RBSE Class 12th 2026 HINDI-SAHITYA-SS-21 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2026 |
| Subject | HINDI-SAHITYA-SS-21 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2026 HINDI-SAHITYA-SS-21
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Rajasthan Board Class 12th HINDI-SAHITYA-SS-21 2026 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2026
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2026
हिंदी साहित्य
समय : 3 घण्टे 15 मिनट | पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न हल करना अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
- प्रश्न का उत्तर लिखने से पूर्व प्रश्न का क्रमांक अवश्य लिखें।
SS-2-Hindi Sah.
खण्ड -अ
निम्नलिखित बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए | (i से xii)
-
i) इनमें से मालवा क्षेत्र में बहने वाली नदी है
- अ) बनास
- ब) लूणी
- स) घग्गर
- द) चंबल
व्याख्या: चंबल नदी मालवा क्षेत्र में बहती है। यह मध्य प्रदेश के मालवा पठार से निकलकर राजस्थान में प्रवेश करती है।
-
ii) छप्पन का अकाल किस विक्रमी संवत में पड़ा ?
- अ) 956
- ब) 2056
- स) 856
- द) 1756
व्याख्या: छप्पन का अकाल विक्रमी संवत 1756 (सन् 1699 ई.) में पड़ा था, जो राजस्थान के इतिहास में एक भीषण अकाल के रूप में जाना जाता है।
-
iii) किसका फूल सूँघकर साँप का फन झड़ जाता है ?
- अ) सनई का
- ब) कोकाबेली का
- स) बेर का
- द) हरसिंगार का
व्याख्या: लोककथाओं के अनुसार कोकाबेली के फूल की सुगंध से साँप का फन झड़ जाता है। यह एक प्रसिद्ध मान्यता है।
-
iv) “तुम्हारी तरफ से मेरा दिल साफ है।” सूरदास ने ये वाक्य किससे कहा ?
- अ) भैरों को
- ब) जगधर को
- स) नायकराम को
- द) सुभागी को
व्याख्या: यह वाक्य सूरदास ने सुभागी से कहा था, जो उनकी पत्नी थी। यह संवाद उनके पारिवारिक संबंधों को दर्शाता है।
-
v) 'टियर' लघुकथा में राजा ने सबसे पहले क्या हुक्म दिया ?
- अ) सब अपने-अपने होंठ सिलवा लें।
- ब) सब प्रजा अपने कान बंद कर ले।
- स) सब लोग अपनी आँखें बंद रखेंगे।
- द) सब लोग अपने मुँह बंद कर लें।
व्याख्या: 'टियर' लघुकथा में राजा ने सबसे पहले आदेश दिया कि सब लोग अपने मुँह बंद कर लें, ताकि कोई बोल न सके।
प्रश्न vi
“दूसरा देवदास' कहानी के पात्र मंगल पंडा के अनुसार स्नान कब अधूरा रहता है ?
- स्नान के बाद भगवान के दर्शन नहीं करने पर।
- स्नान के बाद दक्षिणा नहीं देने पर।
- स्नान के बाद संतों की सेवा करने पर।
- स्नान के बाद चंदन का तिलक न करने पर।
सही उत्तर: (अ) स्नान के बाद भगवान के दर्शन नहीं करने पर।
व्याख्या: मंगल पंडा के अनुसार स्नान के बाद भगवान के दर्शन न करने पर स्नान अधूरा रहता है।
प्रश्न vii
'बच्चे' कविता में कवि ने बच्चे से क्या पूछा ?
- सूर्य किस दिशा में अस्त होता है ?
- हिमालय किधर है ?
- तुम्हारा घर किधर है ?
- हिंद महासागर किधर है ?
सही उत्तर: (स) तुम्हारा घर किधर है ?
व्याख्या: कवि ने बच्चे से उसके घर के बारे में पूछा था।
प्रश्न viii
“मैं गलैया माहुँट नीरु।” पंक्ति में प्रयुक्त 'माहुँट' का अर्थ है
- क्लिष्ट
- मेंढक
- मूसलाधार
- महावट
सही उत्तर: (द) महावट
व्याख्या: 'माहुँट' का अर्थ महावट (हाथी का महावत) होता है।
प्रश्न ix
कहानी विधा को नाटक विधा से अलग करने वाला तत्व है
- कथानक
- संवाद
- अभिनय
- पात्र
सही उत्तर: (स) अभिनय
व्याख्या: नाटक में अभिनय होता है जबकि कहानी में नहीं, यही दोनों विधाओं में मुख्य अंतर है।
प्रश्न x
नाट्य-शास्त्र के अनुसार नाटक का शरीर किसे कहा गया है ?
