्षा रखती थी, क्योंकि फागुन प्रेम और मिलन का महीना होता है। वह अपने वियोग को समाप्त कर पति के साथ रहना चाहती थी।
प्रश्न 15: लेखक का गाँधी जी से प्रथम परिचय कब और किस प्रकार हुआ?
उत्तर: लेखक का गाँधी जी से प्रथम परिचय उनके भाषण के माध्यम से हुआ। गाँधी जी ने सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों पर भाषण दिया, जिसने लेखक को गहराई से प्रभावित किया।
प्रश्न 16: आरती के समय हरिद्वार के परिवेश का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।
उत्तर: आरती के समय हरिद्वार में गंगा के घाटों पर दीप जलते हैं, घंटियाँ बजती हैं, और भक्त भजन गाते हैं। वातावरण भक्तिमय और पवित्र हो जाता है, जहाँ हर ओर श्रद्धा और आस्था का माहौल होता है।
प्रश्न 17: सूरदास धन संचय करके क्या-क्या करना चाहता था?
उत्तर: सूरदास धन संचय करके अपने परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना चाहता था, जैसे बच्चों की शिक्षा, घर का रखरखाव, और बुढ़ापे में सुरक्षा। वह एक स्थिर जीवन जीने की इच्छा रखता था।
प्रश्न 18: 'बिसनाथ दूध कटहा हो गए' इसका तात्पर्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस वाक्य का तात्पर्य है कि बिसनाथ बहुत अधिक दुखी या परेशान हो गए। 'दूध कटहा' का अर्थ है दूध का फट जाना, जो किसी स्थिति के बिगड़ने या खराब होने का प्रतीक है।
प्रश्न 19: आपण का काल इतिहास में क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर: आपण का काल इतिहास में इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि इस काल में साहित्य, कला और संस्कृति का विकास हुआ। यह काल सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों का भी
गद्यांश: "ये लोग आधुनिक भारत के नए 'शरणार्थी' हैं, जिन्हें औद्योगीकरण के झंझावात ने अपनी घर-जमीन से उखाड़कर हमेशा के लिए निर्वासित कर दिया है। प्रकृति और इतिहास के बीच यह गहरा अंतर है। बाढ़ या भूकंप के कारण लोग अपना घरवार छोड़कर कुछ समय के लिए ज़रूर बाहर चले जाते हैं, किंतु आफत टलते ही वे दोबारा अपने जाने-पहचाने परिवेश में लौट भी आते हैं। किंतु विकास और प्रगति के नाम पर जब इतिहास लोगों को उन्मूलित करता है, तो ये फिर कभी अपने घर वापस नहीं लौट सकते। आधुनिक औद्योगीकरण की आँधी में सिर्फ मनुष्य ही नहीं उखड़ता, बल्कि उसका परिवेश और आवास-स्थल भी हमेशा के लिए नष्ट हो जाते हैं।" सप्रसंग व्याख्या: संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित 'शरणार्थी' शीर्षक निबंध से लिया गया है। इसके लेखक प्रसिद्ध कथाकार 'मार्केज़' हैं। इसमें औद्योगीकरण के कारण विस्थापित होने वाले लोगों की पीड़ा का वर्णन किया गया है। प्रसंग: लेखक ने यहाँ प्राकृतिक आपदाओं और औद्योगीकरण के कारण होने वाले विस्थापन में अंतर स्पष्ट किया है। प्राकृतिक आपदा में लोग अस्थायी रूप से विस्थापित होते हैं और वापस लौट आते हैं, जबकि औद्योगीकरण स्थायी रूप से उन्हें उनकी जड़ों से उखाड़ देता है। व्याख्या: लेखक कहता है कि आधुनिक भारत में औद्योगीकरण के तूफान ने अनेक लोगों को उनके घर और जमीन से उखाड़कर स्थायी रूप से निर्वासित कर दिया है। ये लोग नए 'शरणार्थी' हैं। प्रकृति और इतिहास में गहरा अंतर है – बाढ़ या भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं में लोग कुछ समय के लिए विस्थापित होते हैं, पर आपदा टलने पर वापस लौट आते हैं। लेकिन विकास और प्रगति के नाम पर जब इतिहास (मानव निर्मित परिस्थितियाँ) लोगों को उखाड़ता है, तो वे कभी वापस नहीं लौट सकते। औद्योगीकरण की आँधी में न केवल मनुष्य बल्कि उसका पूरा परिवेश और आवास-स्थल भी हमेशा के लिए नष्ट हो जाता है। गद्यांश: "ये जो ठिगने से लेकिन शानदार दरख्त गरमी की भयंकर मार खा-खाकर और भूख प्यास की निरंतर पीड़ा सह-सहकर भी जी रहे हैं, इन्हें क्या कहूँ? सिर्फ जी ही नहीं रहे हैं, हँस भी रहे हैं। बेहया हैं या बयारे या मरतगौला हैं? कभी-कभी जो लोग ऊपर से कमजोर दिखते हैं, उनकी जड़े काफ़ी गहरी, पैठी रहती हैं। ये भी धरती की छाती फाड़कर न जाने किस अतल गहराई से अपना भोग्य खींच लाते हैं?" सप्रसंग व्याख्या: संदर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित 'शरणार्थी' शीर्षक निबंध से लिया गया है। इसके लेखक प्रसिद्ध कथाकार 'मार्केज़' हैं। प्रसंग: लेखक यहाँ उन पेड़ों के माध्यम से विस्थापित लोगों के जीवन संघर्ष और उनकी अदम्य जीवटता का चित्रण कर रहा है। व्याख्या: लेखक उन ठिगने किंतु शानदार पेड़ों को देखकर आश्चर्यचकित है जो भयंकर गर्मी और लगातार भूख-प्यास सहने के बावजूद न केवल जीवित हैं बल्कि खिलखिला रहे हैं। वह सोचता है कि क्या ये बेशर्म हैं या पागल या मरने पर उतारू? लेखक समझता है कि कभी-कभी जो लोग ऊपर से कमजोर दिखते हैं, उनकी जड़ें बहुत गहरी होती हैं। ये पेड़ भी धरती की छाती चीरकर किसी अतल गहराई से अपना भोजन खींच लाते हैं। यहाँ पेड़ उन विस्थापितों का प्रतीक हैं जो विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी गहरी जड़ों (संस्कार, संस्कृति) के बल पर जीवित रहते हैं। काव्यांश: सप्रसंग व्याख्या: संदर्भ: प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित कविता 'हिमालय किधर है?' से लिया गया है। इसके कवि 'रघुवीर सहाय' हैं। प्रसंग: कवि ने यहाँ एक बच्चे के माध्यम से यह दिखाया है कि हिमालय जैसी विशाल और गौरवशाली चीज़ को समझने के लिए बड़े-बड़े दावों या ज्ञान की नहीं, बल्कि सरल और मासूम दृष्टि की आवश्यकता है। व्याख्या: कवि स्कूल के बाहर पतंग उड़ा रहे एक लड़के से पूछता है कि हिमालय किधर है? लड़का बिना किसी हिचकिचाहट के 'उधर-उधर-उड़ाने' कहकर पतंग की उड़ान की दिशा में इशारा करता है। उसकी पतंग उसी दिशा में भागी जा रही थी। कवि स्वीकार करता है कि उसने पहली बार सच में जाना कि हिमालय किधर है। यहाँ बच्चे की सहज बुद्धि और पतंग की उड़ान हिमालय की ओर संकेत करती है। कवि यह बताना चाहता है कि सच्चा ज्ञान किताबों या बड़े-बड़े दावों में नहीं, बल्कि सरलता और स्वाभाविकता में छिपा होता है। काव्यांश: सप्रसंग व्याख्या: संदर्भ: प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित 'रामचरितमानस' के 'अरण्यकांड' से लिया गया है। इसके रचयिता गोस्वामी तुलसीदास हैं। प्रसंग: यह संवाद रावण द्वारा सीता हरण के बाद का है। राम और लक्ष्मण सीता को खोजते हुए वन में भटक रहे हैं। तब वे एक बहेलिए से मिलते हैं, जो अपने पुत्र की मृत्यु पर विलाप कर रहा है। बहेलिया राम से अपने मृत पुत्र को जीवित करने की प्रार्थना करता है। व्याख्या: बहेलिया राम से विनती करता है कि हे राघव (राम)! एक बार मेरे प्रभु (पुत्र) को जीवित कर दो। यह बाज (बहेलिए का पुत्र) तुम्हें देखकर अपने आप वन की ओर चला जाएगा। जिसे मैं अपने कमल जैसे हाथों से बार-बार दूध पिलाता था और प्यार से चुचकारता था, हे मेरे राम लाड़िले! वह अब मुझे पूरी तरह भूल गया है (मर गया है)। यहाँ बहेलिए की व्यथा और राम के प्रति उसकी अटूट आस्था का मार्मिक चित्रण है।खण्ड – द
प्रश्न 4. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए –
अथवा
प्रश्न 5. निम्नलिखित काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए –
हिमालय किधर है?
मैंने उस लड़के से पूछा जो स्कूल के बाहर
पतंग उड़ा रहा था।
उधर-उधर-उड़ाने कहा
फिर उसकी पतंग भागी जा रही थी।
मैं स्वीकार करूँ
मैंने पहली बार जाना
हिमालय किधर है!
अथवा
राघौ! एक बार प्रभु पैदेहु
ए बर बाजि विलोकि आपने बहुरो बनहिं सिधावी।
जे पय पियावत कर-पंकज वार वार चुचुकारे।
क्यों जीवहिं, मेरे राम लाडिले! ते अब निपट बिसारे।
प्रश्न 6. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 400 शब्दों में निबंध लिखिए –