RBSE Class 9th 2025 Hindi (901)-2025 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 9th |
| Exam year | 2025 |
| Subject | Hindi (901)-2025 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 9th 2025 Hindi (901)-2025
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Rajasthan Board Class 9th Hindi (901)-2025 2025 solved Previous Year Question Papers
कक्षा 9वीं वार्षिक परीक्षा, 2025
Class 9th Annual Examination, 2025
हिन्दी / HINDI [902]
अनुक्रमांक (अंकों में) / Roll No. (in figures): ___________ अनुक्रमांक (शब्दों में) / Roll No. (in words): ___________
समय: 3 घंटे 15 मिनट / Time: 3 Hours 15 Minutes
[कुल प्रश्नों की संख्या: 24] [Total No. of Questions: 24]
[पूर्णांक: 80] [Maximum Marks: 80]
[कुल मुद्रित पृष्ठ: 04] [Total No. of Printed Pages: 04]
अनुदेश: General Instructions:
- परीक्षार्थी प्रश्न-पत्र के पहले पृष्ठ पर अपना अनुक्रमांक अंकों और शब्दों में लिखें। / Write Roll No. on the first page of the Question Paper in figures and words.
- प्रत्येक प्रश्न के सामने उसका अंक भार अंकित है। / Marks for every question are indicated alongside.
नोट: सभी प्रश्न करना अनिवार्य है।
खण्ड - क
1. निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर लिखें:
भारतीय दर्शन सिखाता है कि जीवन का एक आशय और लक्ष्य है, उस आशय की खोज हमारा दायित्व है और उस लक्ष्य को प्राप्त कर लेना, हमारा विशेषाधिकार है। इस प्रकार दर्शन जो कि आशय को उद्घाटित करने की कोशिश करता है और जहाँ तक उसे इसमें सफलता मिलती है, वह इस लक्ष्य तक अग्रसर होने की प्रक्रिया है। कुल मिलाकर आखिर यह लक्ष्य क्या है? बाधाएँ कई हैं। पर इनमें प्रमुख है — अज्ञान। अशिक्षित आत्मा भी नहीं है। यह दर्शन ही है जो उसे शिक्षित करता है और अपनी शिक्षा से उसे अज्ञान से मुक्ति दिलाता है, जो यथार्थ दर्शन नहीं होने देता। इस प्रकार एक दार्शनिक होना एक बौद्धिक अनुशासन पर चलना है क्योंकि सत्य की खोज में लगे हुए सही अनुगमन करना नहीं है, बल्कि एक शक्तिप्रद अनुशासन पर चलना है। दार्शनिक को अपने जीवन को इस प्रकार आचरित करना पड़ता है ताकि उस यथार्थ से एकाकार हो जाये।
-
(क) 'अनुशासन' शब्द में उपसर्ग का सही विकल्प है -
- (अ) अन + शासन
- (ब) आ + नुशासन
- (स) अनु + शासन
- (द) अ + शासन
व्याख्या: 'अनुशासन' शब्द 'अनु' उपसर्ग और 'शासन' मूल शब्द के योग से बना है।
-
(ख) जीवन का लक्ष्य प्राप्त करने में सबसे बड़ी बाधा क्या है?
- (अ) अशिक्षित होना
- (ब) ज्ञान का अभाव
- (स) अहंकार
- (द) यथार्थ दर्शन
व्याख्या: गद्यांश के अनुसार, लक्ष्य प्राप्ति में प्रमुख बाधा 'अज्ञान' (ज्ञान का अभाव) है।
-
(ग) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: भारतीय दर्शन और जीवन का लक्ष्य
-
(घ) मानव जीवन का एकमात्र उद्देश्य क्या है?
उत्तर: गद्यांश के अनुसार, मानव जीवन का एकमात्र उद्देश्य अपने जीवन के आशय और लक्ष्य की खोज करना तथा उस लक्ष्य को प्राप्त करना है।
-
(ङ) भारतीय दृष्टि में दार्शनिक होना क्या है?
