RBSE Class 8th 2026 HALF-YEARLY-SANSKRIT-011225 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 8th |
| Exam year | 2026 |
| Subject | HALF-YEARLY-SANSKRIT-011225 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 8th 2026 HALF-YEARLY-SANSKRIT-011225
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Rajasthan Board Class 8th HALF-YEARLY-SANSKRIT-011225 2026 solved Previous Year Question Papers
अर्द्ध वार्षिक परीक्षा सत्र 2025-26
विषय: संस्कृत
कक्षा – VIII (आठवीं)
समय : 2½ घंटे पूर्णांक : 65
निर्देश
- सभी प्रश्न करना अनिवार्य है। प्रश्नों के अंक उनके सामने अंकित हैं।
- सर्वप्रथम परीक्षार्थी अपना नामांक प्रश्न-पत्र पर अनिवार्यतः लिखें।
1. अधोलिखित प्रश्नानाम् उत्तराणि प्रदत्त विकल्पेभ्यः चित्वा लिखत :
(i) शृगालस्य नाम आसीत् –
- (अ) दीर्घपुच्छः
- (ब) चित्रकः
- (स) चित्रकः
- (द) दधिपुच्छः ✓ सही उत्तर
व्याख्या: प्रसिद्ध कथा में शृगाल (सियार) का नाम 'दधिपुच्छः' था।
(ii) चञ्चलः कः आसीत्?
- (अ) श्रमिकः
- (ब) व्यापारी ✓ सही उत्तर
- (स) कृपकः
- (द) व्यापारिणः
व्याख्या: 'चञ्चलः' शब्द का अर्थ चंचल या अस्थिर होता है, यहाँ व्यापारी को चञ्चल कहा गया है।
(iii) गुणाः गुणेषु भवन्ति –
- (अ) जीवमानाः
- (ब) गुणाः ✓ सही उत्तर
- (स) दोषाः
- (द) निर्गुणाः
व्याख्या: गुण गुणियों में ही होते हैं, अतः सही विकल्प 'गुणाः' है।
2. विशेष्य-विशेषणयोः मेलनं कुरुत –
| विशेषण पदानि | विशेष्य पदानि |
|---|---|
| (i) त्रिवर्षीया | पुत्री |
| (ii) एताभ्यः | शिल्पिभ्यः |
| (iii) त्रीणि | कारणानि |
| (iv) त्रीणि | वर्षाणि |
3. निम्न गद्यांशस्य हिन्दी में अनुवादं कुरुत –
गद्यांश: कस्मिंश्चित् वने खरनखरः नाम सिंहः प्रतिवसति स्म। सः कदाचित् इतस्ततः परिभ्रमन् क्षुधार्तः न किंचिदपि आहारं प्राप्तवान्। ततः सूर्यास्तसमये एकां महतीं गुहां दृष्ट्वा सः अचिन्तयत् – नूनम् एतस्यां गुहायां कोऽपि प्राणी आगच्छति। अतः अत्रैव निगूढो भूत्वा तिष्ठामि।
हिन्दी अनुवाद: किसी वन में खरनखर नाम का एक सिंह रहता था। वह कभी इधर-उधर भटकता हुआ भूखा हो गया और उसे कुछ भी भोजन नहीं मिला। तब सूर्यास्त के समय एक बड़ी गुफा देखकर उसने सोचा – निश्चय ही इस गुफा में कोई प्राणी आता है। इसलिए मैं यहीं छिपकर बैठ जाऊँ।
4. अधोलिखित पदयोः सन्धिं कृत्वा लिखत –
- विद्या + आलयः = विद्यालयः (दीर्घ सन्धि)
- सूर्य + उदयः = सूर्योदयः (गुण सन्धि)
- गम् + तुम् = गन्तुम् (अनुनासिक सन्धि / श्चुत्व सन्धि)
- रमा + ईशः = रमेशः (दीर्घ सन्धि)
5. अव्ययपदानि चित्वा रिक्त स्थानानि पूरयत –
(प्रश्न में अव्ययपदों के चयन हेतु वाक्यांश अपूर्ण है। कृपया पूर्ण प्रश्न प्राप्त होने पर उत्तर दिया जाएगा।)
प्रश्नपत्रम् – संस्कृतम् (अर्धवार्षिक परीक्षा)
प्रश्न ७. रिक्त-शब्दों के अर्थ नदी में लिखो – 4
- मातृजाया – माता से उत्पन्न (भाई/बहन)
- प्रक्षालयन्ति – धोते हैं
- एतस्ततः – इधर-उधर
- पलायगानः – भागने वाला
प्रश्न ८. अपनी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत में दो श्लोक लिखिए जो इस प्रश्न-पत्र में नहीं आये हैं? 6
श्लोक १: (उदाहरणार्थ – यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥)
श्लोक २: (उदाहरणार्थ – परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः, परोपकाराय वहन्ति नद्यः। परोपकाराय दुहन्ति गावः, परोपकारार्थमिदं शरीरम्॥)
नोट: विद्यार्थी अपनी पाठ्यपुस्तक से कोई भी दो श्लोक लिख सकते हैं जो इस प्रश्नपत्र में नहीं दिए गए हैं।
प्रश्न ९. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृत भाषाया लिखंत – 8
-
सतत् कि करणीयम् ?