- समय का बंधन
- बोले जाने वाले शब्द
- पात्र का स्वभाव
- उद्देश्य
सही उत्तर: (ब) बोले जाने वाले शब्द
व्याख्या: नाट्य-शास्त्र के अनुसार नाटक का शरीर संवाद या बोले जाने वाले शब्दों को माना गया है।
खण्ड – अ
बहुविकल्पीय प्रश्न
-
सबसे महत्त्वपूर्ण तथ्य या सूचना समाचार लेखन की उलटा पिरामिड शैली में कहाँ होती है ?
- अ) मध्य एवं अंत के बीच में
- ब) शीर्ष पर ✓
- स) मध्य में
- द) अंत में
व्याख्या: उलटा पिरामिड शैली में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य (मुख्य सूचना) शीर्ष पर रखी जाती है, ताकि पाठक को तुरंत मुख्य बात पता चल जाए।
-
इनमें से व्याख्यात्मक ककार है ?
- अ) क्या
- ब) कौन
- स) कैसे ✓
- द) कब
व्याख्या: व्याख्यात्मक ककार (क्यों, कैसे) किसी घटना के कारण या प्रक्रिया की व्याख्या करते हैं। 'कैसे' इसी श्रेणी में आता है।
रिक्त स्थानों की पूर्ति
-
“तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती, स्वयं प्रभा समुज्ज्वला स्वतंत्रता पुकारती” पंक्ति में प्रसाद गुण है।
उत्तर: प्रसाद गुण। कारण – इसमें शब्द सरल, स्पष्ट और अर्थ की सहज अभिव्यक्ति करने वाले हैं, जो मन को प्रसन्न करते हैं।
-
“हेमसुता पति-वाहन प्रिय” पंक्ति में यमक दोष है।
उत्तर: यमक दोष। कारण – यहाँ 'हेमसुता' (सीता) और 'पति-वाहन' (रथ) में ध्वनि साम्य होने से अर्थ में अनावश्यक पुनरावृत्ति का आभास होता है।
-
काव्य में जहाँ अर्थ के आधार पर चमत्कार उत्पन्न हो, उन अलंकारों को अर्थालंकार कहते हैं।
उत्तर: अर्थालंकार। ये अर्थ के सौंदर्य पर आधारित होते हैं, जैसे उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा आदि।
-
“देखो दो-दो मेघ बरसते, म्हे प्यासी की प्यासी” पंक्ति में अनुप्रास अलंकार है।
उत्तर: अनुप्रास अलंकार। कारण – 'दो-दो' और 'प्यासी की प्यासी' में वर्णों की आवृत्ति से ध्वनि सौंदर्य उत्पन्न हुआ है।
-
प्रत्येक चरण में 3, 6, 10 पर यति तथा चरण के अंत में गुरु-लघु नहीं होने के लक्षण वाला छंद मात्रिक छंद है।
उत्तर: मात्रिक छंद (जैसे – दोहा, चौपाई)। इसमें मात्राओं की गणना होती है, वर्णों की नहीं।
-
गण को ज्ञात करने का सूत्र यमाताराजभानसलगा है।
उत्तर: यमाताराजभानसलगा। यह वर्णिक छंदों में गण (यगण, मगण, तगण आदि) पहचानने का पारंपरिक सूत्र है।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
-
प्रसाद गुण की परिभाषा लिखिए।
उत्तर: प्रसाद गुण वह काव्यगत विशेषता है जिसमें शब्द और अर्थ सरल, स्पष्ट एवं सहजबोध्य हों, जिससे पाठक के मन में तुरंत अर्थ का बोध हो और आनंद की अनुभूति हो। आचार्य मम्मट के अनुसार – “प्रसादो रसनिर्भरता” अर्थात रस की प्रधानता ही प्रसाद गुण है।
-
छंद कितने प्रकार के होते हैं ? नाम लिखिए।
उत्तर: छंद मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं:
- वर्णिक छंद – जिनमें वर्णों (अक्षरों) की गणना होती है (जैसे – शिखरिणी, मंदाक्रांता)।
- मात्रिक छंद – जिनमें मात्राओं की गणना होती है (जैसे – दोहा, चौपाई, सोरठा)।
- मुक्त छंद – जिनमें वर्ण या मात्रा का कोई नियम नहीं होता, केवल लय और भाव पर बल दिया जाता है।
-
कहानी लेखन कला को सीखने का सबसे अच्छा तरीका कौन-सा है ?