उत्तर: भारतीय दृष्टि में दार्शनिक होना केवल बौद्धिक अनुशासन पर चलना नहीं है, बल्कि एक शक्तिप्रद अनुशासन पर चलना है, जिसमें दार्शनिक अपने जीवन को इस प्रकार आचरित करता है कि वह यथार्थ से एकाकार हो जाए।
-
(च) भारतीय दर्शन के अनुसार हमारा लक्ष्य और दायित्व क्या है?
उत्तर: भारतीय दर्शन के अनुसार, जीवन के आशय और लक्ष्य की खोज करना हमारा दायित्व है, और उस लक्ष्य को प्राप्त कर लेना हमारा विशेषाधिकार है।
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खण्ड 'अ' (अपठित बोध)
निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
हे ग्राम देवता! नमस्कार |
सोने-चाँदी से नहीं किन्तु,
तुमने मिट्टी से किया प्यार।
हे ग्राम देवता! नमस्कार |
तुम जन-मन के अधिनायक हो,
तुम हँसो कि फूले-फले देश।
आओ सिंहासन पर बैठो,
यह राज्य तुम्हारा है अशेष |
उर्वरा भूमि के नये खेत,
ये नये धान्य से सजे वेश।
तुम भू पर रहकर भूमि भार,
धारण करते हो मनुज शेष।
-
अधिनायक शब्द में उपसर्ग है -
- (a) अधि
- (b) अ
- (c) नायक
- (d) क
सही उत्तर: (a) अधि
व्याख्या: 'अधिनायक' शब्द में 'अधि' उपसर्ग है, जो 'नायक' शब्द से पहले जुड़कर 'अधिनायक' बनाता है।
-
भूमि शब्द का समानार्थी है -
- (a) फूल
- (b) आकाश
- (c) धरती
- (d) वातावरण
सही उत्तर: (c) धरती
व्याख्या: 'भूमि' का अर्थ धरती या पृथ्वी है, इसलिए इसका समानार्थी शब्द 'धरती' है।
-
किसान किससे प्यार करता है?
किसान मिट्टी से प्यार करता है। कवि के अनुसार, किसान सोने-चाँदी से नहीं, बल्कि मिट्टी से प्रेम करता है।
-
किसान को ग्राम-देवता क्यों कहा गया है?
किसान को ग्राम-देवता इसलिए कहा गया है क्योंकि वह मिट्टी से प्रेम करता है, खेतों में फसल उगाकर सबका पेट भरता है और गाँव की उन्नति का आधार है। वह अपने परिश्रम से पूरे गाँव का पालन-पोषण करता है।
-
जन-मन का अधिनायक किसे कहा गया है?
कवि के अनुसार, किसान को 'जन-मन का अधिनायक' कहा गया है, क्योंकि वह सभी लोगों के मन का शासक है और उसकी मेहनत से ही देश की प्रगति संभव है।
-
किसान को 'मनुज-शेष' कहने का क्या आशय है?
किसान को 'मनुज-शेष' कहने का आशय है कि वह मनुष्य होते हुए भी पृथ्वी का भार धारण करता है। वह भूमि पर रहकर खेती करता है और अपने कंधों पर पूरे समाज की जिम्मेदारी उठाता है, जैसे शेषनाग पृथ्वी का भार धारण करते हैं।
खण्ड 'ब' (निबंध लेखन)
दिए गए बिंदुओं के आधार पर किसी एक विषय पर निबंध लिखिए:
(अ) विद्यार्थी जीवन में अनुशासन
- प्रस्तावना
- अनुशासन क्या है
- अनुशासन की आवश्यकता
- अनुशासन का शिक्षा में महत्त्व
- उपसंहार
(ब) भ्रष्टाचार - एक विकराल समस्या
- प्रस्तावना
- भ्रष्टाचार के कारण
- भ्रष्टाचार का दुष्प्रभाव
- भ्रष्टाचार निराकरण के उपाय
- उपसंहार
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ
- प्रस्तावना
- वर्तमान में समाज की बदली मानसिकता
- लिंगानुपात में बढ़ता अंतर
- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान एवं उसका उद्देश्य
- उपसंहार
मोबाईल एक वरदान या अभिशाप
- प्रस्तावना
- मोबाईल का उपयोग
- मोबाईल का शिक्षा में महत्त्व
- मोबाईल का दुष्प्रभाव
- उपसंहार
प्रश्न 4. अध्यापक और छात्र के बीच परीक्षा की तैयारी को लेकर हुए संवाद को लिखिए।
अथवा
स्वयं को मनोज मानते हुए अपने पिताजी से पुस्तकें खरीदने के लिए 500 रुपये मँगवाने के लिए पत्र लिखें।
प्रश्न 8. आपके विद्यालय में आयोजित "मातृ-पितृ पूजन-दिवस" पर एक प्रतिवेदन लिखिए।
खण्ड +स
प्रश्न - 7
-
(i) 'अपमान' शब्द में कौनसा उपसर्ग है?