सतत् विद्याध्ययनं करणीयम्। (सदैव पढ़ना चाहिए।)
-
मधुमक्षिका कि जनयति ?
मधुमक्षिका मधु जनयति। (मधुमक्खी शहद उत्पन्न करती है।)
-
खरनखर: कुत्र प्रतिवसति सम ?
खरनखर: गुहायाम् प्रतिवसति। (खरनखर गुफा में रहता है।)
-
राकेश: केन तिरस्कार करोति ?
राकेश: दुर्जनैः तिरस्कार करोति। (राकेश दुर्जनों द्वारा तिरस्कार करता है।)
प्रश्न १०. निम्नलिखित पद्यांश का हिन्दी अनुवाद लिखत: – 8
पद्यांश:
पीत्वा तु कटुकं मधुरं समानं,
माधुर्यमेव जनयेन्मधुमक्षिकासौ।
सन्तस्तथैव समसज्जनदुर्जनानां,
वचः मधुरसूक्तरसं सृजन्ति॥
हिन्दी अनुवाद: मधुमक्खी कड़वे और मीठे दोनों को पीकर केवल मिठास ही उत्पन्न करती है। उसी प्रकार सज्जन लोग सज्जनों और दुर्जनों के वचनों को सुनकर केवल मधुर और सुन्दर रस (सार) ही उत्पन्न करते हैं।
पथि पाषाणः विषमाः प्रखराः,
हिस्त्राः पशवः परितो घोराः।
अथ खलु यद्यपि गमनं,
सदैव धैर्य निधेहि चरणम्॥
हिन्दी अनुवाद: रास्ते में पत्थर, ऊबड़-खाबड़ जगहें, तीखे काँटे, चारों ओर भयंकर हिंसक पशु हैं। फिर भी यद्यपि चलना कठिन है, सदैव धैर्य रखकर कदम रखो।
प्रश्न ११. निर्देशानुसार पदानि स्वीकृत्य ‘विद्यालयः’ विषये निबंधलेखनम् कुरुत – 6
सहायक पदानि: विद्यालयस्य समीपे, वृक्षाः, खगाः, पुष्पाणि, भ्रमणाय
निबंध:
मम विद्यालयः नगरस्य समीपे अस्ति। विद्यालयस्य समीपे बहवः वृक्षाः सन्ति। तेषु वृक्षेषु खगाः कूजन्ति। विद्यालयस्य उद्याने सुन्दराणि पुष्पाणि सन्ति। अहं प्रतिदिनं प्रातःकाले भ्रमणाय विद्यालयस्य उद्यानं गच्छामि। विद्यालयः ज्ञानस्य मन्दिरम् अस्ति। अत्र वयं पठामः, लिखामः, क्रीडामः च। मम विद्यालयः अतीव सुन्दरः अस्ति।
प्रश्न १२. पद धातु च लकार लिखत – 2+2=4
| पद | धातु | लकार |
|---|---|---|
| पिबति | पा (पिब्) | लट् लकार (वर्तमान काल) |
| गच्छति | गम् | लट् लकार (वर्तमान काल) |
प्रश्न १३. प्रदत्त शब्दानां सहायतया ‘काकस्य चातुर्यम्’ पूरयित्वा लिखत – 8
प्रदत्त शब्दाः: काक, पिपासा, उपरि, पाषाणः, जलार्थ, पिबति, बहु दूर, जलं, घट, स्वल्पम्, तृषितः
पूरितम् अनुच्छेदम्:
एकः काकः अस्ति। सः बहु पिपासा भ्रमति। तदा ग्रीष्मकालः कुत्रापि जलं नास्ति। काकः बहु दूर गच्छति। तत्र स एकं घट पश्यति। काकस्य तृषितः भवति। किन्तु घटे एवं स्वल्पम् जलम् अस्ति। जलं कथम् पिबति इति काकः चिन्तयति। सः एकम् उपरि करोति। सः पाषाणः आनयति। घटे पूरयति। जलम् जलार्थ आगच्छति। काकः जलम् पिबति। ततः सन्तुष्टः सन् गच्छति।