उत्तर: कहानी लेखन सीखने का सबसे अच्छा तरीका अच्छी कहानियों का गहन अध्ययन और नियमित अभ्यास है। प्रेमचंद, मुंशी प्रेमचंद, मंटो आदि की कहानियाँ पढ़कर उनकी शैली, कथानक, पात्र-चित्रण और संवाद को समझना चाहिए तथा स्वयं लिखने का अभ्यास करना चाहिए।
-
कविता सर्जन के संबंध में कौन-सी शैली कवि की ताकत बन जाती है ?
उत्तर: कविता सर्जन में अभिव्यक्ति की मौलिकता और भाव-प्रवणता कवि की सबसे बड़ी ताकत बन जाती है। कवि की अपनी अनूठी शैली, बिंब-विधान और रस-योजना उसे दूसरों से अलग पहचान दिलाती है।
-
संपादक के नाम पत्र' स्तंभ की सामान्य जानकारी दीजिए।
उत्तर: 'संपादक के नाम पत्र' एक पत्रकारिता स्तंभ है जिसमें पाठक अपनी समस्याओं, सुझावों या शिकायतों को पत्र के रूप में संपादक को लिखते हैं। यह स्तंभ जनता और समाचार पत्र के बीच संवाद का माध्यम है। इसमें पत्र का चयन, संपादन और प्रकाशन किया जाता है। यह लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का एक महत्वपूर्ण मंच है।
-
फीचर की परिभाषा लिखिए।
उत्तर: फीचर एक पत्रकारिता विधा है जो किसी घटना, व्यक्ति, स्थान या विषय को रोचक, विस्तृत और मानवीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है। यह समाचार से भिन्न होता है क्योंकि इसमें तथ्यों के साथ-साथ वर्णन, भावना और विश्लेषण भी होता है। फीचर का उद्देश्य पाठक को सूचित करने के साथ-साथ मनोरंजन और ज्ञानवर्धन भी करना है।
4. दिए गए अपठित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए | [6×1=6]
सांस्कृतिक चेतना की सर्वश्रेष्ठ अभिव्यक्ति सार्वभौम सत्य के आधार पर प्रतिष्ठित धार्मिक भावना और दार्शनिक चिन्तनधारा के माध्यम से हुई। कला, शिल्प, साहित्य और संगीत इन्हीं की आनुषंगिक उपलब्धियाँ हैं। इन सबका क्षेत्र विशाल मानव समाज है जिसकी प्रेरणा और प्रसाद से मनुष्य जीवन-यापन करता है। भारतीय जीवन में समय-समय पर विदेशी और विजातीय तत्त्वों के आते रहने के कारण परस्पर संघात होते रहे, किन्तु इन्हीं से होकर ऐसी जीवन शक्ति का संचार भी होता रहा है कि हम डूबते-डूबते भी उबरते चले आए हैं, निष्प्रभ या निस्तेज न होकर नवजीवन की अरुणिमा से महिमा मंडित होते रहे हैं। इन सबके मूल में हमारी समन्वय साधना की प्रवृत्ति प्रधान रही है। इसे हम मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के दौर में समझ सकते हैं।
-
आनुषंगिक शब्द का अर्थ है
- अ) अस्पष्ट
- ब) अद्वितीय
- स) अनुपम
- द) प्रासंगिक
व्याख्या: 'आनुषंगिक' का अर्थ 'प्रासंगिक' या 'साथ-साथ चलने वाला' होता है। गद्यांश में कला, शिल्प, साहित्य और संगीत को धार्मिक भावना और दार्शनिक चिन्तनधारा की आनुषंगिक (प्रासंगिक) उपलब्धियाँ कहा गया है।
-
"अरुणिमा" शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय है
- अ) मा
- ब) आ
- स) इमा
- द) अणिमा
व्याख्या: 'अरुणिमा' शब्द 'अरुण' (लाल) मूल शब्द में 'इमा' प्रत्यय जोड़ने से बना है। 'इमा' प्रत्यय भाववाचक संज्ञा बनाता है, जैसे लालिमा, पीतिमा आदि।
प्रश्न 5 (iii) – (गद्यांश पर आधारित)
विदेशी और विजातीय तत्त्वों के परस्पर संघात से भारत पर क्या प्रभाव पड़ा?