- अप
- अ
- मान
- अन
सही उत्तर: अप
स्पष्टीकरण: 'अपमान' में 'अप' उपसर्ग है, जो 'मान' शब्द से पहले जुड़ता है।
-
(ii) परसर्ग 'ने' से किस क्रिया का अभाव होता है?
- पूर्णता का अभाव
- अन्य का अभाव
- निरन्तरता का अभाव
- सम्भाव्यता का अभाव
सही उत्तर: निरन्तरता का अभाव
स्पष्टीकरण: परसर्ग 'ने' का प्रयोग भूतकाल में होता है, जो क्रिया की निरन्तरता का अभाव दर्शाता है।
-
(iii) सामाजिक शब्द में कौनसा प्रत्यय है?
- आ
- ई
- इक
- सम
सही उत्तर: इक
स्पष्टीकरण: 'सामाजिक' में 'इक' प्रत्यय है, जो 'समाज' शब्द से जुड़ता है।
-
(iv) निम्न में से 'आदि' शब्द का विलोम शब्द है?
- अंत
- चेतन
- जीवन
- अन्य
सही उत्तर: अंत
स्पष्टीकरण: 'आदि' का अर्थ शुरुआत है, इसका विलोम 'अंत' होता है।
-
(v) निम्न में से 'फूल' का पर्यायवाची है?
- फूल
- बगीचा
- पुष्प
- नीरज
सही उत्तर: पुष्प
स्पष्टीकरण: 'फूल' का पर्यायवाची 'पुष्प' है, दोनों का अर्थ समान है।
-
(vi) 'उस स्थान पर दीपक जल रहा है।' रेखांकित शब्द में कौनसा परसर्ग है?
- अपादान
- करण
- सम्प्रदान
- अधिकरण
सही उत्तर: अधिकरण
स्पष्टीकरण: 'पर' शब्द अधिकरण कारक का परसर्ग है, जो स्थान का बोध कराता है।
-
(vii) 'आँखें बिछाना' मुहावरे का अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्य में प्रयोग करो।
अर्थ: बहुत आदर और स्वागत करना।
वाक्य: मेहमान के आने पर घरवालों ने आँखें बिछा दीं।
-
(viii) 'अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना' मुहावरे का अर्थ स्पष्ट करो व वाक्य में प्रयोग करो।
अर्थ: अपना नुकसान स्वयं करना।
वाक्य: झूठ बोलकर उसने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली।
-
(ix) कर्ता के साथ 'ने' आने पर कौनसी क्रिया होती है?
कर्ता के साथ 'ने' आने पर क्रिया सकर्मक होती है और भूतकाल में प्रयोग होती है।
-
(x) संयुक्त वाक्य की परिभाषा लिखो।
संयुक्त वाक्य वह वाक्य है जिसमें दो या दो से अधिक सरल या मिश्र वाक्य समुच्चयबोधक अव्ययों (जैसे: और, या, लेकिन, इसलिए) से जुड़े हों। उदाहरण: राम पढ़ता है और श्याम खेलता है।
खण्ड - ग
अति लघुत्तरात्मक प्रश्न
-
प्रश्न 19: लेखिका की नानी की आजादी के आन्दोलन में किस प्रकार की भागीदारी रही?
उत्तर: लेखिका की नानी ने आजादी के आन्दोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई। वे जुलूसों में शामिल होती थीं, जनसभाओं को संबोधित करती थीं और अंग्रेजों के खिलाफ प्रचार-प्रसार का कार्य करती थीं। उन्होंने इस आन्दोलन में महिलाओं को भी जोड़ने का कार्य किया।
-
प्रश्न 20: बाढ़ की खबर सुनकर लोग किस तरह की तैयारी करने लगे?