- अ) Una की संस्कृति नष्ट हो गई।
- ब) हम निष्प्रभ और Rete हो गए।
- स) हम नैतिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर हो गए।
- द) भारत में अदम्य जीवन शक्ति का संचार हुआ।
सही उत्तर: द) भारत में अदम्य जीवन शक्ति का संचार हुआ।
व्याख्या: गद्यांश के अनुसार, विदेशी और विजातीय तत्त्वों के संघात से भारत की संस्कृति नष्ट नहीं हुई, बल्कि उसमें नई जीवन शक्ति का संचार हुआ, जिसने उसे और अधिक समृद्ध किया।
प्रश्न 5 (iv) – (गद्यांश पर आधारित)
गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
उत्तर: गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक "भारतीय संस्कृति की अदम्य जीवन शक्ति" या "भारत की सांस्कृतिक चेतना" हो सकता है।
प्रश्न 5 (v) – (गद्यांश पर आधारित)
सांस्कृतिक चेतना की सर्वश्रेष्ठ अभिव्यक्ति किस माध्यम से हुई?
उत्तर: सांस्कृतिक चेतना की सर्वश्रेष्ठ अभिव्यक्ति भाषा और साहित्य के माध्यम से हुई।
प्रश्न 5 (vi) – (गद्यांश पर आधारित)
गद्यांश का प्रतिपाद्य लिखिए।
उत्तर: गद्यांश का प्रतिपाद्य यह है कि भारतीय संस्कृति में अदम्य जीवन शक्ति है। विदेशी और विजातीय तत्त्वों के संघात के बावजूद यह संस्कृति नष्ट नहीं हुई, बल्कि उसने उन तत्त्वों को आत्मसात कर अपनी चेतना को और अधिक समृद्ध किया।
प्रश्न 5 – अपठित पद्यांश पर आधारित
दिए गए अपठित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए।
हे प्रभु! आनंद दाता ज्ञान हमको दीजिए।
शीघ्र सारे दुर्गुणों को दूर हमसे कीजिए।लीजिए हमको शरण में, हम सदाचारी बने।
ब्रह्मचारी, धर्म रक्षक, वीर व्रतधारी बने।
सत्य बोलें, झूठ त्यागे, मेल आपस में करें।
दिव्य जीवन हो हमारा, यश तेरा गाया करें।जाए हमारी आयु हे प्रभु, लोक के उपकार में।
हाथ डाले हम कभी ना, भूलकर अपकार में।
प्रश्न (i)
"मेल आपस में करें" पंक्ति का प्रतीकार्थ है:
- अ) Fa का प्रसार wt।
- ब) Fe (अस्वच्छता) को अवरुद्ध करें।
- स) सद्भाव आधारित आपस में व्यवहार करें।
- द) आपस में मल्ल युद्ध करें।
सही उत्तर: स) सद्भाव आधारित आपस में व्यवहार करें।
व्याख्या: 'मेल आपस में करें' का अर्थ है कि हम आपस में प्रेम, एकता और सद्भाव से रहें। यह पंक्ति परस्पर मिलजुल कर रहने और भाईचारे का संदेश देती है।
प्रश्न 4. (ii) 'सदाचारी' शब्द का अर्थ इनमें से है:
- अ) अच्छी वेशभूषा वाला
- ब) अच्छे स्वास्थ्य वाला
- स) अच्छे स्वरूप वाला
- द) अच्छे व्यवहार वाला ✓
व्याख्या: 'सदाचारी' का अर्थ 'अच्छे आचरण या व्यवहार वाला' होता है।
प्रश्न 5. (iii) कवि कैसे जीवन की कामना कर रहा है?
- अ) कलुषित जीवन की
- ब) दिव्यतापूर्ण जीवन की ✓
- स) नैराश्यपूर्ण जीवन की
- द) रूण जीवन की
व्याख्या: कवि दिव्यतापूर्ण (दिव्य गुणों से युक्त) जीवन की कामना कर रहा है।
प्रश्न 6. (iv) पद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: पद्यांश का उचित शीर्षक 'प्रभु से प्रार्थना' या 'दिव्य जीवन की कामना' हो सकता है।
प्रश्न 7. (v) कवि प्रभु से क्या प्रार्थना कर रहा है?
उत्तर: कवि प्रभु से दिव्यतापूर्ण जीवन प्रदान करने की प्रार्थना कर रहा है, जिसमें कलुषितता और नैराश्य न हो।
प्रश्न 8. (vi) पद्यांश के अनुसार कवि क्या नहीं करना चाहता है?
उत्तर: कवि कलुषित (दूषित) और नैराश्यपूर्ण (निराशा से भरे) जीवन को नहीं जीना चाहता।
निर्देश: प्रश्न संख्या 6 से 15 तक प्रत्येक प्रश्न के लिए अधिकतम शब्द सीमा 40 शब्द हैं।
प्रश्न 9. सूरदास को झोंपड़े के जल जाने का दुःख न था, दुःख था उस पोटली का। सूरदास को पोटली का दुःख क्यों था?