उत्तर: बाढ़ की खबर सुनकर लोग अपने घरों की सुरक्षा के लिए तैयारी करने लगे। वे अपने कीमती सामान को ऊंचे स्थानों पर रखने लगे, खाने-पीने की वस्तुओं का संग्रह करने लगे और नाव या अन्य साधनों की व्यवस्था करने लगे। कुछ लोग अपने परिवार को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी करने लगे।
-
प्रश्न 21: 'रीढ़ की हड्डी' पाठ के लेखक कौन हैं?
उत्तर: 'रीढ़ की हड्डी' पाठ के लेखक जयशंकर प्रसाद हैं।
लघुत्तरात्मक प्रश्न
-
प्रश्न 22: खरीद बिक्री बंद हो चुकने पर भी पान की दुकान क्यों बढ़ गई?
उत्तर: खरीद-बिक्री बंद हो चुकने पर भी पान की दुकान इसलिए बढ़ गई क्योंकि पान खाने वाले लोगों की संख्या अधिक थी और वे पान खाने के लिए उत्सुक थे। पान की दुकान एक ऐसी जगह थी जहाँ लोग मिलते-जुलते थे और चर्चा करते थे। इसके अलावा, पान की दुकान का संचालन छोटे पैमाने पर होता था, जिसे बंद करना आसान नहीं था।
-
प्रश्न 23: 'परदानशीं' शब्द का अर्थ बताकर बताएं कि 'मेरे संग की औरतें' पाठ में यह किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
उत्तर: 'परदानशीं' शब्द का अर्थ है - पर्दा करने वाली या पर्दे में रहने वाली महिला। 'मेरे संग की औरतें' पाठ में यह शब्द लेखिका की नानी के लिए प्रयुक्त हुआ है, जो पर्दा प्रथा का पालन करती थीं लेकिन फिर भी आजादी के आन्दोलन में सक्रिय रूप से भाग लेती थीं।
निबन्धात्मक प्रश्न
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प्रश्न 24: 'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक की सार्थकता सिद्ध करते हुए बताइये कि समाज में महिलाओं को उचित स्थान दिलाने हेतु आप क्या प्रयास कर सकते हैं?
उत्तर: 'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक की सार्थकता इस प्रकार है - रीढ़ की हड्डी शरीर को सीधा रखने और संतुलन बनाए रखने का कार्य करती है। इसी प्रकार, समाज में महिलाएं भी परिवार और समाज को संतुलित रखने का कार्य करती हैं। यह शीर्षक महिलाओं के महत्व को दर्शाता है कि वे समाज की रीढ़ हैं।
समाज में महिलाओं को उचित स्थान दिलाने हेतु प्रयास:
- महिलाओं को शिक्षा के समान अवसर प्रदान करना
- उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाना
- लैंगिक भेदभाव को समाप्त करना
- महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना
- उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना
- घर और बाहर दोनों जगह समान अवसर प्रदान करना
-
प्रश्न 25 (अथवा): 'मेरे संग की औरतें' पाठ के आधार पर लेखिका की माँ के व्यक्तित्व की विशेषताएं लिखिए।
उत्तर: 'मेरे संग की औरतें' पाठ के आधार पर लेखिका की माँ के व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- स्वतंत्र विचारों वाली: वे पर्दा प्रथा का पालन नहीं करती थीं और स्वतंत्र रूप से घर से बाहर निकलती थीं।
- साहसी: उन्होंने समाज की रूढ़ियों का सामना करते हुए अपने विचारों को व्यक्त किया।
- शिक्षा प्रेमी: वे शिक्षा के महत्व को समझती थीं और अपनी बेटियों को शिक्षित करने में विश्वास रखती थीं।
- सामाजिक चेतना: वे सामाजिक मुद्दों पर जागरूक थीं और समाज सुधार में रुचि रखती थीं।
- संघर्षशील: उन्होंने अपने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया लेकिन हार नहीं मानी।
- प्रगतिशील: वे नए विचारों को अपनाने के लिए तैयार रहती थीं और अपने बच्चों को भी प्रगतिशील बनाने का प्रयास करती थीं।