उत्तर: सूरदास को झोंपड़ी जलने का दुःख नहीं था क्योंकि वह अंधा था और उसे भौतिक वस्तुओं से मोह नहीं था। उसे पोटली का दुःख इसलिए था क्योंकि उसमें उसकी कमाई की पूंजी और जीवन की स्मृतियाँ थीं, जो उसके लिए अत्यंत मूल्यवान थीं।
प्रश्न 10. गाँव में बारिश आने पर कैसा वातावरण होता था?
उत्तर: गाँव में बारिश आने पर वातावरण खुशनुमा और उल्लासपूर्ण हो जाता था। चारों ओर हरियाली छा जाती थी, खेतों में फसलें लहलहाने लगती थीं, और लोग राहत महसूस करते थे। बारिश के पानी से तालाब और नदियाँ भर जाती थीं, जिससे प्रकृति का सौंदर्य बढ़ जाता था।
प्रश्न 11. 'माटी की माटी' पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर: 'माटी की माटी' पाठ में मिट्टी के महत्व और उससे जुड़ी भावनाओं का वर्णन है। यह पाठ मिट्टी को जीवन का आधार बताता है और उसके प्रति आदरभाव रखने की प्रेरणा देता है।
खण्ड-स
प्रश्न 9. 'देवसेना का गीत' में 'प्रलय चल रहा अपने पथ पर' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति का आशय है कि संसार में विनाश और अराजकता का दौर चल रहा है। प्रलय अपने नियत मार्ग पर अटल रूप से आगे बढ़ रहा है, जिसे कोई रोक नहीं सकता। यह कवि के निराशावादी दृष्टिकोण को दर्शाता है, जहाँ वह समाज में व्याप्त बुराइयों और विनाश को अपरिहार्य मानता है।
प्रश्न 10. “बारहमासा' के फांगुण मास में विरह से नागमती की कैसी स्थिति हो रही है?
फाल्गुन मास में नागमती की विरह स्थिति अत्यंत विकट और व्याकुल हो जाती है। इस मास में प्रकृति में बसंत ऋतु का आगमन होता है, जिससे चारों ओर खुशहाली और उल्लास छा जाता है। लेकिन नागमती के लिए यह उल्लास और भी अधिक पीड़ादायक हो जाता है, क्योंकि वह अपने प्रियतम के वियोग में अकेली है। वह प्रकृति के इस सौंदर्य को देखकर और भी अधिक व्यथित हो उठती है और अपने प्रिय के मिलन के लिए तड़पती है।
प्रश्न 11. सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय' या घनानंद का साहित्यिक परिचय लिखिए।
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”: ये हिंदी साहित्य के प्रयोगवादी और नई कविता के प्रमुख स्तंभ हैं। इनका जन्म 1911 में हुआ। इनकी रचनाओं में व्यक्तिवादी दृष्टिकोण, बिंब-विधान और नए प्रयोग मिलते हैं। प्रमुख रचनाएँ: 'हरी घास पर क्षण भर', 'बावरा अहेरी', 'आँगन के पार द्वार' आदि।
अथवा
घनानंद: ये रीतिकाल के प्रमुख कवि हैं, जो शृंगार रस के उत्कृष्ट कवि माने जाते हैं। इनकी रचनाओं में प्रेम की गहन अनुभूति और विरह की मार्मिक अभिव्यक्ति मिलती है। इनकी भाषा ब्रजभाषा है और इन्होंने 'सुजान सागर', 'वियोग बेली' आदि ग्रंथों की रचना की।
प्रश्न 12. बालक द्वारा लड्डू माँगने एवं अध्यापक क्यों निराश हो गए?
बालक ने अपनी मासूमियत और सरलता से अध्यापक से लड्डू माँगा। अध्यापक इसलिए निराश हुए क्योंकि उन्हें लगा कि बालक पढ़ाई-लिखाई के बजाय खाने-पीने की चीजों में अधिक रुचि रखता है। यह घटना शिक्षा प्रणाली की विडंबना को दर्शाती है, जहाँ बच्चों की स्वाभाविक इच्छाओं को समझने के बजाय उन्हें दबा दिया जाता है।
प्रश्न 13. किसान को साझे में खेती करने के लिए किसने और क्या पढ़ाई?
इस प्रश्न का स्पष्ट उत्तर पाठ्य सामग्री के अभाव में नहीं दिया जा सकता। कृपया संबंधित पाठ को देखें।
प्रश्न 14. रामचंद्र शुक्ल या ममता कालिया का साहित्यिक परिचय लिखिए।
रामचंद्र शुक्ल: ये हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध आलोचक और निबंधकार हैं। इनका जन्म 1884 में हुआ। इन्होंने हिंदी साहित्य के इतिहास को वैज्ञानिक दृष्टि से देखा। प्रमुख रचनाएँ: 'हिंदी साहित्य का इतिहास', 'चिंतामणि' (निबंध संग्रह) आदि।
अथवा
ममता कालिया: ये हिंदी की प्रमुख कहानीकार और उपन्यासकार हैं। इनकी रचनाओं में स्त्री-मन की गहरी पड़ताल और सामाजिक यथार्थ का चित्रण मिलता है। प्रमुख रचनाएँ: 'बेघर', 'नरक दर नरक', 'एक पत्नी के नोट्स' आदि।
प्रश्न 15. मानवीकरण अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
परिभाषा: जब निर्जीव वस्तुओं, प्रकृति या भावों पर मनुष्य के गुणों, क्रियाओं या भावों का आरोप किया जाता है, तब वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।
उदाहरण: "हवा धीरे-धीरे बोली, पत्ते झूमने लगे।" यहाँ हवा (निर्जीव) को बोलने का मानवीय गुण दिया गया है।
प्रश्न 16. 'सरोज स्मृति' कविता में पिता-पुत्री के आत्मीय संबंध, पिता के संघर्ष और पुत्री वियोग की पीड़ा का संवेदनशील चित्रण है। उक्त कथन की समीक्षा कीजिए।
यह कथन पूर्णतः सत्य है। 'सरोज स्मृति' कविता में कवि ने अपनी पुत्री सरोज के प्रति अपने गहरे प्रेम और वियोग की पीड़ा को अत्यंत मार्मिक ढंग से चित्रित किया है। कविता में पिता-पुत्री के बीच के आत्मीय संबंधों को बड़ी संवेदनशीलता से उकेरा गया है। पिता के संघर्ष को उनके द्वारा पुत्री के लिए किए गए प्रयासों और उसकी यादों के माध्यम से दर्शाया गया है। पुत्री के वियोग में पिता की पीड़ा इतनी गहरी है कि वह हर वस्तु में उसे ही देखता है। यह कविता वियोग की पीड़ा का एक अद्वितीय और संवेदनशील चित्रण प्रस्तुत करती है।
अथवा
प्रश्न 16. भरत राम के प्रति अटूट श्रद्धाभाव एवं सतत समर्पण रखते हैं। उक्त कथन की समीक्षा कीजिए।
यह कथन पूर्णतः सत्य है। भरत राम के प्रति अटूट श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक हैं। जब राम वन गए, तो भरत ने राज्य को स्वीकार नहीं किया और राम की चरणपादुकाओं को सिंहासन पर रखकर स्वयं नंदीग्राम में तपस्वी की तरह रहे। उन्होंने राम के लौटने तक राज्य का संचालन उनके नाम पर किया। यह उनके अटूट श्रद्धाभाव और सतत समर्पण को दर्शाता है। वे राम के प्रति अपने प्रेम और निष्ठा में अडिग रहे, जो भारतीय संस्कृति में भाईचारे और आदर्श के प्रतीक माने जाते हैं।
प्रश्न 7
“विकास का उजला पहलू अपने पीछे कितने व्यापक पैमाने पर विनाश का अँधेरा लेकर आया है।” “जहाँ कोई नहीं” पाठ के आधार पर इस कथन की समीक्षा कीजिए। [3]
समीक्षा: 'जहाँ कोई नहीं' पाठ में लेखक ने विकास के दोहरे स्वरूप को उजागर किया है। विकास ने जहाँ एक ओर सुविधाएँ दी हैं, वहीं दूसरी ओर प्रकृति का अंधाधुंध दोहन किया है। उद्योगीकरण, शहरीकरण और आधुनिक तकनीक ने प्राकृतिक संसाधनों को नष्ट किया है, जिससे पर्यावरण असंतुलित हुआ है। यह विकास का अँधेरा पहलू है, जो विनाश को जन्म दे रहा है।
अथवा
'कुटज' पाठ के आधार पर कुटज वृक्ष की विशेषताओं की विवेचना कीजिए। [3]
विवेचना: 'कुटज' पाठ में कुटज वृक्ष को एक संघर्षशील और साहसी वृक्ष के रूप में चित्रित किया गया है। इसकी विशेषताएँ हैं:
- यह पथरीली और बंजर भूमि पर भी उगता है, जो इसकी कठोरता को दर्शाता है।
- इसके फूल सफेद और सुगंधित होते हैं, जो सौंदर्य का प्रतीक हैं।
- यह औषधीय गुणों से भरपूर है, विशेषकर बुखार और पेट के रोगों में उपयोगी।
- यह वृक्ष प्रतिकूल परिस्थितियों में भी जीवित रहने की प्रेरणा देता है।
प्रश्न 8
सूरदास पर “खेल में रोते हो” की चेतावनी सुनकर क्या प्रभाव पड़ा? [3]
प्रभाव: सूरदास पर इस चेतावनी का गहरा प्रभाव पड़ा। वे अपने बचपन की स्मृतियों में खो गए और उन्हें एहसास हुआ कि उनका जीवन खेल-खेल में ही बीत गया। यह चेतावनी उनके लिए आत्मचिंतन का कारण बनी, जिससे वे अपने जीवन की सार्थकता पर विचार करने लगे।
अथवा
“अपना-अपना उजाड़ सभ्यता में” पाठ के अनुसार पर्यावरण विनाश से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। कैसे? समझाइए। [3]
स्पष्टीकरण: 'अपना-अपना उजाड़ सभ्यता में' पाठ के अनुसार, पर्यावरण विनाश निम्नलिखित कारणों से प्राकृतिक संतुलन बिगाड़ रहा है:
- वनों की अंधाधुंध कटाई से वर्षा चक्र प्रभावित हो रहा है।
- उद्योगों और वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण से वायु और जल दूषित हो रहे हैं।
- जैव विविधता नष्ट हो रही है, जिससे खाद्य श्रृंखला बाधित हो रही है।
- जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ रही हैं।
प्रश्न 9
निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए: [5]
संवाद पहुँचाने का काम सभी नहीं कर सकते। आदमी भगवान के घर से संवदिया बनकर आता है। संवाद के प्रत्येक शब्द को याद रखता, जिस सुर और स्वर में संवाद सुनाया गया है, ठीक उसी ढंग से जाकर सुनाना सहज काम नहीं है। गाँव के लोगों की गलत धारणा है कि कामचोर और पेटू आदमी ही संवदिया का काम करता है। न आगे माथ ना पीछे पगहा। बिना मज़दूरी लिए दिन-रात गाँव-गाँव संवाद पहुँचावे, उसको और क्या कहेंगे?
प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश 'जहाँ कोई नहीं' पाठ से लिया गया है। इसमें लेखक संवदिया (संदेशवाहक) के कार्य की महत्ता और समाज में उसके प्रति व्याप्त गलत धारणाओं पर प्रकाश डाल रहा है।
व्याख्या: लेखक कहता है कि संवाद पहुँचाने का कार्य सरल नहीं है, इसे हर कोई नहीं कर सकता। संवदिया को भगवान का दूत माना गया है, जो जन्म से ही इस कार्य के लिए नियुक्त होता है। उसे संवाद के हर शब्द को याद रखना होता है और उसे उसी सुर और स्वर में सुनाना होता है जैसे उसे बताया गया था। यह अत्यंत कठिन कार्य है। गाँव के लोग गलती से संवदिया को कामचोर और पेटू समझते हैं, जबकि वह बिना किसी मजदूरी के दिन-रात गाँव-गाँव संवाद पहुँचाता है। लेखक इस गलत धारणा की आलोचना करता है और संवदिया के कार्य के प्रति सम्मान व्यक्त करता है।
अथवा
(गद्यांश का विकल्प उपलब्ध नहीं है।)
प्रश्न 20: निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए
अमुक दिन अमुक बार मदन महीने की होवेगी पंचमी
दफ्तर में छुट्टी थी-यह था प्रमाण
और कविताएँ पढ़ते रहने से यह पता था
कि दहर-दहर दहकेंगे कहीं के जंगल
आम बौर आवेंगे
रंग-रस-गंध से लदे-फँदे दूर के विदेश के
वें नंदन-वन होवेंगे यशस्वी |
सप्रसंग व्याख्या
प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि द्वारा रचित कविता से लिया गया है। इसमें कवि ने एक बालक की कल्पना और उसके मन में चल रहे संघर्ष का चित्रण किया है। बालक के सामने इनाम में कुछ भी माँगने का अवसर है, लेकिन वह स्वाभाविक और कृत्रिम भावों के बीच उलझा हुआ है।
व्याख्या: कवि कहता है कि एक निश्चित दिन और समय पर मदन महीने (वसंत ऋतु) की पंचमी तिथि होगी। उस दिन दफ्तर में छुट्टी थी – यह एक प्रमाण था। कविताएँ पढ़ते रहने से यह पता था कि दूर-दूर तक जंगल दहक उठेंगे (खिल उठेंगे), आम के पेड़ों पर बौर आएँगे, और दूर विदेशों के वे नंदन-वन (सुंदर उद्यान) रंग, रस और गंध से लदे-फँदे हुए यशस्वी होंगे।
इस पद्यांश में कवि ने बालक की मानसिक दशा को दर्शाया है। बालक अपने स्वाभाविक भाव (लड्डू खाने की इच्छा) और कृत्रिम भाव (बड़ी-बड़ी चीज़ें माँगने का दिखावा) के बीच झूल रहा है। अंत में वह स्वाभाविक भाव को चुनता है और 'लड्डू' कहता है, जिससे पिता और अध्यापक निराश हो जाते हैं। कवि स्वयं भी इस घटना को देखकर राहत की साँस लेता है।
विशेष: इस पद्यांश में बाल मनोविज्ञान का सजीव चित्रण है। कवि ने सरल भाषा में बालक की मासूमियत और उसके मन के द्वंद्व को उभारा है। 'दहर-दहर दहकेंगे' जैसे शब्दों से वसंत ऋतु की सुंदरता का बोध होता है।
गद्यांश (प्रश्न 19 से संबंधित)
एक वृद्ध महाशय ने उसके सिर पर हाथ फेरकर आशीर्वाद दिया और कहा कि जो तू इनाम चाहे वही दें। बालक कुछ सोचने लगा। बालक के मुख पर विलक्षण रंगों का परिवर्तन हो रहा था, उसमें कृत्रिम और स्वाभाविक भावों की लड़ाई की झलक आँखों में दिख रही थी। कुछ खाँसकर, गला साफ़ कर नकली परदे के हट जाने पर स्वयं विस्मित होकर बालक ने धीरे से कहा, 'लड्डू'। पिता और अध्यापक निराश हो गए। इतने समय तक मेरा श्वास घुट रहा था। अब मैंने सुख से साँस भरी।
गद्यांश की व्याख्या
प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने एक बालक के मनोवैज्ञानिक संघर्ष का मार्मिक चित्रण किया है। एक वृद्ध व्यक्ति बालक को इनाम में जो चाहे माँगने को कहता है। बालक के मन में दो भाव लड़ रहे हैं – एक ओर स्वाभाविक इच्छा (लड्डू खाने की) और दूसरी ओर कृत्रिम भाव (बड़ी-बड़ी चीज़ें माँगने का दिखावा)। अंत में बालक अपनी स्वाभाविक इच्छा को चुनता है और 'लड्डू' कहता है। पिता और अध्यापक निराश होते हैं, लेकिन लेखक को राहत मिलती है क्योंकि बालक ने अपनी मासूमियत नहीं खोई।
प्रश्न 2: निबंध
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबंध लिखिए। (5 अंक)
- आपरेशन सिंदूर : भारत का गौरव
- राजस्थान की शौर्य परंपरा
- मेरी प्रिय-रचना
नोट: यहाँ केवल विषय दिए गए हैं। विद्यार्थी को किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबंध लिखना है। निबंध में प्रस्तावना, विषय-विस्तार और उपसंहार का ध्यान रखना चाहिए।
पद्यांश का संदर्भ (पृष्ठ 11 से)
पद्यांश में वियोग शृंगार रस का वर्णन है। नायिका अपने प्रियतम के वियोग में व्याकुल है और गोकुल छोड़कर मथुरा जाने की बात कहती है।
पद्यांश:
के पतिआ लए जाएत रे मोर पिअतम पास |
हिए fg सहए असह दुख रे भेल साओन मास ||
एकसरि भवन पिआ बिनु रे मोहि रहलो-न जाए |
सखि अनकर दुख दारुन रें जग के पतिआए ||
मोर मन हरि हर लए गेल रे अपनो मन गेल |
गोकुल तेजि मंधुपुर बस रे कन अपजस्त Ae TI
व्याख्या: यह पद्यांश सूरदास या अन्य कृष्ण-भक्त कवि की रचना प्रतीत होता है। इसमें गोपी अपने प्रियतम श्रीकृष्ण के वियोग में दुखी है। वह कहती है कि वह पत्र लेकर अपने प्रियतम के पास जाएगी। सावन मास में असह्य दुख सहन करना पड़ रहा है। प्रिय के बिना एक क्षण भी घर में नहीं रहा जाता। उसका मन हरि (कृष्ण) हर ले गए हैं और अपना मन भी चला गया है। वह गोकुल छोड़कर मथुरा (मंधुपुर) में बसने की बात सोच रही है।